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जयपुर-मुंबई सुपरफ़ास्ट गोलीकांड: मोहम्मद असगर का परिवार पूछ रहा है ये सवाल
- Author, चंदन जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
रेलवे सुरक्षा बल यानी आरपीएफ की ज़िम्मेदारी रेल मुसाफ़िरों की सुरक्षा की होती है, लेकिन उसी के एक जवान की गोली ने मुसाफ़िरों की जान ले ली.
ये घटना भारत में एक बड़ा सियासी सवाल बन चुकी है.
आरोपों के मुताबिक़ सोमवार सुबह जयपुर-मुंबई सुपरफ़ास्ट ट्रेन में आरपीएफ़ कॉन्स्टेबल चेतन सिंह ने गोली मारकर चार लोगों की हत्या कर दी.
इनमें तीन मुसाफ़िर और आरपीएफ के एक एएसआई भी शामिल हैं.
इस गोलीबारी में बिहार के मोहम्मद असगर की भी मौत हो गई, जो नौकरी की तलाश में मुंबई जा रहे थे.
परिवार की हालत
असगर मधुबनी ज़िले के बिसफी प्रखंड के पर्वत्ता गांव के रहने वाले थे.
उनका परिवार काफ़ी ग़रीब है और असगर की मौत के बाद गांव में मातम का माहौल है.
असगर पिछले एक साल से अपने परिवार के साथ जयपुर में रह रहे थे. वहां वो एक चूड़ी की फ़ैक्ट्री में काम कर रहे थे.
असगर के भाई ज़िकरुल्लाह के मुताबिक़ मुंबई में एक मस्ज़िद में काम करने को लेकर उनकी बात हुई थी और उसी के सिलसिले में वो मुंबई जा रहे थे.
इससे पहले कि असगर मुंबई पहुंचते ये घटना हो गई जिसमें उनकी मौत हो गई.
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मोहम्मद असगर पहले मुंबई में मज़दूरी करते थे. इस दौरान उनका परिवार गांव में ही रहता था.
एक साल पहले उन्होंने जयपुर में चूड़ी फ़ैक्ट्री में नौकरी शुरू की थी और परिवार को जयपुर लेकर चले गए.
48 साल के असगर अपने पीछे पत्नी, चार बेटियों और एक बेटे को छोड़ गए हैं. उनके सभी बच्चों की उम्र तीन से चौदह साल के बीच है. असगर के घर में मां, पांच भाई और एक बहन भी हैं.
परिवार के गुजारे के लिए असगर के एक भाई नागपुर में बिजली मिस्त्री का काम करते हैं और एक दिल्ली में राशन की दुकान पर, जबकि बाक़ी तीन भाई अभी छोटे हैं.
असगर को अब अपनी बहन की शादी भी करानी थी.
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कैसे हुई घटना?
असगर के भाई ज़िकरुल्लाह ने बीबीसी को बताया है कि रेलवे ने उन्हें भाई की मौत की जानकारी दी और शव को लाने के लिए वो नागपुर से दिल्ली आए हैं.
ज़िकरुल्लाह का कहना है कि रेलवे ने ये नहीं बताया कि उनके भाई को आरपीएफ जवान ने गोली क्यों मारी.
ख़बरों के मुताबिक़ आरपीएफ कॉन्स्टेबल चेतन सिंह अपने सीनियर एएसआई टीकाराम मीणा और अन्य साथियों के साथ जयपुर-मुंबई ट्रेन में एस्कॉर्ट ट्यूटी पर थे.
चेतन पर ही गोली चलाकर एएसआई टीकाराम मीणा और तीन अन्य मुसाफ़िरों की हत्या का आरोप है और फ़िलहाल उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया है.
जयपुर मुंबई ट्रेन में गोलीबारी के बाद मुंबई सेंट्रल के डीआरएम नीरज कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि एक बार गोली चलाने के बाद आरपीएफ कॉन्स्टेबल इधर-उधर भाग भी रहा था.
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जयपुर-मुंबई सुपरफ़ास्ट ट्रेन
इस गोलीबारी में तीन यात्रियों समेत आरपीए़फ़ के एएसआई टीकाराम मीणा की मौत हो गई है.
इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें आरपीएफ़ जवान चेतन सिंह चौधरी कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हुए नज़र आ रहे हैं.
इन टिप्पणियों के आधार पर इस घटना को नफ़रती हिंसा से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, रेलवे का कहना है कि इस घटना से पहले किसी तरह की बहस नहीं हुई है.
पश्चिमी रेलवे ने बताया है कि इस मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है जो घटना के लिए ज़िम्मेदार कारणों का पता लगाएगी.
रेलवे पुलिस ने बताया है कि चेतन सिंह चौधरी रेलवे सुरक्षा बल के जवान हैं, जो घटना के वक़्त ट्रेन में अपनी ड्यूटी पर थे.
पश्चिमी रेलवे पुलिस कमिश्नर ने ये भी बताया है कि "उनकी (चेतन सिंह) तबीयत गड़बड़ थी. इसी में उसने अपना आपा खो दिया. पहले टीकाराम को मारा फिर उसके बाद उसे जो दिखा उसे मार दिया."
इसके साथ ही रेलवे ने इस घटना से पहले किसी तरह की बहस होने से इनकार किया है.
चेतन सिंह के साथ ट्रेन में मौजूद रहे उनके सहकर्मी घनश्याम आचार्य ने भी बताया है कि गोली चलाने से पहले चेतन ने तबीयत ख़राब होने की बात कही थी.
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फ़ैक्ट फ़ाइंडिंग कमेटी
ज़िकरुल्लाह ने इस गोलीबारी से जुड़े सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे एक वीडियो का ज़िक्र किया है और गुस्सा ज़ाहिर करते हुए कहा कि यह आरपीएफ का काम नहीं है.
हालांकि बीबीसी इस वीडियो की सच्चाई की पुष्टि नहीं करता है.
लेकिन हमने इसके संबंध में पश्चिम रेलवे के प्रवक्ता से बात की और इसकी सच्चाई जानने की कोशिश की.
पश्चिम रेलवे के प्रवक्ता ने भी इस तरह के वीडियो की सच्चाई की पुष्टि करने से इनकार किया है.
उनका कहना है, "पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और हमने भी उच्च स्तर की फ़ैक्ट फ़ाइंडिंग कमेटी बनाई है. इसमें हर बिंदु की जांच हो रही है. जांच के बाद रिपोर्ट सौंपी जाएगी."
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गंभीर सियासी आरोप
वहीं, इस घटना पर सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है.
कई वीडियो में दावा किया जा रहा है कि अभियुक्त कॉन्स्टेबल चेतन राजनीतिक नारे लगा रहा था.
इन टिप्पणियों के आधार पर इस घटना को नफ़रती हिंसा से जोड़कर देखा जा रहा है.
हालांकि, रेलवे का कहना है कि इस घटना से पहले किसी तरह की बहस नहीं हुई है.
राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सांसद मनोज झा ट्वीट कर आरोप लगा चुके हैं कि हो सकता है कि आरपीएफ के कॉन्स्टेबल चेतन सिंह को मानसिक रूप से बीमार बताया जाए.
उनका आरोप है कि यह मानसिक रोग समाज में व्यापक तौर पर फैल चुका है.
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ऐसी घटना को सत्ता के लोभ में समाज में नफ़रत फ़ैलाने का नतीजा बताया है.
खड़गे ने एक ट्वीट में सरकार पर निशाना साधा है.
जबकि कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट कर आरोप लगाया है कि आरपीएफ कॉन्स्टेबल ने जो हत्याएं की हैं वह उग्र और लोगों को बांटने वाले माहौल का नतीजा है.
12956 जयुपुर-मुंबई सुपरफ़ास्ट ट्रेन में हुई इस गोलीबारी में अल्पसंख्यक समुदाय के तीन लोगों की मौत हुई है.
एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इस घटना को अल्पसंख्यकों पर आतंकी हमला बताकर ट्वीट किया है.
पीड़ित परिवार की सहायता
पश्चिम रेलवे के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया है कि ट्रेन में हुई गोलीबारी की घटना में मारे गए मुसाफ़िरों के आश्रितों को रेलवे की तरफ से 10-10 लाख़ रुपये का मुआवज़ा दिया जा रहा है.
हालांकि ख़बर लिखे जाने तक असगर के एक और भाई मोहम्मद सनाउल्लाह ने बीबीसी को बताया है कि उन्हें मुआवज़े को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है.
दूसरी तरफ़ मधुबनी ज़िला प्रशासन भी असगर के परिवार को आर्थिक मदद देने की कोशिश कर रहा है.
मधुबनी के ज़िला जन संपर्क पदाधिकारी परिमल कुमार ने बीबीसी को बताया है कि राज्य सरकार की तरफ से किसी भी तरह से अगर परिवार की मदद की जा सकती है तो प्रशासन उसके लिए कोशिश कर रहा है.
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मधुबनी ज़िला प्रशासन को इस घटना की सूचना सोमवार शाम को दी गई थी.
मधुबनी के ज़िलाधिकारी अरविंद कुमार वर्मा ने बीबीसी को बताया है कि घर के किसी सदस्य की मौत हो तो लोगों में शोक होना स्वाभाविक है, इसलिए कुछ अधिकारियों को गांव भी भेजा गया है ताकि परिवार और गांव के लोगों को सांत्वना दे सकें.
फ़िलहाल मोहम्मद सनाउल्लाह मां को सहारा देने के लिए दिल्ली से अपने गांव पहुंच गए हैं.
कुछ दिनों बाद सब अपने-अपने काम पर लौट आएंगे.
पीछे मोहम्मद असगर की पत्नी और बच्चे रह जाएंगे, जिन्हें यह भी पता नहीं कि असगर की जान क्यों गई.
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