ग्लोबल हंगर इंडेक्स क्या है, स्मृति इरानी के बयान पर विवाद का क्या है पूरा मामला

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ग्लोबल हंगर इंडेक्स की ताजा रिपोर्ट पर महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति इरानी के एक बयान को लेकर विपक्ष हमलावर है.
12 अक्टूबर को जारी रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भुखमरी की स्थिति गंभीर है. 125 देशों की लिस्ट में भारत 111वें नंबर पर है, वहीं पिछले साल भारत 107वे नंबर पर था.
दरअसल शुक्रवार को हैदराबाद में केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री(फिक्की) के एक कार्यक्रम में बोल रहीं थीं.
इस दौरान उन्होंने कहा कि 'ग्लोबल हंगर इंडेक्स' जैसे सूचकांक असल मायने में भारत को नहीं दिखाते हैं और लोगों का मानना है कि यह सब बकवास है.
ग्लोबल हंगर इंडेक्स को खारिज करते हुए स्मृति इरानी ने कहा कि वे 140 करोड़ के देश में 3 हजार लोगों को फोन करके पूछते हैं कि क्या आप भूखे हैं? "यह इंडेक्स कह रहा है कि पाकिस्तान, भारत से बेहतर काम कर रहा है. क्या आप कल्पना कर सकते हैं?"
इतना ही नहीं उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि कई प्रोग्राम में हिस्सा लेने के लिए वे घर से सुबह चार बजे निकली हुई हैं और उन्हें कम से कम 10 बजे कुछ खाने को मिलेगा और "ऐसे में अगर उन लोगों का फोन मुझे आए और वे मुझे पूछें कि क्या मैं भूखी हूं, तो मैं कहूंगी- हां."

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विपक्ष ने उठाए सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने स्मृति इरानी के बयान को असंवेदनशील बताया है.
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि आपकी यह अनभिज्ञता है या फिर असंवेदनशीलता, कि भुखमरी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर आप इतना हल्के तरीके से बोल रही हैं. इस देश की महिला बाल विकास मंत्री होने के नाते ये अत्यंत चिंताजनक बात है."
श्रीनेत ने कहा कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स अल्पपोषण, चाइल्ड वेस्टिंग, चाइल्ड स्टंटिग और बाल मृत्यु दर जैसे चार मानकों पर आधारित है, जो यूएन के सस्टेनेबल गोल्स का हिस्सा हैं, जिन्हें भारत सरकार पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है.
उन्होंने कहा, "आप उन लोगों के घाव को जरूर कुरेदती हैं, जो गुरबत, गरीबी और भुखमरी के चलते रात की एक रोटी कम खाकर गुजर बसर करते हैं. शर्म आनी चाहिए."
राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने भी स्मृति इरानी के बयान पर प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह इंडेक्स किसी ऐसी कंपनी के फोन कॉल पर आधारित नहीं है जो सुबह आपको फोन करके पूछते हैं कि क्या आप भूखे हैं?
चौधरी ने लिखा कि स्मृति इरानी को इस सर्वे में भूखा या कुपोषित के रूप में नहीं दिखाया जाएगा.
राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का कहना है कि बीजेपी सरकार की गरीब विरोधी नीतियों के चलते भारत भुखमरी सूचकांक में 10 वर्षों में 63वें स्थान से फिसलकर 111वें स्थान पर आ गया है. अब केंद्र की मोदी सरकार आदतन रिपोर्ट और सूचकांक को समझने एवं स्वीकार कर नीतियों में सुधार करने की बजाय इसे झूठा और त्रुटिपूर्ण बताएगी.
क्या है ग्लोबल हंगर इंडेक्स

हर साल भुखमरी पर ग्लोबल हंगर इंडेक्स नाम से रिपोर्ट आती है. इसे दो यूरोपीय एजेंसियां जारी करती हैं जिसमें जर्मनी की वेल्ट हंगर हिल्फे और आयरलैंड की कंसर्न वर्ल्डवाइड एनजीओ शामिल है.
ग्लोबल हंगर इंडेक्स में किसी भी देश में भुखमरी की स्थिति का पता लगाने के लिए चार पैमानों का आकलन किया जाता है.
अल्पपोषण- इसमें किसी देश की वो जनसंख्या आती है जिसे हर रोज के खाने में पर्याप्त कैलोरी नहीं मिल पा रही है.
चाइल्ड वेस्टिंग- पांच साल से कम उम्र के वो बच्चे जिनका वजन उनकी लंबाई के अनुरूप कम है.
चाइल्ड स्टंटिंग- पांच साल से कम उम्र के वो बच्चे जिनकी लंबाई, उम्र के अनुरूप कम है.
बाल मृत्यु दर- पांच साल से कम उम्र के वो बच्चे जिनकी मौत हो जाती है.
इन चारों आयामों को 100 प्वाइंट का स्टैंडर्ड स्कोर दिया जाता है. अगर किसी देश को 20 से 34.9 के बीच में प्वाइंट्स मिलते हैं, तो उसे 'गंभीर' श्रेणी में 35 से 49.9 के बीच वाले देशों को 'बहुत गंभीर' श्रेणी में रखा जाता है.
रिपोर्ट में भारत की स्थिति

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2023 ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत को 125 देशों की लिस्ट में 28.7 अंक दिए गए हैं. इन अंकों के साथ भारत 'गंभीर' श्रेणी में आता है और उसका नंबर 111वां है.
रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में भारत की चाइल्ड वेस्टिंग दर सबसे ज्यादा 18.7 प्रतिशत है, जो गंभीर कुपोषण को दिखाती है.
अगर चाइल्ड स्टंटिंग की बात करें तो रिपोर्ट में भारत के 35 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे इसके शिकार हैं.
रिपोर्ट में भारत की कुपोषण दर 16.6 प्रतिशत और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 3.1 प्रतिशत है.
इन आंकड़ों को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने प्रेस रिलीज जारी कर खारिज किया है.
मंत्रालय का कहना है कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स भारत की वास्तविक स्थिति का नहीं दर्शाता है और रिपोर्ट में भुखमरी मापने के जो मानक हैं वे भी गलत हैं.
सरकार का कहना है कि इंडेक्स में जिन चार पैमानों का इस्तेमाल किया गया है, उसमें से तीन बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े हुए हैं, जो भारत की पूरी आबादी का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते हैं.
प्रेस रिलीज में कहा गया है कि भारत के कुपोषण को मापने के लिए हंगर इंडेक्स ने तीन हजार के एक बहुत छोटे नमूने को आधार बनाया है.
मंत्रालय का कहना है कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स में चाइल्ड वेस्टिंग दर 18.7 प्रतिशत बताई गई है, जबकि असल में यह दर 7.2 प्रतिशत से भी कम है, जिसे पोषण ट्रैकर पर देखा जा सकता है.
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