पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में आटे के दामों को लेकर प्रदर्शन के दौरान हिंसा, एक पुलिस इंस्पेक्टर की मौत

मुज़फ़्फ़राबाद

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पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में बिजली और आटे के बढ़ते दामों को लेकर शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई है.

स्थानीय पत्रकार मोहम्मद ज़ुबैर ख़ान ने बीबीसी उर्दू को बताया है कि इस हिंसक झड़प के दौरान एक पुलिसकर्मी की मौत हुई है.

वहीं इस पूरी हिंसक घटना में अलग-अलग इलाक़ों में 90 से अधिक लोगों के घायल होने की ख़बर है.

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में सरकार के प्रवक्ता अब्दुल माजिद ख़ान ने इस बात की जानकारी दी है.

उन्होंने दावा किया है कि मीरपुर इस्लामगढ़ में प्रदर्शनकारियों की फ़ायरिंग से एक पुलिस इंस्पेक्टर अदनान क़ुरैशी के सीने में गोलियां लगने से मौत हुई है.

उनके शव को डिस्ट्रिक्ट हेडक्वॉर्टर अस्पताल मीरपुर लाया गया है.

उनके मुताबिक़ अदनान क़ुरैशी जनता की जानो-माल की सुरक्षा कर रहे थे.

प्रवक्ता ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ क़ानून के मुताबिक़ कार्रवाई की जाएगी.

उनका कहना था कि मुज़फ़्फ़राबाद में भी कुछ जगहों पर छोटी-मोटी झड़पें हुई हैं, पुलिस अराजक तत्वों पर क़ाबू पाने की कोशिश कर रही है.

कैसे हिंसक हुआ प्रदर्शन

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पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में जम्मू कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमिटी ने मुज़फ़्फ़राबाद के लिए लॉन्ग मार्च और वहां धरना देने का आह्वान किया था.

इस कमिटी में कश्मीर के अधिकतर व्यापारी वर्ग के लोग शामिल हैं. ये कमिटी बिजली की क़ीमतों में बढ़ोतरी और आटे के बढ़ते दामों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रही थी.

इस आह्वान के बाद स्थानीय प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए मुज़फ़्फ़राबाद में घुसने और वहां पहुंचने वाले तमाम रास्तों को बंद कर दिया था.

बुधवार-गुरुवार की रात इस कमिटी के कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने कथित तौर पर गिरफ़्तार भी किया था.

शनिवार को लॉन्ग मार्च से एक दिन पहले शुक्रवार को कमिटी ने चक्का जाम किया और दुकानों को बंद करने की भी घोषणा की थी.

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद, ढाढियाल, कोटली और अन्य इलाक़ों में दो दिन से आम जनजीवन ठप्प पड़ा था और हड़ताल जारी थी.

लॉन्ग मार्च के दौरान झड़पें

मुज़फ़्फ़राबाद

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शनिवार को जब लॉन्ग मार्च की अपील की गई तो पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के कई इलाक़ों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों की ख़बरें आईं.

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाए थे कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की सरकार ने पूरे कश्मीर में कई लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है मगर इसके बावजूद जनता बड़ी तादाद में बाहर निकली है और अपनी मांगें पूरी होने तक प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की है.

कश्मीर सरकार के प्रवक्ता और असेंबली के सदस्य अब्दुल माजिद ख़ान ने प्रदर्शनकारियों के दावों को ख़ारिज करते हुए कहा था कि रास्ते बंद नहीं हैं और कश्मीर और पाकिस्तान आने-जाने वाले रास्ते खुले हुए हैं.

उन्होंने बताया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन हर किसी का हक़ है मगर शांति व्यवस्था ख़राब करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती है.

उनका दावा था कि शुक्रवार की रात को मुज़फ़्फ़राबाद में ग्रिड स्टेशन पर कुछ अराजक तत्वों ने क़ब्ज़ा करने की कोशिश की थी जबकि ढाढियाल में पुलिस और असिस्टेंट कमिश्नर पर हमला हुआ था जिसके बाद पुलिस ने शांति व्यवस्था बरक़रार रखने के लिए कार्रवाई की थी.

सरकार ने क्या कहा

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के वित्त मंत्री अब्दुल माजिद ख़ान ने कहा कि सरकार ने बहुत अधिक संयम बरता और वो सभी मुद्दों के समाधान के लिए शांतिपूर्ण तरीक़े से बात करने को तैयार है.

उन्होंने कहा, “मुद्दे बातचीत के ज़रिए सुलझाए जाने चाहिए और हमारे दरवाज़े बातचीत के लिए हमेशा खुले हुए हैं. लेकिन इस प्रस्ताव को सरकार की कमज़ोरी नहीं मान लेना चाहिए.”

उन्होंने बताया कि कोटली और मीरपुर ज़िलों में सरकारी अधिकारियों के तीन वाहन जला दिए गए हैं.

वहीं पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पार्टी पीएमएल-एन के पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के अध्यक्ष शाह ग़ुलाम क़ादिर ने इस पूरी घटना को अनुचित बताते हुए सभी से शांति क़ायम करने की अपील की है.

पीएमएल-एन ने एक वीडियो ट्वीट किया है जिसमें क़ादिर बता रहे हैं कि उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से बात की है और उन्हें प्रदर्शनकारियों की मांगों के बारे में बताया है.

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वहीं पीटीआई ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग करने की निंदा करते हुए कहा है कि यह स्वीकार्य नहीं है.

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पीटीआई ने पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पों के वीडियो भी शेयर किए हैं.

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