लौटे भारतीयों ने सुनाई अमेरिका पहुँचने की आपबीती: खाना तक नहीं मिला,कई रास्ते में मर गए...

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हरियाणा के कुरुक्षेत्र ज़िले के एक गांव के खुशप्रीत सिंह छह महीने पहले 45 लाख रुपये खर्च कर अमेरिका चले गए थे.
खुशप्रीत सिंह के पिता ने अपनी ज़मीन, घर और पशुधन पर कर्ज़ लेकर खुशप्रीत को अमेरिका भेज दिया था, लेकिन वे वापस लौटने वाले भारतीयों में से हैं.
खुशप्रीत का कहना है कि वह 22 जनवरी को सीमा पार कर गए थे और उन्हें दो फ़रवरी को वापस भेज दिया गया.
वो कहते हैं, "पानी पीकर जंगल पार करो. जिसका साथ छूटा, उसे पीछे मुड़कर देखने की भी ज़रूरत नहीं है, बस अपने रास्ते चलते जाओ. केवल वही पार कर सकता है जो गाइड के क़दमों का पीछा कर सकता है, जो पीछे रह जाता है वह हमेशा पीछे रह जाता है."

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अमेरिका में पकड़े जाने के बाद खुशप्रीत को 12 दिनों तक ट्रांज़िट कैंप में रखा गया.
वह बताते हैं, "पहले दिन उन्होंने कहा कि वे हमें भारत वापस भेज देंगे लेकिन हमें लगा कि वे हमारे साथ मज़ाक कर रहे हैं. वे गंभीर थे लेकिन हम मज़ाक समझ रहे थे."
ख़ुशप्रीत बताते हैं कि उन्हें कैसे सैन्य विमान पर चढ़ाया गया और उस समय कैसा सुलूक किया गया.
वो कहते हैं, "जब उन्होंने हमें हथकड़ी लगाई, तो हम गंभीर हो गए. पहले तो उन्होंने हमें बताया कि वे हमें वेलकम सेंटर ले जा रहे हैं. हमें लगा कि हमें वहाँ छोड़ दिया जाएगा, लेकिन जब हम उतरे, तो देखा कि हमारे सामने सेना का विमान खड़ा था."
बीते कुछ समय से खुशप्रीत को जो कुछ झेलना पड़ा उससे वे काफ़ी विचलित नज़र आए. अमेरिका तक पहुंचने में काफ़ी पैसे खर्च हो गए थे और उन्होंने उम्मीद जताई कि 'अगर हमारा पैसा वापस मिल जाएगा तो हम यहां कुछ काम करेंगे. लेकिन अब हम बाहर की तरफ़ नहीं देखेंगे."
खुशप्रीत सिंह के पिता भावुक नजर आए. उन्होंने रोते हुए कहा, "हमें हमारा पैसा वापस दे दो. अगर पूरा नहीं तो कम से कम आधा तो दे दो."
'रास्ते में लाशें भी देखीं'

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पंजाब में होशियारपुर ज़िले के उर्मर टांडा के सुखपाल सिंह ने बताया कि वह जंगलों और समंदर के रास्ते होते हुए अमेरिका पहुंचे थे.
बीबीसी संवाददाता प्रदीप शर्मा को सुखपाल सिंह ने बताया कि उन्हें घर छोड़े चार महीने हो गए थे.
रास्ते की कठिनाइयों के बारे में उन्होंने कहा, "मैं हाथ जोड़कर सभी से कहना चाहता हूं कि कोई भी ग़लत रास्ते से न जाए और हो सके तो बिल्कुल न जाए. यहां थोड़ा खाना मिलता है तो वही खाओ. वहां खाना नहीं है, पैसे भी छीन लेते हैं और कोई सुरक्षा भी नहीं है."
वो बताते हैं, "वे हमें पहले इटली ले गए. फिर हमें लैटिन अमेरिका ले गए. हमने लगभग 15 घंटे तक नाव पर यात्रा की. हम पहाड़ों में 45 किलोमीटर तक चले और जो कोई भी वहां गिर जाता है, उसे वे वहीं छोड़ देते हैं. हमने रास्ते में कई शव देखे."

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होशियारपुर ज़िले के दसूआ कस्बे के हरविंदर सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. उनका कहना है कि पहले उन्हें दिल्ली, फिर क़तर और वहां से ब्राज़ील ले जाया गया.
वह बताते हैं, "मैं ब्राज़ील में दो दिन तक एक होटल में रुका रहा. फिर उन्होंने मुझे बताया कि पेरू से तुम्हारे लिए एक फ्लाइट है. हम बस से पेरू गए, लेकिन वहाँ कोई फ्लाइट नहीं थी. वहाँ से आगे हम टैक्सी से गए."
हरविंदर सिंह का कहना है कि उन्होंने इस सब पर 42 लाख रुपये खर्च किए हैं.
उन्होंने कहा, "जब हम पनामा पहुंचे तो हम फंस गए. वहां एक या दो लड़के मर गए, एक समुद्र में डूब गया और एक जंगल में मर गया."
'वैध वीज़ा के बाद भी पकड़ कर वापस भेजा'

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पंजाब के ही लुधियाना ज़िले के जगरांव की रहने वाली मुस्कान तीन साल के स्टडी वीज़ा पर ब्रिटेन गई थीं.
अभी उनके वीज़ा की अवधि दो साल बाकी थी, लेकिन अमेरिका पहुंचते ही उन्हें भारत वापस भेज दिया गया.
बीबीसी के सहयोगी प्रत्रकार गुरमिंदर ग्रेवाल के अनुसार, वह पांच जनवरी 2024 को ब्रिटेन गई थीं.
मुस्कान ने बताया, "अमेरिका में कैलिफ़ोर्निया के तुहावाना में हम सैर पर निकले थे. पुलिस ने हमें रोका और कहा कि वे आकर हमें ले जाएंगे. इसके बाद हमें 10 दिनों तक अपने पास रखा और हमारे साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया."
मुस्कान बताती हैं, "कैलिफ़ोर्निया पुलिस हमें लेने आई थी. फिर उन्होंने हमें भारत भेज दिया. यहां आने के बाद ही हमें पता चला कि हम भारत आ गए हैं. हमें इधर-उधर धकेला गया, हम वैध वीज़ा पर गए थे. हमने कोई सीमा पार नहीं की और न ही कोई दीवार चढ़ी."
उन्होंने कहा, "मेरे पास अभी भी वैध ब्रिटिश वीज़ा है लेकिन हमें बताया गया है कि हम 5 साल तक कहीं नहीं जा सकते."
मुस्कान के पिता जगदीश कुमार कहते हैं, "हमने बच्चे का भविष्य बनाने के लिए उसे भेजा था, लेकिन उसके साथ धक्का-मुक्की की गई. सरकार को अब इस पर ग़ौर करना चाहिए. हमने कर्ज़ लेकर बच्चे को भेजा था."
मुस्कान के घर पहुंची आम आदमी पार्टी की विधायक सरबजीत कौर मनुके ने कहा, "मुझे आश्चर्य है कि लड़की के पास अभी भी दो साल का वैध ब्रिटिश वीज़ा है, फिर भी उसे वापस भेज दिया गया."
मनुके का कहना है कि मुस्कान के परिवार से उनके अच्छे संबंध हैं, "हमारी बेटी तुहावाना घूमने गई थी. वे उसे खुद वहां ले गए और सब कुछ हो गया. अमेरिका जैसे देश से ऐसी उम्मीद नहीं की जाती."
11 दिन पहले ही पहुंचे थे अमेरिका

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पंजाब के गुरदासपुर ज़िले के फतेहगढ़ चूड़ियां के जसपाल सिंह को अमेरिका में सिर्फ 11 दिन ही बीते थे कि उन्हें पकड़ कर वापस भेज दिया गया.
बीबीसी संवाददाता गुरप्रीत चावला से बात करते हुए उन्होंने भारी मन से कहा, "अमेरिका जाने का सपना टूट गया."
उनकी अमेरिका यात्रा लगभग ढाई साल पहले शुरू हुई थी. इस सपने के लिए उन्होंने 40 लाख रुपए गंवा दिए.
बुधवार को 104 भारतीयों को अमेरिकी सैन्य विमान से भारत वापस भेजा गया. जसप्रीत भी उन 104 लोगों में शामिल थे.
जसपाल सिंह का कहना है कि वह 2022 में विज़िटर वीज़ा पर इंग्लैंड गए थे और वहां उनका संपर्क स्पेन के एक पंजाबी एजेंट से हुआ.
फिर जुलाई 2024 में वो यूरोप पहुंचे. इसके बाद लगभग 6 महीने विभिन्न देशों में बिताने के बाद उन्होंने पनामा के जंगलों से होते हुए अमेरिका का रास्ता ढूंढा.
जसपाल सिंह कहते हैं, "गधे पर यात्रा का अनुभव बेहद ख़तरनाक था. मैंने न सिर्फ़ लड़कों बल्कि लड़कियों की लाशें भी वहाँ लुढ़कती देखीं, कंकाल भी देखे. यात्रा के दौरान हमें खाने के लिए केवल थोड़ी सी रोटी और एक या दो बिस्कुट ही मिले."
जसपाल का कहना है कि अमेरिकी सीमा पार करने के बाद अमेरिकी सेना ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.
वो कहते हैं, "हमें कई तरह से प्रताड़ित किया गया. विमान में बिठाने के बाद मेरे हाथ-पैर बांध दिए गए. विमान कई जगहों पर रुका, लेकिन अमृतसर पहुंचने के बाद ही मेरे हाथ-पैर खोले गए."
'ज़मीन बेचने के बाद भी मेरा बेटा कहीं का नहीं रहा'

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हरियाणा के कुरुक्षेत्र के रहने वाले रॉबिन हांडा भी अमेरिका का सपना पूरा करने 7 महीने पहले रवाना हुए थे.
उन्हें भी कल वापस भेज दिया गया. हांडा ने कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और बेहतर भविष्य की तलाश में अमेरिका चले गए.
हरियाणा से बीबीसी संवाददाता कमल सैनी अनुसार, रॉबिन हांडा ने बताया, "मैं 7 महीने पहले अमेरिका जाने के लिए घर से निकला था. मुझे एक महीने तक रास्ते में कई जगहों पर रोका गया. रास्ते में मुझे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, कभी मुझे खाना मिला कभी नहीं मिला, कभी समुद्र में, कभी नावों में, कभी लोगों ने मेरे पैसे छीन लिए, कई तरह की परेशानियां मैंने उठाईं."
रॉबिन हांडा ने बताया, "मैंने 22 जनवरी को सीमा पार की. फिर हमने क़ानूनी प्रक्रिया पूरी की और खुद को सेना के हवाले कर दिया. वे हमें एक कैंप में ले गए और वहां हमारे साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया."
उन्होंने कहा, "हमें यह भी नहीं बताया गया कि हमें कैंप से कहां ले जाया जाएगा और हमारे हाथ-पैर जंजीरों से बांध दिए गए. जब हमने देखा कि सेना का विमान हमारे सामने खड़ा है, तो हम चौंक गए."
हांडा अब कहते हैं, "मैं किसी को भी इस तरह बाहर जाने की सलाह नहीं दूंगा. यह बहुत कठिन रास्ता है."
रॉबिन हांडा के पिता ने कहा कि उन्होंने बेटे को भेजने पर 45 लाख रुपये खर्च किए थे.
रॉबिन हांडा के पिता कहते हैं, "एजेंसी ने हमें धोखा दिया. उन्होंने कहा कि बेटा एक महीने में पहुंच जाएगा, लेकिन 6-7 महीने तक हमें दर दर भटकने के लिए मजबूर किया गया. उन्होंने प्रताड़ित किया, यहाँ तक कि बिजली का झटका भी दिया ."
उन्होंने कहा, "हमारे पास बच्चे की पिटाई के वीडियो भी हैं. उसे अच्छी नौकरी मिल जाएगी इस वादे पर ज़मीन भी बेच दी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ."
इस दौरान रॉबिन हांडा की दादी प्यार कौर बेहद भावुक नजर आईं. उन्होंने कहा, "ज़मीन बेचने के बाद मेरा बच्चा बेकार हो गया. मेरा बेटा भूख और प्यास से तड़प गया."
"उन्होंने धान बेचकर बाहर भेज दिया. धान बेचने की वजह से उनके दादा भी बीमार पड़ गए. उन्होंने इस बात को दिल पर ले लिया और अब उन्हें कुछ भी पता नहीं है."
'अमेरिका जाने पर 50 लाख रुपए खर्च किए'

पंजाब के ही फतेहगढ़ साहिब ज़िले के काहनपुरा गांव के जसविंदर सिंह अक्तूबर 2024 में अमेरिका गए.
जसविंदर सिंह के चाचा करनैल सिंह ने बीबीसी को बताया, "जसविंदर को पुलिस अधिकारी देर रात घर पर छोड़ गए थे."
उन्होंने अपने परिवार को बताया कि 'हमें हथकड़ी लगाकर अमेरिका से हवाई जहाज से लाया गया था.'
जसविंदर सिंह 22 दिन पहले ही अमेरिका पहुंचे थे जब उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.
करनैल सिंह कहते हैं, "जसविंदर की तबीयत घर पहुंचने के बाद से ही ख़राब है, शायद वह तनाव में है."
जसविंदर सिंह को सुबह अचानक बीमार पड़ने के बाद लुधियाना अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
वो कहते हैं, "जसविंदर ने परिवार को बताया कि कैंप में खाने को कुछ नहीं दिया जाता था, केवल आधा सेब या जूस दिया जाता था और वह भी कभी-कभी."
जसविंदर सिंह का एक बड़ा भाई है, दोनों भाइयों के पास एक किला ज़मीन है. वे खेती करते थे.
पिछले साल उन्होंने एक एजेंट के माध्यम से अमेरिका जाने का फैसला किया.
उन्होंने बताया कि अमेरिका जाने के लिए परिवार ने करीब 50 लाख रुपए खर्च किए.
वो कहते हैं, "इस पैसे के लिए हमने सोने के गहने गिरवी रखे थे और रिश्तेदारों से काफी पैसे उधार लिए थे."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
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