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बरेली: धर्म गुरु तौक़ीर रज़ा के गिरफ़्तारी देने के एलान से शहर में तनाव
- Author, शहबाज़ अनवर
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, पश्चिमी उत्तर प्रदेश से
बरेली में इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल प्रमुख और धर्म गुरु मौलाना तौकीर रज़ा की गिरफ़्तारी देने के एलान के बाद से शहर में तनाव का माहौल है.
बरेली शहर में सुरक्षा के लिए जगह-जगह पर पुलिस बल तैनात किया गया है. कुछ जगहों से मामूली झड़प की ख़बरें भी मिली हैं.
पुलिस ने दावा किया है कि ये झड़प कुछ युवकों के बीच हुई थी. इस मामले में उचित कार्रवाई की जा रही है.
पुलिस ने मौलाना को शहर के इस्लामिया इंटर कॉलेज के निकट उनके तमाम समर्थकों के साथ रोक लिया, मौलाना ने गिरफ्तारी देना चाही, लेकिन पुलिस ने उन्हें वापस कर दिया.
बीबीसी से बात करते हुए तौकीर रज़ा ने कहा कि हम गिरफ़्तारी देने गए थे लेकिन पुलिस ने गिरफ़्तार नहीं किया और हमें बाइज़्ज़त घर छोड़ दिया गया.
ज्ञानवापी मामले से जुड़े एक केस में अदालत का फैसला आने के बाद तौक़ीर रज़ा ने शुक्रवार को दोपहर की नमाज़ के बाद गिरफ़्तारी देने की घोषणा की थी और जेल भरने का आह्वान किया था.
बरेली पुलिस ने इस मामले में बयान जारी कर कहा, "मौलाना तौकीर रज़ा द्वारा जुमे की नमाज के बाद अपनी गिरफ़्तारी का एलान किया गया था, कार्यक्रम शांतिपूर्वक सम्पन्न हो गया है. बरेली के थाना बारादरी क्षेत्र श्यामतगंज के पास झड़प की घटना हुई."
इस बारे में बरेली के एसएसपी घुले सुशील चंद्रभान ने मीडिया से कहा, "पुलिस ने मौक़े पर पहुंच स्थिति को संभाला. जिन लोगों ने भी ख़ुराफ़ात की है, उनके ख़िलाफ मुक़दमा लिखकर कार्रवाई कराई जा रही है. अराजक तत्वों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी. तीन युवकों को चोटें आई हैं."
क्या बोले मौलाना तौक़ीर
यूं तो मौलाना के गिरफ़्तारी देने की घोषणा के बाद से ही पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड में था, लेकिन शुक्रवार को बरेली में जगह-जगह भारी पुलिस फोर्स तैनात थी.
बरेली में ही इस्लामिया इंटर कॉलेज का मैदान छावनी में तब्दील था.
साथ ही आसपास के इलाक़ो में भी भारी पुलिस फोर्स, पीएसी और आरएएफ तैनात थी. नमाज़ पढ़ने जाने से पूर्व मौलाना तौक़ीर रज़ा ने मीडिया से बात की.
उन्होंने कहा, "बुलडोज़र तुम हमारे घरों पर चला दोगे और हम अंधे-बहरे बने बैठे रहेंगे. अब किसी बुलडोज़र को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट अगर संज्ञान नहीं ले रहा है तो हम अपनी हिफाज़त ख़ुद करेंगे. हमें क़ानूनी अधिकार है."
उन्होंने आगे कहा, "मैं संवैधानिक तरीक़े से अमन के तरीक़े से गिरफ़्तारी देना चाहता हूं."
उन्होंने कहा, "अगर वाक़ई तुम हिंदुत्व की बात करते हो, मंदिरों की बात करते हो तो चीन का अवैध कब्ज़ा कैलाश मानसरोवर मंदिर से हटाओ, लेकिन मुसलमान कमज़ोर है बुलडोजर चलाकर मस्जिदें तोड़ दोगे."
एक सवाल के जवाब ने उन्होंने कहा, "यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है, भारतीय जनता पार्टी के दौर से नहीं, इससे पहले से. मुस्लिम पर्सनल लॉ जब मौजूद है कोर्ट में, एक क़ानून मौजूद है, इसके बावजूद हमारे जितने मामले कोर्ट में जाते हैं, वे यूसीसी के तहत तय होते हैं, पर्सनल लॉ के तहत नहीं होते हैं, और फिर यूनिफॉर्म सिविल कोड रहा कहां, जब आपने उसमें से कुछ को छोड़ दिया, इसका मतलब यूनिफॉर्म नहीं रहा तो ये बेईमानी हो रही है. ये बातें सिर्फ मुसलमान को दबाने, सताने, परेशान करने के लिए हैं."
हंगामा और अफरा-तफरी का दिखा माहौल
बरेली में शुक्रवार को एहतियात के तौर पर भारी पुलिस फोर्स तैनात रही.
रोडवेज़ बस स्टैंड से लेकर स्कूलों के आसपास और प्रमुख चौराहों पर पुलिस बल देखा गया, साथ ही शहर में जगह-जगह पुलिस फोर्स गश्त करती भी देखी गई.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, बरेली में तक़रीबन 1400 पुलिसकर्मियों की तैनाती रही, जिसमें एएसपी और सीओ स्तर तक के अधिकारी रहे.
इस बारे में बीबीसी ने सीओ सिटी तृतीय अनिता चौहान से बात की.
उन्होंने कहा, "शहर में भारी पुलिस फ़ोर्स तैनात रही है, इनकी संख्या कितनी है, ये तो मैं नहीं बता सकती हूं, लेकिन पुलिस बल में आरएएफ, पीएसी की चार पांच कम्पनियां और प्लाटून तैनात रहीं."
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "प्रदर्शनकारियों के लौटने के दौरान बारादरी क्षेत्र में इनके ही कुछ युवकों में गाली-गलौज और मारपीट हो गई थी मामूली रूप से, कोई इतनी बड़ी बात नहीं हुई थी. सबकुछ शांतिपूर्वक सम्पन्न हुआ है."
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