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यश ठाकुर की शानदार गेंदबाज़ी ने कैसे लखनऊ सुपर जायंट्स के रिकॉर्ड को बनाए रखा
- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
लखनऊ सुपर जायंट्स रविवार रात को आईपीएल में गुजरात टाइटंस के ख़िलाफ़ मैच जीतने में आख़िरकार सफल हो गई.
लखनऊ सुपर जायंट्स ने लखनऊ के इकाना स्टेडियम पर खेले गए मैच में 33 रन से विजय पाकर यह उपलब्धि हासिल की. इससे पहले गुजरात टाइटंस से लखनऊ की टीम चारों मैच हारी थी.
लखनऊ को इस जीत को दिलाने में गेंदबाज़ों की सटीक गेंदबाज़ी और कैच पकड़ने में अच्छे प्रदर्शन ने अहम भूमिका निभाई.
लखनऊ सुपर जायंट्स ने पहले बल्लेबाज़ी करके 160 से ज़्यादा रन बनाकर कभी नहीं हारने के रिकॉर्ड को यहां बनाए रखा. यह 13वां मौका है, जिसे उसने इस तरह मैच जीता है.
यश ठाकुर का आईपीएल में पहला पंजा
यश ठाकुर ने गेंदबाज़ी में गति में अच्छा परिवर्तन और स्लोअर बाउंसर का अच्छा इस्तेमाल करके आईपीएल में पहली बार पांच विकेट लेकर मैच की जीत में अहम भूमिका निभाई.
उन्होंने 3.5 ओवर में 30 रन देकर पांच विकेट निकाले. इस सत्र में पहली बार किसी गेंदबाज़ ने पांच विकेट निकाले हैं.
शुभमन गिल और साई सुदर्शन जब मैच में अपनी टीम को मज़बूती की तरफ बढ़ा रहे थे, उस समय यश ठाकुर ने अपने पहले ओवर में ही शुभमन गिल को बोल्ड करके पहला झटका दिया.
यश ठाकुर को लखनऊ सुपर जायंट्स ने पिछले सत्र में 45 लाख रुपए में खरीदा था. पर वह इस प्रदर्शन से अपनी सार्थकता को साबित करने में सफल रहे हैं.
शुभमन गिल का विकेट सर्वश्रेष्ठ
प्लेयर ऑफ द मैच बने यश ठाकुर ने कहा कि शुभमन गिल का विकेट पांचों में सर्वश्रेष्ठ रहा. उन्होंने कहा कि शुभमन रूम बनाकर खेलते हैं, उनके लिए हम लोगों ने आगे टप्पा रखने की योजना बनाई और इस कारण ही उनका विकेट मिला.
यश ने कहा कि पहला विकेट मिलने पर राहुल ने मुझसे कहा कि आज तेरा दिन है, इसलिए अच्छी गेंद करेगा तो विकेट मिलेंगे, प्लेयर ऑफ द मैच बनने से बहुत खुश हूं.
मोहम्मद कैफ ने कहा कि यश गेंदबाज़ी में लगातार बदलाव करते हैं और इस कारण ही उन्हें सफलता मिली.
18 गेंदों ने बदल दिया मैच का नक्शा
गुजरात टाइटंस टीम 164 रन के लक्ष्य का पीछा कर रही थी और उन्हें पॉवर प्ले में एक गेंद बाकी रहने पर बिना विकेट खोए 54 रन बना लिए थे. इस समय लग रहा था कि वह आसानी से जीत सकते हैं. लेकिन अगली 18 गेंदों में चार विकेट निकल जाने पर मैच का नक्शा ही बदल गया.
यश ठाकुर के शुभमन गिल को बोल्ड करने के बाद केन विलियम्सन, साई सुदर्शन और बीआर शरत भी लौट गए. इसमें क्रुणाल पांड्या के एक ओवर में दो विकेट निकालने ने गुजरात की रीढ़ तोड़ने में अहम भूमिका निभाई.
क्रुणाल पांड्या ने अपने आईपीएल करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके चार ओवरों में 11 रन देकर तीन विकेट निकाले.
इससे पहले उनका 2017 में 14 रन पर तीन विकेट सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था. यह सच है कि इन झटकों के बाद गुजरात टाइटंस कभी उभर ही नहीं सकी.
बिश्नोई के कैच के क्या कहने
रवि बिश्नोई ने जिस तरह से अपनी गेंद पर केन विलियम्सन का रिटर्न कैच पकड़ा, उसे मैच का टर्निंग प्वाइंट माना जा सकता है.
गिल के आउट होने के बाद विलियम्सन से पारी को संवारने की उम्मीद की जा रही थी और वह इस तरह की भूमिका आईपीएल में ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार निभा चुके हैं.
बिश्नोई की गुगली गेंद को विलियम्सन भांप गए और उन्होंने गेंदबाज़ के बराबर से उठाकर खेलने का प्रयास किया. एक बार तो लगा कि गेंद उनके पार निकल गई है. पर उन्होंने अपने दाएं हवा में 1.96 मीटर की छलांग लगाकर एक हाथ से कैच पकड़ लिया. इस कैच को सर्वश्रेष्ठ कैचों में शुमार ज़रूर किया जाएगा.
इसमें कोई दो राय नहीं कि लखनऊ की जीत में उनके फील्डरों की भूमिका को भी कम करके नहीं आंका जा सकता है, क्योंकि जब भी कैच निकला, तो वह उसे पकड़ने में सफल रहे. मैच जिताते हैं कैच, इस कहावत को उनके फील्डरों ने सही साबित किया.
राहुल तेवतिया ने थोड़ी उम्मीदें ज़रूर बनाईं
मैच के आखिरी समय में राहुल तेवतिया ने आक्रामक अंदाज़ में बल्लेबाज़ी करके कुछ समय के लिए दर्शकों की धड़कनों को ज़रूर बढ़ा दिया.
लेकिन दूसरे छोर से कोई साथ देने वाला नहीं होने से वह पिछले सालों में दिलाई जीतों वाले प्रदर्शन को नहीं दोहरा सके.
दूसरे छोर पर रन बनाने वाला बल्लेबाज़ नहीं होने से उन्हें एक रन को कई बार छोड़ना पड़ा. इस कारण टीम पिछड़ती चली गई.
अगर इस समय कोई साथ निभाने वाला जोड़ीदार होता तो अप्रत्याशित परिणाम भी देखा जा सकता था. उन्होंने 25 गेंदों में दो चौकों और दो छक्कों से 30 रन बनाए.
राहुल और स्टोयनिश की साझेदारी रही अहम
लखनऊ सुपर जायंट्स को दो झटका जल्दी लग जाने के बाद केएल राहुल और स्टोयनिश ने 73 रन जोड़कर पारी संवारी तो ज़रूर, लेकिन इसके लिए 62 गेंदें खेलकर रन गति को काफी कम कर दिया. पर फिर भी यह साझेदारी बहुत अहम साबित हुई.
राहुल ने जब पारी को गति देने का प्रयास किया तो वह नालकंडे की गेंद पर तेवतिया के हाथों लपक गए.
केएल राहुल किसी हद तक आउट होने से पहले टीम को शुरुआत में लगे दो झटकों से तो उबारने में सफल हो गए.
उन्होंने 31 गेंदों में 33 रन बनाए. इसमें सिर्फ तीन चौके ही शामिल थे. उन्होंने इस साझेदारी के दौरान एक-दो रन पर फोकस बनाया और चौके और छक्के लगाने का प्रयास नहीं किया.
सही मायनों में जब पारी को गति देने की ज़रूरत थी, तब यह दोनों ही आउट हो गए. यह सही है कि स्टोयनिश इस सत्र का पहला अर्धशतक लगाने में सफल रहे.
उन्होंने 43 गेंदों में चार चौकों और दो छक्कों से 58 रन बनाए. स्टोयनिश का रंगत में आना टीम के लिए अच्छी खबर ज़रूर है.
सिद्धार्थ की एक ओवर में तीन नो बॉल
आमतौर पर स्पिनरों को नो बॉल करते कम ही देखा जाता है. पर लखनऊ सुपर जायंट्स के इंपेक्ट खिलाड़ी मणिमारन सिद्धार्थ ने गेंदबाज़ी की शुरुआत की और पहले दो ओवरों में सिर्फ 9 रन देकर खूब वाह-वाही लूटी. पर तीसरे ओवर में तीन नो बॉल डालकर सभी को हैरत में डाल दिया.
सिद्धार्थ आमतौर पर दिखने वाले स्पिनरों से थोड़े भिन्न दिखते हैं. स्पिनर छोटे कदम लेकर गेंदबाज़ी करते हैं पर सिद्धार्थ का आखिरी कदम बहुत लंबा होता है, इस कारण ही वह कई बार नो बॉल फेंकते नज़र आए. यही नहीं वह 113 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाज़ी करते हैं.
सिद्धार्थ की इस बात की तारीफ करनी होगी कि नो बॉल के बाद मिले फ्री हिट पर एक भी बड़ा शॉट खेलने का मौका नहीं दिया. यही नहीं तीसरे फ्री हिट पर तो साई सुदर्शन को कैच करा दिया था.
मयंक यादव नहीं छोड़ सके प्रभाव
लखनऊ सुपर जायंट्स के पिछले दो मैचों में मयंक अपनी गति का कहर ढाने में सफल रहे थे. लेकिन यहां की धीमी विकेट पर प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं हो सके. वह पिछले दो मैचों की तरह गति भी निकालते नज़र नहीं आए.
मयंक ने पिछले दो मैचों में लगातार 145 कि.मी. की रफ्तार निकालने के दौरान ही 156.7 कि.मी. की रफ्तार से गेंद फेंककर रिकॉर्ड भी बनाया था. पर आज उन्होंने सबसे तेज़ गेंद 141 कि.मी. की गेंद फेंकी.
पहले ही ओवर में तीन चौकों से 13 रन देने के बाद केएल राहुल ने मैच में उनका इस्तेमाल नहीं करना बेहतर समझा.
मयंक को स्लो पिचों पर किस तरह गेंदबाज़ी की जाए, सीखना होगा. वह गति निकाल रहे थे, जिससे गेंद बल्ले पर अच्छे से आ रही थी.
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