पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर जब हार्दिक पांड्या बोले- ये मेरे पे ग्रेड से ऊपर की बात है

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दुबई में भारतीय क्रिकेट टीम ने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए चैंपियंस ट्रॉफ़ी जीत ली. न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ फ़ाइनल में स्पिनर्स की कसी हुई गेंदबाज़ी और बाद में बैटिंग के वक़्त मध्य क्रम के बल्लेबाज़ों के उपयोगी योगदान से भारत ने ये खिताबी मुक़ाबला जीत लिया.
सेमीफ़ाइनल और फ़ाइनल में हार्दिक पांड्या ने बल्ले के साथ भले ही ज़्यादा स्कोर ना किया हो, लेकिन अहम मौक़े पर रन बनाकर और रन गति तेज़ रख कर उन्होंने भारत को मैच जीतने में योगदान दिया.
मैच के बाद पत्रकारों से मुख़ातिब होते हुए उन्होंने अपनी बैटिंग, बॉलिंग, ड्रेसिंग रूम के माहौल और अपने छक्के मारने की क़ाबिलियत समेत कई मुद्दों पर बात की. लेकिन उनके एक जवाब ने सबका ध्यान खींचा.
और वो सवाल भारतीय टीम के पाकिस्तान ना जाने को लेकर था.

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टीम इंडिया के पाकिस्तान नहीं जाने का सवाल

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जब उनसे एक पाकिस्तानी पत्रकार ने सवाल किया कि भारतीय टीम के पाकिस्तान में भी कई प्रशंसक हैं. लेकिन टीम, पाकिस्तान जाकर एक भी मैच नहीं खेली. इस पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है?
हार्दिक पांड्या ने कहा, "अच्छी बात है कि हमारे वहां भी प्रशंसक हैं. लेकिन मैं उम्मीद करता हूं कि यहां भी जो पाकिस्तानी क्रिकेट प्रशंसक हैं उन्होंने मैच देखा होगा. अब हम कहां गए, कहां नहीं गए ये मेरे पे ग्रेड से ऊपर की बात है."
चैंपियंस ट्रॉफ़ी के दौरान भारत के पाकिस्तान ना जाने का मुद्दा लगातार छाया रहा.
पाकिस्तान को इस टूर्नामेंट की मेज़बानी मिली थी. लेकिन भारत ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पाकिस्तान जाकर खेलने से इनकार कर दिया था.
इस वजह से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी ने भारत के सारे मैच दुबई में आयोजित कराए. भारत के पहले सेमीफ़ाइनल और फिर फ़ाइनल में पहुंचने के कारण भी इन मैचों का आयोजन पाकिस्तान के बजाय दुबई में कराया गया.

दुबई में मैच कराने को लेकर सवाल

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दुबई में भारत के मैच कराने को लेकर पाकिस्तानी के कई क्रिकेट विशेषज्ञों, पूर्व क्रिकेटरों और पाकिस्तान के अलावा भी कई और देशों के क्रिकेटरों और विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई थी.
कई एक्सपर्ट्स ने सवाल उठाए थे कि एक ख़ास टीम को ये चुनने की इजाज़त क्यों दी जा रही है कि वो किसी टूर्नामेंट में कहां खेले और कहां ना खेले.
लाहौर में हुए सेमीफ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड के हाथों हारने वाली दक्षिण अफ़्रीका की टीम के डेविड मिलर ने कहा, "ये सिर्फ़ एक घंटा 40 मिनट की फ़्लाइट थी. लेकिन ये आयडियल नहीं था कि हमें ये करना पड़ा."
दरअसल, जब सेमीफ़ाइनल लाइन अप पूरी तरह से तय नहीं हुई थी तब दक्षिण अफ़्रीका की टीम को पाकिस्तान से दुबई जाना पड़ा था क्योंकि इस बात की संभावना भी थी कि सेमीफ़ाइनल में उसका मुक़ाबला भारत से हो.
लेकिन बाद में सेमीफ़ाइनल में उसे न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ लाहौर में खेलना पड़ा जिसके कारण उसे दुबई से वापस आना पड़ा वो भी एक भी मैच खेले बिना.

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इंग्लैंड के पूर्व टेस्ट क्रिकेट खिलाड़ी और कमंटेटर जोनाथन एगन्यू ने ऑस्ट्रेलियाई प्रसारक एबीसी स्पोर्ट्स से कहा है कि भारत ने पूरे चैंपियंस ट्रॉफी को जिस तरह से हैंडल किया है, उसे लेकर वह बहुत असहज हैं.
जोनाथन एगन्यू ने कहा, ''यह ग़लत है. अगर आप इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेलने जा रहे हैं तो मैच कहाँ खेलेंगे और कहाँ नहीं खेलेंगे, इसका चुनाव आप नहीं कर सकते हैं. मुझे नहीं पता कि ऐसा कब तक होगा? इस तरह के रुख़ से पूरे टूर्नामेंट का मज़ाक बन जाता है.''
क्रिकेट विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान में कराची, लाहौर, रावलपिंडी और दुबई की पिचों में बहुत फ़र्क़ है. खेलने की स्थिति भी बिल्कुल अलग है. दुबई में ओस नहीं होती है और भारत ने शुरुआत के दोनों मैच यहाँ जीते हैं.
बीसीसीआई की आलोचना

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पाकिस्तान ने अपना पहला मैच 19 फ़रवरी को कराची में न्यूज़ीलैंड के साथ खेला था और 60 रनों से हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद पाकिस्तान को भारत के साथ मैच खेलने दुबई जाना पड़ा, उसमें भी उसे हार मिली.
और फिर उसे बांग्लादेश से खेलने के लिए रावलपिंडी आना पड़ा.
जबकि भारत ने अपने सारे मैच दुबई में खेले. इसे लेकर भी कई विशेषज्ञों ने कहा कि भारत को एक ही मैदान पर सारे मैच खेलने का ये फ़ायदा मिल रहा है कि उसे मैदान और पिच की परिस्थितियों की अच्छी जानकारी होने के कारण टीम सिलेक्शन में मदद मिल रही है.
एगन्यू ने एबीसी से कहा, ''मेज़बान टीम (पाकिस्तान) लंबे समय बाद किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट का आयोजन कर रही है लेकिन बड़े मैच अपने देश से बाहर खेलने पर मजबूर है. क्या ये सही है?
पाकिस्तान और भारत के बीच राजनीतिक तनाव का असर क्रिकेट के पिच पर अक्सर दिखता है. 2009 में श्रीलंका की टीम पाकिस्तान गई थी और उस पर चरमपंथी हमला हुआ था.
पाकिस्तान की टीम भारत के दौरे पर 2012-13 में आई थी जबकि भारत ने पाकिस्तान का आख़िरी दौरा एशिया कप के लिए 2008 में किया था. 2023 में पाकिस्तान ने एशिया कप की मेज़बानी की थी लेकिन भारत ने अपने सारे मैच श्रीलंका में खेले थे.
एगन्यू ने कहा कि हम इसे लगातार नहीं होने दे सकते. उन्होंने कहा, ''दो मुख्य टीमों के बीच विशुद्ध राजनीति हो रही है और यह शर्मनाक है.''
पाकिस्तान और भारत एक दूसरे के ख़िलाफ़ केवल ग्लोबल आईसीसी टूर्नामेंट ही खेल रहे हैं. दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सिरीज़ लंबे समय से बंद है.
भारत से खेलने के लिए पाकिस्तानी टीम के दुबई जाने से पहले पाकिस्तान के पूर्व स्पिनर सक़लैन मुश्ताक़ ने कहा था, ''मुझे उम्मीद है कि उन्हें ठीक से सबक सिखाएंगे.''
मुश्ताक़ ने पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल 24 डिजिटल से कहा था, ''बीसीसीआई का ड्रामा यहीं ख़त्म नहीं होने वाला है. पाकिस्तान के बच्चे चाहते हैं कि यहाँ विराट कोहली और जसप्रीत बुमराह खेलने आएं. सभी बच्चे इन्हें यहाँ खेलते हुए देखना चाहते हैं लेकिन उनका नाटक ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है. मुझे नहीं पता कि ये किस दुनिया में रह रहे है और क्या हासिल करना चाहते हैं.''
गावस्कर का जवाब

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इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन और माइकल अथर्टन ने भी इसी बात पर सवाल उठाए थे और कहा था कि भारत को दुबई में खेलने का फ़ायदा मिला.
जिसके जवाब में पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कमेंटेटर सुनील गावस्कर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, "ये मुद्दा कोई बयान देने लायक ही नहीं है. कुछ लोग हमेशा शिकायत करते रहते हैं. उन्हें ये बात समझ नहीं आती कि आज भारतीय क्रिकेट कहां खड़ी है. चाहे वो क्वालिटी की बात हो, टैलेंट की बात हो, चाहे रेवेन्यू जेनरेट करने की बात हो. ग्लोबल क्रिकेट में भारत का योगदान ज़बरदस्त है. टेलीविज़न राइट्स और मीडिया रेवेन्यू की वजह से जो अच्छा ख़ासा पैसा आ रहा है वो सब भारत के कारण है. उन्हें ये समझ में आना चाहिए कि उनको जो पैसा मिल रहा है वो भी भारत के विश्व क्रिकेट को योदगान की वजह से है."
गेंदबाज़ी पर क्या बोले हार्दिक?

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जसप्रीत बुमराह की गैर मौजूदगी में टीम में हार्दिक पांड्या ने मोहम्मद शमी के अलावा दूसरे तेज़ गेंदबाज़ की भूमिका निभाई. इस रोल को वो कैसे देखते हैं? इसके जवाब में पांड्या ने कहा, "गेंदबाज़ी हमेशा से ही मेरे दिल के क़रीब रही है. मैं बॉलिंग करना बहुत एन्जॉय करता हूं. गेंदबाज़ी अच्छी हो जाती है तो मुझे बैटिंग की चिंता नहीं होती."
ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइल में और फिर न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ फ़ाइनल में हार्दिक ने आख़िरी लम्हों में बड़े छक्के लगाकर भारत को मैच जिताने में अहम भूमिका भी निभाई. फ़ाइनल में उन्होंने जो छक्का मारा वो तो सौ मीटर से भी ज़्यादा लंबा छक्का था.
इस बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, "जब मैं 14 साल का था तभी से मुझे लंबे छक्के मारना पसंद है. लेकिन तब उतनी ताक़त नहीं थी. अब थोड़ी ताक़त आ गई है तो लंबे छक्के मार लेता हूं."
टीम के माहौल के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "हम सब बेहद लकी हैं कि ऐसी टीम का हिस्सा हैं. हम सब एक दूसरे का साथ, एक दूसरी की सफलता का लुत्फ़ लेते हैं. एक दूसरे की हौसला अफ़ज़ाई करते हैं. और यही हमारी कामयाबी की मुख्य वजह है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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