You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
चुनाव आयोग ने पीएम मोदी, राहुल गांधी की बजाय बीजेपी और कांग्रेस को भेजा नोटिस, क्या हैं जोखिम?- प्रेस रिव्यू
चुनाव आयोग ने गुरुवार को आचार संहिता उल्लंघन के मामले में बीजेपी और कांग्रेस दोनों राजनीतिक दलों को नोटिस जारी किया है.
ये नोटिस पीएम नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के ख़िलाफ़ चुनाव आयोग में दर्ज की गई शिकायतों के मद्देनज़र बीजेपी और कांग्रेस के अध्यक्षों को भेजा गया है.
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़- ये पहली बार है, जब स्टार प्रचारक की बजाय पार्टियों को नोटिस भेजकर चुनाव आयोग ने इस तरह की शिकायतों से निपटने के अपने रवैये को बदला है.
इससे पहले चुनाव आयोग राजनीतिक पार्टियों के लिए एडवाइज़री जारी किया करता था. अगर किसी उम्मीदवार के ख़िलाफ़ कोई शिकायत आए तो चुनाव आयोग उम्मीदवार को ही नोटिस भेजा करता था.
अख़बर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में लिखा गया है कि स्थिति इस बार बदल गई है.
अपने नोटिस में आयोग ने कहा कि पार्टी के स्टार प्रचारक अपने खुद के के भाषणों के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार हैं लेकिन "अलग-अलग मामलों में" आयोग आचार संहिता के उल्लंघन के लिए पार्टी के प्रचारकों को भी जवाबदेह ठहरा सकता है.
अखबार से एक पूर्व चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग का ये कदम जोखिम भरा है.
उन्होंने कहा, "अगर किसी नेता की टिप्पणी के लिए आप पार्टी को नोटिस जारी करते हैं, तो आपके पास उस नेता के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की गुंजाइश कितनी है? मान लीजिए कि अगर पार्टी जवाब देती है और वो आपको संतोषजनक नहीं लगा तो आप पार्टी के ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई करेंगे?''
पूर्व चुनाव आयुक्त ने कहा कि इस कदम से चुनाव आयोग का इरादा साफ़ नहीं है.
चुनाव आयोग का बदला रुख
चुनाव आयोग के रुख़ में बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले भी आयोग ने आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में हाई-प्रोफाइल नेताओं को नोटिस भेजा है.
साल 2007 में गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान सोनिया गांधी, 2013 में मोदी, 2014 में अमित शाह (जब वह भाजपा महासचिव हुआ करते थे) को चुनाव आयोग ने नोटिस दिया था.
हालांकि ये जानना भी अहम है कि आज तक किसी भी मौजूदा प्रधानमंत्री को आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत पर नोटिस नहीं भेजा गया है.
अख़बार लिखता है कि चुनाव आयोग के एक अधिकारी के अनुसार, गुरुवार को जारी किए गए ये नोटिस मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार की घोषणा का हिस्सा है.
16 मार्च को राजीव कुमार ने लोकसभा चुनावों पर अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था, "आचार संहिता का बार-बार उल्लंघन करने वाले प्रचारकों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की जाएगी."
चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने अखबार से कहा, ''ज़िम्मेदारी बढ़ाई जा रही है और बल्कि क़ानूनी तौर पर उस राजनीतिक पार्टी को भी जोड़ा जा रहा है जिसका नाता स्टार प्रचारक से है. चुनाव आयोग में पंजीकरण के वक्त पार्टियां वादा करती हैं कि वो संविधान के आदर्शों पर कायम रहेंगी. हमने उन्हें उनके इस वादे के बारे में याद दिलाया है."
2000 टन प्याज का निर्यात करेगा भारत
द हिंदू में छपी एक ख़बर के अनुसार, केंद्र सरकार ने गुरुवार को प्याज के निर्यात पर लगी अनिश्चितकालीन पाबंदी में आंशिक रूप से ढील दी है.
इसके बाद गुजरात और मुंबई के तीन बंदरगाहों से मुख्य रूप से गुजरात में उगाए जाने वाले 2,000 टन सफेद प्याज के "तत्काल" निर्यात का रास्ता खुल गया है.
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफ़टी) ने इससे जुड़ा एक आदेश जारी किया है.
इस आदेश में कहा गया है कि सफेद प्याज के निर्यात की अनुमति केवल तभी दी जाएगी जब गुजरात के बागवानी आयुक्त निर्यात की जाने वाली चीज़ और उसकी मात्रा को प्रमाण पत्र देंगे. इसके बाद ही उसका निर्यात संभव होगा.
अख़बार लिखता है कि गुजरात के अमरेली और भावनगर सफेद प्याज की खेती बड़े पैमाने पर होती है. इन दोनों जगहों पर सात मई को मतदान होना है.
यह निर्यात मुंद्रा बंदरगाह, पिपावाव बंदरगाह और न्हावा शेवा या जेएनपीटी बंदरगाह से करने होगा.
पिछले साल आठ दिसंबर को सरकार ने देश में प्याज की सप्लाई कम होने के बाद इसकी कीमतों को नियंत्रण में रखने के इसके निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी.
कर्नाटक की रैली में पीएम मोदी फिर मुसलमानों पर बोले
कर्नाटक में एक चुनावी रैली में गुरुवार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर प्रदेश में "पिछले दरवाजे से" ओबीसी लिस्ट में मुसलमानों को शामिल करने और संविधान का उल्लंघन करने का आरोप लगाया.
अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर के अनुसार, पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने धार्मिक आधार पर आरक्षण को बढ़ावा दिया.
उन्होंने कहा कि कर्नाटक में सभी मुसलमानों को ओबीसी के समान "पिछड़ा" घोषित करने का कांग्रेस का फ़ैसला पिछड़े वर्गों के हितों के लिए नुक़सानदायक था.
पीएम ने कहा, "संविधान लिखने वाले बाबा साहेब अंबेडकर धार्मिक आधार पर आरक्षण के ख़िलाफ़ थे, लेकिन कांग्रेस ने... उनकी पीठ में छुरा घोंपा. मुसलमानों को आरक्षण देना गै़र-कानूनी था. यह पूरे देश के ओबीसी समुदायों के लिए खतरे की घंटी है."
उन्होंने कहा, "आपको पता है कि कांग्रेस ने कर्नाटक में क्या गुनाह किया. रातों-रात अपनी आर्थिक और सामाजिक स्थिति के बाबजूद सभी मुसलमनों को ओबीसी लिस्ट में शामिल कर लिया गया. ओबीसी रिज़र्वेशन के अधिकार को छीनकर ग़ैर-क़ानूनी तरीके से मुलसमानों को दे दिया गया."
इसके जवाब में कांग्रेस नेता और प्रदेश के मुख्यमंत्री सिद्धारमैय्या ने कहा, "पीएम खुले तौर पर झूठ बोल रहे हैं. हार की डर की वजह से वो मायूस हो गए हैं. रिज़र्वेशन संविधान के अनुसार दिया जाता है इसमें कोई अपनी मर्ज़ी से बदलाव नहीं कर सकता."
"राज्यों के पास इसमें बदलाव करने की ताकत नहीं होती. हमारे प्रधानमंत्री को ये बेसिक जानकारी भी नहीं है, ये देश का दुर्भाग्य है."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)