पीएम मोदी के यूक्रेन जाने की अटकलों पर रूसी मीडिया में इतनी क्यों है चर्चा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगस्त में अपनी संभावित यूक्रेन यात्रा के दौरान रूस और यूक्रेन के बीच मध्यस्थता कर सकते हैं.

रूसी समाचार एजेंसी तास ने कहा है कि उसे भारतीय संसद के एक सूत्र ने ये जानकारी दी है.

रूस के सरकारी टीवी चैनल आरटी ने भी भारतीय मीडिया में राजनयिक सूत्रों के हवाले से छपी ख़बर का हवाला देते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री अगस्त में यूक्रेन जा सकते हैं.

तास के मुताबिक सूत्र ने प्रधानमंत्री मोदी की यूक्रेन यात्रा की संभावनाओं के बारे में जानकारी देते हुए बताया, ''भारत यूक्रेन संकट में मध्यस्थता की भूमिका निभा सकता है. प्रधानमंत्री मोदी की यूक्रेन यात्रा के दौरान भारत ये प्रस्ताव रख सकता है. इस संभावना पर अभी विचार चल रहा है.''

सूत्र ने कहा, ''भारत की रूस से पुरानी दोस्ती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अच्छे रिश्ते हैं. यूक्रेन के भी भारत से अच्छे संबंध हैं. दोनों देश भारत पर भरोसा करते हैं.''

इस सूत्र ने तास को बताया, "भारत ने कई बार कहा है कि वो रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को ख़त्म कराने में मदद कर सकता है. हालांकि मध्यस्थता दोनों पक्षों के राज़ी होने पर ही कराई जा सकती है. भारत ने हमेशा कहा है कि सिर्फ़ बातचीत और मध्यस्थता से ही यूक्रेन संकट का हल निकाला जा सकता है.’’

तास ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी की यूक्रेन यात्रा अगस्त महीने में हो सकती है. इसने न्यूज़ चैनल विऑन (WION) की एक ख़बर का हवाला दिया है, जिसमें सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि "भारतीय प्रधानमंत्री संभवत: 23 अगस्त को यूक्रेन जाएंगे.''

रूस के सरकारी मीडिया ने क्या लिखा है

रूस के सरकारी न्यूज़ चैनल आरटी ने भारतीय मीडिया में छपी ख़बरों का हवाला देते हुए कहा है कि मोदी अगस्त में यूक्रेन की राजधानी कीएव जाने की योजना बना रहे हैं.

आरटी की वेबसाइट पर छपी ख़बर में भारतीय मीडिया के हवाले से कहा गया है कि मोदी 23 अगस्त को कीएव पहुंच सकते हैं. जुलाई में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने अपने यूक्रेनी समकक्षों से टेलीफ़ोन पर बात की थी.

आरटी ने लिखा है कि मोदी की मॉस्को यात्रा को मिली तवज्जो से अमेरिका हताश बताया जा रहा था क्योंकि उसे रूस को अलग-थलग करने की कोशिश को झटका लगा था.

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने भी प्रधानमंत्री मोदी की अगस्त में मोदी की संभावित यूक्रेन यात्रा की ख़बर दी है.

हालांकि नई दिल्ली स्थित यूक्रेनी दूतावास ने रॉयटर्स से इस बात की पुष्टि नहीं की है. उसने कहा है कि अभी भारतीय विदेश मंत्रालय से इसकी कोई सूचना नहीं है.

क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ

अगस्त में मोदी की संभावित यूक्रेन यात्रा पर विदेश और भू-रणनीतिक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, ''ये साफ़ नहीं है कि मोदी कीएव जाकर क्या हासिल करना चाहते हैं. अगर वो युद्धविराम कराना चाहते हैं तो ये रास्ता वॉशिंगटन से होकर गुज़रता है. अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे यह तय करेंगे कि युद्धविराम के प्रयासों को रफ़्तार मिलेगी कि नहीं.''

बीजेपी के सदस्य और पूर्व मंत्री रह चुके सुब्रमण्यम स्वामी ने एक्स पर लिखा,''यूक्रेन पर मोदी की मेहनत एक स्वागतयोग्य बदलाव है. लेकिन ये अमेरिकी राष्ट्रपति के दबाव में हो रहा है. लेकिन मोदी को पंचतंत्र के चमगादड़ों के हश्र से सबक लेना चाहिए. दोनों तरफ़ से कोशिश करने की वजह से उनका भी वही हश्र न हो जाए.''

पूर्व राजनयिक अशोक सज्जनहार ने एक्स पर लिखा, ''मैं अगले महीने पीएम मोदी के लीक से हट कर यूक्रेन की यात्रा का योजना का स्वागत करता हूं. यह दुनिया में भारत के बढ़ते कद और असर का सुबूत है. ये भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और बहुपक्षीय रिश्तों को बढ़ावा देने की उसकी नीति को दिखाता है.''

‘द हिंदू’ की राजनयिक संपादक सुहासिनी हैदर ने लिखा है, ''अगर मोदी कीएव जाते हैं तो वो उन कुछ नेताओं में से एक होंगे जो युद्ध के बाद रूस और यूक्रेन दोनों देशों की यात्रा करेंगे. जिन अन्य देशों के नेताओं ने युद्ध के बाद दोनों देशों की यात्रा की है उनमें गिनी-बिसाऊ, हंगरी, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की के नेता शामिल हैं.''

पहले भी मिल चुके हैं मोदी और ज़ेलेंस्की

फ़रवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध छिड़ने के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेंलेस्की से पीएम मोदी इटली और जर्मनी में जी-7 सम्मेलन के इतर मुलाकात कर चुके हैं. लेकिन अभी तक उन्होंने यूक्रेन की यात्रा नहीं की है.

इटली में पिछले महीने ज़ेंलेस्की से मुलाकात के दौरान मोदी ने कहा था कि भारत यूक्रेन संकट के शांतिपूर्ण हल के लिए अपनी क्षमता के मुताबिक़ हरसंभव कोशिश करेगा.

इस महीने की शुरुआत में मोदी ने अपनी रूस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति पुतिन से मुलाक़ात की थी. मुलाक़ात के बाद मोदी ने कहा था कि पुतिन से बातचीत में कई ‘दिलचस्प आइडिया’ और उस पर ‘बिल्कुल नए विचार’ उभरे हैं.

लेकिन जे़ेंलेस्की ने कहा था कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता का दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता को दुनिया के सबसे खूंखार अपराधी को गले लगाते देखना बड़ी निराशा की बात है. ये शांति प्रयासों के लिए बड़ा झटका है.

इस पर भारत ने नई दिल्ली में तैनात यूक्रेनी राजदूत को सफाई देने लिए बुला लिया था.

अमेरिका ने जताई थी मोदी की रूस यात्रा पर चिंता

पश्चिम के मीडिया का कहना है कि पीएम मोदी के रूस दौरे से पुतिन के ख़िलाफ़ प्रतिबंध का असर कमज़ोर पड़ा है.

पश्चिम यूक्रेन पर हमले के बाद से रूस को अलग-थलग करने की कोशिश कर रहा है लेकिन भारत पश्चिम की नीतियों के साथ खड़ा नहीं है.

भारत ने मोदी की रूस की यात्रा को सफल बताया था.

लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने मोदी की रूस यात्रा को लेकर चिंता जताई थी. वहीं पेंटागन ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि भारत यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए न्यायपूर्ण शांति के प्रयासों का समर्थन करेगा.

भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर तीसरे कार्यकाल में मोदी की यह पहली रूस यात्रा थी.

जिस वक्त मोदी रूस के दौरे पर थे उस वक्त पश्चिमी देशों के सैन्य गठबंधन, नेटो की बैठक की तैयारी हो रही थी. अमेरिका में हुई नेटो की इस बैठक में यूक्रेन के लिए सहयोग और नेटो की उसकी सदस्यता अहम मुद्दा था.

जानकार मानते हैं कि मोदी का रूस दौरा पश्चिमी देशों को इशारा है कि वह अपनी रक्षा और अन्य ज़रूरतों के लिए पूरी तरह पश्चिमी देशों पर निर्भर नहीं कर सकता.

बीते साल भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत के रूस से तेल ख़रीदने को लेकर यूरोपीय यूनियन के विदेश नीति प्रमुख जुसेप बोरेल की टिप्पणी का जवाब दिया था. उन्होंने स्पष्ट किया था कि "भारत रूस से तेल ख़रीद रहा है और ये सामान्य है."

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