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ग़ज़ा का नासिर अस्पताल, घायलों को जो बचाने गए उन्हें भी गोली मारी गई- बीबीसी पड़ताल
- Author, एलिस कडी, सीन सेडोन, मैरी-खोसे अल अज़ी और रिचर्ड इरविन-ब्राउन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
बीते शनिवार, 10 फ़रवरी को ग़ज़ा में जब सुबह सूरज उगा उससे पहले ही पूरा इलाक़ा गोलियों की आवाज़ से गूंज रहा था.
उस वक्त डॉ. अमिरा अल-असौली नासिर अस्पताल के मैनेटर्निटी बिल्डिंग में थीं, जब उन्हें अपनी खिड़की के नीचे किसी के ज़ोर से चीखने की आवाज़ सुनाई दी. लोगों ने कहा कि वहां एक घायल व्यक्ति है.
जबतक वो सीढ़ियां उतरकर नीचे पहुंचतीं, उसकी मौत हो चुकी थी.
इब्राहिम सलमा ने भी चीख की आवाज़ सुनी थी. वो अस्पताल में ही ठहरे हुए थे इसलिए आवाज़ सुनकर वो भी बाहर निकले. उन्हें गोली लग गई.
उन्होंने बताया, "अचानक मैंने अपने पैर में कुछ गर्म महसूस किया और मैं गिर पड़ा. मेरा पैर भारी लग रहा था और उससे खून बह रहा था."
डॉ. अमिरा ने फिर भी ख़तरा मोल लिया. घटना का एक वीडियो सामने आया है जिसमें देखा जा सकता है कि वो अपना जैकेट निकालकर झुकते हुए इब्राहिम की ओर दौड़ीं.
अमिरा ने बीबीसी से कहा, "मैं झिझकी नहीं."
उस दिन की बात याद करते हुए इब्राहिम बताते हैं कि डॉ. अमिरा ने उनकी छाती पर हाथ रखा और चिल्लाईं, "वो ज़िंदा है."
(चेतावनीः इस कहानी में दिए वाकये विचलित करने वाले हैं.)
ज़मीन पर क्या थे हालात?
पिछले महीने इसराइली सेना ने ग़ज़ा के सबसे बड़े और भीड़भाड़ वाले नासिर अस्पताल पर सैन्य अभियान चलाया था. उसके बाद कई हफ़्तों तक बीबीसी ने वहां हुए घटनाक्रम की पड़ताल की.
मंगलवार को हमने बताया था कि यहां के मेडिकल स्टाफ़ इसराइली सेना पर उन्हें हिरासत में लेने, पीटने अपमानित करने का आरोप लगाया था.
इसके बाद ब्रितानी सरकार ने इस पर इसराइल से सफ़ाई मांगी. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अत्याचार और मानवाधिकार क़ानून के उल्लघंन के मामलों में भरोसेमंद रिपोर्टों की जांच करना इसराइल की "नैतिक ज़िम्मेदारी" बनती है.
प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और सत्यापित वीडियो फ़ुटेज के विश्लेषण के ज़रिए हम दिखा सकते हैं कि उस दिन क्या कुछ हुआ.
स्वास्थ्यकर्मी, मरीज़ और अस्पताल के मुख्य द्वार के बाहर पनाह लिए हुए विस्थापित नागरिकों ने बताया कि वो कैसे गोलीबारी के बीच फंस गए थे.
बीबीसी ने गोली चलने की 21 घटनाओं के वीडियो को वेरिफ़ाई किया है और पुष्टि की है कि इस शूटिंग में तीन लोग मारे गए थे.
बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट इसराइली सेना को सौंपी और नासिर अस्पताल में सैन्य अभियान के बारे में सवाल भी पूछे.
इसराइली सेना का शुरू से कहना है कि हमास के लड़ाके अस्पताल और मेडिकल सेंटरों का इस्तेमाल करते हैं. उनका ये भी आरोप है कि सात अक्टूबर के हमले में अगवा किए गए बंधकों को रखने के लिए हमास इन जगहों का इस्तेमाल कर रहा है.
इसराइली सेना ने क्या कहा?
इसराइली सेना ने बीबीसी को बताया कि उस इलाके़ में उनके पहुंचने से पहले ही गोलीबारी की घटनाएं हो रही थीं और उन्होंने निशाना लेकर "आतंकवादियों पर गोलियां" चलाईं.
इसराइली सेना का आरोप है कि जब वो अंदर पहुंचे तो उन्हें बंधकों के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाएं और हथियार का पता चला. बीते नवंबर में जिन बंधकों को छोड़ा गया उन्होंने कहा था यहीं पर एक कमरे में उन्हें बंद करके रखा गया था.
शैरोन अलोनी कुनियो (इसराइली बंधक) ने बताया था कि उन्हें अरबी वेशभूषा में एंबुलेंस से नासिर अस्पताल ले जाया गया था जबकि उनके पति को एक शीट से ढंककर ले जाया गया ताकि वो शव की तरह दिखें. उनके पति अभी भी ग़ज़ा में हैं. इसी तरह का बयान एक अन्य इसराइली बंधक ने दिया था.
लेकिन अस्पताल में काम करने वाले, जिनमें अंतरारष्ट्रीय स्वास्थ्यकर्मी भी थे, उन्होंने हमास लड़ाकों की मौजूदगी से इनकार किया.
जब इस्पताल में छापा मारा गया तो इसराइली सेना ने कहा कि "200 संदेहास्पद आतंकवादियों" को हिरासत में लिया गया, जिनमें कुछ ऐसे थे जो "स्वास्थ्यकर्मियों की तरह कपड़े" पहने हुए थे.
हमले के दौरान नासिर अस्पताल में जितने लोग थे उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि इसराइली सेना के स्नाइपर और ड्रोन अस्पताल की इमारतों बीच आने-जाने वालों और खिड़कियों से देखने वालों को निशाना बना रहे थे.
26 साल की सर्जन डॉ. महमूद शमाला ने कहा, "उन्होंने असप्ताल को टैंकों, बुलडोज़र और ड्रोन से घेर लिया था. चारों ओर स्नाइपर थे. खिड़की के पास जाने का मतलब था गोली खाना. चारों ओर बमबारी हो रही थी. वो बहुत मुश्किल दिन था."
एक अन्य डॉक्टर मोहम्मद हारारा ने कहा कि "इस कामप्लेक्स में ठहरे बहुत से विस्थापित लोग आवाजाही के दौरान निशाना बनाए गए. घायल लोगों के क़रीब पहुंचना मुश्किल था और जोखिम लेकर जाने का मतलब कुर्बानी देने जैसा था. बहुत से लोग जो अपने भाईयों, रिश्तेदारों, परिचितों को बचाने गए, उन्हें निशाना बनाया गया."
इस बारे में सवाल पूछने पर इसराइली सेना ने कहा कि "संदिग्ध आतंकवादियों पर निशाना साधा गया."
मदद करने की चुनौती
आठ फ़रवरी को नर्स हाज़िम अबू ओमर को तब गोली लगी जब वो ड्यूटी पर थे.
कई और लोगों ने भी बीबीसी को बताया कि इस तरह से लोगों को गोलियां लगीं थी. इनमें दो डॉक्टर भी थे जो उस समय अपने कमरे में थे. एक वीडियो फ़ुटेज में दिखता है कि एक घायल नर्स को ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया.
हमें ये नहीं पता कि गोली किसने मारी क्योंकि इसराइली सेना ने भी इस पर कोई जवाब नहीं दिया.
उसी दिन के एक और वीडियो में दिखता है कि लोग एक पुलिस स्टेशन के पास मौजूद तीन स्कूलों में से एक के मैदान में इकट्ठा लोगों को पानी पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं.
जब लोगों ने सड़क पार करने की कोशिश की, तो गोलियों की आवाज़ आई. बीबीसी के विश्लेषण के अनुसार, किसी को गोली तो नहीं लगी लेकिन उसी तरफ़ गोली चलाई गई थी.
उसी दिन के एक और वीडियो में ड्रोन का शोर सुनाई देता है.
10 फ़रवरी को इब्राहिम सलमा के दोनों पैरों में गोली लगी थी. जब वो खून से लथपथ गिरे हुए थे तो एक डॉक्टर उनसे लगातार बात कर रहा था ताकि वो बेहोश न हों. पास खड़ा दूसरा व्यक्ति अपने फ़ोन पर वीडियो बना रहा था.
एक घंटे तक पड़े रहने के बाद डॉ. अमिरा असौली उनके पास पहुंचीं और स्ट्रेचर से उन्हें अस्पताल में पहुंचाया.
उसी दिन के एक अन्य वीडियो में दिखता है कि एक व्यक्ति रेंगते हुए कुछ ही दूरी पर पड़े एक घायल व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश करता है.
एक दिन बाद के वीडियो में वही शव ज़मीन पर पड़ा हुआ दिखता है. ये बताता कि कोई भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा था.
सबके सामने गोली मारी...
डॉ. मोहम्मद मोग़राबी ने उसी दिन इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए एक वीडियो में कहा, "हम एक इमारत से दूसरी तक नहीं जा सकते. अस्पताल के परिसर में हिलने वाले किसी भी व्यक्ति को स्नाइपर निशाना बना लेंगे."
11 फ़वरवरी को दो वीडियो क्लिप सामने आए जिनमें देखा जा सकता है कि मुख्य इमारत और अल-दाहरा रोड के गेट पर दो शव पड़े हुए थे.
डॉ. हरारा ने कहा कि ये शव चार से पांच दिन तक ऐसे ही पड़े रहे और कुत्ते और बिल्लियां उन्हें "नोचते" रहे.
13 फ़रवरी को स्थिति और गंभीर हो गई जब एक व्यक्ति जंपसूट पहने अस्पताल परिसर में आता है और लोगों को वहां से जाने के लिए कहा जाता है. उसके हाथ बंधे हुए थे.
अस्तपाल में मौजूद लोगों ने बीबीसी को बताया कि वो जमाल अबू अल-ओला हैं. वो एक फ़लस्तीनी व्यक्ति थे, जो एक दिन पहले गायब हो गए थे. उन्हगोंने वो कपड़े पहले थे जो इसराइली सेना की हिरासत में रहने वाले पहनते हैं.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उस दिन वो तीन बार एक नियत रास्ते से अस्पताल आए और उनके ऊपर ड्रोन उड़ रहा था.
डॉ. हरारा ने बीबीसी को बताया कि "वो बहुत असमान्य लग रहे थे, डरे हुए थे. उनकी मां ने उनसे वापस न जाने को कहा. लेकिन उन्होंने कहा कि अगर वो नहीं जाएंगे तो वो अंदर आकर उन्हें और पूरे परिवार को मार देंगे."
दूसरी बार उनके चेहरे पर कट का निशान था. तीसरी बार उन्हें गोली मार दी गई.
अस्पताल में रुके एक अन्य व्यक्ति ने बीबीसी को बताया, "बेघर लोगों और उनकी मां के सामने उनकी हत्या कर दी गई."
बीबीसी से बात करने वाले किसी भी व्यक्ति ने नहीं देखा कि गोली कहां से चली. जमाल की मौत के बारे में बीबीसी के सवालों का इसराइली सेना ने जवाब नहीं दिया. लेकिन पहले उसने कहा था कि इस पर समीक्षा हो रही है.
डॉक्टरों ने कहा कि उस दिन अस्पताल परिसर में कई लोगों को गोली लगी. डॉ. खालिद सेर ने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा कि खेलते हुए दो लड़कों को गोली मारी गई और तीन नागरिकों को अस्पताल के गेट पर गोली मारी गई.
वीडियो फ़ुटेज क्या बताते हैं...
उस समय वहां पर मौजूद एक पत्रकार ने इन लड़कों के मारे जाने का वीडियो जारी किया, जिसे बीबीसी ने सच पाया. लेकिन स्वतंत्र रूप से ये पता करना मुश्किल है कि किन हालात में गोली चली.
उसी दिन एक टैंक ने अस्पताल की दीवार गिरा दी. इसराइली सेना के वाहनों से लाउडस्पीकर के ज़रिए लोगों को जाने के लिए कहा जा रहा था.
अरबी में दी गई चेतावनी में लोगों से कहा गया, "तुरंत बाहर जाएं... जो अपनी ज़िंदगी को ख़तरे में नहीं डालना चाहते. जो भी अस्पताल के अंदर हैं एक साथ बाहर आएं."
14 फ़रवरी को अस्पताल के आसपास ड्रोन मंडराने लगे. एक बार फिर अस्पताल खाली करने का आदेश दिया गया और कहा गया कि इसराइली सेना छापा मारने वाली है.
इब्राहिम बैसाखियों पर बाहर निकले और उन्होंने चारों तरफ लाशें देंखीं, जिनमें कुछ को कुत्ते बिल्लियों ने खा लिया था.
जब वो इसराइली चेकप्वाइंट पर पहुंचे, उन्होंने देखा कि बहुत सारे लोगों को हिरासत में लिया जा रहा था.
अस्पताल के जनरल मैनेजर अतेफ़ अल-हूत ने बताया कि 15 फ़रवरी को एक गोला आर्थोपेडिक डिपार्टमेंट पर गिरा, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई.
इसराइली सेना ने कहा कि अस्पताल के पास एक सैन्य टार्गेट को निशाना बनाया गया था लेकिन दुर्घटना से गोला अस्पताल पर ही गिर गया.
एक वीडियो में दिखता है कि एक स्वास्थ्यकर्मी मलबे में तब्दील इमारतों से घायलों को बाहर निकाल रहे हैं.
बीबीसी ने डॉ. हरारा के वीडियो को वेरिफ़ाई किया है जिसमें दिखता है कि 15 फ़रवरी को अस्पताल से दो किलोमीटर दूर दक्षिणी शहर ख़ान यूनिस जाते हुए लोगों पर गोलियां चलीं.
एक महिला को पैर में गोली लगी जिसे बाद में एक कार से बाहर ले जाया जाने लगा, लेकिन ठीक उसी समय एक धमाका सुनाई दिया.
एक अन्य वीडियो में कुछ लोगों का समूह, जो स्वास्थ्यकर्मियों की तरह कपड़े पहने हुए था, जान बचाते हुए दिखा. ये समूह सड़क पार करने की कोशिश कर रहा था.
नासिर अस्पताल का हाल
उधर नासिर अस्पताल में गोली चलने की आवाज़ आने के बाद एक घायल व्यक्ति इमरजेंसी बिल्डिंग की तरफ रेंगकर आते हुए दिख रहा है.
अस्पताल पर इसराइली कब्ज़े के बाद भी जो लोग बच गए थे उन्होंने बताया कि उनके पास खाने पानी का काफी कम सामान था. उन्हें एक इमारत में शिफ़्ट कर दिया गया और उन्हें बहुत गंदगी में रहना पड़ा. उन्हें डर था कि अगर वो परिसर में जाएंगे तो उन्हें गोली मार दी जाएगी.
इसराइली सेना ने कहा "नासिर अस्पताल में चलाया गया अभियान सटीक और केंद्रित तरीक़े से अंजाम दिया गया और अस्पताल के संचालन को कम से कम क्षति पहुंचे इसका ख्याल रखा गया और मरीज़ों और मेडिकल स्टाफ़ को नुकसान नहीं पहुंचाया गया."
16 फ़रवरी को स्वास्थ्यकर्मियों को अस्पताल में निर्वस्त्र होने, पीठ के पीछे बंधे हाथों के साथ घुटने पर झुकने को मजबूर किया गया. ये वहीं हुआ जहां एक सप्ताह पहले इब्राहिम को गोली लगी थी. कई लोगों को हिरासत में लिया गया.
दो दिन बाद वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजे़शन ने कहा कि नासिर अस्पताल ने काम करना बंद कर दिया है. इसराइली सेना ने 25 फ़रवरी को अपना अभियान समाप्त किया.
एक बयान में इसराइली सेना ने कहा, "सेना ने अस्पताल को बड़ी मात्रा में खाने का सामान और वैकल्पिक जेनरेटर उपलब्ध कराए हैं ताकि वो काम चालू रख सके और मरीजों का इलाज न रुके."
जब इसराइली सेना का अभियान ख़त्म हो गया तो नासिर अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने कहा कि उसे स्थानीय लोगों ने लूट लिया और भाग गए.
डॉ. हातेम राबा ने कहा, "वो सबकुछ ले गए- खाना, पानी, दवाइयां, बैटरियां. वे भूखे थे और वो सब ले गए जो काम का थी."
जब इस सप्ताह बीबीसी ने अस्पताल का दौरा किया, वहां मरीज़ों की संख्या बहुत कम थी. केवल कुछ ही विस्थापित लोग परिसर में मौजूद थे.
एक बुज़ुर्ग व्यक्ति ने बीबीसी को बताया, "मैं बीमार हूं, मुझे दिल की बीमारी के साथ ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ है. मैं यहां से नहीं जा सकता."
"मैं यहां रुका हुआ हैं और खुदा के रहम का इंतज़ार कर रहा हूं, चाहे ज़िंदा रहूं या मरूं. "
अतिरिक्त रिपोर्टिंग - मुआथ अल ख़ातिब और बीबीसी अरबी से सोहा इब्राहिम
वेरिफ़िकेशन - बीबीसी वेरिफ़ाई से रिचर्ड इरविन ब्राउन
विज़ुअल जर्नलिज्म और डिज़ाइन - गेरी फ़्लेचर, लिली और जो बार्थोलोम्यू
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