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पीएम मोदी ने एससीओ समिट में चीन की इस योजना का किया विरोध- प्रेस रिव्यू
भारत की अध्यक्षता में मंगलवार को वर्चुअली हुए शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइज़ेशन (एससीओ) समिट के अंत में नई दिल्ली घोषणापत्र जारी किया गया. इस घोषणापत्र को लेकर भारत ने एक अहम फ़ैसला लिया है.
अंग्रेज़ी अख़बार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें बताया गया है कि भारत ने घोषणापत्र के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) से जुड़े पैराग्राफ़ पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था.
बीआरआई चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का अहम प्रोजेक्ट है, जिसमें व्यापार के लिए बाक़ी दुनिया से चीन को जोड़ने के लिए अहम इन्फ़्रास्ट्रक्चर तैयार करना है.
भारत ने बीते साल समरकंद घोषणापत्र में भी इसी तरह के पैराग्राफ़ पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था.
साल 2023 के नई दिल्ली घोषणापत्र में बीआरआई पैराग्राफ़ में लिखा गया, “चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के अपने समर्थन की पुष्टि करते हैं. रिपब्लिक ऑफ़ कज़ाख़स्तान, किर्गिज़ रिपब्लिक, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ पाकिस्तान, रशियन फ़ेडरेशन, रिपब्लिक ऑफ़ ताजिकिस्तान और रिपब्लिक ऑफ़ उज़्बेकिस्तान ने इस परियोजना और बीआरआई को यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन से जोड़ने को संयुक्त रूप से लागू करने के लिए चल रहे काम के बारे में ध्यान दिया है.”
भारत हमेशा से बीआरआई परियोजना की आलोचना करता रहा है. उसका कहना है कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन करता है.
2022 समरकंद घोषणापत्र में भी बीआरआई को लेकर इसी तरह का पैराग्राफ़ इस्तेमाल किया गया था.
यूक्रेन का नहीं लिया गया नाम
आतंकवाद के मुद्दे पर भी दिल्ली घोषणापत्र में वैसी भाषा इस्तेमाल की गई है, जैसे कि समरकंद घोषणापत्र में की गई थी. हालांकि इस बार ‘अतिराष्ट्रवाद’ की जगह ‘अंधराष्ट्रीयता’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है.
नई दिल्ली घोषणापत्र में कहा गया है, “सदस्य देश महत्वपूर्ण मानते हैं कि आतंकी, चरमपंथी और अलगाववादी समूहों की गतिविधियों को निशाना बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को साझा कोशिशें करने की ज़रूरत है. धार्मिक असहिष्णुता, आक्रामक राष्ट्रवाद, जातीय और नस्लीय भेदभाव, फ़ासीवाद, ज़ेनोफ़ोबिया और अंधराष्ट्रवाद के विचार पर ख़ास ध्यान देने की ज़रूरत है.”
मंगलवार को जारी किए गए घोषणापत्र में यह भी कहा गया है कि सदस्य राष्ट्रों ने ये माना है कि ‘आतंकवाद और चरमपंथ का मुक़ाबला करने के नाम पर राज्यों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जा सकता.’
इसके साथ ही नई दिल्ली घोषणापत्र में यूक्रेन संघर्ष का कोई ज़िक्र नहीं किया गया है जबकि बीते समरकंद घोषणापत्र में इसका उल्लेख था.
इस बार लोगों के अधिकारों के सम्मान और किसी राष्ट्र की संप्रभुता, स्वतंत्रता, अखंडता के सम्मान के सिद्धांत की बात की गई है.
रोका जा सकता था बालासोर ट्रेन हादसा: सीआरएस रिपोर्ट
ओडिशा के बालासोर में बीते महीने हुआ ट्रेन हादसा सिर्फ़ उचित प्रक्रिया का पालन करके टाला जा सकता था. ऐसा अंग्रेज़ी अख़बार ‘द हिंदू’ की एक ख़ास रिपोर्ट का कहना है.
अख़बार लिखता है कि बहानागा बाज़ार रेलवे स्टेशन के पास लोकेशन बॉक्स की वायरिंग में एक अज्ञात दिक़्क़त के बारे में बीते पांच सालों से सिग्नल एंड टेलीकॉम (एसएंडटी) को पता नहीं था जो ओडिशा में तीन ट्रेनों के आपस में टकराने के हादसे की वजह बनी.
‘द हिंदू’ का दावा है कि उसको कमिशन ऑफ़ रेल सेफ़्टी (सीआरएस) की रिपोर्ट हाथ लगी है जो एसएंडटी विभाग की ग़लती की ओर इशारा करती है. एसएंडटी 2 जून को हादसे के दिन रिपेयर का काम कर रहा था.
इस हादसे की जांच कर रहे रेलवे अधिकारियों ने पाया है कि अगर उचित प्रक्रिया का पालन किया गया होता तो हादसे को टाला जा सकता था. उचित प्रक्रिया के तहत सर्किट पर रनिंग चेक्स को देखना था जो रेल ट्रैक्स पर पॉइंट्स सेट करते हैं और लोकेशन बॉक्स को रिले या कंट्रोल रूम से जोड़ते हैं.
अधिकारियों का कहना है कि साल 2018 से एसएंडटी स्टाफ़ इन ख़ामियों को अंजाम दे रहा था और यह तब नज़र में आई जब इतना बड़ा हादसा हो गया जो कि सुरक्षा की भारी विफलता है.
पाकिस्तानी महिला ने बनवाए थे फ़र्ज़ी आधार कार्ड
पाकिस्तान से भागकर भारत आई महिला के मामले में कई नई बातें सामने आ रही हैं.
हिंदी अख़बार ‘अमर उजाला’ लिखता है कि नेपाल के रास्ते पाकिस्तान से भारत आईं सीमा हैदर ने अपने प्रेमी सचिन के साथ मिलकर तीन फ़र्ज़ी आधार कार्ड बनवाए थे.
कथित तौर पर पबजी गेम खेलते हुए पाकिस्तान की सीमा और ग्रेटर नोएडा में रहने वाले सचिन के बीच दोस्ती हुई थी जिसके बाद वो अपने चार बच्चों के साथ भारत आ गई थीं.
अख़बार के मुताबिक़, सीमा ने सात महीने पहले भी पाकिस्तान सीमा बॉर्डर पार करके भारत आने की कोशिश की थी लेकिन सुरक्षाबलों की चौकसी के कारण उसकी ये कोशिश नाकाम हो गई थी.
सचिन क़ानूनी रूप से सीमा के साथ शादी करने की योजना वकीलों के साथ बना रहा था. इसी दौरान पुलिस को सीमा के रबूपुरा में होने की भनक लग गई थी.
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