बीएचयू रेपः अभियुक्तों की गिरफ़्तारी में देरी पर उठते सवाल-ग्राउंड रिपोर्ट

- Author, दिलनवाज़ पाशा और उत्पल पाठक
- पदनाम, वाराणसी से
आईआईटी बीएचयू का कैम्पस काफ़ी बड़ा है. इस कैम्पस के कई हिस्से ऐसे हैं जहां शाम ढलने के बाद अंधेरा हो जाता है लेकिन अब यहां हर जगह नई लाइटें लगी हैं.
बीएचयू सिक्यूरिटी की गाड़ियां अब गश्त करती रहती हैं.
बीएचयू की एक सड़क के आखिरी छोर पर रात में करीब डेढ़ बजे अपने दोस्त के साथ टहल रही आईआईटी बीएचयू की एक छात्रा के साथ गैंगरेप की घटना के बाद कैंपस में सुरक्षा के इंतज़ाम बेहतर हुए हैं.
एक नवंबर की रात करीब डेढ़ बजे बीटेक की छात्रा कैंपस के अंतिम छोर पर अपने दोस्त के साथ थी तब यहाँ घुप्प अंधेरा रहा होगा.
एफ़आईआर के मुताबिक बुलेट बाइक पर आए तीन युवकों ने छात्रा के साथ यहां गैंगरेप किया.
सर्वाइवर का आरोप है कि उसका वीडियो भी बनाया गया था और जबरदस्ती फोन नंबर भी लिया गया.
जहाँ ये घटना हुई थी, वहां आगे रास्ता बंद है. बीएचयू का कैंपस ओपन है और बाहरी लोग यहां आ-जा सकते हैं. लेकिन रात के डेढ़ बजे कैंपस के इस अंतिम छोर पर अभियुक्तों के पहुंचने का कोई स्पष्ट कारण दिखाई नहीं देता.
पुलिस जांच में पता चला है कि अभियुक्त देर रात बीएचयू कैंपस आते-जाते रहे हैं लेकिन सर्वाइवर और अभियुक्तों के बीच कोई सीधा संबंध भी नहीं है.
जांच में शामिल एक अधिकारी के मुताबिक, ‘लड़की रैंडम टार्गेट थी, अगर उस दिन वहां कोई और लड़की होती तो वो भी शायद टार्गेट होती.’
आईआईटी कैंपस के छात्रों के मुताबिक़, इस इलाक़े में पहले भी एक लड़की के साथ छेड़छाड़ की घटना हुई, लेकिन उसने मामला रिपोर्ट नहीं किया था.
आईआईटी की सुरक्षा समिति से जुड़े एक छात्र ने इस घटना की पुष्टि की है.
घटनाक्रम

छात्रा के बयान के मुताबिक वो रात डेढ़ बजे अपने दोस्त के साथ टहल रही थी जब अचानक तीन युवक बुलेट पर आए और उसका वीडियो बनाना शुरू किया. छात्रा के दोस्त को उससे अलग कर दिया और मुंह दबाकर उसे तीनों युवक एक कोने में ले गए. छात्रा का दावा है कि 10-15 मिनट तक उसके साथ जबरदस्ती की गई. छात्रा वहां से भागी और एक प्रोफेसर के घर में छिप गई.
इस दौरान उस छात्रा के दोस्त ने आईआईटी बीएचयू के अपने साथी छात्रों को जानकारी दी. सूचना के दस मिनट बाद ही पुलिस मौके पर पहुंच गई थी. कुछ देर बाद पुलिस के एसीपी स्तर के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए थे.
करीब आधे घंटे तक छात्रा को खोजा गया, इस दौरान प्रोफेसर ने उसे अपने घर के गेट तक छोड़ा और आईआईटी बीएचयू की सिक्यूरिटी समिति से जुड़े छात्रों ने वहां से उसे पेट्रोलिंग गार्ड के पास पहुंचाया.
बीएचयू की छात्रा के साथ हुई इस घटना के अगले दिन आईआईटी के छात्रों ने पूरे दिन प्रदर्शन किया.
इस दौरान छात्रा के साथ रहे एक छात्र के मुताबिक, पुलिस ने रात में ही मौके का मुआयना किया था लेकिन घटनास्थल को सील नहीं किया गया था.
पुलिस जाँच

पुलिस ने घटना के अगले दिन एफ़आईआर दर्ज कर ली थी. पहली एफ़आईआर छेड़छाड़ और वीडियो बनाने को लेकर थी. इसमें गैंगरेप की धारा 376डी नहीं जोड़ी गई थी.
हालांकि बाद में सर्वाइवर के बयान के आधार पर 8 नवंबर को एफ़आईआर में गैंगरेप की धारा जोड़ दी गई थी.
पुलिस ने इस जांच को लेकर कोई अधिकारिक बयान नहीं दिया है. बीबीसी ने वाराणसी ज़ोन के कई अधिकारियों से इस घटना को लेकर बात करने की कोशिश की लेकिन किसी ने भी जवाब नहीं दिया.
अधिकारियों ने घटना की संवेदनशीलता का भी हवाला दिया. आम तौर पर वाराणसी पुलिस ऐसी घटनाओं के सामने आने पर प्रेस रिलीज जारी करती है, लेकिन इस मामले में अभियुक्तों की गिरफ़्तारी के बाद कोई प्रेस नोट जारी नहीं किया गया.
पुलिस जांच से जुड़े एक अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, “घटना की संवेदनशीलता की वजह से गोपनीयता बरती जा रही है.”
छात्रा ने वीडियो बनाए जाने का दावा किया है लेकिन अभी तक पुलिस ने कथित वीडियो बरामद नहीं किया है.
घटनाक्रम के बाद से छात्रा के साथ रहने वाले एक छात्र के मुताबिक़, घटना को दो दिन बाद पुलिस ने उसका मेडिकल टेस्ट कराया था.
हालांकि इस छात्र का दावा है कि पीड़िता के कपड़े या कोई और सबूत उससे पुलिस ने बरामद नहीं किया है.
बीबीसी ने ईमेल के ज़रिए वाराणसी पुलिस कमिश्नर को सवाल भेजे हैं, जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट कर दिया जाएगा.
अभियुक्तों के बारे में कब पता चला?

पुलिस ने घटना के चौबीस घंटे के भीतर ही अभियुक्तों की सीसीटीवी फुटेज हासिल कर ली थी. कुछ सीसीटीवी फुटेज धुंधले भी थे. घटना के बाद से हर वक्त लड़की के साथ रहने वाले एक छात्र के मुताबिक, पुलिस ने तीन नवंबर को ये सीसीटीवी फुटेज छात्रा को दिखाए थे.
इसी बीच यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने हर्ष नाम के एक युवक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया. युवक का चेहरा सीसीटीवी में दिख रहे युवकों से मिलता-जुलता था.
पुलिस ने हर्ष की फोटो छात्रा को दिखाई, लड़की ने कहा, ‘ये हो भी सकता है और नहीं भी.’
हर्ष को करीब 48 घंटे पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया. हर्ष के परिवार और अधिवक्ता ने उनके घटना के समय कहीं और होने के सबूत पेश कर दिए थे.
हर्ष बताते हैं, ‘पुलिस ने गाड़ी में बिठाते ही मुझसे पूछा था कि मेरे बाक़ी साथी कहां हैं. मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था. इसके बाद मुझे थाने ले जाया गया जहां शीर्ष अधिकारी भी थे. मेरी फोटो खींचने के बाद वहां मौजूद एक एसीपी ने कहा- यही लड़का है. मैं मना करता रहा लेकिन किसी ने मेरी नहीं सुनी. उन्होंने मेरी फोटो आगे अपने अधिकारियों को भेजी.’

इमेज स्रोत, BHU
हर्ष को कुछ देर थाने में बिठाने के बाद पुलिस लाइन भेज दिया गया था. उन्हें वहीं बिठाकर रखा गया. हर्ष कहते हैं, ‘मेरे साथ पुलिस ने मारपीट नहीं की, बस बार-बार मुझ पर दबाव बनाया कि मैं अपने बाक़ी दो साथियों का नाम बता दूं, लेकिन मैं कहता रहा कि मैं किसी को नहीं जानता.’
इसी दौरान पुलिस को अभियुक्तों की साफ़ सीसीटीवी तस्वीरें मिल गईं थी. सर्वाइवर के साथ रहने वाले एक छात्र के मुताबिक, चार नवंबर को तीन बजे पुलिस के दो शीर्ष अधिकारी जिनमें से एक घटना की जांच कर रहे एसीपी प्रवीण थे, बीएचयू पहुंचे. यहां प्रॉक्टर ऑफिस में उन्होंने छात्रा को तीन स्पष्ट तस्वीरें दिखाईं. छात्रा ने 4 नवंबर यानी घटना के तीसरे दिन, इन युवकों की पहचान कर ली थी.
इस दौरान उसके साथ रहे इस छात्र के मुताबिक, ‘जो तस्वीरें छात्रा को दिखाईं गईं थीं, वो सीसीटीवी फुटेज से नहीं थीं, बल्कि अलग से खींची हुई थी. लड़की ने स्पष्ट कर दिया था कि अभियुक्त ये युवक ही हैं.’
यानी पुलिस चार नवंबर को अभियुक्तों की पुख्ता पहचान कर चुकी थी.
इस घटना के बाद पुलिस के लगातार संपर्क में रहा ये छात्र कहता है, ‘हम जब भी पुलिस से जांच और अभियुक्तों की गिरफ़्तारी के बारे में संपर्क करते, हमसे यही कहा जाता कि वो अभी फ़रार हैं.’
आईआईटी बीएचयू के ये छात्र और घटना की शिकार छात्रा काशी ज़ोन में एसीपी रहे प्रवीण कुमार सिंह के लगातार संपर्क में थे. प्रवीण का अब नोएडा तबादला कर दिया गया है.
उन्होंने इस घटना के बारे में कोई भी टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा, ‘अब मैं वाराणसी में नहीं हूं, आप वाराणसी के अधिकारियों से इस बारे में बात करें.’
कौन हैं अभियुक्त?

पुलिस ने घटना के ठीक दो महीने बाद तीन युवकों को 30 दिसंबर की रात को गिरफ़्तार किया. कुणाल पांडे, अभिषेक चौहान आनंद और सक्षम पटेल नाम के ये तीनों युवक वाराणसी में बीजेपी के आईटी सेल से जुड़े रहे हैं.
कुणाल पांडे सुदंरपुर नरिया के रहने वाले हैं और वाराणसी में बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख थे.
कुणाल शादीशुदा हैं और उनके पिता की बचपन में ही मौत हो गई थी. उनकी पत्नी अब मायके हैं और मां घर पर ताला लगाकर चली गई हैं.
कुणाल के घर के बाहर खड़ी एक कार पर बीजेपी के पोस्टर लगे हैं. इन्हें खुरचने की कोशिश की गई है.
यहां रहने वाले लोगों को यक़ीन नहीं हो रहा है कि मोहल्ले में सबकी मदद करने वाला युवा नेता अब गैंगरेप के मामले में जेल में बंद हैं.
उनके पड़ोस में रहने वाली एक 22 वर्षीय युवती कहती है, “मैं कुणाल को करीब दस साल से जानती हूं, जब उनका परिवार यहां रहने आया था. उन्होंने कभी ऐसी हरकत नहीं कि कोई सोच सके, वो इस मामले में शामिल होंगे.”

वो कहती हैं, “कुणाल भैया बीजेपी से जुड़े थे. योगी आदित्यनाथ की सरकार बुलडोजर चलाती है, पुलिस गोली मार देती है, कुणाल को सब पता था, ऐसे में ये यक़ीन करना और मुश्किल है कि वो बीजेपी में रहते हुए वो ऐसा कुछ कर सकते हैं.”
यहां मौजूद कई महिलाएं बताती हैं कि कुणाल उभरते हुए युवा नेता हैं और बहुत तेजी से उन्होंने बीजेपी में अपनी पकड़ बनाई थी.
उनके घर के ठीक सामने रहने वाली पचास वर्षीय महिला कहती हैं, “कुणाल का यहां बहुत 'भौकाल' था. आसपास के जुआरी शराबी उनसे डरते थे, उन्होंने जुआ बंद करा दिया था. जहां आप खड़े हैं, यहां पास में ही लोग जुआ खेलते रहते थे, अब देखिए कितनी शांति है. हमें भरोसा नहीं हो रहा है कि हमारा कुणाल ऐसा कर सकता है.”
पुलिस जांच से जुड़े एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बीबीसी को बताया है कि कुणाल और बाक़ी अभियुक्तों के ख़िलाफ़ ठोस सबूत अभी तक की जांच में मिले हैं.
लेकिन कुणाल के घर के आसपास रहने वाले लोग ये मानने को तैयार नहीं है कि वो ‘बलात्कार जैसा घिनौना काम’ कर सकते हैं.
मोहल्ले की एक महिला कहती हैं, “यहां कुणाल से सब डरते हैं. वो हमेशा आगे रहते थे. थाना चौकी में उनकी जान-पहचान थी, उन्हें सब जानते थे, किसी को भी पुलिस का कोई काम होता था वो कुणाल के पास ही आता था. हम ये मानने को तैयार ही नहीं है कि इतनी तेज़ी से राजनीति में आगे बढ़ रहा युवा ऐसा काम कर सकता है.”

कुणाल के घर से क़रीब तीन किलोमीटर दूर जिवधीपुर हरिजन बस्ती के जोल्हापुर वार्ड में अभियुक्त अभिषेक चौहान आनंद का घर है.
पुराने बने इस एक कमरे के मकान में ताला लगा है. अभिषेक का परिवार उनकी गिरफ़्तारी के बाद से ही पास के एक घर में रह रहा है. उनके पिता जब दरवाजा खोलते हैं तो इस अंधेरे कमरे में सामने एक घड़ी नजर आती है, इस घड़ी के अँगरेज़ी में एम, घड़ी के बाद डी और आई लिखा है.
अभिषेक के पिता रोते हुए कहते हैं, “मेरा बेटा 14 साल की उम्र में बीजेपी से जुड़ गया था. वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बहुत प्रभावित था और उन्हें भगवान की तरह पूजता था. 30 दिसंबर की रात अचानक भारी पुलिस बल हमारे घर आई और मेरे बेटे को उठाकर ले गया. हमें यक़ीन नहीं हो रहा है कि हमारा बेटा ऐसा कुछ कर सकता है.”
अभिषेक अब जेल में हैं. उनके पिता ने उनसे मुलाक़ात की है. वो दावा करते हैं, “अभिषेक ने मुझसे कहा है कि उसकी कोई ग़लती नहीं है, उसने कोई रेप नहीं है किया है. उसने बस इतना कहा है कि उस रात बीएचयू में उनकी लड़की से कहासुनी हुई थी और ये बात इतनी बड़ी नहीं थी कि इस बारे में वो किसी को बताता.”
अभिषेक के पिता मुन्ना चौहान कहते हैं, “मेरा बेटा पार्टी के कहने पर मध्य प्रदेश चुनाव लड़ाने गया था. फिर वापस आ गया था. महीने भर से तो वो घर पर ही था.”
अभिषेक की मां उस कमरे में रखे गद्दे दिखाते हुए कहती हैं, “मेरा बेटा पूरी तरह बीजेपी को समर्पित था. कुछ नहीं कमाता था, यहीं फर्श पर गद्दा बिछाकर सोता था. हम ही उसका ख़र्च उठाते थे. बीजेपी से जुड़ा होने की वजह से उसकी यहां अच्छी पूछ थी, स्थानीय लोग थाना-चौकी का काम कराने के लिए उसके पास आते थे.”
कमरे में रखे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पोस्टर दिखाते हुए अभिषेक के भाई सूरज बताते हैं, “उसने पार्टी के लिए बहुत काम किया है. दिन रात बीजेपी का काम करता था. प्रधानमंत्री के हर कार्यक्रम के पर्चे घर-घर बांटता था. स्थानीय बीजेपी नेताओं के कार्यक्रमों की व्यवस्था की ज़िम्मेदारी भी संभालता था."

अभिषेक का परिवार उनकी बेगुनाही का दावा करते हुए कहता है कि वो लड़-झगड़ तो सकता है लेकिन बलात्कार नहीं कर सकता.
रिश्ते में अभिषेक की बुआ रोते हुए कहती हैं, “होश संभालते ही उसने पार्टी के लिए काम किया और अब इस घटना के बाद पार्टी ने उसे अकेला छोड़ दिया है, जबकि अभी उसका गुनाह साबित नहीं हुआ है.”
यहीं से क़रीब दो सौ मीटर दूर एक पतली गली में सक्षम पटेल का घर है. सक्षम पटेल भी बीजेपी आईटी सेल से जुड़े थे. उनकी मां उषा पटेल रोते हुए कहती हैं, “मैंने जेल में अपने बेटे से बात की है, वो रो-रोकर खुद को बेगुनाह बता रहा है. वो बस इतना ही कह रहा है कि बीएचयू में लड़की से मामूली कहासुनी हुई थी.”
सुषमा पटेल कहती हैं, “मेरा बेटा दिलीप सिंह पटेल के लिए काम करता था, वो उसे सैलरी भी देते थे. वो उनका सोशल मीडिया चलाता था.”

दिलीप सिंह पटेल बीजेपी के मंडल प्रमुख हैं. बीबीसी ने उनसे बात करने की कोशिश की लेकिन कोई जवाब नहीं मिल सका. इस बात की भी पुष्टि नहीं हो सकी है कि सक्षम पटेल किस तरह से दिलीप सिंह पटेल के साथ जुड़े थे. हालांकि उनका परिवार ये दावा करता है कि दिलीप उसे हर महीने वेतन देते थे.
अपने कमरे में ज़मीन पर बिछे एक गद्दे की तरफ़ इशारा करते हुए सुषमा पटेल कहती हैं, “मेरा बेटा महीने भर से घर पर ही था. वो रोज़ यहीं सोता था, अगर उसने इतना बड़ा केस किया था तो पुलिस ने अभी तक उसे गिरफ़्तार क्यों नहीं किया था?”
सक्षम पटेल ने मुलाक़ात के दौरान अपनी मां को बताया था कि बीएचयू में उनका झगड़ा हुआ था.
हालांकि घटना के बाद उन्होंने इस बारे में परिवार के किसी सदस्य को जानकारी नहीं दी थी.
सक्षम पटेल की पहचान इलाक़े में एक उभरते हुए युवा नेता की थी. यहां रहने वाले सभी लोगों को पता है कि वो बीजेपी में काम करते थे.
एक स्थानीय युवा कहते हैं, “कोई भी काम हो सक्षम भाई करा देते थे. उनकी थाने से लेकर प्रशासन तक अच्छी पकड़ थी.”
बीजेपी ने गिरफ़्तारी के बाद इन तीनों युवकों से अपना पल्ला झाड़ लिया है.
गिरफ़्तारी में देरी पर सवाल

बीबीसी को पता चला है कि तीनों अभियुक्तों की पहचान 4 नवंबर को ही स्पष्ट हो गई थी. घटना के अगले ही दिन उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और वाराणसी में सक्रिय राजनेता अजय राय ने दावा किया था कि घटना के तीनों अभियुक्त बीजेपी से जुड़े हुए हैं. इस दावे के बाद उन पर एफ़आईआर भी दर्ज की गई थी.
अजय राय बीबीसी से बातचीत में दावा करते हैं, “मैं लंबे समय तक बीजेपी से जुड़ा रहा हूं. मेरी अभी भी बीजेपी में जान पहचान है, बीजेपी के मेरे सूत्रों से ही मुझे पता चला था कि घटना में शामिल अभियुक्त बीजेपी से जुड़े हुए हैं. पार्टी को पता था कि उसके लोगों ने बलात्कार किया है, लेकिन फिर भी सब चुप रहे. दो महीने तक उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया गया क्योंकि पार्टी उन्हें बचाना चाहती थी.”
हालांकि वाराणसी में बीजेपी ज़िला अध्यक्ष विद्यासागर राय बीबीसी से बात करते हुए कहते हैं, “ये बात सच है कि कुणाल बीजेपी से जुड़ा था, वो आईटी सेल का प्रमुख था और संगठन में बदलाव के बाद नया प्रमुख नियुक्त न होने की वजह से वो ही ज़िम्मेदारी संभाल रहा था. लेकिन ये दावा बिलकुल ग़लत है कि पार्टी को उनकी संलिप्तता के बारे में पता था. हमें उसकी गिरफ़्तारी के दिन ही ये पता चला और बाकी लोगों की तरह ही हम भी हतप्रभ थे. उसने हमारे साथ काम किया है और ये अंदाज़ा लगाना मुश्किल था कि वो ऐसा कर सकता है. किसी के दिल-दिमाग़ में क्या चल रहा है ये कोई पता भी नहीं लगा सकता.”
विद्यासागर राय कहते हैं, “इससे अधिक इस बारे में बोलना ठीक नहीं होगा.”
बीबीसी ने बीजेपी से जुड़े कई और लोगों से बात करने की कोशिश की लेकिन सभी ने मामले की संवेदनशीलता का हवाला देकर बोलने से इनकार कर दिया.
अजय राय दावा करते हैं, “जब भी बलात्कारी या अपराधी बीजेपी से जुड़े होते हैं, तब पार्टी उन्हें बचाने की कोशिश करती है. हाल ही में बीजेपी के एक विधायक बलात्कार के मामले में दोषी क़रार दिए जाने के बाद जेल गए हैं. उन पर बलात्कार का मुक़दमा विधायकी का चुनाव लड़ने से पहले का है, पार्टी ने उनकी दाग़दार छवि के बावजूद उन्हें टिकट दे दिया है. इन मामलों से पता चलता है कि पार्टी के महिला सुरक्षा के दावे खोखले हैं.”
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