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भरपूर नींद और आराम के बावजूद क्या आप हर समय थका हुआ महसूस करते हैं?
कुछ लोगों को यह शिकायत रहती है कि वे रात को भरपूर नींद लेते हैं फिर भी उन्हें हर समय थकान महसूस होती है. जबकि वे कसरत या कोई भारी मेहनत वाला काम भी नहीं कर रहे होते.
क्या आपको भी ऐसा लगता है, अगर हां तो आप अकेले नहीं हैं.
साल 2023 में तीन महाद्वीपों में किए गए 91 शोधों की पड़ताल में पाया गया कि दुनिया भर में हर पांच में से एक वयस्क शख़्स को कम से कम छह महीने तक लगातार ऐसा महसूस हुआ कि वो थके हुए हैं. जबकि उनके शरीर में कोई बीमारी या और समस्या नहीं थी.
बीबीसी फ़्यूचर पर छपे लेख के अनुसार, अमेरिका का उदाहरण लें तो वहां नेशनल स्लीप फाउंडेशन ने 1000 वयस्कों पर शोध किया था.
इसमें ये पाया गया कि शोध में शामिल किए गए 33 फ़ीसदी लोग हफ़्ते में दो से चार दिन ऐसा महसूस करते हैं मानो उन्हें नींद आ रही हो.
आठ में से एक व्यक्ति थकान से परेशान
वहीं ‘यूगव’ ने ब्रिटेन में 1700 लोगों पर शोध किया था.इनमें से एक चौथाई का कहना था कि उन्हें ज़्यादातर समय थकान महसूस होती है.
हर आठ में से एक ने कहा कि वे तो हर वक़्त थका हुआ महसूस करते हैं.
कई शोधों में ऐसा भी पाया गया है कि पुरुषों के मुक़ाबले थकान महसूस करने वाली महिलाओं की संख्या ज़्यादा है.
स्कॉटलैंड के एबरडीन में बतौर फ़ैमिली डॉक्टर काम करने वालीं रोज़ालिंड एडम कहती हैं कि लोगों में थकान की समस्या बहुत आम हो गई है.
उन्होंने बीबीसी फ़्यूचर के लिए सैंडी ओंग को बताया कि ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस ने इसे ‘टायर्ड ऑल द टाइम’ या टैट (टीएटीटी) नाम दिया है, मतलब- हर समय थका हुआ महूसस करना.
क्यों होती है ये थकान?
आख़िर यह थकान क्यों होती है, इसका शरीर और दिमाग़ पर क्या असर पड़ता है और इसका इलाज कैसे करना होता है?
इन सवालों को लेकर अभी वैज्ञानिकों को ज़्यादा मालूम नहीं है.
समस्या ये भी है कि इस थकान या फ़टीग को एक परिभाषा में गढ़ना भी आसान नहीं हैं.
एडम कहती हैं, “थकान होना नींद आने जैसा लगने से अलग है. भले ही इनका आपस में नाता है, लेकिन फ़टीग या थकान के कई पहूल हैं.”
क्रिस्टोफ़र बार्न्स अमेरिका की वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में ऑर्गनाइज़ेशनल बीहेवियर एंड मैनेजमेंट के प्रोफ़ेसर हैं. वह कहते हैं, “आप कई तरह से थका हुआ महसूस कर सकते हैं. जैसे कि लंबे समय तक चलने या कसरत करने के बाद होने वाली थकान एक सामान्य शारीरिक थकान है.”
लेकिन इस तरह की शारीरिक थकान से मानसिक थकान भी पैदा हो सकती है.
विकी वाइटमोर अमेरिका के मैरीलैंड के बेथेस्डा के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ में प्रोग्राम डायरेक्टर हैं. वह थकान के कारणों का अध्ययन करते हैं.
उन्होंने बीबीसी फ़्यूचर से कहा, “फ़टीग का असर सोचने-समझने और भावनाओं को जताने की क्षमता पर भी पड़ता है. जैसे कि थकान होने पर हम चिड़चिड़े हो सकते हैं.”
फ़टीग का मतलब सबके लिए अलग हो सकता है और इसके कारण भी अलग हो सकते हैं. जैसे कि ये कई सामान्य और यहां तक कि गंभीर बीमारियों का लक्षण भी हो सकती है.
बीबीसी फ़्यूचर के अनुसार, कैंसर, मल्टीपल सक्लेरोसिस, लॉन्ग कोविड और डिप्रेशन के कारण भी इंसान थकान महसूस कर सकता है.
नींद का थकान से रिश्ता
इंसान के लिए पर्याप्त नींद लेना ज़रूरी है. हर किसी की नींद की ज़रूरत अलग हो सकती है, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि सात से नौ घंटे की नींद लेना ज़रूरी है.
हमारे शरीर को मांसपेशियों की मरम्मत, इम्यूनिटी को दुरुस्त करने, भावनाओं को संभालने, यादों को संजोने और नई जानकारियों को याद करने के लिए इतने समय तक नींद की ज़रूरत होती है.
कई शोधों में पाया गया है कि जिन लोगों को लंबे समय तक फ़टीग की समस्या रहती है, उन्हें मौत का ख़तरा आम लोगों से ज़्यादा होता है. उनके एन्गज़ाइटी और डिप्रेशन की चपेट में आने का ख़तरा भी बढ़ जाता है.
कम आराम मिलने से सिर दर्द और बदन दर्द की समस्या हो सकती है. मूड ख़राब रहने का असर रिश्तों पर भी पड़ सकता है. प्रोफ़ेसर बार्न्स कहते हैं कि शोध बताते हैं कि अच्छी नींद लेने वाले जोड़े ख़ुश रहते हैं, जबकि कम नींद लेने वालों में विवाद ज़्यादा होते हैं.
यही नहीं, बार्न्स बताते हैं कि फ़टीग के कारण ऑफ़िस में भी ख़राब असर हो सकता है. काम के साथ-साथ व्यवहार और फिर ऑफ़िस का माहौल भी ख़राब हो सकता है. उनका एक शोध बताता है कि कम नींद लेने वाले बॉस अपने कर्मचारियों से दुर्व्यवहार कर सकते हैं.
कुछ शोध ये भी बताते हैं फ़टीग के कारण सड़क हादसों और अन्य जगह पर काम करते समय चूक के कारण नुक़सान होने का ख़तरा भी बढ़ जाता है.
लंबा नहीं, अच्छा आराम ज़रूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि ज़्यादा देर नींद लेने के बजाय, अच्छी नींद लेनी चाहिए. ज्यादा समय तक नींद लेना ही जरूरी नहीं. अच्छी नींद होनी चाहिए.
थकान पर शोध करने वाले वैज्ञानिक विकी वाइटमोर कहते हैं, “कुछ घंटों की गहरी नींद ज़्यादा समय ली जाने वाली कच्ची और बार-बार टूटने वाली नींद से बेहतर होती है. आप गहरी नींद लेकर जागेंगे तो ज़्यादा ताज़ा महूस करेंगे.”
जब हम सोते हैं तो दिमाग़ ग़ैरज़रूरी काम रोक देता है. वाइटमोर बताते हैं कि नींद कच्ची हो या बार-बार टूटे तो दिमाग़ से कई टॉक्सीन (विषैले पदार्थ) बाहर नहीं निकल पाते.
शोध ये भी कहते हैं कि रोज़ एक ही समय पर नींद लेना फ़ायदेमंद है, क्योंकि दिमाग़ 24 घंटे के साइकिल में काम करता है. तय समय पर सोने पर वह बेहतर ढंग से अपने काम कर पाता है. इसीलिए कुछ शोध बताते हैं कि शिफ़्ट में काम करने का लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है. इससे पेट में एसिडिटी से लेकर डायबिटीज़ होने तक का ख़तरा बना रहता है.
बीबीसी फ़्यूचर के अनुसार, अगर तय समय पर न सोएं तो आप रैपिड आई मूवमेंट वाली नींद ले पाते. ये नींद के साइकिल की चौथी अवस्था है, जिसमें आंखें ज़्यादा हलचल करती हैं.
ये वही अवस्था है जिसमें हम सपने देखते हैं. इसमें दिमाग़ दिन भर की जानकारियों और भावनाओं को समझकर संजोता है.
शोध कहते हैं कि जो लोग ऐसी नींद नहीं ले पाते, उन्हें डिप्रेशन, डिमेंशिया और पार्किन्सन्स या सोचने-समझने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
थकान के अनेक कारण
यह स्पष्ट है कि सही से आराम न मिलने का असर हमारी सेहत, रिश्तों और काम पर भी पड़ता है. लेकिन थकान के लिए सिर्फ़ नींद ही ज़िम्मेदार नहीं है.
डॉक्टर प्राची जैन दिल्ली के मैक्स अस्पताल में पीडिएट्रिक्स ओनकॉलोजी एंड हेमाटोलॉजी विभाग की इंचार्ज हैं. वह बताती हैं कि स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं के कारण भी फ़टीग हो सकता है.
उन्होंने बीबीसी के सहयोगी आदर्श राठौर से कहा, “थकान बने रहने का एक मुख्य कारण जो उभरकर आता है, वह है आयरन की कमी. महिलाओं, छोटे बच्चों और किशारों में इस वजह से कई बार एनीमिया की दिक्कत होती है, जिससे वे थकान महसूस करते हैं.”
उन्होंने कहा, “इसके अलावा, भागदौड़ भरी ज़िंदगी में लोग ये ध्यान नहीं दे पा रहे कि वो जो खाना खा रहे हैं, उसमें ज़रूरी पोषक तत्व हैं या नहीं. ज़रूरी न्यूट्रिशन, विटामिन और मिनरल वगैरह की कमी हो जाए तो हमारी सेहत ख़राब होने लगती है. इसलिए ज़रूरी है कि अगर आपको लंबे समय तक थकान महसूस होती रहे तो डॉक्टर के पास जाएं. वही सही कारण का पता लगाकर उसका हल बता सकते हैं."
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि कई बार हारमोन्स का संतुलन ठीक न होने के कारण भी दिक्कतें होती हैं. जैसे कि थायरॉइड सही से काम न करे तो भी थकान रह सकती है. ऐसे में ब्लड टेस्ट से पता लगाया जा सकता है कि कहीं कोई कमी तो नहीं है.
गुजरात में एक होटल चेन में हाइजीन मैनेजर हरीश राणा को विटामिन डी की कमी के कारण फ़टीग की दिक्कत थी और इसका पता टेस्ट से ही चला था.
उन्होंने बीबीसी सहयोगी आदर्श राठौर को बताया, “पिछले साल की शुरुआत में रूटीन बिल्कुल ठीक होने के बावजूद मुझे थकान रहने लगी थी. जब डेढ़ महीने तक ऐसा ही रहा तो मैंने डॉक्टर को दिखाया. उन्होंने आशंका जताई कि विटामिन डी की कमी हो सकती है. टेस्ट करवाने पर वही समस्या निकली. फिर मैंने डॉक्टर की सलाह पर सप्लिमेंट लिए तो बेहतर महसूस होने लगा.”
लेकिन, डॉ. रोज़ालिंड एडम कहती हैं कि शारीरिक रूप से स्वस्थ लोगों को अन्य कारणों, जैसे कि ज़्यादा काम करने, खाना ठीक से न खाने या मानसिक सेहत ठीक न होने के कारण थकान महसूस हो सकती है.
कई और कारण
इसके अलावा भी कई कारण हैं, जैसे कि किसी के घर में छोटे बच्चे हों तो उसके लिए ढंग की नींद लेना पाना संभव नहीं है.
इसी तरह शराब पीने या कैफ़ीन वाले ड्रिंक्स पीने से डीहाइड्रेशन हो जाती है, जिससे थकान होने लगती है.
डॉक्टर प्राची जैन कहती हैं कि थका हुआ महसूस करने का संबंध ख़राब लाइफ़ स्टाइल से भी हो सकता है.
वह बताती हैं, “समय पर खाना न खाना या बहुत ज़्यादा जंक फ़ूड खाना भी आपके शरीर को नुक़सान पहुंचाता है. फिर स्क्रीन देखते हुए ज़्यादा समय बिताने या सोने से पहले स्मार्टफ़ोन देखने से भी स्लीप साइकिल डिस्टर्ब होता है. इसलिए ज़रूरी है कि स्वस्थ्य लाइफ़ स्टाइल अपनाई जाए.”
नॉर्वे में काउंसिल फ़ॉर न्यूट्रिशनल एंड एन्वायरन्मेंटल मेडिसन नाम के संगठन के संस्थापक जेयर ब्योर्कलुंद का भी मानना है कि ऊर्जा से भरा महसूस करना है तो सामान्य से तरीक़े अपनाने चाहिए.
वह सुझाव देते हैं, “संतुलित आहार लें, खाने में न्यूट्रिशन का ख्याल रखें, समय पर सोएं और पर्याप्त नींद लें, कसरत करें, तनाव न लें, पानी ठीक मात्रा में पीएं और अपने आसपास अच्छा माहौल रखें.”
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