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जेईई एडवांस में ऑल इंडिया टॉपर वेद लाहोटी ने बताया अपनी सफलता का राज़
- Author, मोहर सिंह मीणा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
"मेरे हिसाब से पढ़ाई को लेकर आप में ज़िद होनी चाहिए. इसी से आप आगे बढ़ते हैं. टॉपर बनने के लिए आपका सपना होना चाहिए और मोटिवेशन होना चाहिए."
यह कहना है, जेईई एडवांस परीक्षा के इतिहास में पहली बार 98.61 प्रतिशत नंबर के साथ ऑल इंडिया टॉपर बने वेद लाहोटी का.
वेद लाहोटी ने 360 में 355 अंक हासिल किए हैं.
इससे पहले सबसे ज़्यादा अंक का रिकॉर्ड 2020 की परीक्षा परिणाम में देखने को मिला था, तब टॉपर को 352 अंक हासिल हुए थे. मुंबई ज़ोन के चिराग फेलार को ये अंक हासिल हुए थे.
कैसे बने रिकॉर्ड नंबर से टॉपर
लंबे कद काठी के वेद बेहद शांत नज़र आते हैं. चेहरे पर चश्मा, छोटे बाल और कभी किसी को देख कर मुस्कुराते हैं तो कभी जिज्ञासा भरी नज़रों से देखते हैं.
वेद लाहोटी बताते हैं, "जेईई एडवांस – 2024 का परिणाम मुझे, टीचर्स और पैरेंट्स को भी काफ़ी अच्छा लग रहा है.”
पाँच नंबर कहाँ कम हुए, इस सवाल पर कहते हैं, "फिजिक्स में दो और मैथ में तीन नंबर कम हैं. कुछ सवाल ऐसे होते हैं जो ग़लत हो जाएं तो काफ़ी मार्क्स कट जाते हैं और नेगेटिव मार्किंग भी होती है. इसलिए मैंने बिल्कुल भी रिस्क नहीं लिया. इस वजह से मेरे पांच मार्क्स कम हुए हैं."
लेकिन अब वेद की नज़र भविष्य की ओर है. वह कहते हैं, “अब मुंबई आईआईटी से कंप्यूटर साइंस में एडमिशन लूंगा. अभी तक मेरा विदेश जाने का कोई प्लान नहीं है. भारत ही मेरी कर्मभूमि है. बचपन से ही मेरी कंप्यूटर, एई और कोडिंग में दिलचस्पी रही है. इसलिए मैं मुंबई आईआईटी से कंप्यूटर स्ट्रीम में जाऊंगा और इसी फील्ड में आगे काम करूँगा."
जेईई एडवांस में असफल स्टूडेंट्स को सलाह
वेद ने रिकॉर्ड के साथ ऑल इंडिया टॉप किया है. वो 48 हज़ार से ज़्यादा कामयाब छात्रों की क़तार में शीर्ष पर हैं.
इस परीक्षा में एक लाख से ज़्यादा छात्र क्वॉलिफाई नहीं कर सके हैं.
उन छात्रों के लिए वेद कहते हैं, “अगर आप आईआईटीयन नहीं बन पाए तो आपकी लाइफ़ यहीं ख़त्म नहीं हो जाती है. आप लाइफ में बहुत कुछ कर सकते हैं. जीवन में सफलता और असफलता तो आती जाती रहती है."
वेद कहते हैं, "मैंने कभी घंटे देख कर पढ़ाई नहीं की, मेरा बचपन से ही पढ़ाई में इंटरेस्ट था. टीचर्स के मुताबिक़ पढ़ाई की है."
इस रिकॉर्ड को तोड़ पाना मुश्किल
वेद लाहोटी के अंक को लेकर कोटा से करियर काउंसलर एक्सपर्ट अमित आहूजा कहते हैं, "इस परिणाम को रिपीट करना आसान नहीं होगा. इस कठिनतम पेपर में 98.61 प्रतिशत अंक लाना अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है.”
कोटा में कैसा रहा यहां तक का सफ़र
वेद कहते हैं, "मेरा मैथ्स में इंट्रेस्ट था और मैंने कोटा के बारे में काफ़ी सुना था. यहाँ पर देश भर से टैलेंटेड बच्चे आते हैं, जिस कारण यहाँ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होती है और अच्छा करने की प्रेरणा मिलती है. इसलिए कोटा आना मेरा ख़ुद का फ़ैसला था."
अपने परिवार के सपोर्ट को याद करते हुए कहते हैं, "परिवार का पूरा सपोर्ट रहा है. कभी टेस्ट में कम मार्क आए तो उन्होंने कभी भी मेरे हौसले को कम नहीं होने दिया. उन्होंने हमेशा मुझे अच्छे मार्क लाने के लिए प्रेरित किया."
"मेरे परिवार ने मेरे लिए बहुत त्याग भी किया है. मेरे माता-पिता इंदौर से कोटा मुझसे मिलने आते थे. घर को संभालने में दिक्क़त होती थी लेकिन उन्होंने इसकी आँच मेरी पढ़ाई पर नहीं आने दी.''
आए दिन कोटा में स्टूडेंट्स की ख़ुदकुशी पर वेद कहते हैं, "मैं घर से दूर रह कर भी अपने परिवार से हमेशा संपर्क में था. परिवार से हमेशा संपर्क में रहने के कारण कभी निराशा नहीं हुई."
वेद के पिता योगेश लाहोटी इंदौर में ही एक नामचीन कंपनी में मैनेजर पद पर कार्यरत हैं.
योगेश कहते हैं, "वेद ने इतिहास रच दिया है. इससे बड़ी कोई ख़ुशी हमारे लिए नहीं हो सकती है. अभी तक किसी भी स्टूडेंट को इतने मार्क्स नहीं आए हैं."
माँ जया लाहोटी क्या कहती हैं?
वेद लाहोटी माँ जया लाहोटी कहती हैं, “अपनी ख़ुशी शब्दों में बयां नहीं कर सकती. जेईई एडवांस परीक्षा के इतिहास का सबसे अच्छा परिणाम अपना बच्चा लाए तो कौन माँ ख़ुश नहीं होगी.''
जया कहती हैं, "वेद को दो साल हॉस्टल में रखा था. मैं हर महीने उससे मिलने आती थी. मुझे घर को भी मैनेज करना पड़ता था और वेद का भी ध्यान रखना पड़ता था. उसकी आवाज़ से अगर कभी मुझे लगता था कि परेशान है तो मोटिवेट करती थी. उसको प्रॉपर डायट और एक्सरसाइज के लिए भी गाइड करती थी."
स्कूल में भी रहे हैं टॉपर
वेद लाहोटी का जन्म 25 दिसंबर 2006 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था. शुरुआती स्कूली शिक्षा इंदौर से हुई और साल 2022 की मई में एक सपना लिए वह कोटा आ गए थे.
वेद ने दसवीं और बारहवीं कोटा में जेईई की तैयारी करते हुए ही की. उन्होंने कक्षा दसवीं में 98.6 प्रतिशत और कक्षा बारहवीं में 97.6 प्रतिशत अंक मिले.
वेद अपने 78 साल के नाना आरसी सोमानी को अपना आदर्श मानते हैं, सोमानी सरकारी सेवाओं से रिटायर हुए हैं.
वेद के परिणाम के बाद उनके परिवार से सबसे ज़्यादा डांस करने वाले उनके नाना आरसी सोमानी ही हैं. गुलाबी शर्ट पहने हुए उनके नाना लगातार डांस कर अपनी खुशी का इजहार कर रहे थे.
78 साल के आरसी सोमानी मध्य प्रदेश सरकार से रिटायर्ड इंजीनियर हैं. वह कहते हैं, “वो ढाई साल की की उम्र से ही मेरे साथ रहा है. उसे जहाँ भी ओलंपियाड देने या टैलेंट हंट में जाना होता था, मुझे ही साथ लेकर जाता था.”
आरसी सोमानी कहते हैं, "वेद अपने भविष्य का फैसला ख़ुद ही लेगा. लेकिन, मैं चाहता हूँ वो प्रशासनिक सेवाओं में जाए और देश सेवा में अपना सहयोग करे. वेद भी भारत में रहकर देश सेवा करना चाहता है."
कैसा होता है जेईई एडवांस का पेपर
करियर काउंसलर अमित आहूजा कहते हैं, "पेपर का स्टैंडर्ड बहुत कठिन होता है."
"आईआईटी के अच्छे और अनुभवी प्रोफेसर्स मिलकर इस पेपर को बनाते हैं और इसे कठिनतम पेपर माना जाता है."
वह मानते हैं कि पेपर कैसा होगा यह पहले से अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है.
वो कहते हैं, "इसमें न्यूमेरिकल वैल्यू बेस्ड क्वेश्चन भी आएंगे, एमसीक्यू बेस्ड क्वेश्चन भी आएंगे और पेपर पूरी तरह से अनसर्टेन होता है."
"स्टूडेंट जब पेपर देने जाता है, तब उसको मालूम होता है कि पेपर का यह लेवल है. पेपर के दौरान ही स्टूडेंट को ऑन द स्पॉट ही मालूम होता है कि पेपर की मार्किंग स्कीम यह है, पेपर का स्टैंडर्ड लेवल यह है. जेईई एडवांस का पेपर कभी भी पहले से डिफाइन नहीं होता है कि कितने क्वेश्चन होंगे और उनकी मार्किंग स्कीम क्या होगी."
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