महुआ मोइत्रा: संसद में सरकार को घेरने वाली सांसद क्या अब अकेली पड़ गई हैं?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी की खुलकर आलोचना करने के लिए पहचानी जाने वाली तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा इन दिनों एक नए विवाद में फंस गई हैं.

महुआ मोइत्रा यूं तो पहले भी विवादों में रही हैं लेकिन माना जा रहा है कि इस बार उनकी लोकसभा सदस्यता भी ख़तरे में पड़ सकती है.

आरोप लगा है कि उन्होंने भारतीय कारोबारी गौतम अदानी और उनकी कंपनियों के समूह को निशाना बनाने के लिए लगातार संसद में सवाल पूछे और वह भी रिश्वत लेकर.

मोइत्रा पर यह आरोप लगाया है बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने जिनकी महुआ से पहले भी तकरार होती रही है.

महुआ मोइत्रा ने अपने ऊपर लगाए गए इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि वह हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं.

अब संसद की एथिक्स कमेटी महुआ मोइत्रा के ख़िलाफ़ दी गई बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की शिकायत पर सुनवाई कर रही है.

तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि इस मामले में एथिक्स कमेटी की जांच रिपोर्ट के बाद ही कोई क़दम उठाया जाएगा.

ऐसे में क़यास लगाए जा रहे हैं कि मोइत्रा अपनी पार्टी में भी अकेली पड़ गई हैं.

विदेश में नौकरी से भारत में नेता बनने तक

पहले पश्चिम बंगाल में विधायक रह चुकीं महुआ मोइत्रा का बतौर सांसद यह पहला कार्यकाल है.

उनका जन्म असम में हुआ था और स्कूली पढ़ाई कोलकाता में. इसके बाद की पढ़ाई के लिए वह अमेरिका चली गई थीं.

मेसाच्यूसेट्स के माउंट होलियोक कॉलेज से उन्होंने इकनॉमिक्स और मैथेमैटिक्स में ग्रैजुएशन की. इसके बाद अमेरिका और ब्रिटेन में कुछ और व्यावसायिक शिक्षा भी हासिल की.

इसके बाद मोइत्रा ने लंदन में प्रतिष्ठित बैंकिंग कंपनी जेपी मॉर्गन चेज़ में बतौर इन्वेस्टमेंट बैंकर काम किया और फिर 2009 में भारत लौट आईं.

पश्चिम बंगाल लौटने के बाद जब उन्होंने राजनीति में क़दम रखा तो पहले यूथ कांग्रेस से जुड़ीं. मगर 2010 में वह तृणमूल कांग्रेस में चली गईं.

चुनाव में पहली सफलता उन्हें छह साल बाद मिली जब वह साल 2016 के विधानसभा चुनाव में करीमपुर से विधायक चुनी गईं.

इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने उन्हें कृष्णानगर सीट से टिकट दिया जहां से वह 60 हज़ार वोटों से जीत हासिल कर लोकसभा पहुंचीं.

संसद में पहले ही भाषण से छाईं

जब महुआ पश्चिम बंगाल में विधायक थीं, तब उन्होंने राष्ट्रीय मीडिया चैनलों में बतौर तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता आना शुरू कर दिया था.

जनवरी 2017 में उन्होंने टीवी डिबेट के दौरान तत्कालीन बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो पर उनके अपमान का आरोप लगाया.

उन्होंने सुप्रियो के ख़िलाफ़ महिला को अश्लील शब्द कहने या इशारे करने से जुड़ी धारा 509 के तहत मामला दर्ज़ कराया था. बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मामले को खारिज करते हुए कहा था कि मंत्री की टिप्पणी इस धारा के बजाय धारा 499 के तहत अपमानजनक मानी जा सकती है.

जब महुआ सांसद चुनी गईं तो उन्होंने संसद में अपने पहले भाषण से ही सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया था.

उन्होंने जून 2019 में संसद में कहा कि संविधान ख़तरे में है.

अपने भाषण में उन्होंने फ़ासीवाद के शुरुआती लक्षणों का ज़िक्र किया और कहा कि ऐसे लक्षण उन्हें मोदी सरकार के दौरान भारत में भी नज़र आ रहे हैं.

भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने उनके भाषण पर आपत्ति जताई थी.

इसके बाद से वह लगातार अपने तेज़तर्रार अंदाज़ और तीखे बयानों के लिए मीडिया और सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं और 'दक्षिणपंथियों' व 'बीजेपी समर्थकों' के निशाने पर भी हैं.

सोशल मीडिया पर उनके लाइफ़ स्टाइल और निजी ज़िंदगी पर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं. उनकी सिगार या शैंपेन पीने की तस्वीरें शेयर की गई हैं तो कभी महंगे कपड़ों और पर्स पर भी सवाल उठाए गए.

पार्टी भी काटती रही है कन्नी

तृणमूल कांग्रेस भी कई बार महुआ के विवाद में फंसने के बाद उनसे किनारा करती रही है.

दिसंबर 2020 में महुआ ने पश्चिम बंगाल में मीडिया को कथित तौर पर ‘दो पैसे का’ का कह दिया था. पत्रकारों की नाराज़गी के बाद टीएमसी ने उनके बयान से ख़ुद को अलग कर लिया था.

पिछली साल जुलाई में एक मीडिया संस्थान के कार्यक्रम में उन्होंने काली मां को सिगरेट पीता दिखाने वाले एक फ़िल्म के पोस्टर को लेकर जो कहा, उससे फिर विवाद खड़ा हो गया.

महुआ ने कहा था, “मेरे लिए काली का मतलब मांस खाने वाली, शराब स्वीकार करने वाली देवी है. आपको अपनी देवी की कल्पना अपने हिसाब से करने की छूट है.”

इसके बाद उनपर मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में कई जगहों पर एफ़आईआर भी हुई थी.

उस समय भी टीएमसी ने कहा था कि महुआ के इन बयानों का पार्टी से कोई लेना देना नहीं है.

दुबे से तकरार का इतिहास और ताज़ा मामला

महुआ मोइत्रा ने फ़रवरी 2021 में संसद में दिए भाषण के दौरान सरकार और न्यायपालिका को निशाने पर लिया था.

उन्होंने नाम लिए बिना कहा था "न्यायपालिका अब पवित्र नहीं रही और ऐसा उसी दिन हो गया था जब मुख्य न्यायाधीश पर यौन शोषण का आरोप लगा. फिर अपने मुक़दमे की उन्होंने ख़ुद सुनवाई की और ख़ुद को बेक़सूर बता दिया. फिर रिटायर होने के तीन महीनों के अंदर राज्य सभा का नामांकन भी स्वीकार कर लिया.”

माना गया कि उन्होंने पूर्व चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई पर यह टिप्पणी की है. बीजेपी ने इस बयान को आपत्तिजनक बताया. फ़रवरी 2021 में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे और पी.पी. चौधरी मोइत्रा के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार प्रस्ताव लेकर आए थे.

इन्हीं निशिकांत दुबे ने इस बार भी महुआ मोइत्रा के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला हुआ है.

निशिकांत दुबे ने लोकसबा अध्यक्ष को चिट्ठी भेजकर आरोप लगाया कि महुआ ने दर्शन हीरानंदानी नाम के कारोबारी से रिश्वत लेकर अदानी समूह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने के लिए सवाल पूछे.

मोइत्रा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है.

एक हलफ़नामे को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसमें दर्शन हीरानंदानी ने माना है कि मोइत्रा ने अदानी समूह को निशाना बनाया.

हालांकि, मोइत्रा ने इस हलफ़नामे पर सवाल उठाए हैं और मीडिया संस्थानों पर झूठी रिपोर्टिंग करने का आरोप लगाया है.

उन्होंने एक मैसेज के माध्यम से बीबीसी से इस बात की पुष्टि की उन्होंने 'झूठी, दुर्भावना से प्रेरित रिपोर्टिंग' का आरोप लगाते हुए 15 मीडिया कंपनियों को क़ानूनी नोटिस भेजा है.

देहाद्राई बनाम मोइत्रा

दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को दी शिकायत में जय अनंत देहाद्राई नाम के वकील ने इन आरोपों को साबित करने के लिए सबूत दिए हैं.

देहाद्राई वही शख़्स हैं जिन्हें महुआ मोइत्रा अपना ‘जिल्टेड एक्स’ यानी निराश ‘पूर्व प्रेमी’ बताती हैं.

वकील देहाद्राई ने पिछले दिनों आरोप लगाया था महुआ मोइत्रा ने उनके पालतू कुत्ते हेनरी को किडनैप कर लिया है.

उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर हेनरी के साथ अपनी एक तस्वीर भी शेयर की थी.

उन्होंने इसके साथ लिखा था कि ‘हेनरी को लौटाने के बदले सीबीआई को दी गई शिकायत को वापस लेने के लिए कहा गया लेकिन मैंने साफ़ मना कर दिया है, सीबीआई को सभी जानकारियां दूंगा.”

वहीं, महुआ मोइत्रा कहती हैं, "मेरे जिल्टेड एक्स ने कुछ निजी तस्वीरों को क्रॉप करके शेयर किया. इनका आधार बनाकर भाजपा मुझे एक बदलचलन औरत साबित करना चाहती है.”

“पश्चिम बंगाल में इन सभी बातों का फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन वो मेरे चरित्र हनन करने का प्रयास कर रहे हैं. उन्हें लग रहा है कि ऐसा करने से मैं ख़ामोश हो जाऊंगी और अदानी का मुद्दा उठाना बंद कर दूंगी लेकिन ऐसा नहीं होगा, मैं बोलती रहूंगी."

अब आगे क्या?

इस बीच संसद की एथिक्स कमेटी ने निशिकांत दुबे की शिकायत पर गुरुवार से सुनवाई शुरू कर दी है.

इस सम्बंध में मोइत्रा को 31 अक्टूबर को कमेटी के सामने पेश होना है मगर उन्होंने शुक्रवार को एक्स पर लिखा कि वह चार नवंबर के बाद ही कमेटी के सामने आ पाएंगी.

उन्होंने कमेटी के चेयरमैन के नाम लिखे लेटर को शेयर करते हुए लिखा है, “एथिक्स कमेटी के चेयरमैन ने 31 अक्टूबर को पेश होने को लेकर 5 बजकर 20 मिनट पर ईमेल करके मुझे समन भेजे मगर इससे काफ़ी पहले लाइव टीवी पर इसकी जानकारी दे दी. सारी शिकायतें और हलफ़नामे मीडिया को जारी कर दिए गए. मैं चार नवंबर तक पहले से तय अपने चुनावक्षेत्र के कार्यक्रमों को निपटाकर तुरंत कमेटी के सामने पेश होना चाहूंगी.”

अपने पत्र में मोइत्रा ने कमेटी से गुज़ारिश की है कि इस सम्बंध में 5 नवंबर के बाद कभी का भी समय दे दें.

अब देखना यह है कि उनकी इस गुज़ारिश पर कमेटी का क्या रुख़ रहता है.

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