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जस्टिन ट्रूडो अब इसराइल पर बयान देकर घिरे, नेतन्याहू खुलकर आए सामने
इसराइल-हमास युद्ध में जो पश्चिमी देश इसराइल के साथ खड़े हैं, उसमें एक नाम कनाडा का भी है.
27 अक्टूबर को जब संयुक्त राष्ट्र आम सभा में इसराइल और हमास के बीच मानवीय आधार पर तुरंत संघर्ष विराम लागू करने का प्रस्ताव लाया गया था, तो कनाडा ने इससे दूरी बनाई थी.
कनाडा, उन 45 देशों की लिस्ट में भारत के साथ शामिल था जो वोटिंग से अनुपस्थित रहा था.
वहीं कनाडा ने पिछले हफ़्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में उस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ वोट किया, जिसमें कब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र में इसराइली बस्तियों की निंदा की गई थी.
यानी कनाडा उन सात देशों में शामिल था, जिसने इसराइल के समर्थन में वोट किया. इस प्रस्ताव के समर्थन में 145 वोट पड़े था, ख़िलाफ़ में सात और 18 देश वोटिंग से बाहर रहे थे.
जिन्होंने इस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ वोट किया, वे देश हैं- कनाडा, हंगरी, इसराइल, मार्शल आईलैंड्स, फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेसिया, नाऊरु और अमेरिका.
एक तरफ़ कनाडा यूएन में खुलकर इसराइल के साथ खड़ा है और दूसरी तरफ़ वहाँ के प्रधानमंत्री ऐसा बयान दे रहे हैं कि इसराइल असहज दिख रहा है. कई लोगों का कहना है कि जस्टिन ट्रूडो इसराइल के मामले कन्फ़्यूज दिख रहे हैं.
मंगलवार को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि ग़ज़ा में महिलाओं, बच्चों और नवजातों की हत्या बंद होनी चाहिए.
जस्टिन ट्रूडो ने इसराइल सरकार से ज़्यादा से ज़्यादा संयम बरतने की अपील की है.
ट्रूडो ने कहा कि पूरी दुनिया टीवी और सोशल मीडिया पर देख रही है. हम डॉक्टरों, परिवार के लोगों, जीवित बचे लोगों और उन बच्चों की वेदना सुन रहे हैं, जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया है.
सात अक्टूबर से शुरू हुए इसराइल-हमास युद्ध के बाद यह पहली बार है, जब कनाडा के प्रधानमंत्री ने इसराइल की इतनी तीखी आलोचना की है.
नेतन्याहू ने दिया जवाब
उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इसराइली पीएम नेतन्याहू ने कहा कि उन्हें हमास की बर्बरता को रोकने और उसे हराने में इसराइल का साथ देना चाहिए.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि होलोकास्ट के समय यहूदियों के साथ किए गए जनसंहार के बाद का यह सबसे भयानक जनसंहार है जो हमास कर रहा है.
नेतन्याहू ने कहा कि यह इसराइल नहीं है जो जानबूझकर नागरिकों को निशाना बना रहा है, बल्कि यह हमास है जो नागरिकों के सिर काट रहा है, उन्हें जला रहा है और जनसंहार कर रहा है.
उन्होंने लिखा, “इसराइल नागरिकों को नुक़सान से दूर रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है, वहीं हमास उन्हें नुक़सान में रखने के लिए सब कुछ कर रहा है. इसराइल ने ग़ज़ा में नागरिकों को मानवीय कॉरिडोर और सुरक्षित क्षेत्र दिया है जबकि हमास उन्हें बंदूक की नोक पर सुरक्षित इलाक़ों में जाने से रोक रहा है.”
भारत के जाने-माने सामरिक विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी का कहना है, ''यूएन में इसराइल के ख़िलाफ़ प्रस्ताव में जिस तरह से वोटिंग हुई, उससे साफ़ है कि अमेरिका अलग-थलग पड़ गया है."
"ट्रूडो के मनमाने नेतृत्व वाले कनाडा को छोड़ दें तो अमेरिका को सारे सहयोगियों ने अकेले छोड़ दिया.''
ब्रह्मा चेलानी के इस ट्वीट के जवाब में वरिष्ठ पत्रकार विक्रम चंद्रा ने लिखा है, ''जो ट्रूडो भारत के मामले में नियम आधारित व्यवस्था की बात करते हैं वो फ़लस्तीनी क्षेत्र में इसराइली कब्ज़े का समर्थन कर रहे हैं. दिलचस्प है.''
अल-शिफा को लेकर विवाद
कनाडा के पीएम की यह आलोचना ऐसे समय पर आई है, जब ग़ज़ा के सबसे बड़े अस्पताल अल-शिफा हमले के चपेट में है.
इसराइली सेना का कहना है कि अस्पताल पर हमला हमास की तरफ़ से किया था, वहीं हमास ने इन आरोपों से इनकार किया है.
इसराइल ने अस्पताल पर किसी भी तरह की बमबारी से इनकार किया है, वहीं ग़ज़ा में हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इसराइल ने उन्हें कहा है कि वे अस्पताल पर हमला करेंगे, क्योंकि उनका मानना है कि हमास के लोग अस्पताल के नीचे बनी सुरंगों के अंदर छिपकर काम कर रहे हैं.
इसे लेकर अमेरिका के व्हाइट हाउस ने भी बयान जारी किया है. उसका कहना है कि वह ग़ज़ा में चल रहे इसराइली सैन्य अभियान के बारे में तो कोई विशेष बात नहीं करेगा लेकिन अमेरिका किसी अस्पताल पर हवाई हमला करने का समर्थन नहीं करता है.
अमेरिका का कहना है, “हम ऐसे अस्पताल पर हमला नहीं देखना चाहते, जहां निर्दोष, असहाय लोग फंसे हुए हैं और मेडिकल केयर पाने की कोशिश कर रहे हैं. अस्पतालों और मरीज़ों की रक्षा की जानी चाहिए.”
अल-शिफा अस्पताल में 39 प्रीमेच्योर बच्चों को भर्ती कराया गया था, जिसमें से तीन बच्चों की मौत अस्पताल में ईंधन ख़त्म होने की वजह से हो गई है.
बाक़ी बच्चे 36 प्रीमेच्योर बच्चों की हालत भी नाज़ुक बनी हुई है. अस्पताल का कहना है कि उन्हें कहीं दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए कोई तरीक़ा दिखाई नहीं दे रहा है, वहीं इसराइल ने बच्चों को बाहर निकालने के लिए इनक्यूबेटर भेजने की पेशकश की है. समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों को डॉक्टर इनक्यूबेटर में रखते हैं.
हालांकि अमेरिका, इसराइल के उस दावे का समर्थन करता है, जिसमें वह कहता है कि हमास, अल-शिफा समेत ग़ज़ा के दूसरे अस्पतालों को कमांड सेंटर की तरह इस्तेमाल कर रहा है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने पत्रकारों को बताया कि ख़ुफ़िया जानकारी से इस बात की पुष्टि हुई है कि हमास ने अपने सैन्य अभियानों को छिपाने और बंधकों को रखने के लिए अल-शिफा और दूसरे अस्पतालों के नीचे बनी सुरंगों का इस्तेमाल किया है.
ट्रूडो से सवाल
अमेरिकी मैगजीन द अटलांटिक में वरिष्ठ संपादक डेविड जेफरी फ्रम का कहना है कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इसराइल को जो फटकार लगाई है, उसका इस क्षेत्र पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि ट्रूडो तो यह पता होना चाहिए कि उनका यह बयान उन लोगों की मदद करेगा जो यहूदियों का उत्पीड़न करते हैं.
जेफरी ने कहा कि वे चुनावों में अपनी गिरावट को कम करने के लिए यहूदियों की सुरक्षा को ख़तरे में डाल रहे हैं.
एक बड़े मानवाधिकार वकील आर्सेन ऑस्ट्रोवस्की ने भी जस्टिन ट्रूडो के बयान की आलोचना की है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा, “जस्टिन ट्रूडो, आपको शर्म आनी चाहिए.”
ऑस्ट्रोवस्की ने लिखा कि इस समय इसराइल बहुत ज्यादा संयम बरत रहा है और वह एक ऐसे क्रूर और सनकी दुश्मन के ख़िलाफ़ क़ानून की हद में रहकर ही काम कर रहा है, जिसने अस्पतालों को कमांड सेंटर, हथियार डीपो, सुरंगों और लॉन्चिंग पैड में बदल दिया है.
उन्होंने कहा कि इसराइल के इस दावे का समर्थन न सिर्फ़ ब्रिटेन बल्कि जर्मनी, यूरोपीय संघ और अमेरिका तक करता है, ऐसे में आपने अपनी नैतिकता खो दी है.
ऑस्ट्रोवस्की ने लिखा कि जस्टिन ट्रूडो ने कनाडा को पश्चिम में अकेला कर दिया है और ऐसा करने से सिर्फ़ हमास को बढ़ावा मिलेगा और कनाडा में यहूदी विरोधी लोगों को इससे बल मिलेगा.
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