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अदानी ग्रुप को हिंडनबर्ग के बाद फिर झटका देने वाली रिपोर्ट के बारे में जानिए
- Author, दीपक मंडल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
इस साल जनवरी में जब अमेरिकी शॉर्ट सेलर कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने अदानी ग्रुप पर शेयरों में मैनिपुलेशन का आरोप लगाया था तो इसके मालिक गौतम अदानी दुनिया के तीसरे सबसे अमीर शख़्स थे.
लेकिन इस रिपोर्ट के आते ही उनकी संपत्ति 120 अरब डॉलर से घटकर 39.9 अरब डॉलर रह गई थी.
यानी रातों-रात उनकी संपत्ति घट कर एक तिहाई हो गई थी. हिंडनबर्ग रिसर्च ने अदानी ग्रुप पर अपनी कंपनियों के शेयरों की कीमतों में छेड़छाड़ करने और टैक्स हैवन्स देशों के ज़रिये फर्ज़ीवाड़े को अंजाम देने का आरोप लगाया था.
हालांकि तब से लेकर अब तक अदानी ग्रुप की कुछ कंपनियों के शेयरों में काफी रिकवरी हो चुकी थी. लेकिन 31 अगस्त को ब्रिटिश अख़बार ‘द गार्डियन’ और ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ ने ओसीसीआरपी के दस्तावेज़ों के आधार पर छपी रिपोर्ट ने इस ग्रुप को एक बार फिर परेशान कर दिया.
इस रिपोर्ट के आने के बाद अदानी ग्रुप की कंपनियों ने शेयर बाज़ार में अब तक लगभग 35,200 करोड़ रुपये गंवा दिए.
ऑर्गनाइज़्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट यानी ओसीसीआरपी के दस्तावेज़ों में क्या है, जिसे मीडिया में छापा गया है?
‘द गार्डियन’ और ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ ने ओसीसीआरपी के जिन दस्तावेज़ों के आधार पर रिपोर्ट छापी है, उसमें कहा गया है कि टैक्स हैवन्स देश मॉरीशस के दो फंड - इमर्जिंग इंडिया फोकस फंड (ईआईएफएफ) और ईएम रीसर्जेंट फंड (ईएमआरएफ) ने 2013 से 2018 के बीच अदानी ग्रुप की चार कंपनियों में पैसा लगाया और इनके शेयरों की खरीद-फरोख्त भी की.
इन दोनों फंड्स के जरिये यूएई के निवेशक नासिर अली शाबाना अहली और ताइवान के निवेशक चांग चुंग लींग ने इन कंपनियों में पैसा लगाया था.
ये पैसा बरमूडा के इन्वेस्टमेंट फंड ग्लोबल अपॉर्च्युनिटीज के जरिये लाया गया. 2017 में नासिर अली और चांग चुंग लींग के इस निवेश की कीमत लगभग 43 करोड़ डॉलर थी. इस वक्त इसकी कीमत (मौजूदा एक्सचेंज रेट) 3550 करोड़ रुपये है.
जनवरी 2017 में इन दोनों निवेशकों की अदानी इंटरप्राइजेज, अदानी पावर और अदानी ट्रांसमिशन में क्रमश: 3.4, 4 और 3.6 फीसदी हिस्सेदारी थी.
गौतम अदानी के भाई विनोद अदानी पर क्या हैं आरोप?
ओसीसीआरपी के दस्तावेज़ों के मुताबिक़ गौतम अदानी के भाई और अदानी प्रमोटर ग्रुप के सदस्य विनोद अदानी की यूएई स्थित गुप्त कंपनियों एक्सेल इन्वेस्टमेंट और एडवाइज़री सर्विसेज़ लिमिटेड को ईआईएफएफ, ईएमआरएफ और जीओएफ की ओर से जून 2012 से अगस्त 2014 के बीच 14 लाख डॉलर दिए गए.
ओसीसीआरपी की पड़ताल में पाया कि ईआईएफएफ, ईएमआरएफ और जीओएफ विनोदी अदानी के कहने पर अदानी ग्रुप की कंपनियों में पैसा लगा रहे थे.
इसका मतलब ये कि ईआईएफएफ, ईएमआरएफ और जीओएफ जैसे फंड ऐसी मुखौटा कंपनियां थीं जिनके ज़रिये विनोद अदानी ने अदानी ग्रुप की कंपनियों में भारी पैसा लगाया था. इससे किसी रियल बिज़नेस के आधार पर नहीं बल्कि इस फंड के आधार पर कंपनी की वित्तीय स्थिति बहुत अच्छी लग रही थी.
इससे शेयर बाज़ार में कंपनी की स्थिति बहुत अच्छी लग रही थी. लिहाज़ा निवेशकों का ग्रुप की कंपनियों की ओर रुझान काफी बढ़ा हुआ था. कंपनी का कारोबार उतना अच्छा नहीं था, जितना शेयर बाज़ार में इसके शेयरों के प्रदर्शन से लग रहा था.
दरअसल विनोद अदानी के कहने पर नासिर अली और चांग चुंग लींग के फंड्स ने अदानी ग्रुप की कंपनियों में जो पैसा लगाया. उससे अदानी ग्रुप की कंपनियों की कंपनियों अदानी एंटरप्राइज़ेज़ और अदानी ट्रांसमिशन में प्रमोटर ग्रुप (जिसके विनोद अदानी सदस्य थे) की हिस्सेदारी 78 फीसदी से ज्यादा ( जनवरी 2017 ) हो गई.
ये सिक्योरिटीज़ कांट्रेक्ट्स (रेगुलेशन) रूल्स 1957 के नियम 19ए का उल्लंघन था, जिसके मुताबिक शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध कंपनियों को 25 फीसदी पब्लिक होल्डिंग के नियम का पालन करना पड़ता है.
नियम 19ए क्या है?
सिक्योरटीज कांट्रेक्ट्स (रेगुलेशन) रूल्स 1957 का नियम 19ए , 4 जून 2010 को एक संशोधन के ज़रिये लाया गया था. इसके मुताबिक़ शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध हर लिस्टेड कंपनी को 25 फीसदी की पब्लिक शेयर होल्डिंग के नियम का पालन करना होगा. यानी उसे अपने 25 फीसदी आम निवेशकों की खरोद-फरोख्त के लिए रखना होगा.
इस हिस्सेदारी में प्रमोटर या प्रमोटर ग्रुप में शामिल शख्स के पति या पत्नी, माता-पिता, भाई, बहन या बच्चों के अलावा ग्रुप की सब्सीडियरी कंपनियों और एसोसिएट कंपनियों की भागीदारी नहीं होगी.
कंपनी के शेयरों की प्राइस डिस्कवरी यानी शेयरों की कीमतें निर्धारित करने में ये अहम है. इस नियम का उल्लंघन ये संकेत देता है कि शेयरों की कीमतों में कृत्रिम रूप से छेड़छाड़ की गई है. इससे इनसाइडर ट्रेडिंग के संकेत भी मिलते हैं. इससे शेयर बाज़ार की विश्वसनीयता को भी झटका लगता है.
ओसीसीआरपी की वेबसाइट पर इस मामले से जुड़ी रिपोर्ट में भारतीय शेयर बाज़ार के विशेषज्ञ और पारदर्शिता आंदोलनकारी अरुण अग्रवाल से बात की गई है.
उन्होंने कहा कि किसी कंपनी के पास अपने 75 शेयर होना गैरकानूनी नहीं है लेकिन ऐसा करके वो बाज़ार में शेयरों की कृत्रिम कमी पैदा करती है. इससे कंपनी अपने शेयरों की वैल्यू बढ़ा लेती है.
शेयरों की कीमत बढ़ने से मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (बाज़ार में मौजूद शेयरों को उनकी कीमतों से गुना करने पर हासिल मूल्य) भी बढ़ जाती है. यानी शेयरों की कीमतों में छेड़छाड़ (मैनिपुलेशन) से कंपनी अपनी संपत्ति बढ़ा लेती है.
अदानी ग्रुप ने इस रिपोर्ट पर क्या कहा?
अदानी ग्रुप ने पूरी रिपोर्ट को ये कहकर खारिज कर दिया है कि ये ‘री-साइकिल्ड’ है. यानी पुरानी रिपोर्ट को नए अंदाज़ में पेश किया गया है.
इसमें कहा गया है कि ये दिग्गज निवेशक जॉर्ज सोरोस से जुड़े लोगों की ओर से तोड़-मरोड़ कर पेश की गई रिपोर्ट है. इसे विदेशी मीडिया के एक हिस्से का भी समर्थन मिल रहा है.
ग्रुप ने कहा कि पत्रकारों ने जिस मॉरीशस फंड का नाम लिया है वो पहले भी हिंडनबर्ग रिपोर्ट में आ चुका है. अदानी ग्रुप पर लग रहे आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं.
इसमें हिंडनबर्ग के आरोपों को ही दोहराया गया है. मीडिया मे जारी बयान में अदानी ग्रुप ने कहा है इसकी कंपनियां पब्लिक शेयरहोल्डिंग संबंधित रेगुलटरी नियमों का पालन कर रही हैं.
ग्रुप ने कहा है कि ये सोरोस समर्थित संगठनों की हरकत लग रही है. विदेशी मीडिया का एक हिस्सा भी इसे हवा दे रहा है ताकि हिंडनबर्ग रिपोर्ट का हौवा एक बार फिर खड़ा किया जा सके. समूह ने कहा है कि ये दावे एक दशक पहले बंद मामलों पर आधारित हैं.
कंपनी ने कहा है कि तब डीआरआई ने ओवर इन्वॉइसिंग, विदेशों में फंड ट्रांसफर करने, रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शंस और एफपीआई के जरिए निवेश के आरोपों की जांच की थी. एक इंडिपेंडेंट एडजुकेटिंग अथॉरिटी और एक अपीलीय ट्रिब्यूनल ने इस बात की पुष्टि की थी कि कोई ओवर-वैल्यूएशन नहीं था और ट्रांजैक्शंस कानूनों के मुताबिक थे.
मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने हमारे पक्ष में फैसला दिया था. इसलिए इन आरोपों का कोई आधार नहीं है.
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में सेबी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं.
इसमें कहा गया है कि जिस दौरान अदानी ग्रुप में कथित तौर पर गैरकानूनी फंडिंग की गई उस दौरान बाजार नियामक सेबी के चीफ यू सी सिन्हा थे.
इस साल मार्च में उन्हें अदानी समूह के मीडिया वेंचर एनडीटीवी का नॉन एक्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाया गया. हालांक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने जब यू सी सिन्हा से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि उनका नाम रिपोर्ट में नहीं है.
अलबत्ता कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा, "2014 में अदानी ग्रुप के ख़िलाफ़ जांच हुई. इसमें सेबी को सुबूत दिए गए और सेबी ने अदानी को क्लीन चिट दे दी. जिस जेंटलमैन ने अदानी को क्लीन चिट दी उन्हें अब एनडीटीवी में डायरेक्टर बना दिया गया है. इसलिए ये साफ है कि कुछ बड़ा गलत हुआ है.’’
ओसीसीआरपी क्या है?
ओसीसीआरपी खोजी पत्रकारों की ओर से बनाया गया संगठन है. इसकी स्थापना 2006 में हुई थी. शुरू में इसे यूनाइटेड नेशन्स डेमोक्रेसी फंड ने फंडिंग की थी.
इस नेटवर्क का पहला दफ्तर साराजेवो में खोला गया था. ओसीसीआरपी में शुरू में छह पत्रकार थे लेकिन अब 30 देशों में इसके 150 से ज्यादा पत्रकार काम करते हैं.
इसका उद्देश्य पत्रकारों का एक ग्लोबल नेटवर्क बनाना है जो आसानी से आपस में जानकारी शेयर कर सकें ताकि भ्रष्टाचार और अपराध के ग्लोबल नेटवर्क को अच्छी तरह समझ कर उसका पर्दाफाश किया जा सके.
ओसीसीआरपी ने अब तक अपराध और भ्रष्टाचार के 398 मामलों की पड़ताल की है. इसकी वजह से 621 गिरफ्तारियां और सजा हो चुकी हैं. 131 लोगों को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा है और 10 अरब डॉलर से ज्यादा का जुर्माना लगाया है और या इतनी राशि रिकवर हुई है.
जॉर्ज सोरोस का ओसीसीआरपी से क्या नाता है?
ओसीसीआरपी को दुनिया के कई बड़े संगठन वित्तीय मदद देते हैं. जॉर्ज सोरोस का ओपन सोसाइटी फाउंडेशन भी इसे वित्तीय मदद देता है.
ओपन सोसाइटी फाउंडेशन दुनिया के 120 देशों में काम करता है. इसे 1984 में बनाया गया था. जब अदानी ग्रुप पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आई थी तब जॉर्ज सोरोस ने कहा था कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विदेशी निवेशकों और देश की संसद के सवालों का जवाब देना होगा
जॉर्ज सोरोस हंगरी मूल के अमेरिकी कारोबारी और परोपकारी हैं. 2021 में उनकी कुल संपत्ति 8.6 अरब डॉलर थी. उन्होंने 32 अरब डॉलर की अपनी सपंत्ति ओपन सोसाइटी फाउंडेशन को दे दी थी. इनमें से 15 अरब डॉलर बांट दिए गए हैं.
ओपन सोसाइटी फाउंडेशन की वेबसाइट के मुताबिक़ ये एक ऐसे जीवंत और समावेशी लोकतंत्र के लिए काम करता है जिसमें सरकारें अपने लोगों के लिए जवाबदेह हों.
हिंडनबर्ग मामले में अब तक क्या-क्या हुआ है?
25 जनवरी को अमेरिकी शॉर्ट सेलिंग कंपनी ‘हिंडनबर्ग’ ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें अदानी ग्रुप पर शेयरों के दामों में गड़बड़ी करने औैर टैक्स हैवन्स का गलत इस्तेमाल करने के आरोप लगाए गए.
इसमें कंपनी पर बहुत ज्यादा कर्ज़ होने का भी ज़िक्र था. अदानी ग्रुप ने इसका खंडन किया. लेकिन इसके बाद कंपनी की संपत्ति में काफी तेजी से गिरावट आई और ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदानी की संपत्ति 120 अरब डॉलर से घट कर 39.9 अरब डॉलर रह गई थी.
फिलहाल इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में जांच चल रही है. हालांकि इस मामले की जांच के लिए बनी एक्सपर्ट कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि जांच में अदानी ग्रुप की कमी सामने नहीं आई. वैसे हिंडनबर्ग रिपोर्ट से पहले कुछ संस्थाओं ने अदानी ग्रुप के शेयरों की शॉर्ट पोजिशन ले ली थी इसके शेयरों में गिरावट से मुनाफा कमाया.
सेबी ने इस मामले में 25 अगस्त को अपनी रिपोर्ट दाखिल की. सेबी ने बताया कि उसने कुल 24 पहलुओं की जांच की. इसमें से 22 की जांच पूरी हो चुकी है. दो जांच की रिपोर्ट अंतरिम है. सेबी ने बताया कि वह अपनी जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा.
सेबी की विस्तृत जांच रिपोर्ट अभी सामने नहीं आ आ पाई है. 24 मामलों की जांच के दौरान उसने क्या-क्या कदम उठाए. जांच में मिला क्या, इसकी जानकारी फिलहाल नहीं दी गई है.
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