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बालासोर ट्रेन दुर्घटना के एक महीने बाद भी नहीं हो पाई है 52 शवों की पहचान
सुब्रत कुमार पति
बीबीसी हिंदी के लिए, भुवनेश्वर से
बालासोर ट्रेन हादसे में पश्चिम बंगाल के अन्जरुल हक़ की मौत हो गयी थी.
घर में उनकी पत्नी और 3 छोटे बच्चे हैं जो उनके शव का एक महीने से इन्तजार कर रहे हैं.
उनकी पत्नी रोते रोते बेहोश हो रही हैं. परिवार में इस बार का ईद अंतहीन दुःख के साथ गुजरा.
अन्जारुल के भाई और साले भुवनेश्वर में रुके हैं और हर दिन एम्स का चक्कर काट रहे हैं.
अन्जारुल के भाई ने डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल भी दिया है लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है.
अन्जारुल के साले मोहम्मद करीम ने बीबीसी से कहा कि अभी तक उनको अन्जारुल के बारे में कुछ पता नहीं चला पाया है.
मोहम्मद करीम जैसे कई परिजन हैं जो बालासोर ट्रेन हादसे में जान गंवाने वाले अपनों की तलाश हादसे के एक महीने बाद भी कर रहे हैं.
न ख़त्म होने वाला इंतज़ार
पश्चिम बंगाल के मालदा से आए शिव चरण भुवनेश्वर एम्स के पास एक गेस्ट हाउस में एक महीने से रुके हुए हैं.
उनके छोटे भाई कृष्णा की बालासोर हादसे में ही मौत हो गई थी.
हादसे के कुछ ही समय पहले उन्होंने अपने भाई से टेलीफ़ोन पर बात की थी.
उनका कहना है की वह अपने भाई के शव को कपड़ों से ही पहचान पाए लेकिन कन्फर्म होने के लिए उनका भी डीएनए टेस्ट किया गया है.
रिपोर्ट कब आएगी ये उन्हें कोई बता नहीं रहा है.
शिव चरण ने बीबीसी को बताया कि वो शव के बिना भुवनेश्वर से नहीं जायेंगे क्योंकि धार्मिक नियमों के अनुसार भाई का अंतिम संस्कार करना जरूरी है.
ऐसे कई लोग हैं जो पिछले एक महीने से भुवनेश्वर में रह कर अपने परिजन के शव का इन्तजार कर रहे हैं.
कुछ लोग खाली हाथ वापस लौट गए हैं और कुछ अभी भी उम्मीद के साथ रोज भुवनेश्वर एम्स का चक्कर काट रहे हैं.
डीएनए रिपोर्ट से 29 मृतकों की पहचान
बालासोर के बाहानगा स्टेशन में घटी दुर्घटना के एक महीने बाद भी 52 शवों की पहचान नहीं हो पाई है.
इन 52 शवों को एम्स कैंपस में अभी भी डीप फ्रिज कंटेनर में रखा गया है. कई शव बुरी तरह टुकड़े टुकड़े हो गए हैं.
शुक्रवार को 30 डीएनए टेस्ट रिपोर्ट आई है. रिपोर्ट आने के बाद 29 मृतकों की पहचान हुई है.
इन मृतकों के परिवारजनों को शवों को हस्तांतरित किया जा रहा है.
पूर्वी तटीय रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी विश्वजीत साहू ने बीबीसी को कहा, “रेलवे शवों को सौंपते हुए किसी भी त्रुटि से बचने के लिए सतर्कता पूर्वक काम कर रहा है."
"रेलवे अधिकारी, ओडिशा पुलिस, भुवनेश्वर महानगर निगम के अधिकारी और एम्स कर्मचारियों की मदद से सही परिजनों की पहचान की जा रही है.”
उनके मुताबिक, कुछ शव ऐसे हैं जिनके एक से ज्यादा दावेदार हैं. इस स्थिति में दावा करने वाले लोगों का डीएनए मैच करवाने के लिए दिल्ली स्थित केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया है.
दूसरे फेज के रिपोर्ट का इन्तजार किया जा रहा है.
क्या सामूहिक अंतिम संस्कार होगा?
अधिकारियों का कहना है कि घटना के एक महीने बाद अब लावारिस लाशों की पहचान करना आसान नहीं होगा.
जो 52 शव बचे हैं इनका क्या करना है, इस पर विचार किया जा रहा है.
इनका सामूहिक अंतिम संस्कार होगा या नहीं इस पर अब तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है.
विश्वजीत साहू ने बीबीसी से कहा की डीएनए सैंपल टेस्टिंग प्रक्रिया ख़त्म न होने तक इस पर कोई फैसला नहीं हो सकता.
पिछले महीने 2 जून की शाम को बालासोर के बाहानगा स्टेशन के पास यह भयंकर ट्रेन दुर्घटना घटी थी जिसमे 293 लोगों की जान गयी थी और 1000 लोग घायल हो गए थे.
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) इस घटना की जांच कर रही है.
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