'यमुना में ज़हर' मिलाने का आरोप लगाने वाले केजरीवाल दोषी पाए गए तो क्या हो सकता है

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- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, संवाददाता, बीबीसी हिन्दी
चुनाव आयोग ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को उन आरोपों का सबूत सौंपने को कहा है, जो उन्होंने हरियाणा की बीजेपी सरकार पर लगाए हैं.
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने हरियाणा सरकार पर यमुना के पानी में ज़हर मिलाने का आरोप लगाया है, केजरीवाल के अलावा दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने भी ऐसे ही आरोप लगाए हैं.
केजरीवाल के इन आरोपों पर अब प्रधानमंत्री मोदी ने भी उन पर पलटवार किया है.
मोदी ने कहा, "ये सिर्फ़ हरियाणा का नहीं, बल्कि भारतीयों का अपमान है, हमारे संस्कारों का अपमान, हमारे चरित्र का अपमान है. ये वो देश है, जहां पानी पिलाना धर्म माना जाता है. मुझे पक्का विश्वास है कि ऐसी ओछी बाते करने वालों को दिल्ली इस बार सबक सिखाएगी."

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केजरीवाल के इन आरोपों की शिकायत बीजेपी और कांग्रेस दोनों के नेताओं ने चुनाव आयोग से की और इसे काफ़ी गंभीर मामला बताया.
इसी पर चुनाव आयोग ने केजरीवाल को बुधवार शाम 8 बजे तक लगाए गए आरोपों के समर्थन में सबूत देने को कहा है.
सवाल ये है कि अगर केजरीवाल अपने लगाए गए आरोपों के समर्थन में सबूत नहीं दे पाए तो चुनाव आयोग उनके ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई कर सकता है?
भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत कहते हैं, "आदर्श आचार संहिता में कहा गया है कि आप कोई आधारहीन बात नहीं कर सकते हैं. अगर केजरीवाल की बात आधारहीन साबित हुई तो उन्हें चुनाव प्रचार न करने देने जैसा कोई आदेश चुनाव आयोग दे सकता है."
दिल्ली में विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार 3 फ़रवरी को बंद हो जाएगा और 5 फरवरी को वोट डाले जाएंगे.
वरिष्ठ वकील और कानून के जानकारी संजय हेगड़े का मानना है कि दावा सही नहीं पाए जाने की सूरत में चुनाव आयोग अधिक से अधिक केजरीवाल को चुनाव प्रचार करने से रोक सकता है.
हालाँकि उनका मानना है कि पूर्व में पीएम नरेंद्र मोदी समेत कई नेता आपत्तिजनक बयान दे चुके हैं.
हेगड़े कहते हैं, "चुनाव आयोग ऐसे मामलों में क्या कर सकता है, इससे पहले भी लोकसभा चुनाव में कई तरह के बयान नेताओं ने दिए. तब चुनाव आयोग ने उस पर क्या किया? वो ज्यादा से ज्यादा केजरीवाल को चुनाव प्रचार से रोक सकते हैं, इससे ज्यादा कुछ नहीं."
'नरसंहार' जैसे शब्द के इस्तेमाल पर संजय हेगड़े कहते हैं कि इस मामले में हरियाणा की जल बोर्ड जैसी संस्था केजरीवाल के ख़िलाफ़ मानहानि का मुकदमा कर सकती है.
केजरीवाल के ख़िलाफ़ मामला कितना गंभीर

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दिल्ली में चल रहे चुनाव प्रचार के बीच अरविंद केजरीवाल के आरोपों ने एक तरह का सियासी भूचाल ला दिया है. इस मामले में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तक केजरीवाल की शिकायत करने चुनाव आयोग पहुंच गए.
आम बजट की तैयारियों के बीच निर्मला सीतारमण का चुनाव आयोग पहुंचना बताता है कि बीजेपी ने इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लिया है.
केजरीवाल के बयान के ख़िलाफ़ मिली शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने चिंता जताई है कि 'केजरीवाल के आरोपों से गंभीर परिणाम हो सकते हैं. इनमें क्षेत्रीय समूहों के बीच दुश्मनी, पड़ोसी राज्यों के निवासियों के बीच तनाव और पानी की कमी के कारण कानून-व्यवस्था की समस्याएं शामिल हैं.
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने आरोप लगाया कि 'नरसंहार' जैसी बात करने के बाद भी दिल्ली पुलिस या चुनाव आयोग ने केजरीवाल के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की है.

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ओपी रावत कहते हैं, "केजरीवाल ने अपने बयान में दो समुदायों के बीच दुश्मनी जैसी बात नहीं की है, अगर ऐसा होता वो वो करप्ट प्रैक्टिस में माना जाता और इसके लिए 2 साल तक सज़ा का भी प्रावधान है, लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं बोला है. "
यही नहीं दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने भी केजरीवाल के आरोपों को तथ्यात्मक रूप से ग़लत बता दिया. यानी पानी में ज़हर के मुद्दे पर केजरीवाल पर चौतरफा हमला शुरू हो गया.
दिल्ली जल बोर्ड की सीईओ की जिस चिट्ठी को बीजेपी ने चुनाव आयोग से की गई अपनी शिकायत में सौंपा है उसके मुताबिक़, "दिल्ली जल बोर्ड ने कहा है कि हर साल सर्दियों में अक्तूबर से फ़रवरी के बीच दिल्ली में यमुना में अमोनिया का स्तर बढ़ जाता है."
दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक़ उसके वाटर ट्रीटमेंट प्लांट अमोनिया की 1 पीपीएम की मात्रा तक को शुद्ध करने के लिहाज से बने हैं, हालांकि प्लांट में अमोनिया की 2 से 2.5 पीपीएम तक मात्रा वाले पानी में भी अलग से पानी मिलाकर ऐसे दूषित पानी को भी शुद्ध किया जा सकता है.
हालांकि चुनाव आयोग में हरियाणा सरकार की शिकायत करने पहुंची दिल्ली की सीएम आतिशी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी दिल्ली जल बोर्ड के इन्हीं आंकड़ों के आधार पर हरियाणा सरकार पर आरोपों को दोहराया.
अमोनिया कितना घातक

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दिल्ली जल बोर्ड के आंकड़ों मुताबिक़ साल 2024 में एक दिसंबर को अमोनिया की न्यूनतम मात्रा 0.94 मिलीग्राम प्रति लीटर और अधिकतम मात्रा 1.3 मिलीग्राम प्रति लीटर थी.
31 दिसंबर को यही मात्रा बढ़कर न्यूनतम 7.6 और अधिकतम 10 हो गई. जबकि 27 दिसंबर को यमुना के पानी में अमोनिया की न्यूनतम मात्रा 6.8 और अधिकतम मात्रा 7.2 मिलीग्राम प्रति लीटर थी.
दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स में क्लिनिकल इको-टॉक्सिकोलॉजी विभाग के सह संस्थापक डॉक्टर जावेद एहसान क़ादरी कहते हैं, "पानी में अमोनिया की मात्रा होती ही है, इसलिए पानी को ट्रीट कर इस्तेमाल करते हैं. अमोनिया हमारे शरीर में भी होता है लेकिन यह पेशाब वगैरह के ज़रिए निकल जाता है."
"अमोनिया न्यूरोटॉक्सिक होता है. इसकी मात्रा ज़्यादा होने से यह शरीर में कई तरह की बीमारियों को जन्म दे सकती है. इसमें लीवर, किडनी और ब्रेन जैसी कई अंगों से जुड़ी गंभीर बीमारियां शामिल हैं."
इसकी वजह से भ्रम, यादाश्त चला जाना, ज़ुबान का लड़खड़ाना, कोमा, श्वसन संबंधी बीमारी जैसी कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं.
दरअसल अमोनिया जिसका रासायनिक सूत्र 'NH₃' है, वह नाइट्रोजन और हाइड्रोजन से बना एक ज़हरीला रसायन है. इंसान का लीवर अमोनिया को यूरिया में बदल देता है और यह पेशाब के ज़रिए शरीर से बाहर निकल जाता है.
ज़्यादा अमोनिया कंज़्यूम कर लेने या मेटाबॉलिज़्म के सही तरीके से काम नहीं करने से शरीर के अंदर का यह अमोनिया बीमारियों को जन्म देता है.
अमोनिया के इसी ख़तरे के आधार पर अरविंद केजरीवाल ने यमुना के पानी में ज़हर मिलाने का आरोप हरियाणा सरकार पर लगाया है.
अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा, "भारतीय जनता पार्टी की हरियाणा की सरकार ने यमुना के पानी में ज़हर मिलाकर भेज दिया है. ये तो भला हो हमारे दिल्ली जल बोर्ड के इंजीनियर्स का कि उन्होंने पकड़ लिया. उन्होंने दिल्ली के बॉर्डर पर ही वो पानी रोक दिया."
"अगर वो पानी दिल्ली के अंदर आ जाता और पीने के पानी में मिल जाता, दिल्ली के अंदर न जाने कितने लोगों की मौत हो जाती. एक सामूहिक नरसंहार (मास जेनोसाइड) हो जाता दिल्ली के अंदर, अगर ये पानी जो भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने दिल्ली में भेजा है, इसके अंदर उन्होंने ऐसा ज़हर मिलाकर भेजा है, जिसकी सफाई दिल्ली के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में भी नहीं हो सकती."
केजरीवाल ने क्या कहा था

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"ऐसा तो कोई दुश्मन देश करता है. देखा गया था कि अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी में परमाणु बम फेंका था, कहीं दो देशों के युद्ध में बॉयोलॉजिकल वेपन्स फेंक दिए जाते हैं, कहीं दो देशों के अंदर वहां जाने वाली नदी में ज़हर मिला दिया जाता है."
केजरीवाल के इन आरोपों की शिकायत मंगलवार को बीजेपी के कई बड़े नेताओं ने चुनाव आयोग से की, इनमें केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत अन्य लोग भी शामिल थे.
भूपेंद्र यादव ने कहा, "अरविंद केजरीवाल आज एक बेहद अराजकतावादी मानसिकता से दिल्ली की राजनीति में ज़हर घोलने पर उतर आए हैं. उन्होंने एक बेहद घटिया और लोगों के मन में अनावश्यक डर पैदा करने का जो काम किया है.. वो सीधे-सीधे मॉडल कोड ऑफ़ कन्डक्ट के ख़िलाफ़ आता ही है.. हमने चुनाव आयोग को उनके भाषण का पूरा अंश दिया है."
भूपेंद्र यादव ने दावा किया, "चुनाव आयोग ने हमारी बात का पूरा संज्ञान लिया है और हमें आश्वासन दिया है कि चुनाव में जिस प्रकार की आदर्श आचार संहिता का पालन होना चाहिए, ये भाषा उस मर्यादा को तोड़ने वाली है. हमें विश्वास है कि चुनाव आयोग से हमें पूरा न्याय मिलेगा."

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दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने भी इस मुद्दे पर हरियाणा की बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
आतिशी के आरोपों के मुताबिक़, "चुनाव में हार के डर से भाजपा दिल्ली वालों को प्यासा मारना चाहती है. भाजपा अपनी हरियाणा सरकार से यमुना नदी में जहरीला पानी छुड़वा रही है. पानी में इतना अमोनिया है कि दिल्ली के 3 वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बंद होने के कगार पर हैं."
इस मुद्दे पर आतिशी ने पहले चुनाव आयोग से शिकायत की और फिर दिल्ली के उपराज्यपाल को चिट्ठी लिखकर उनपर सवाल खड़े किए हैं.
आतिशी ने चिट्ठी में उपराज्यपाल पर हरियाणा सरकार के बचाव का आरोप लगाया है.
आतिशी ने कहा है, "यमुना में अमोनिया की मात्रा अधिकतम मंज़ूर सीमा से 700% ज़्यादा है, यह एक ऐसा तथ्य है जिससे आप इनकार नहीं कर सकते, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आपने कितने रिपोर्ट के साथ छेड़छाड़ की है.."
"माना जाता है कि आपको जिन लोगों की सेवा करनी है, आप पूरी तत्परता उनके साथ धोखा कर रहे हैं. आपकी निष्ठा किसके साथ है."
इससे पहले उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने आतिशी को चिट्ठी लिखकर केजरीवाल के 'नरसंहार' के प्रयास के आरोपों को आपत्तिजनक बताया था.
दिल्ली में पानी के मुद्दे पर हरियाणा से रही है पुरानी तकरार

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दिल्ली में यमुना एक मात्र नदी है, इसका पानी हरियाणा होते हुए दिल्ली पहुंचता है. दिल्ली अपनी पानी की ज़रूरत के लिए हरियाणा से छोड़े गए पानी और उत्तर प्रदेश से आने वाले पानी पर काफ़ी ज़्यादा निर्भर करता है.
दिल्ली सरकार और हरियाणा सरकार के बीच पानी को लेकर खींचतान बहुत पुरानी है.
दिल्ली सरकार अक्सर राज्य में पानी के संकट को लेकर हरियाणा पर आरोप लगाती रही है. दोनों राज्य सरकारों के बीच यह खींचतान हर साल गर्मियों में ज़्यादा देखने को मिलती है, जब पानी की खपत बढ़ जाती है.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ राजधानी दिल्ली में पानी की ज़रूरत का 40 फ़ीसदी हरियाणा से होते हुए बहने वाली यमुना से पूरा होता है.
यमुना के इस पानी को दिल्ली के अलग-अलग वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में शुद्ध किया जाता है और इसे पाइपलाइन के ज़रिए दिल्ली के कई इलाक़ों में भेजा जाता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
















