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क्या ईरान से जुड़े हैं इसराइल पर हमास के हमले के तार?
- Author, पॉल एडम्स
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
फ़लस्तीन के चरमपंथी संगठन हमास और इसराइल के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से एक सवाल पूछा जा रहा है कि इस हमले में इसराइल के धुर दुश्मन देश ईरान की कोई भूमिका थी?
अमेरिकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जनरल ने हमास और लेबनानी चरमपंथी संगठन हिजबुल्लाह के कुछ अनाम सदस्यों के हवाले से लिखा है कि ईरान ने एक हफ़्ते पहले ही इस अभियान को हरी झंडी दी थी.
लेकिन अमेरिका के एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने बताया है कि अमेरिकी सरकार के पास फिलहाल ऐसी जानकारी नहीं है जिससे इस हमले में ईरान की भूमिका होने से जुड़े आरोपों की पुष्टि की जा सके.
इसके बाद भी इस मामले के पीछे जो सच छिपा है, वो काफ़ी अहम है.
अगर ये सामने आता है कि इन हमलों के पीछे ईरान का हाथ था तो ये द्विपक्षीय संघर्ष क्षेत्रीय टकराव में बदल सकता है.
ऐसे में जहां एक ओर ईरानी नेताओं ने इस हमले की तारीफ़ की है लेकिन उन्होंने इस मामले में ईरान की किसी भूमिका से इनकार किया है.
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ‘ईरान की भूमिका होने से जुड़े आरोप राजनीतिक वजहों पर आधारित हैं.'
ईरानी प्रवक्ता ने कहा है कि ईरान दूसरे देशों की निर्णय प्रक्रिया में किसी तरह हस्तक्षेप नहीं करता है.
ईरान और हमास के बीच रिश्ते
अमेरिका ने कहा है कि उसने अब तक ऐसे सबूत नहीं देखे हैं जो ये बताते हों कि ईरान इन हमलों के पीछे था.
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने हमास और ईरान के बीच लंबे रिश्ते होने की बात ज़रूर कही है.
ईरान कई सालों तक फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास का मुख्य वित्त पोषक रहा है.
ईरान इस संगठन को सिर्फ आर्थिक मदद ही नहीं भारी संख्या में हथियार और रॉकेट भी देता रहा है.
ऐसे में इसराइल पिछले कई सालों से उस मार्ग को बाधित करने की कोशिश कर रहा है जिसके ज़रिए चीज़ें ईरान से ग़ज़ा पट्टी तक पहुंचती हैं.
इनमें सूडान, यमन से लेकर लाल सागर के जहाज़ों और सिनाई प्रायद्वीप में सक्रिय बद्दू तस्कर शामिल हैं.
इसराइल के धुर दुश्मन होने के नाते यहूदी राज्य को नुकसान पहुंचना ईरानी हित में है.
इसराइली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी हाइम तोमेर ‘मैं कहूंगा कि ये सोचना बहुत ज़्यादा नहीं होगा कि ईरान इसमें शामिल है. ये इसराइल और सऊदी अरब के बीच होने जा रहे शांति समझौते से जुड़ी ख़बरों पर ईरान की प्रतिक्रिया है.”
ईरान की भूमिका पर सवाल
लेकिन तोमेर कहते हैं कि इस बात से इत्तिफ़ाक रखना मुश्किल है कि ईरान ने शनिवार के हमलों का आदेश दिया होगा.
वे कहते हैं, "ये सही है कि हमास को हथियार ईरान से मिलते हैं. ये भी सही है कि ईरान सीरिया में हमास को ट्रेनिंग देता है. यहां तक कि ईरान के भीतर भी हमास के लड़ाकों को ट्रेनिंग दी जाती है.”
वे कहते हैं कि हाल की महीनों में इसराइल ने हमास के अधिकारियों के मूवमेंट को ट्रेक किया है.
तोमेर ने बताया, “हमने हमास के मिलिट्री विंग के प्रमुख सालेह अल-अरूरी और हमास के अन्य अधिकारियों को ईरान और लेबनान जाते देखा है. इन लोगों ने वहां बैठकें की है. इसराइल को ख़बर है कि इनमें से कुछ लोग आयतुल्ला ख़ामेनेई से भी मिली.”
लेकिन ये ‘नज़दीकी रिश्ते’ भी हमले की टाइमिंग का जवाब नहीं दे रहे.
तोमेर कहते हैं, “हमास की नज़र इसराइल के भीतर सियासी संघर्ष पर थी. ईरान ने हमास की हथियारों और उपकरणों से ख़ूब मदद की है. लेकिन मेरे विचार से शनिवार के हमले का फ़ैसला 75 फ़ीसदी फ़ैसला हमास ने किया था.”
हमास के हमले की योजना
तेल अवीव यूनिवर्सिटी में ईरान के एक्सपर्ट राज़ ज़िम्मत इससे सहमत हैं.
सोशल मीडिया पर ज़िम्मत ने लिखा, "ये फ़लस्तीन की कहानी है.”
वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक ईरान ने पिछले हफ़्ते बैरूत में हुई एक बैठक में इन हमलों को हरी झंडी दी थी.
हमास और हिज़्बुल्ला के सूत्रों ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड के ऑफ़िसर अगस्त के महीने से हमास के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. और शनिवार को हुए ज़मीन, हवा और पानी के रास्ते हमला इसी सहयोग का नतीजा है.
हमास ने जो वीडियो रिलीज़ किए हैं वो बताते हैं कि ये ऑपरेशन कितना सुनियोजित था. अब तक हमास ग़ज़ा पट्टी पर इसराइल के विरुद्ध जो घुसपैठ करने की कोशिश करता रहा है, उसकी तुलना में शनिवार का हमला बहुत योजनापूर्वक किया गया ऑपरेशन लगता है.
एक रॉकेट, ड्रोन, वाहन और हैंग-ग्लाइडर्स का प्रयोग बताता है कि योजना बनाने वालों ने यूक्रेन युद्ध के दौरान इस्तेमाल हुए हाइब्रिड युद्ध की तकनीक का अच्छा अध्ययन किया है.
लेकिन राज़ का कहना है कि हमला करने का फ़ैसला ‘हमास ने किया. और ये निर्णय उन्होंने अपने हितों और फलस्तीन की हक़ीक़त के मद्देनज़र लिया है.”
वे कहते हैं, "क्या हमास को ईरान की मदद मिली? बेशक मिली. क्या इस कार्रवाई से ईरान का हित सधता है? बिल्कुल. क्या हमास को ऑपरेट करने के लिए ईरान की अनुमति लेनी पड़ती है, बिल्कुल नहीं.”
बहुप्रतिक्षित था अभियान
इसराइली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद के पूर्व अधिकारी हाइम तोमेर कहते हैं कि हमास अरसे से अपने विशेष दस्ते तैयार कर रहा था.
तोमेर कहते हैं, "लेकिन ये ऑपरेशन हमास के स्तर से भी कहीं ऊपर का था.”
अब इसराइल के अधिकारी देश के उत्तर से लेकर दक्षिण तक ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आगे क्या होगा और क्या भविष्य में ईरान की भागेदारी और प्रत्यक्ष रूप से सामने आने लगेगी.
लेबनान में ईरान के सहयोगी मिलिशिा हिज़बुल्ला ने पहले ही इसराइली कब्ज़े वाले गोलान हाइट्स पर छोटे पैमान पर ही सही, हमला कर दिया है.
राज़ कहते हैं, "हमास के ऑपरेशन ने मध्य-पूर्व की हक़ीक़त को बदल कर रख दिया है. अब ईरान पर्दे के पीछे से मदद के बजाय भविष्य सीधे तौर पर शामिल हो सकता है. विशेषकर अगर हमास के ख़िलाफ़ इसराइली कार्रवाई से उस संगठन के अस्तित्व को ख़तरा होता है.”
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