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पश्चिम बंगाल में नौशाद सिद्दीक़ी उड़ा सकते हैं ममता बनर्जी की नींद - प्रेस रिव्यू
पश्चिम बंगाल की डायमंड हार्बर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताने वाले इंडिया सेक्युलर फ्रंट के नौशाद सिद्दीक़ी तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू लिखता है कि 24 परगना ज़िले की इस सीट से 2014 से अभिषेक बनर्जी सांसद चुने जाते रहे हैं. लेकिन बीते सप्ताह नौशाद सिद्दीक़ी ने इस सीट से अपनी क़िस्मत आज़माने की इच्छा जताई थी.
2021 के विधानसभा चुनावों में सिद्दीक़ी ने 24 परगना ज़िले की भांगर सीट से चुनाव जीतकर सत्ताधारी टीएमसी को चौंका दिया था.
भांगर विधानसभा सीट, डायमंड हार्बर लोकसभा सीट का हिस्सा नहीं है, लेकिन ये सीट दक्षिण 24 परगना का हिस्सा है, जहाँ की कुल मुसलमान आबादी 35 फ़ीसदी से अधिक है.
माना जा रहा है कि इस कारण नौशाद सिद्दीक़ी इस सीट पर टीएमसी के उम्मीदवार को कड़ी टक्कर दे सकते हैं.
पश्चिम बंगाल में सीपीएम सरकार के 34 साल लंबे शासन को ख़त्म करते हुए 2011 में टीएमसी ने पश्चिम बंगाल की सत्ता संभाली थी.
उस वक़्त से लेकर अब तक पार्टी को राज्य के मुस्लिम समुदाय का समर्थन मिलता रहा है. 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में 27.01 फ़ीसदी मुसलमान हैं.
हाल के दिनों में टीएमसी को मिलने वाले इस समर्थन में कमी आई है.
इसी साल फ़रवरी में मुर्शिदाबाद के सागरदिघी विधानसभा उपचुनाव में टीएमसी को हार मिली थी. इस सीट पर मुस्लिम आबादी 66.28 फ़ीसदी है.
डायमंड हार्बर लोकसभा सीट में आबादी की बात की जाए तो यहाँ 52 फ़ीसदी आबादी मुसलमानों की है, जिस कारण इस सीट से नौशाद सिद्दीक़ी का उतरना अभिषेक बनर्जी के लिए परेशानी का सबब बन सकता है. अभिषेक बनर्जी, मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के भतीजे हैं.
दो साल पहले आई पार्टी ने दी टक्कर
अभिषेक बनर्जी ने 2014 का चुनाव इसी सीट से 70 हज़ार से अधिक मतों से जीते था, इसके बाद 2019 में इन्होंने 3.2 लाख मतों से बढ़त बनाते हुए इस सीट पर दोबारा जीत हासिल की.
द हिंदू लिखता है कि बीते सालों में अभिषेक बनर्जी ने डायमंड हार्बर को 'गवर्नेंस के रोल मॉडल' के रूप में पेश करते रहे हैं.
वहीं दूसरी तरफ़ इंडिया सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ़) नाम की पार्टी 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले ही अस्तित्व में आई है. ये पार्टी नौशाद सिद्दीक़ी के बड़े भाई और हुगली ज़िले की जानीमानी फुरफुरा शरीफ़ मस्जिद में मौलाना पीरज़ादा अब्बास सिद्दीक़ी ने बनाई है.
बंगाल के ग्रामीण इलाक़ों में रहने वाले मुसलमान समुदाय के लोगों पर नौशाद सिद्दीक़ी के परिवार की अच्छी पकड़ है. 2021 में आईएसएफ़ ने वामपंथी लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था.
जहां लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली, वहीं आईएसएफ़ ने टीएमसी के हाथों से भांगर सीट को छीन लिया था.
इसी साल जुलाई में हुए पंचायत चुनावों में आईएसएफ़ ने भांगर समेत कई और सीटों पर टीएमसी को कड़ी टक्कर दी थी. भांगर में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि यहां दोनों पार्टियों के समर्थकों में झड़पें तक हुईं.
पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में टीएमसी सरकार और आईएसएफ़ के बीच का तनाव उस वक़्त खुल कर सामने आया जब जनवरी 2021 में पार्टी के स्थापना दिवस समारोह के दिन सीद्दीक़ी को कोलकाता पुलिस ने गिरफ़्तार किया.
उनकी गिरफ़्तारी के बाद इलाक़े में हिंसा बढ़ गई और लोग सड़कों पर उतर आए.
सिद्दीक़ी के ख़िलाफ़ कई केस दर्ज किए गए लेकिन 40 दिनों तक कस्टडी में रखे जाने के बाद कोलकाता हाई कोर्ट ने उन्हें ज़मानत दे दी.
इस मौक़े पर सिद्दीक़ी ने टीएमसी नेतृत्व पर आरोप लगाया और कहा कि उनकी गिरफ़्तारी के पीछे मुख्य कारण डायमंड हार्बर सीट से लड़ने का उनका फ़ैसला है.
उन्होंने कहा कि टीएमसी को डर है कि वो डायमंड हार्बर सीट के ’मॉडल ऑफ़ गवर्नेंस’ के दावे की पोल खोल देंगे.
उनका कहना था, "राज्य में अल्पसंख्यकों की एक बड़ी आबादी है, जिसे दूसरे राज्यों में लोगों की तरह आर्थिक मौक़े नहीं मिलते. तृणमूल कांग्रेस डायमंड हार्बर सीट को गवर्नेंस के मॉडल के रूप में पेश कर रही है. मैंने इस सीट से चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया है ताकि मैं इस मॉडल की हक़ीक़त को लोगों के सामने ला सकूं."
उनके इस बयान के जवाब में अभिषेक बनर्जी ने कहा था कि इस सीट से कोई भी चुनाव लड़ सकता है, यहां तक कि गुजरात और उत्तर प्रदेश के लोग भी चाहें तो वो इस सीट से उनके ख़िलाफ़ खड़े हो सकते हैं.
यमुना में ज़हरीले झाग के लिए यूपी ज़िम्मेदार- आम आदमी पार्टी
दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने यमुना नदी में आने वाली ज़हरीली झाग के लिए पड़ोसी उत्तर प्रदेश को ज़िम्मेदार ठहराया है और कहा है कि वो कालिंदी कुंज में ओखला बराज से प्रदूषित पानी यमुना में छोड़ रहा है.
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार, जानकार कहते हैं कि प्रदूषित पानी में बड़ी मात्रा में फॉस्फेट्स और सर्फेक्टेंट हैं और इसे यमुना में छोड़े जाने से पहले साफ़ नहीं किया गया है. उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा से क़रीब 23 जगहों से प्रदूषित पानी यमुना में आता है.
इस बीच यमुना में प्रदूषण को लेकर दिल्ली सरकार और बीजेपी में आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गया है.
दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी मार्लेना ने कहा है कि सरकार चाहती है कि छठ के मौक़े पर दिल्लीवासियों को परेशानी न हो, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार से गुज़ारिश है कि वो प्रदूषित पानी यमुना में न छोड़ें.
अख़बार लिखता है कि छठ पूजा से पहले दिल्ली जल बोर्ड ने यमुना नदी में दिखी ज़हरीली झाग को हटाने के लिए डीफ़ोमर्स (झाग ख़त्म करने वाला केमिकल) छिड़कना शुरू कर दिया है.
वहीं बीजेपी ने आरोप लगया है कि दिल्ली सरकार ”ज़हरीले झाग को छिपाने के लिए केमिकल का छिड़काव” कर रही है.
तमिलनाडु: गवर्नर ने लौटाए 10 बिल, सरकार करेगी पास
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद तमिलनाडु के गवर्नर आरएन रवि ने साल 2020 से लेकर साल 2023 के बीच राज्य की विधानसभा द्वारा पारित 10 बिल वापिल लौटा दिए हैं.
अख़बार डेकन हेराल्ड में छपी एक ख़बर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने हाल में कहा था कि गवर्नर का बिलों पर कोई फ़ैसला न लेना चिंताजनक है.
एक आला सरकारी अधिकारी के हवाले से अख़बार लिखता है कि जो 10 बिल गवर्नर ने लौटाए हैं वो सिद्धा युनिवर्सिटी की स्थापना और राज्य सरकार के अनुदान से चलने वाली युनिवर्सिटी से जुड़े हैं.
सूत्र का कहना है कि ”जो बिल विधानसभा के पास लौटा दिए गए हैं वो पहले पास किए जा चुके हैं और सरकार ने अब उन्हें बिना किसी बदलाव के लागू करने का फ़ैसला किया है.”
विधानसभा स्पीकर एम अप्पावू ने संवाददाताओं से कहा है कि इसके लिए 18 नवंबर को विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा जहां बिल को लागू करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.
अख़बार लिखता है कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व डीएमके सरकार के तनाव के बीच ये तीसरी बार है जब गवर्नर ने पास किए बिल वापिस लौटाए हैं.
इससे पहले फरवरी 2022 और मार्च 2023 में, गवर्नर ने एंटी नीट बिल और ऑनलाइन जुए पर प्रतिबंध लगाने संबंधी बिल को वापस कर दिया. बाद में विधानसभा ने इन्हें फिर से लागू किया.
आईबीआई ने बढ़ाया कंज्यूमर लोन का जोखिम भार
पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड के ज़रिए लोन को लेकर बैंकिंग और ग़ैर-बैंकिंग संस्थाओं (एनबीएफ़सी) को चेतावनी देने के बाद केंद्रीय बैंक (आीबीआी) ने इस तरह के लोन को लेकर जोखिम भार को बढ़ा कर 100 से 125 फ़ीसदी कर दिया है.
अख़बार बिज़नेस स्टैंडर्ड में छपी एक ख़बर के अनुसार ये नए रूल तत्काल प्रभाव से लागू होंगे और नए और बकाया लोन पर लागू होंगे.
अख़बार लिखता है कि इसका मतलब है कि बैंकों को ऐसे लोन देते समय अधिक पूंजी अलग रखनी होगी और ऐसे में वो इस तरह के लोन पर ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं.
अख़बार के अनुसार आरबीआई ने कहा है कि कमर्शियल बैंकों के कंज्य़ूमर लोन (बकाया और नए लोन) के संबंध में जोखिम भार 25 फ़ीसदी अंक से 125 फ़ीसदी तक बढ़ाने का फ़ैसला लिया गया है. इसमें पर्सनल लोन शामिल है, लेकिन होम लोन, एजुकेशन लोन, गाड़ियों के लिए लिया जाने वाला लोन, या सोने और सोने के गहने गिरवी रखकर लिया जाने वाले लोन शामिल नहीं है.
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