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बिहार में सुरंग खोदकर रेल इंजन की चोरी का क्या है पूरा सच?
- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना (बिहार) से
बिहार के बरौनी में रेल इंजन की चोरी की ख़बरों को रेलवे ने पूरी तरह से झूठ बताया है.
बिहार के बरौनी में सुरंग खोदकर रेल इंजन की चोरी की ख़बर लगातार सुर्खियों में है. कई ख़बरों में दावा किया गया है कि चोरों ने सुरंग खोदकर इंजन को ही गायब कर दिया.
उसके बाद इस इंजन को कबाड़ के रूप में बेचे जाने का दावा भी ख़बरों में किया गया.
चोरी की यह घटना रेलवे के जिस इलाक़े में हुई है वह पूर्व-मध्य रेलवे यानी ईसीआर के अंतर्गत आता है.
बीबीसी ने इस ख़बर की सच्चाई जानने की कोशिश की है. हमने इसके लिए हाजीपुर में पूर्व मध्य रेलवे के प्रवक्ता वीरेंद्र कुमार सेसे बात की.
वीरेन्द्र कुमार ने बीबीसी को बताया, "यह पूरी तरह से ग़लत ख़बर है, सुरंग खोदकर कार की चोरी नहीं की जा सकती तो रेल के इंजन को कैसे गायब कर सकते हैं. चोरों ने दीवार तोड़कर इंजन के कुछ पार्ट्स चुराए थे."
उन्होंने बताया है कि जिस इंजन से ज़्यादा चोरी की गई है वह एक डीज़ल इंजन है और कुछ समय पहले तक इस्तेमाल में था. रेलवे की टीम ने छापेमारी कर चोरी किए गए पार्ट्स का 95 फ़ीसदी हिस्सा रिकवर भी कर लिया है."
वहीं इस मामले में रेल मंत्रालय की तरफ से भी बयान जारी किया गया है. मंत्रालय के प्रवक्ता अमिताभ शर्मा के मुताबिक़ इंजन चोरी की ख़बर पूरी तरह ग़लत और भ्रामक है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल यह घटना बरौनी के गढ़हरा लोको शेड की है. यहां यार्ड में क़रीब 16 रेलवे इंजन रखे हुए हैं. कई इंजनों को मेंटेनेंस के लिए भी लोको शेड में रखा जाता है. कई बार इंजन का फौरन इस्तेमाल ना होना हो तो उसे लोकोमोटिव शेड में रखा जाता है.
रेलवे के पुराने इंजन समय-समय पर कबाड़ में बेचे जाते हैं. कई बार कुछ कंपनियां भी साइडिंग में हल्के काम लेने के लिए इन इंजनों की ख़रीदारी करती हैं.
पावर प्लांट या बड़ी फ़ैक्ट्री के लिए हल्की और कम दूरी की ढुलाई के लिए भी कई जगहों पर रेलवे के इंजन का इस्तेमाल होता है.
ऐसे में निजी और सरकारी कंपनियां भी इस्तेमाल होने लायक पुराने रेल इंजनों को ख़रीद लेती हैं.
भारत में रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा करना रेलवे सुरक्षा बल यानी आरपीएफ़ की ज़िम्मेदारी होती है.
रेलवे प्रॉपर्टी से कई बार चोरी की ख़बरें भी आती हैं.
दरअसल रेलवे की पटरियां ओपन एरिया में होती हैं. इसलिए यहां तक पहुंच पाना बहुत मुश्किल नहीं होता है. इसलिए आरपीएफ़ की तरफ़ से महत्वपूर्ण जगहों पर सुरक्षाकर्मी भी तैनात किए जाते हैं.
इसके अलावा आरपीएफ़ की तरफ़ से समय-समय पर ख़ास अभियान चलाकर भी महत्वपूर्ण जगहों की जांच भी की जाती है.
गढ़हरा लोको शेड में चोरी की वारदात का पता रेलवे को क़रीब पंद्रह दिन पहले पता चला. आरोपों के मुताबिक़ कई बार यहां से रेलवे की संपत्ति को चोरी कर गायब किया गया.
रेलवे ने इसी महीने सात नवंबर को नियमित जांच के दौरान पाया कि गढ़हरा यार्ड की एक दीवार टूटी हुई है. वहां लगातार चलने से कदमों के निशान दिखाई दिए.
आरपीएफ ने उसके बाद संबंधित इंजीनियर को बुलाकर इंजनों की जांच करने को कहा. इस दौरान देखा गया कि रेलवे के पुराने इंजनों के कुछ पार्ट्स और ख़ासकर मोटर केबल काट कर गायब कर दिए गए हैं.
इनमें तांबे और एल्युमिनियम के तार की कबाड़ में भी काफ़ी कीमत होती है. जबकि लोहे के तार सस्ते होते हैं.
कैसे पकड़े गए अपराधी
रेलवे संपत्ति गायब होने के बाद रेलवे और विजिलेंस की टीम ने रात में छिपकर निगरानी की और कुछ चोरों को पकड़ा. फिर पूछताछ और उनके मोबाइल डिटेल्स की जांच की गई.
रेलवे सुरक्षा बल के मुताबिक़ सबसे पहले गुड्डू कुमार नाम के एक व्यक्ति को भागते हुए पकड़ा गया था. जबकि उस समय पांच लोग भागने में सफल रहे थे.
आरपीएफ की तरफ़ से जांच के दौरान एक से दूसरे और दूसरे से तीसरे अपराधी की पहचान की गई. इस तरह से पिछले क़रीब दो हफ़्तों में अभियान चलाकर चोरों को पकड़ा गया है.
इस मामले में मुज़फ़्फ़रपुर से सन्नी कुमार नाम के एक अभियुक्त को भी चोरी किए गए कुछ सामानों के साथ पकड़ा गया.
इस मामले में रेलवे इंजनों से क़रीब चौदह लाख़ के सामान और तार की चोरी का अनुमान लगाया है. इसका बड़ा हिस्सा बिहार के ही मुज़फ़्फ़रपुर में बेचा गया था. रेलवे ने बाद में चोरी किए गए ग्यारह लाख़ से ज़्यादा के सामान को वापस कब्ज़े में लेने का दावा किया है.
रेलवे संपत्ति की चोरी पर सज़ा
इस मामले में अंतिम जानकारी मिलने तक छह अभियुक्तों को फ़िलहाल हिरासत में लिया गया है. ये सभी बिहार के बेगुसराय जेल में हैं. जबकि कोर्ट ने पांच अन्य अभियुक्तों के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी का वारंट जारी किया है. इन सबकी तलाश फ़िलहाल जारी है.
यह मामला बेगुसराय थाने के अंतर्गत ही आता है. इनपर आरपीयूपी (रेलवे प्रॉपर्टी अनलॉफुल पज़ेशन) ऐक्ट के सेक्शन 3 'ए' के तहत केस दर्ज़ किया गया है.
आरपीयूपी ऐक्ट रेलवे की संपत्ति को ग़ैरकानूनी तरीक़े से अपने पास रखने से जुड़ा हुआ क़ानून है. इस तरह के अपराध के लिए तीन से पांच साल तक की सज़ा दी जा सकती है.
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