इसराइल ग़ज़ा युद्ध: डॉक्टर ने बताया दवाओं की कमी से हालात हुए चिंताजनक

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- Author, अदनान अल-बुर्श
- पदनाम, बीबीसी अरबी, रफ़ाह (ग़ज़ा) से
“ग़ज़ा पट्टी और विशेष रूप से रफ़ाह में स्थिति बेहद जोख़िम भरी है.”
रफ़ाह में स्थित शहीद मोहम्मद यूसुफ़ अल-नज़र अस्पताल के निदेशक डॉ मारवान अल-हम्स हैं.
इनकी ओर से चलाए जा रहे इस अस्पताल में 63 बिस्तर हैं और यहां इस समय 145 मरीजों का इलाज चल रहा है.
मरीजों की यह संख्या अस्पताल की क्षमता से दोगुनी लग सकती है. लेकिन मिस्र की सीमा से लगने वाले रफ़ाह शहर में दस लाख विस्थापित फ़लस्तीनी रहते हैं. वहीं, युद्ध से पहले इस जगह की आबादी लगभग तीन लाख हुआ करती थी.
डॉ अल-हम्स ने स्कूलों, राहत शिविरों और भीड़भरे घरों में फैलती बीमारियों का ज़िक्र करते हुए कहा, “दवाओं की कमी एक ख़तरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है. और अब अस्पतालों में बिलकुल जगह नहीं बची है.”
डॉ अल-हम्स कहते हैं कि ग़ज़ा पट्टी के अस्पतालों में गंभीर डायरिया, थकान और उच्च तापमान से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं.
ये सभी संक्रमण पानी, खाद्य पदार्थ और दूसरे लोगों के साथ संपर्क की वजह से फैलते हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि दो महीने से जारी युद्ध के बाद प्रति सात सौ लोगों के लिए औसतन एक नहाने का स्थान और 150 लोगों पर एक टॉयलेट उपलब्ध है.
उत्तरी ग़ज़ा में सिर्फ एक अस्पताल काम कर रहा है और दक्षिण में दस अस्पताल काम कर रहे हैं.
लोग इसराइली बमबारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं. साबुन या डिटरजेंट मिलना असंभव जैसा है. दूसरी सभी चीज़ें का नंबर दूसरा होता है.
डॉ अल-हम्स कहते हैं, “चर्मरोग भी फैल रहे हैं. अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने वाले चिकनपॉक्स से जूझ रहे लोगों की संख्या लगभग 4593 है. ये आंकड़ा पांच दिन पुराना है.”
मीज़ल्स के भी अब तक पांच मामले रिकॉर्ड सामने आ चुके हैं.
डॉ अल-हम्स कहते हैं कि मीनिंगाइटिस भी एक गंभीर बीमारी है जिसके अब तक 115 केस दर्ज किए जा चुके हैं.
इसके साथ ही वे स्किन से जुड़ी बीमारियों और रैशेज़ के भी मरीजों की बड़ी संख्या देख रहे हैं. वह कहते हैं कि आठ दिसंबर तक इस तरह के 35,305 केस दर्ज किए हैं.
वह कहते हैं, “हमने परजीवियों के कारण बीमार हुए 17,511 लोग हमारे पास पहुँचे हैं. इनके लिए हमारे कोई दवाई नहीं है.”
इसके अलावा 19,350 स्केबीज़ के केस भी आए हैं. ये बीमारी व्यक्ति से व्यक्ति में फैलती है.
ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अब तक डिसेंटरी के 350 केस रजिस्टर किए हैं. डिसेंटरी अंतड़ियों की इंफ़ेक्शन के कारण होती है. इस बीमारी में पेट दर्द के अलावा उल्टियां, दस्त आदि होते हैं.
ये बीमारी भी संक्रामक है.

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लोगों को अब पीलिया होना शुरू हो गया है. लोगों के आँखों के पुतलियां और चमड़ी सफे़द हो रही है. ये हेपाटाइटस के लक्षण भी हैं.
डॉक्टर अल-हम्स कहते हैं कि अब तक हेपाटाइटस के 4,146 केस आ चुके हैं.
डॉक्टर अल-हम्स कहते हैं कि सभी अंडरग्राउंड कूओं को खोल देना चाहिए ताकि लोगों को साफ़ पानी मिल सके.
वे कहते हैं, “ ठहरा हुए पानी से बीमारियां फैल रही हैं. वहां मच्छर पनप रहे हैं. उन्हें तुरंत बंद कर देना चाहिए.
डॉक्टर को उम्मीद है कि ग़ज़ा में पहुँचने वाली सारी दवाओं का अच्छे से इस्तेमाल हो रहा है.
वे कहते हैं, "अब सर्दियाँ शुरू हो रही हैं. अगर सर्दी या फ़्लू फैली तो हम रफ़ाह जैसे शहर में हम इससे निपट नहीं पाएंगे.”
"हम अस्पताल के रिसेप्शन में ही करीब 1,500 मरीज़ों का उपचार कर रहे हैं. हर दिन 2,000 लोग यहाँ पुहँच रहे हैं.”
"अगर बीमारियां और फैलीं तो यहां एक महामारी जैसे हालात हो जाएंगे. और ऐसा हुआ तो तबाही होगी.”
डॉक्टर ने गुज़ारिश की कि उन्हें और अधिक ईंधन मुहैया करवाया जाए. इसराइल ने ईंधन की उपलब्धतता को सीमित रखा हुआ है.
"हम अधिकारियों से रफ़ाह क्रॉसिंग खोलने की इल्तज़ा करते हैं ताकि वहां से ईंधन ग़ज़ा में प्रवेश कर सके.”
वे कहते हैं कि सारी ग़ज़ा पट्टी में सभी अस्पतालों को भरपूर ईंधन उपलब्ध करवाई जानी चाहिए.
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