यूपी: नक़ल रोकने के लिए लाया गया नया ‘क़ानून’ पुराने से कितना अलग
अनंत झणाणें
बीबीसी संवाददाता

इमेज स्रोत, AFP
उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग ने प्रतियोगी और शैक्षणिक परीक्षाओं से जुड़े प्रश्न पत्रों को लीक होने से रोकने और पेपर सॉल्वर गैंग पर लगाम लगाने के एक क़ानूनी मसौदे को तैयार किया है.
राज्य विधि आयोग ने इस मसौदे को उत्तर प्रदेश के विधि विभाग को सौंप दिया है.
इस प्रस्तावित क़ानून में 14 साल जेल और 25 लाख रुपये तक के ज़ुर्माने का प्रावधान है.
राज्य विधि आयोग ने इस क़ानूनी मसौदे से जुड़ी अपनी रिपोर्ट में लिखा, "नक़ल एक बड़ा कारोबार हो चुका है, पेपर लीक होने के वजह से परीक्षाएं रद्द करनी पड़ती हैं, सरकारी पैसों का नुक़सान होता है, मौजूदा क़ानून नक़ल रोकने में पूरी तरह नाकाम हैं, हर 15 दिन या महीने में एक बार अख़बार के पहले पन्ने पर नक़ल से जुड़ी सुर्खियां दिखती हैं. ये इन परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं और उत्तर प्रदेश सरकार की छवि धूमिल होती है."
राज्य विधि आयोग ने इन्हीं बातों को आधार बनाकर नक़ल से निपटने के लिए नए विधेयक का मसौदा तैयार किया है.

इमेज स्रोत, BBC WORLD SERVICE
प्रदेश के पुराने नक़ल क़ानून
उत्तर प्रदेश में पहले से ही नक़ल के ख़िलाफ़ दो क़ानून मौजूद हैं.
उत्तर प्रदेश पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स) एक्ट 1992 और उत्तर प्रदेश पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स) एक्ट 1998.
इन क़ानूनों में नाबालिग़ परीक्षार्थियों की कम उम्र का ध्यान रखते हुए सिर्फ़ सांकेतिक सज़ा के प्रावधान थे.
तो सवाल यह उठता है कि मौजूदा क़ानून होने के बावजूद नक़ल के लिए नए क़ानून की ज़रूरत क्यों महसूस हो रही है.
विधि आयोग की रिपोर्ट में लिखा है, "नक़ल की घटनाएं काफी ज़्यादा बढ़ गई हैं और यह सरकार को शर्मसार करती हैं. और यह मौजूदा क़ानून सॉल्वर गैंग, पेपर लीक और नक़ल के संकट से निपटने के लिए नाकाम साबित हो रहे हैं."
यही कारण है कि राज्य विधि आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इससे निपटने के लिए मसौदा तैयार करते हुए उसे राज्य सरकार को क़ानून बनाने के लिए भेज दिया.
आइए आपको बताते हैं कि यूपी में नक़ल रोकने के लिए प्रस्तावित क़ानून के मसौदे में क्या क्या प्रावधान रखे गए हैं और यूपी में नक़ल का इतिहास क्या रहा है?
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
नक़ल के तरीक़े और प्रस्तावित क़ानून में प्रावधान
इस बारे में विधि आयोग की रिपोर्ट कहती है कि प्रदेश में संगठित तरीके से नक़ल करने और कराने वाला ढांचा है. यह ब्लूटूथ के ज़रिए, पेपर सॉल्वर गैंग के माध्यम से, पेपर लीक करके किया जाता है और इसमें परीक्षा आयोजित कराने वाले विभाग के कर्मचारी और अधिकारी और कंपनियां भी शामिल हो सकते हैं.
जब कभी उत्तर प्रदेश की एसटीएफ़ ने या किसी अन्य जांच एजेंसी ने नक़ल गिरोह को पकड़ा है तो नक़ल करने और कराने के यही तरीक़े कुछ फ़र्क के साथ बार-बार उजागर होते रहे हैं.
प्रस्तावित नक़ल क़ानून के मसौदे का नाम है उत्तर प्रदेश पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स, पेपर लीक एंड सॉल्वर गैंग एक्टीविटीज़) बिल, 2023.
इसे क़ानून बनाने के लिए सरकार को प्रदेश के दोनों सदनों में पारित करवा कर राजपत्र के माध्यम से क़ानून घोषित करना पड़ेगा. ज़रूरत पड़ने पर सरकार इसका अध्यादेश भी पारित कर सकती है.
इस मसौदे में काफी विस्तार से "सॉल्वर गैंग" को और उसके तौर तरीक़ों को परिभाषित किया गया है. नक़ल करने में किसी तरह से मदद करने वाले को सॉल्वर गैंग का सदस्य माना गया है.
नक़ल में मॉडर्न टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल और उसे (नक़ल को) अंजाम देने वाले लोगों को भी दण्डित करने का प्रावधान है.
नक़ल करते पकड़े जाने वाले छात्रों के दोषी पाए जाने पर उनका नतीजा रोक दिया जाएगा, या अभ्यर्थी अगले दो परीक्षा सत्रों में नहीं बैठ पाएगा.
सॉल्वर गैंग चलाने के दोषी पाए जाने वाले किसी भी शख्स को 5 से 14 साल तक की क़ैद हो सकती है और 25 लाख का जुर्माना देना पड़ सकता है.
इस प्रस्तावित क़ानून में संपत्ति कुर्क करने का भी प्रावधान है.
मसौदा कहता है, "ज़िले के डीएम को नक़ल के कारोबार से कमाए गए धन से अर्जित संपत्ति को कुर्क करने का पूरा अधिकार है."
इस क़ानून में परीक्षा का पर्चा छापने वाली कंपनी से परीक्षा रद्द होने या सरकार को नक़ल से हुए आर्थिक नुक़सान की भरपाई के लिए जुर्माना वसूला जा सकता है और कंपनी पर आजीवन प्रतिबन्ध लगाया जा सकता है.

इमेज स्रोत, Empics
2017 में पीएम मोदी ने उठाया था यूपी में नक़ल का मुद्दा
उत्तर प्रदेश के 2017 विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोंडा में एक रैली के मंच से नक़ल का मुद्दा उठाया था.
प्रधानमंत्री मोदी ने अखिलेश यादव सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था, "गोंडा में तो जत्था बंद नक़ल का बिज़नेस चलता है, व्यापार चलता है. यहाँ चोरी करने की नीलामी होती है. जो सेंटर मिलता है, वो हर विद्यार्थी के माँ-बाप को कहता है कि देखिए, तीन हज़ार डेली का, दो हज़ार डेली का, पांच हज़ार डेली का. अगर गणित का पेपर है तो इतना, अगर विज्ञान का पेपर है तो इतना. होता है कि नहीं होता है, भाइयों?"
रैली में आई जनता कहती है, "होता है."
मोदी पूछते हैं, "यह ठेकेदारी बंद होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए?"
जनता कहती है, "होनी चाहिए."
मोदी पूछते हैं, "यह बेइमानी बंद होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए?"
जनता कहती है, "होनी चाहिए."
मोदी मंच से कहते हैं, "यह मेरे देश की भावी पीढ़ी को तबाह करने वाला कारोबार है. यह कारोबार बंद होना चाहिए. शिक्षा के साथ यह जो अपराध जुड़ गया है, वो समाज को, आने वाली पीढ़ियों तक को तबाह करके रख देता है."
मोदी नक़ल के मुद्दे पर लगातार पाँच मिनट तक बोलते रहे.
पीएम मोदी को वो भाषण दिए अब 6 साल होने जा रहा है और तब से अब तक राज्य में बीजेपी की सरकार योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शासन कर रही है.
लेकिन अगर विधि आयोग की मानें तो राज्य में नक़ल की समस्या अब भी काफी संगठित और व्यापक है.

इमेज स्रोत, ANI
सर्वे पर आधारित है मसौदा विधेयक
नए क़ानून की ज़रूरत विधि आयोग के एक सर्वे से सामने आई जिसमें 61 प्रतिशत से अधिक लोगों ने नक़ल रोकने के लिए एक कठोर क़ानून बनाने का पक्ष लिया.
इस सर्वे में विधि आयोग ने 18 सवालों की एक प्रश्नावली में न्याय अधिकारियों, विश्वविद्यालयों, ज़िला अदालतों, उच्च न्यायलयों के अधिकारियों, प्रदेश सरकार के अधिकारियों और आम लोगों से जवाब मांगे.
इसमें विशेष तौर पर लोगों से नक़ल के विरुद्ध एक सख्त क़ानून बनाने का सवाल पूछा गया था.
इसके साथ ही सॉल्वर गैंग, पेपर लीक, शैक्षणिक संस्थानों, छात्रों के अभिभावकों की भूमिका और परीक्षा कराने वाले संस्थानों की भूमिका बारे में भी सवाल पूछे गए थे.
सर्वे में सामने आया कि 67 फ़ीसद से अधिक लोग यह मानते हैं कि नक़ल और पेपर लीक की घटनाओं से देश में बेरोज़गारी बढ़ रही है. वहीं 95 प्रतिशत लोग यह मानते हैं कि इससे उत्तर प्रदेश की उत्पादकता बाधित हो रही है.
सर्वे में हिस्सा लेने वाले 81 प्रतिशत लोग यह मानते हैं कि परीक्षाओं में गड़बड़ियों की वजह से स्वास्थ्य सेवाओं में कदाचार होता है, अक्षम इंजीनियर बनते हैं, और बैंक सुविधाओं में धोखाधड़ी जैसी सामाजिक बीमारियों को बढ़ावा मिलता है.
विधि आयोग का कहना है कि विधेयक बनाने के लिए कराए गए सर्वे में उन्हें पर्याप्त मात्रा में जवाब मिले.

इमेज स्रोत, ANI
यूपी में पेपर लीक का इतिहास
_____________________________________________________________________________
31 जुलाई, 2022
- उत्तर प्रदेश में लेखपाल भर्ती मुख्य परीक्षा 12 ज़िलों के 501 केंद्रों पर थी जिसमें 2.5 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे.
- पुलिस ने पेपर लीक और नक़ल के 21 अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया था.
30 मार्च, 2022
- उत्तर प्रदेश के बलिया में, उत्तर प्रदेश बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्रों के लीक होने से जुड़े एक आपराधिक मामले में पहले गिरफ़्तार किए गए एक इंटर कॉलेज शिक्षक के ख़िलाफ़ कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत नए आरोप लगाए गए थे.
- कुल पांच लोगों के ख़िलाफ़ एनएसए लगाया गया था और 55 लोगों की गिरफ़्तारी हुई थी.
29 नवंबर, 2021
- प्रदेश में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यूपी के प्राथमिक और जूनियर स्कूलों में शिक्षक भर्ती के लिए आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) का पेपर लीक हुआ.
- पेपर लीक होने के मामले में 29 लोगों को गिरफ़्तार किया गया.
- 2,736 परीक्षा केंद्रों पर क़रीब 20 लाख अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होना था.
24 अगस्त, 2021
- राज्य में यूपीएसएसएससी द्वारा आयोजित पीईटी (प्रारंभिक पात्रता परीक्षा) के संबंध में थी और कहा गया था कि लखनऊ प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों को टेस्ट शीट के 3 सेट के लिए 36 लाख रुपये का भुगतान किया गया था.
- जांच करने पर यह ख़बर झूठी निकली जो सोशल मीडिया की उपज थी.
- यह परीक्षा दो पालियों में आयोजित की गई थी जिसमें 20,73,540 परीक्षार्थी शामिल हुए थे.
02 अप्रैल, 2016
- यूपी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का पेपर कथित तौर पर लीक हो गया था.
- पुलिस ने जांच शुरू की और कम से कम दो संदिग्धों को पकड़ लिया.
- राज्य भर के 900 से अधिक केंद्रों पर चार लाख से अधिक पीसीएस अभ्यर्थियों द्वारा ली जा रही परीक्षा रद्द करनी पड़ी.
- परीक्षार्थियों ने लखनऊ, इलाहाबाद, वाराणसी और कानपुर सहित कई शहरों में कई केंद्रों के बाहर विरोध प्रदर्शन किया.
___________________________________________________________________________

इमेज स्रोत, ANI
किस राज्य में कैसा क़ानून
उत्तर प्रदेश ऐसा इकलौता राज्य नहीं है जिसने नक़ल पर नकेल कसने के लिए समय-समय पर क़ानून बनाए हैं.
उत्तराखंड में नक़ल के अपराध से जुड़े क़ानून सबसे सख़्त हैं. वहां इसी साल सरकार ने अध्यादेश जारी किया है जिसमें दोषी को आजीवन कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. लेकिन यह क़ानून सिर्फ़ सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली नक़ल पर ही लागू होता है, स्कूली परीक्षा पर नहीं.
हरियाणाः पेपर लीक में शामिल दोषी को 7 साल तक सज़ा हो सकती है और अगर नक़ल संगठित तरीके से हुई हो तो उसमें 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है. हरियाणा के क़ानून में नक़ल के कारोबार से अर्जित धन से ख़रीदी गई संपत्ति को कुर्क करने का भी प्रावधान है.
आंध्र प्रदेश में परीक्षा में "अनुचित तरीकों" के इस्तेमाल के दोषियों को 3 से 7 साल की सज़ा और जुर्माने का प्रावधान है.
राजस्थान में पेपर लीक करने वाले को तीन साल जेल और जुर्माने की सज़ा का प्रावधान है.
जम्मू कश्मीर में परीक्षा में "अनुचित तरीक़ों" के इस्तेमाल के लिए अधिकतम 2 साल की सज़ा और ज़्यादा से ज़्यादा दो हज़ार रुपये जुर्माने का प्रावधान है.
छत्तीसगढ़ में पेपर लीक करने वाले को एक साल की सज़ा का प्रावधान है. लेकिन अगर नक़ल से जुड़ा कोई जघन्य अपराध होता है तो उसकी सज़ा 5 साल तक हो सकती है.
ये भी पढ़ेंः-
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












