महुआ मोइत्रा: विवादों में घिरी सांसद का आरोपों पर जवाब, टीएमसी का कितना मिल रहा है साथ

    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

संसद में अपने जोशीले भाषणों और बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाली तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा इन दिनों ‘पैसे लेकर सवाल पूछने' के आरोपों में घिरी हैं.

महुआ मोइत्रा ने सभी आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने आरोप लगाने वाले बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे और इन आरोपों को प्रसारित करने वाले कई मीडिया संस्थानों पर मानहानि का मुक़दमा किया है.

बीबीसी से बात करते हुए महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि भारत के सबसे बड़े कारोबारियों में से एक गौतम अदानी के 'ख़िलाफ़ लगातार बोलने' की वजह से उन्हें 'ख़ामोश करने की कोशिश' की जा रही है.

इसी बीच संसद की एथिक्स कमेटी ने इस प्रकरण की जांच शुरू कर दी है. महुआ मोइत्रा का कहना है कि जांच में वो पूरा सहयोग करेंगी.

उन्होंने जानकारियां मीडिया में लीक किए जाने के आरोप लगाते हुए कहा, "मेरा मीडिया ट्रायल किया जा रहा है. एथिक्स समिति को दिए गए कथित शपथपत्र को लीक किया गया है. मीडिया हिट जॉब कर रही है, लेकिन मैं ख़ामोश नहीं रहूंगी."

पिछले रविवार, यानी 15 अक्तूबर को बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के आरोपों के साथ जब ये विवाद शुरू हुआ था, तब बहुत कम लोगों को अंदाज़ा रहा होगा कि ये मामला इतना बढ़ जाएगा.

महुआ मोइत्रा और निशिकांत दुबे के अलावा महुआ के कथित ‘जिल्टेड एक्स’ अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई, एक ‘हेनरी’ नाम का कुत्ता और अरबपति कारोबारी दर्शन हीरानंदानी भी अब इस विवाद में शामिल हो गए हैं.

आरोपों का घेरा

सोशल मीडिया पर भी महुआ मोइत्रा 'दक्षिणपंथी' और 'बीजेपी समर्थित' लोगों के निशाने पर हैं.

उनकी कई ऐसी तस्वीरें पोस्ट की गई हैं जिनमें वो सिगार पीते हुए या शैंपेन पीते हुए दिख रही हैं. उनके महंगे कपड़ों और बैग को लेकर भी सवाल उठाये जा रहे हैं.

हालांकि महुआ भी खुलकर जवाब दे रही हैं. ऐसे ही एक ट्वीट के जवाब में उन्होंने लिखा, “बंगाली महिलाएं अपनी ज़िंदगी जीती हैं, किसी झूठ में नहीं रहती.”

महुआ मोइत्रा कहती हैं, "मेरे जिल्टेड एक्स ने कुछ निजी तस्वीरों को क्रॉप करके शेयर किया. इनका आधार बनाकर भाजपा मुझे एक बदलचलन औरत साबित करना चाहती है. पश्चिम बंगाल में इन सभी बातों का फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन वो मेरे चरित्र हनन करने का प्रयास कर रहे हैं. उन्हें लग रहा है कि ऐसा करने से मैं ख़ामोश हो जाउंगी और अदानी का मुद्दा उठाना बंद कर दूंगी लेकिन ऐसा नहीं होगा, मैं बोलती रहूंगी."

तृणमूल नेता क्या कह रहे हैं?

लेकिन महुआ मोइत्रा की पार्टी टीएमसी ने अभी तक अपने आप को इस 'विवाद' से दूर ही रखा है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है.

पार्टी के राज्य महासचिव कुणाल घोष से जब पत्रकारों ने महुआ मोइत्रा को लेकर सवाल किया तो उन्होंने बार-बार यही कहा, “इस विषय पर आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस कुछ नहीं कहेगी.”

जब उनसे फिर यही पूछा गया तो उन्होंने कहा, “हम इस विषय पर नज़र रखे हुए हैं, जानकारियां जुटा रहे हैं, लेकिन हम अभी कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं. संबंधित व्यक्ति इससे जुड़े सवालों का जवाब दे सकती हैं या स्पष्टीकरण दे सकती हैं. इस विषय पर हम कोई टिप्पणी नहीं करेंगे. हमें इस बारे में कुछ नहीं कहना है.”

इस बयान से साफ़ है कि तृणमूल कांग्रेस ने इस 'विवाद से दूरी' बना रखी है. वहीं तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने रविवार को कहा है कि महुआ मोइत्रा के मामले में 'पार्टी जांच के बाद उचित फैसला' लेगी.

बीजेपी के सवाल

डेरेक ओ ब्रायन ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा, ''हमने मीडिया रिपोर्ट्स देखी हैं. पार्टी नेतृत्व की ओर से संबंधित सदस्य को अपने ऊपर लगे आरोपों के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने की सलाह दी गई है. वह पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं. हालांकि, चूंकि यह मामला एक निर्वाचित सांसद, उनके अधिकारों और विशेषाधिकारों से जुड़ा है, इसलिए इस मामले की जांच संसद के उचित मंच से कराई जाए, जिसके बाद पार्टी नेतृत्व उचित निर्णय लेगा.''

बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी तृणमूल कांग्रेस के महुआ मोइत्रा से दूरी बनाने का सवाल उठाया है.

अमित मालवीय ने पश्चिम बंगाल की सीएम और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा, “ममता बनर्जी का महुआ मोइत्रा को अकेला छोड़ना कोई हैरानी की बात नहीं है. वो अभिषेक बनर्जी के अलावा किसी और का बचाव नहीं करेंगी. कई आपराधिक मामलों और भ्रष्टाचार के आरोपों में टीएमसी के कई नेता जेल में हैं, लेकिन ममता बनर्जी ख़ामोश ही रही हैं.”

मोइत्रा कहती हैं, "टीएमसी मेरे साथ खड़ी है, जब आरोपों में दम ही नहीं है तो कोई क्या कहेगा. एथिक्स समिति की जांच पूरी हो जाने दीजिए, सच सामने आ जाएगा."

तृणमूल खुलकर सामने क्यों नहीं आ रही?

हालांकि विश्लेषक मानते हैं कि महुआ मोइत्रा के मामले में अब तक पार्टी के उनके समर्थन में खुलकर न आने की वजह अंदरूनी राजनीति और राज्य में अदानी समूह का निवेश हो सकता है.

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक सुभाशीष मोइत्रा कहते हैं, “महुआ मोइत्रा से तृणमूल के दूरी बनाने की दो वजहें हैं, पहला तो ये कि महुआ मोइत्रा नदिया ज़िले से सांसद हैं, यहां की स्थानीय टीएमसी यूनिट उनके विरोध में है. पार्टी के कई लोग यहां उनका विरोध करते हैं. कई नेताओं के साथ उनके रिश्ते बहुत अच्छे नहीं है, हालांकि ये काफ़ी समय से चल रहा है."

वो कहते हैं, "दूसरा कारण ये हो सकता है कि अदानी समूह पश्चिम बंगाल में भी निवेश कर रहा है, ऐसे समय में महुआ मोइत्रा के संसद में लगातार अदानी के ख़िलाफ़ बोलने से पार्टी थोड़ा असहज हो सकती है. टीएमसी सरकार चाहती है कि अदानी का निवेश राज्य में आए. हालांकि ये कयास ही है.”

सुभाशीष मोइत्रा कहते हैं, “तृणमूल कांग्रेस में जो भीतरी लड़ाई है वो कोई छुपी बात नहीं है, हालांकि अदानी को लेकर पार्टी ने महुआ से दूरी बनाई होगी, ये अभी सिर्फ़ कयास ही है. लेकिन ये बात स्पष्ट है कि पश्चिम बंगाल सरकार चाहती है कि अदानी राज्य में निवेश करें.”

अदानी समूह ने कहा था कि वह पश्चिम बंगाल में लगभग तीन अरब डॉलर निवेश करेगा.

सितंबर 2022 में अदानी समूह को ताजपुर डीप सी पोर्ट विकसित करने का ठेका मिलने की रिपोर्टें आईं थीं. इस परियोजना में कुल 3.1 अरब डॉलर निवेश होने हैं जिनमें से क़रीब 15 हज़ार करोड़ बंदरगाह के विकास पर और बाकी संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर निवेश होने हैं.

हालांकि महुआ मोइत्रा दावा करती हैं कि अदानी समूह ने अभी तक पश्चिम बंगाल में कोई निवेश नहीं किया है. वो कहती हैं, "अदानी ने सिर्फ़ वादा किया था, अभी तक कुछ निवेश नहीं हुआ है."

खुलकर बोलने वाले नेता निशाने पर?

महुआ मोइत्रा के ख़िलाफ़ शिकायत की जांच इस समय संसद की एथिक्स समिति कर रही है. समिति की जांच के बाद ही ये स्पष्ट होगा कि उन पर क्या कार्रवाई हो सकती है. यदि उन पर आरोप साबित हो जाते हैं तो उनकी संसद सदस्यता भी ख़तरे में आ सकती है.

सुभाशीष मोइत्रा कहते हैं, “ये बहुत गंभीर आरोप हैं और अगर ये साबित हो जाते हैं तो निश्चित रूप से महुआ मोइत्रा को राजनीतिक नुक़सान होगा. वो अभी तक आरोपों को नकार रही हैं.”

वो याद दिलाते हैं कि हाल के समय में संसद में खुलकर बोलने वाले सांसद अलग-अलग विवादों में फंस रहे हैं. आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह कथित दिल्ली शराब घोटाले के मामले में गिरफ़्तार हैं, आम आदमी पार्टी के ही युवा सांसद राघव चड्ढा के सरकारी आवास को लेकर विवाद है.

वरिष्ठ पत्रकार सुभाशीष मोइत्रा कहते हैं, “आरोप सही हैं या ग़लत ये जांच का विषय है, लेकिन हम देख रहे हैं कि संसद में खुलकर बोलने वाले और मुद्दे उठाने का प्रयास करने वाले विपक्ष के राजनेता निशाने पर हैं. महुआ मोइत्रा लगातार खुलकर बोलती रही हैं. अदानी समूह को लेकर भी उन्होंने कई बार सवाल उठाया है. संसद हो या पत्रकारिता, जो भी आलोचक की भूमिका में आता है, वो निशाने पर आ जाता है. संजय सिंह भी अदानी समूह को लेकर खुलकर बोल रहे थे.”

महुआ मोइत्रा पर क्या हैं आरोप?

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया है कि महुआ मोइत्रा ने 'संसद में सवाल पूछने के बदले पैसे लिए.'

उन्होंने आरोप लगाया था कि एक कारोबारी से तोहफे और पैसे लेकर मोइत्रा ने संसद में सवाल पूछे.

मोइत्रा ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है.

बीबीसी से महुआ मोइत्रा कहती हैं, "इन आरोपों में कोई दम नहीं है. यदि मैंने कोई तोहफ़ा लिया है तो उसकी लिस्ट कहां है? बीजेपी एक जिल्टेड एक्स के दावे को आधार बनाकर मुझ पर निशाना साध रही है. ये प्रयास कामयाब नहीं होंगे"

निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि मोइत्रा के ख़िलाफ़ ‘मज़बूत सबूत’ हैं.

इस पत्र में आरोप लगाया गया कि संसद में महुआ मोइत्रा ने जो 61 सवाल पूछे उनमें से 50 अदानी समूह से संबंधित थे.

दुबे ने आरोप लगाया, “रियल एस्टेट समूह हीरानंदानी ग्रुप के प्रमुख अरबपति कारोबारी दर्शन हीरानंदानी के कारोबारी हितों को फ़ायदा पहुंचाने के लिए महुआ मोइत्रा ने आपराधिक साज़िश रची.”

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इन आरोपों को जांच के लिए एथिक्स समिति के समक्ष भेज दिया है.

दुबे ने ये आरोप अधिवक्ता जय देहाद्राई के सुप्रीम कोर्ट में शिकायत देने के बाद लगाये हैं. जय अनंत देहाद्राई ने सीबीआई को भी शपथपत्र के रूप में शिकायत दी है.

महुआ मोइत्रा कहती हैं, "अनंत देहाद्राई एक जिल्टेड एक्स हैं, आपने देखा होगा कई बार इस तरह के लोग महिलाओं के चेहरे पर तेज़ाब तक फेंक देते हैं, उन्होंने जलन में मुझ पर ये हमला करने का ये नाकाम प्रयास किया है. मैं इससे और मजबूत होकर उभरूंगी."

एथिक्स समिति को हीरानंदानी का शपथ पत्र

हीरानंदानी समूह के सीईओ दर्शन हीरानंदानी ने संसद की एथिक्स समिति के समक्ष एक शपथ पत्र दिया है जिसमें महुआ मोइत्रा के ख़िलाफ़ कई आरोप लगाये गए हैं.

महुआ मोइत्रा ने इसे ख़ारिज करते हुए कहा है कि ये हीरानंदानी का ‘एप्रूवर एफिडेविट’ है जो बिना लेटर हेड के सादे काग़ज़ पर लिखा गया है.

एप्रूवर वो व्यक्ति होता है जो किसी मामले में अभियुक्त होता है लेकिन बाद में जांच पक्ष का गवाह बन जाता है ताकि उसे सज़ा से माफ़ी मिल सके.

बीबीसी से बात करते हुए मोइत्रा ने कहा, "हीरानंदानी मेरे पुराने दोस्त हैं. उन्हें इस तरह का कथित शपथपत्र देने के लिए मजबूर किया गया है. इसकी भाषा से लगता है कि उनकी कनपटी पर बंदूक रखकर इस पर हस्ताक्षर करवाए गए हैं."

संसद की समिति के चेयरमैन विनोद सोनकर ने इस शपथ पत्र के प्राप्त होने की पुष्टि मीडिया से बातचीत में की है.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, इस शपथपत्र में दर्शन हीरानंदानी ने टीएमसी सांसद मोइत्रा से अपनी दोस्ती को स्वीकार किया है और कहा है कि मोइत्रा ने लोकप्रियता हासिल करने के लिए अदानी पर हमला किया.

रिपोर्टों के मुताबिक़, हीरानंदानी ने कहा है कि मोइत्रा ने उन्हें 'अपनी संसदीय ईमेल आईडी का लॉग इन और पासवर्ड दिया ताकि वो अदानी समूह पर सवाल उठाने के लिए ज़रूरी जानकारियां उन्हें भेज सकें.'

उन्होंने महुआ मोइत्रा पर तोहफ़े लेने के आरोप भी लगाये हैं. महुआ ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है.

मोइत्रा कहती हैं, "इस शपथ पत्र का मीडिया में पहुंच जाना बताता है कि इस विवाद का मक़सद सिर्फ़ मुझे ख़ामोश करना है. इसमें कोई ठोस आरोप नहीं है. मैं एथिक्स समिति के सामने अपना पक्ष रखने के लिए पूरी तरह से तैयार हूं."

अदानी समूह ने क्या कहा?

अदानी समूह ने एक बयान जारी कर अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई के आरोपों का ज़िक्र करते हुए कहा था, ‘सांसद महुआ मोइत्रा और कारोबारी दर्शन हीरानंदानी ने गौतम अदानी को निशाना बनाने के लिए आपराधिक साज़िश रची.’

अदानी समूह की तरफ से कहा गया कि 'कुछ समूह और व्यक्ति अदानी समूह को नुक़सान पहुंचाने के लिए ओवरटाइम काम कर रहे हैं.'

16 अक्टूबर को एक्स पर किए एक पोस्ट में मोइत्रा ने कहा, “मिस्टर ए, क्या आपका ये बयान आपका सर्वश्रेष्ठ प्रयास है? एक फेक डिग्री सांसद और एक जिल्टेड एक्स के आधार पर? मैं तब तक शांत नहीं बैठूंगी जब तक सीबीआई और ईडी उन 13 हज़ार करोड़ के कोयला घोटाले की जांच नहीं करते जिस पैसे को आपने भारतीयों से चुराया है. मुझे बताया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आपसे और आपके घोटालों से परेशान हैं.”

इस विवाद के बढ़ने के बाद महुआ मोइत्रा लगातार सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रही हैं.

शनिवार को उन्होंने लिखा, “मेरे पास संदेश आया है कि सीबीआई कभी भी रेड कर सकती है. मैं दुर्गा पूजा में व्यस्त हूं. मैं सीबीआई को घर आकर अपने जूतों के जोड़े गिनने का आमंत्रण देती हूं. लेकिन पहले 13000 करोड़ के अदानी समूह के घोटाले में एफ़आईआर दर्ज करें.”

'अदानी समूह ने मुझे पैसे ऑफ़र किए थे'

एक और पोस्ट में महुआ मोइत्रा ने कहा, “सॉरी मिस्टर अदानी, मैं शांति के बदले छह महीने तक चुप रहने के आपकी ‘डील’ को स्वीकार नहीं कर रही हूं. न ही मैं दूसरी डील स्वीकार कर रही हूं जिसमें आप पर तो हमला कर सकती हूं लेकिन प्रधानंमत्री पर नहीं.”

बीबीसी से बात करते हुए मोइत्रा ने कहा, "अदानी ने मुझसे कहा था कि आप ख़ामोश रहें. उन्होंने सवाल नापूछने के लिए मुझे पैसा ऑफ़र किया. जब उससे बात नहीं बनीं तो ये विवाद खड़ा किया गया. मैं और टीएमसी अदानी के घोटाले का मुद्दा उठाते रहेंगे."

महुआ मोइत्रा भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल अदानी समूह पर लगातार आरोप लगा रही हैं और सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर इसे लेकर पोस्ट कर रही हैं.

अदानी समूह इन आरोपों को खारिज करता रहा है और इन्हें लेकर कोई जांच समूह के ख़िलाफ़ नहीं चल रही है.

पालतू कुत्ते ‘हेनरी’ को लेकर आरोप

देहाद्राई ने आरोप लगाया है कि महुआ मोइत्रा ने 'पालतू कुत्ते रोटवाइलर डॉग ‘हेनरी’ को इसलिए घर पर रखा है ताकि सीबीआई को दाख़िल होने से रोका जा सके. ये कुत्ता मोइत्रा ने किडनैप कर लिया है.'

उन्होंने एक्स पर हेनरी के साथ एक फोटो भी शेयर की है.

देहाद्राई ने लिखा है कि ‘हेनरी’ को वापस करने के बदले सीबीआई को दी गई शिकायत को वापस लेने का प्रयास किया गया.

उन्होंने लिखा, “मैंने साफ़ तौर पर मना कर दिया है, सीबीआई को सभी जानकारियां दूंगा.”

रिपोर्टों के मुताबिक़, महुआ मोइत्रा और देहाद्राई के बीच नज़दीकी संबंध थे. महुआ मोइत्रा ने अधिवक्ता देहाद्राई को ‘जिल्टेड एक्स’ यानी नाराज़ पूर्व प्रेमी कहा है.

ये कुत्ता फिलहाल महुआ मोइत्रा के पास है. मोइत्रा के सोशल मीडिया पर हेनरी के साथ उनकी कई तस्वीरें और वीडियो हैं.

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