युद्धविराम के बाद क्या हैं होर्मुज़ के हालात, जहाज़ों की आवाजाही पर कितना असर

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- Author, टॉम एडिन्गटन, जोशुआ चीथम और केलिन डेवलिन
- पदनाम, बीबीसी वेरिफ़ाई
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खाड़ी क्षेत्र में जहाज़ों को ईरान की नौसेना की ओर से चेतावनी मिली है कि जो भी जहाज़ बिना अनुमति के होर्मुज़ स्ट्रेट पार करने की कोशिश करेगा, उसे "निशाना बनाकर ख़त्म कर दिया जाएगा."
शिपिंग ब्रोकरेज फर्म एसएसवाई ने इसकी पुष्टि बीबीसी वेरिफ़ाई से की है.
मंगलवार शाम दो हफ़्ते का युद्धविराम इस शर्त पर हुआ कि इस संकरे जलमार्ग से जहाजों की "सुरक्षित आवाजाही" सुनिश्चित की जाएगी.
लेकिन इसके बाद अब तक बहुत कम जहाज़ ही यहां से गुजर पाए हैं.
यह स्ट्रेट अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच संघर्ष का केंद्र बन गया है. ईरान ने प्रभावी रूप से दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज़ स्ट्रेट को बाधित कर दिया है.
इस रास्ते से दुनिया की लगभग 20 फ़ीसदी तेल और एलएनजी सप्लाई गुजरती है. होर्मुज़ स्ट्रेट में पिछले पांच हफ़्तों से जारी इस अड़चन से ग्लोबल अर्थव्यवस्था को झटका लगा है.
इससे तेल और गैस की क़ीमतें बढ़ गई हैं. यह भी साफ़ हो गया है कि अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन इस स्ट्रेट पर किस हद तक निर्भर है.
एनर्जी के अलावा, ये इलाका उन केमिकल्स की ढुलाई के लिए भी अहम है जिनका इस्तेमाल माइक्रोचिप्स, दवाइयों और फ़र्टिलाइज़र जैसे प्रोडक्ट की मैन्युफै़क्चरिंग में होता है.
शिपिंग विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं

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युद्धविराम की ख़बर के बाद भले ही तेल की क़ीमतों में गिरावट आई हो, लेकिन शिपिंग विशेषज्ञों का कहना है कि फ़िलहाल यहां से जहाज़ों की आवाजाही काफी सीमित ही रहेगी.
वेसपुच्ची मैरिटाइम के लार्स जैनसन ने बीबीसी से कहा, "ज़्यादातर शिपिंग कंपनियां पहले यह जानना चाहेंगी कि इस रास्ते से गुजरने के लिए क्या शर्तें हैं और उन्हें किस तरह की सुरक्षा गारंटी मिलेगी. लेकिन फ़िलहाल ये जानकारी उपलब्ध नहीं है."
आठ अप्रैल को भारतीय समयानुसार शाम साढ़े सात बजे सिर्फ़ तीन कैरियर जहाज़-एनजी अर्थ, डेटोना बीच और हाई लॉन्ग1 ही होमुर्ज़ स्ट्रेट पार कर पाए थे.
यह जानकारी बीबीसी वेरिफ़ाई के विश्लेषण पर आधारित है, जिसमें मरीन ट्रैफ़िक के शिप ट्रैकिंग डेटा का इस्तेमाल किया गया.
इसके मुक़ाबले, 28 फ़रवरी को संघर्ष शुरू होने से पहले इस स्ट्रेट से औसतन हर दिन 138 जहाज गुजरते थे.
हालांकि यह साफ़ नहीं है कि बुधवार को इन जहाजों के यहां से गुजरने में युद्धविराम की भूमिका थी या फिर उन्होंने पहले से ही अपनी यात्रा की योजना बना रखी थी.
शिपिंग एनालिस्ट कंपनी कैप्लर की एना सुबासिक कहती हैं, "अभी यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि क्या यह युद्धविराम के कारण बड़े पैमाने पर आवाजाही फिर से शुरू होने का संकेत है या पहले से मिली किसी विशेष अनुमति का नतीजा है.''
वहीं, विशेषज्ञ लार्स जेनसन का कहना है,"अभी तक ज़मीन पर ज्यादा कुछ नहीं बदला है," और उनके मुताबिक़ जहाज़ों के क्रू को सुरक्षित महसूस करने में अभी समय लगेगा.
इस आकलन से लॉयड्स लिट के एडिटर-इन-चीफ़ रिचर्ड मीड भी सहमत हैं.
उनका कहना है कि यह समय जहाज़ मालिकों के लिए "बेहद ख़तरनाक" रहा है, क्योंकि वे अब भी भारी अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं.
हम जानते हैं कि होर्मुज़ स्ट्रेट पर अभी भी मूल रूप से ईरान का ही नियंत्रण है. माना जा रहा है कि जहाज़ मालिकों को अब भी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर से अनुमति लेनी होगी. लेकिन यह प्रक्रिया कैसे चलेगी यह अभी साफ़ नहीं है.
बीबीसी वेरिफ़ाई के विश्लेषण से पता चलता है कि जिन तीन जहाज़ों ने रास्ता पार किया. उन्होंने ईरान के तट के करीब उत्तरी मार्ग लिया और उसके क्षेत्रीय जल क्षेत्र में प्रवेश किया.
संघर्ष से पहले, जहाज़ आमतौर पर इस स्ट्रेट के बीच से दक्षिणी मार्ग लेते थे.
'लगभग 800 जहाज फंसे'

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अगर स्ट्रेट होर्मुज़ पर फिर से आवाजाही की बात की जाए, तो रिचर्ड मीड के मुताबिक़ सबसे पहले वे टैंकर निकलेंगे जो पहले से माल से पूरी तरह भरे हुए हैं और फंसे हुए हैं.
उन्होंने कहा, "क़रीब 800 जहाज़ कई हफ्तों से वहां फंसे हुए हैं. इनमें से ज़्यादातर अब माल से लदे हुए हैं, इसलिए प्राथमिकता इन्हें बाहर निकालने की होगी."
बिमको के शिपिंग एनालिस्ट नील्स रासमुसेन के मुताबिक़, दो हफ़्ते का युद्धविराम भी जहाज़ों के लिए अनिश्चितता पैदा कर रहा है.
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि बड़ी संख्या में जहाज़ खाड़ी में प्रवेश करेंगे. क्योंकि वे यह जोख़िम नहीं लेना चाहते कि दो हफ़्ते की अवधि ख़त्म होने के बाद कहीं वे फिर से फंस न जाएं."
इंटरनेशनल चैंबर ऑफ शिपिंग के महासचिव थॉमस काज़ाकोस का कहना है कि एक बड़ी अनिश्चितता समुद्र में बारूदी सुरंगों (सी माइंस) की आशंका को लेकर है
उन्होंने बीबीसी वेरिफ़ाई से कहा, "हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जहाज़ों और नाविकों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर साफ़ सहमति हो.''
टोल का मुद्दा और भारत समेत कुछ देशों का इंतज़ाम

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इन चिंताओं के अलावा, जहाज़ों के सामने यह भी अनिश्चितता है कि सुरक्षित रास्ता पाने के लिए उन्हें ईरान को भुगतान करना पड़ सकता है.
क्योंकि ऐसी ख़बरें हैं कि युद्धविराम समझौते में टोल शामिल हो सकता है.
शिपिंग विशेषज्ञ लार्स जेनसन कहते हैं, "ईरान ने संकेत दिए हैं कि होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने के लिए आपको टोल देना होगा और शिपिंग कंपनियां इस तरह का भुगतान करने से हिचकिचाएंगी."
हाल के हफ़्तों में भारत, मलेशिया और फ़िलीपींस जैसे कुछ देशों ने अपने जहाज़ों के लिए सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था कर ली है.
लेकिन अन्य देशों और शिपिंग कंपनियों के लिए टोल देना एक नई जटिलता पैदा कर सकता है.
जेनसन कहते हैं, "यह भुगतान अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों का उल्लंघन भी हो सकता है, जिससे शिपिंग कंपनियों पर और असर पड़ सकता है."
क्वाड्रेंट चैंबर्स के शिपिंग वकील जेम्स टर्नर का कहना है, ''व्यक्तियों, कंपनियों और संगठनों को भुगतान को अपराध की श्रेणी में डाल दिया जाता है. प्रतिबंध ऐसे ही काम करते हैं.''
उन्होंने बीबीसी वेरिफ़ाई से कहा कि 'जब किसी ऐसे व्यक्ति, कंपनी या संगठन को पेमेंट किया जाता है जो प्रतिबंध सूची में शामिल है, तो उसे इसका उल्लंघन माना जाता है.''
इसलिए अगर उन्हें टोल दिया जाता है, तो यह प्रतिबंधों का उल्लंघन होगा, जब तक कि अमेरिका इसके लिए कोई विशेष छूट न दे.
अब तक जहाज़ों की आवाजाही फिर शुरू नहीं हुई है, फिर भी युद्धविराम के बाद के कुछ घंटों में बाज़ारों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है.
ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 13 फ़ीसदी गिरकर 94.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है. अमेरिका में बिकने वाले कच्चे तेल की क़ीमत 15 फ़ीसदी से ज़्यादा गिरकर 95.75 डॉलर प्रति बैरल हो गई है
लेकिन मीड का कहना है कि फ़िलहाल ये कहना जल्दबाज़ी होगा कि सब ठीक हो गया है.
उन्होंने कहा, "तेल की कीमतों में गिरावट इसलिए आई क्योंकि यह एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि वैश्विक ऊर्जा का लगभग 20 फ़ीसदी हिस्सा, जो इस रास्ते से गुजरता है, जल्द ही सामान्य स्तर पर वापस आ जाएगा."
(तमारा कोवेसेविक की अतिरिक्त रिपोर्टिंग)
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित



































