You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
नकली फिंगर प्रिंट और रेलवे की परीक्षा... लेकिन पकड़ा गया 'मुन्ना भाई'
- Author, लक्ष्मी पटेल
- पदनाम, बीबीसी गुजराती सेवा
एक्ज़ाम देने के लिए जो तरीका इस्तेमाल किया गया, उसे जानकर आपको 'मुन्ना भाई एमबीबीएस फ़िल्म' की याद आ जाएगी.
बीती 22 अगस्त यानी सोमवार को गुजरात के वडोदरा समेत भारत के तमाम शहरों में भारतीय रेलवे की प्रथम स्तरीय भर्ती परीक्षा आयोजित की गयी थी.
लेकिन वडोदरा के लक्ष्मीपुरा इलाके के परीक्षा केंद्र में धोखाधड़ी का चौंकाने वाला मामला सामने आया. वडोदरा पुलिस ने इस परीक्षा केंद्र से एक शख़्स को गिरफ़्तार किया है जो एक दूसरे परीक्षार्थी की जगह परीक्षा दे रहा था.
बिहार के रहने वाले इस शख़्स ने पेपर में शामिल होने के लिए असली परीक्षार्थी के अंगूठे की खाल को अपने अंगूठे में चिपका लिया. इस तरह यह शख़्स परीक्षा केंद्र में घुसने में कामयाब हो गया.
लेकिन हैंड सेनिटाइज़र ने इसके मंसूबों पर पानी फेर दिया.
इस शख़्स ने हैंड सेनिटाइज़र से तीन बार हाथ साफ़ किए जिससे अंगूठे पर लगी असली परीक्षार्थी की त्वचा हट गयी. जब परीक्षा निरीक्षकों ने इस शख़्स का फिंगरप्रिंट लिया तो भंडाफोड़ हो गया.
वडोदरा पुलिस ने इस शख़्स को गिरफ़्तार करने के साथ ही असली परीक्षार्थी को भी गिरफ़्तार किया है. इन दोनों लोगों को अदालत में पेश किया गया जिसके बाद उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया.
पुलिस ने कैसे खोला राज
वडोदरा पुलिस ने इस मामले में असली परीक्षार्थी का डीएनए टेस्ट करने का फ़ैसला किया है. फर्ज़ी परीक्षार्थी के अंगूठे से मिली त्वचा के सैंपल को टेस्टिंग के लिए फॉरेंसिक एवं साइंटिफिक लेब भेज दिया गया है.
धोखाधड़ी का ये मामला वडोदरा के लक्ष्मीपुरा क्षेत्र के परीक्षा केंद्र में सामने आया है जिसे अनंता ट्रेडर्स ने बनाया था.
टाटा कंसल्टेंसी सर्विस भारतीय रेलवे की ओर से इस परीक्षा को आयोजित करा रही थी. इस दौरान टीसीएस ने एक फर्ज़ी परीक्षार्थी को परीक्षा देते हुए पकड़ा और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. इस शिकायत के बाद पुलिस ने बिहार के एक गांव से दो लोगों को गिरफ़्तार किया है.
पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक़, टीसीएस के कर्मचारी अखिलेंद्र सिंह परीक्षा सुपरवाइज़र के रूप में तैनात थे. वह फिंगरप्रिंट स्कैनिंग डिवाइस की मदद से छात्रों का वैरिफिकेशन कर रहे थे. लेकिन परीक्षार्थी मनीष कुमार संभू प्रसाद का वैरिफिकेशन कई प्रयासों के बावजूद नहीं हो सका.
इस वजह से शक पैदा हुआ और जब अखिलेंद्र सिंह ने परीक्षार्थी का अंगूठा देखा तो वो दंग रह गए. उन्होंने इस परीक्षार्थी के अंगूठे पर त्वचा चिपकी हुई देखी है.
इसके बाद हुई पूछताछ में मनीष कुमार ने कहा कि वह राज्यगुरु गुप्ता की जगह पर परीक्षा दे रहा था.
पुलिस के मुताबिक़, परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने के बाद परीक्षार्थी का एडमिट कार्ड चेक किया जाता है. सुरक्षाकर्मियों की ओर से परीक्षार्थियों की स्कैनिंग भी की जाती है. इसके बाद छात्रों को परीक्षा देने के लिए लैब दी जाती है.
लैब देने से पहले एक अत्याधुनिक डिवाइस की मदद से परीक्षार्थियों का फिंगर प्रिंट चेक किया जाता है.
मनीष कुमार पहले राउंड में निरीक्षकों को चकमा देने में कामयाब हो गए. लेकिन उन्होंने दो - तीन बार सेनिटाइज़र से हाथ धुले जिससे उनके अंगूठे पर चिपकी त्वचा छूट गयी.
बार-बार जेब में हाथ डाल रहा था अभियुक्त
पुलिस ने बताया है कि एग़्जाम सुपरवाइज़र अखिलेंद्र सिंह ने दो-तीन बार मनीष कुमार का फिंगर प्रिंट लेने की कोशिश की लेकिन मशीन पर फिंगर प्रिंट रजिस्टर ही नहीं हुआ. इसके बाद उन्होंने तीस मिनट बाद एक बार फिर फिंगर प्रिंट लेने की कोशिश की. मगर इस बार भी सफलता नहीं मिली जिससे उन्हें कुछ संदेह हुआ.
इस दौरान मनीष कुमार लगातार अपने पैंट की जेब में हाथ डालते रहे. इससे शक बढ़ गया और उनकी उंगली पर सेनिटाइज़र डाला गया. इससे उनके अंगूठे पर चिपकी खाल बाहर आ गयी.
टीसीएस कर्मचारी जस्मिम कुमार गज्जर ने मनीष कुमार और राज्यगुरु गुप्ता के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई है. भारतीय दंड संहिता की धाराओं 419, 464, 465, 468 और 120(बी) के तहत उनके ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज किया गया है.
लक्ष्मीपुरा पुलिस स्टेशन की इंस्पेक्टर पूजा तिवारी ने बीबीसी को बताया है, "फर्जी परीक्षार्थी और असली परीक्षार्थी बिहार के एक ही गांव के रहने वाले हैं. फर्जी परीक्षार्थी ने अपने अंगूठे का प्रिंट देकर परीक्षा केंद्र में प्रवेश किया था. लेकिन अगले चरण में वह इस प्रक्रिया में सफल नहीं हो सके. इस दौरान उन्होंने दो-तीन बार अपना हाथ सेनिटाइज़र से साफ किया जिससे उनके अंगूठे पर लगी त्वचा बाहर आ गयी. और उनका पर्दाफाश हो गया."
एसीपी एस एम वरोतरिया ने बीबीसी को बताया है, "राज्यगुरु ने अपने अंगूठे को एक गरम तवे पर रखा जिससे उनके अंगूठे पर एक छाला बन गया. इसे फोड़कर उनके अंगूठे की त्वचा का फिंगर-प्रिंट बनाया. हालांकि, इस प्रक्रिया में किसी भी विशेषज्ञ की मदद नहीं ली गयी."
ये भी पढ़ें -
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)