अमेरिका में भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ पर प्रतिबंध लगाने की मांग क्यों हो रही है?

इमेज स्रोत, Getty Images
अमेरिका में भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) पर प्रतिबंध लगाने की मांग हुई है.
मंगलवार को अमेरिका के यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ़्रीडम (यूएससीआईआरएफ़) ने साल 2025 की वार्षिक रिपोर्ट जारी की है. रॉ पर प्रतिबंध लगाने की मांग इसी रिपोर्ट का हिस्सा है.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति लगातार ख़राब हो रही है क्योंकि धार्मिक अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हमले और भेदभाव के मामले बढ़ रहे हैं.
हालांकि, भारत ने यूएससीआईआरएफ़ की रिपोर्ट को ख़ारिज करते हुए इसे 'पक्षपाती और राजनीति से प्रेरित' बताया है.
यूएससीआईआरएफ़, 1998 के अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के ज़रिए बनाया गया एक अमेरिकी संघीय आयोग है. इसका मुख्य काम अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दों पर शोध और निगरानी करना है.
इस साल की रिपोर्ट पर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया काफ़ी हद तक पिछले कुछ वर्षों की प्रतिक्रियाओं जैसी थी. पिछले कुछ सालों से यूएससीआईआरएफ़ लगातार भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक उत्पीड़न पर चिंता जताता रहा है और भारत हर बार इसे ख़ारिज करता आया है.

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें


इमेज स्रोत, WWW.USCIRF.GOV
रॉ पर प्रतिबंध लगाने की बात क्यों?
96 पन्नों की इस रिपोर्ट में भारत को उन 16 देशों के साथ रखने का सुझाव दिया है जहां 'कुछ ख़ास चिंताएं' हैं. इसके बारे में रिपोर्ट के 22वें और 23वें पेज पर विस्तृत जानकारी दी गई है.
रिपोर्ट में लिखा गया है, "भारत सरकार ने विदेशों में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से सिख समुदाय के सदस्यों और उनकी आवाज़ उठाने वालों को टारगेट करने के लिए अपनी दमनकारी रणनीति का विस्तार करना जारी रखा. भारत के धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघनों का डॉक्यूमेंटेशन करने वाले पत्रकारों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज संगठनों ने कांसुलर सेवाएं न मिलने, ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड को निरस्त करने के साथ-साथ हिंसा और निगरानी की धमकियों की सूचना दी है."
रॉ के बारे में कहा गया, "अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग और कनाडा सरकार की ख़ुफ़िया जानकारी ने भारत के रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के एक अधिकारी और छह राजनयिकों के न्यूयॉर्क में 2023 में एक अमेरिकी सिख कार्यकर्ता की हत्या के प्रयास से जुड़े आरोपों की पुष्टि की है."
संस्था ने अमेरिकी सरकार से रॉ पर प्रतिबंध लगाने की सिफ़ारिश की है.
यूएससीआईआरएफ़ ने रिपोर्ट में लिखा, "धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन में दोषी पाए गए व्यक्तियों और संस्थाओं, जैसे विकास यादव और रॉ पर 'टारगेटेड प्रतिबंध' लगाएं. उनकी संपत्तियों को जब्त करें और/या संयुक्त राज्य अमेरिका में उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाएं."
अमेरिका के न्याय मंत्रालय ने 17 अक्तूबर को भारतीय नागरिक विकास यादव के ख़िलाफ़ भाड़े पर हत्या और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करने की घोषणा की थी.
अमेरिकी अधिकारियों का कहना था कि साल 2023 में अमेरिकी धरती पर 'गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की नाकाम साज़िश' में विकास यादव की अहम भूमिका थी.
जहां अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने यादव को भारत सरकार का कर्मचारी बताया था, वहीं भारत ने कहा था कि विकास यादव अब भारत सरकार के कर्मचारी नहीं हैं.
टारेगेटेड प्रतिबंध एक प्रकार का आर्थिक या व्यापारिक प्रतिबंध है जो एक या एक से अधिक देश या अंतर्राष्ट्रीय संगठन किसी देश के अंदर व्यक्ति विशेष, संस्थाओं या सेक्टर के ख़िलाफ़ लगाया जाता है न कि पूरे देश पर.

राम मंदिर, पीएम मोदी और उमर ख़ालिद पर क्या कहा?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जून में लोकसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी समेत बीजेपी नेताओं ने मुसलमानों और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी और ग़लत सूचना का प्रसार किया.
इन बयानों के असर के बारे में दावा है, "इस तरह की बयानबाज़ी ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमलों को बढ़ावा दिया. यह चुनाव के बाद भी जारी रहा."
रिपोर्ट राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अल्पसंख्यकों पर हमले का दावा भी करती है.
रिपोर्ट कहती है, "जनवरी में प्रधानमंत्री मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर के अभिषेक का नेतृत्व किया, जो बाबरी मस्जिद के अवशेषों पर खड़ा है. इसे (मस्जिद) 1992 में एक हिंदू भीड़ ने ध्वस्त कर दिया था. अभिषेक के बाद, छह राज्यों में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमले हुए. अधिकारियों ने मुस्लिम-स्वामित्व वाली संपत्ति को बुलडोज़र से गिराकर भारत के दंड संहिता की धारा 295 का भी बार-बार उल्लंघन किया. इस धारा में "अवैध" मानी जाने वाली मस्जिदों सहित पूजा स्थलों के विनाश या क्षति को अपराध माना जाता है."
यूएससीआईआरएफ़ की रिपोर्ट में भारत आपराधिक क़ानून और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर ख़ालिद का भी ज़िक्र मिलता है.
दावा है कि सरकार ने अपने आपराधिक संहिता को नए कानून से बदल दिया, जिससे धार्मिक अल्पसंख्यक ख़तरे में आ सकते हैं, अगर उन्हें "भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाला" माना जाता है.
सीएए के बारे में लिखा गया, "मार्च में सरकार ने 2019 के नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लागू करने के लिए नियम पेश किए, जिसमें पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान और बांग्लादेश से भागकर आए गै़र-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को फ़ास्ट-ट्रैक नागरिकता प्रदान की गई. 2019 में सीएए का शांतिपूर्ण विरोध करने के लिए यूएपीए के तहत कई लोग हिरासत में रहे, जिनमें उमर ख़ालिद, मीरान हैदर और शरजील इमाम शामिल हैं."
यूएससीआईआरएफ़ कमिश्नर डेविड कुर्री का कहना है कि अमेरिकी सरकार को धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए वकालत करने वाले उन सभी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को रिहा करने के लिए भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम करना चाहिए, जिन्हें मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया है.

रिपोर्ट पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया
अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की 2025 की वार्षिक रिपोर्ट पर मीडिया के सवालों का भारतीय विदेश मंत्रालय ने जवाब दिया है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हमने अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की हाल ही में जारी 2025 की वार्षिक रिपोर्ट देखी है, जो एक बार फिर पूर्वाग्रह से भरी हुई और राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित लगती है."
रणधीर जायसवाल का कहना है, ""यूएससीआईआरएफ़ बार-बार कुछ घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है और भारत के बहुसांस्कृतिक समाज को ग़लत तरीके से दर्शाने की कोशिश करता है. यह धार्मिक स्वतंत्रता की चिंता से ज़्यादा एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा लगता है."
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत एक अरब 40 करोड़ लोगों का देश है, जहां दुनिया के लगभग सभी धर्मों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं. लेकिन हमें उम्मीद नहीं है कि यूएससीआईआरएफ भारत के विविधतापूर्ण और सहिष्णु समाज को सही ढंग से समझेगा या इसकी सच्चाई को मानेगा.
बयान में आगे कहा गया, "भारत एक मज़बूत लोकतंत्र और सहिष्णुता का प्रतीक है, जिसे कमज़ोर करने की ये कोशिशें नाकाम रहेंगी. असल में, यूएससीआईआरएफ़ को ही शक के दायरे में रखा जाना चाहिए."

भारत के पड़ोसी देशों के बारे में क्या बताया गया?
यूएससीआईआरएफ़ ने अलग-अलग देशों और संगठनों को तीन कैटेगरी में बांटा है.
- कंट्रीज़ ऑफ़ पर्टिकुलर कंसर्न
- स्पेशल वॉच लिस्ट कंट्रीज़
- एन्टिटीज़ ऑफ़ पर्टिकुलर कंसर्न
भारत को 'कंट्रीज़ ऑफ़ पर्टिकुलर कंसर्न' कैटेगरी में रखा गया है. भारत के अलावा पड़ोसी अफ़ग़ानिस्तान, चीन, और पाकिस्तान को भी इसी कैटेगरी में रखा गया है जबकि श्रीलंका को 'स्पेशल वॉच लिस्ट कंट्रीज़' में रखा गया है.
पाकिस्तान के बारे में रिपोर्ट बताती है कि 2024 में, पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति और भी ख़राब होती चली गई.
रिपोर्ट के मुताबिक़, "धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय-विशेष रूप से ईसाई, हिंदू और शिया और अहमदिया मुसलमान, पाकिस्तान के सख्त ईशनिंदा कानून के तहत उत्पीड़न का दंश झेल रहे हैं. जबकि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को शायद ही कभी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा हो."
अफ़ग़ानिस्तान के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान का शासन आने के बाद महिलाओं और लड़कियों की ज़िंदगी सबसे ज़्यादा प्रभावित हुई हैं.
यूएससीआईआरएफ़ ने अमेरिकी सरकार से तालिबान के ज़िम्मेदार अधिकारियों पर टारगेटेड प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
















