आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने पहलगाम हमले का किया ज़िक्र, अमेरिकी टैरिफ़ पर भी बोले

2 अक्टूबर 2025 को नागपुर में संघ के मुख्यालय में विजयादशमी कार्यक्रम के दौरान आरएसएस प्रमुख

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इमेज कैप्शन, 2 अक्टूबर 2025 को नागपुर में संघ के मुख्यालय में विजयादशमी कार्यक्रम के दौरान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत (बाएं) और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

विजयादशमी उत्सव के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने पहलगाम हमले का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा के लिए अब सतर्क और तैयार रहना होगा.

संघ प्रमुख ने अपने भाषण में अमेरिकी टैरिफ़ की भी चर्चा की और कहा कि देश को अब आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा.

उन्हें पड़ोसी देशों के राजनीतिक हालात का ज़िक्र किया और कहा कि ये भारत के लिए चिंता का विषय है. क्योंकि इन देशों से भारत के आत्मीय संबंध रहे हैं.

आरएसएस इस साल अपनी स्थापना के 100 साल मना रहा है. संघ का इस साल विजयादशमी उत्सव इसलिए भी ख़ास माना जा रहा है. हर साल विजयादशमी के मौके पर संघ प्रमुख नागपुर में संघ मुख्यालय में संबोधन करते हैं.

मोहन भागवत ने अपने संबोधन की शुरुआत गुरु तेगबहादुर को याद करते हुए की.

उन्होंने कहा, ''यह साल श्रीगुरु तेगबहादुर के बलिदान का 350वां वर्ष है. हिंद की चादर बनकर जिन्होंने समाज की अन्याय की मुक्ति के लिए अपना बलिदान दिया. ऐसे विभूति का स्मरण इस साल होगा."

उन्होंने कहा, "आज गांधी जी की भी जयंती है. उनका योगदान अविस्मरणीय है. आजादी के बाद भारत का तंत्र कैसा चले उसके बारे में विचार देने वालों में उनका नाम था."

मोहन भागवत ने कहा, ''कुछ महीनों पहले पहलगाम दुर्घटना हुई, धर्म पूछकर उनकी हत्या की गई. उसके चलते पूरे देश में क्रोध और दुख था. सेना और सरकार ने पूरी तैयारी से जवाब दिया. सारे प्रकरण में हमारे नेतृत्व की दृढ़ता का चित्र प्रकाशित हुआ. हम सबके प्रति मित्रता रखेंगे लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए सजग रहना होगा.''

'बाहर बैठी शक्तियों को खेल खेलने का मंच मिल जाता है'

संघ प्रमुख मोहन भागवत

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इमेज कैप्शन, संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने भाषण में भारत के पड़ोसी देशों में राजनीतिक बदलावों का ज़िक्र किया.

मोहन भागवत ने नेपाल, बांग्लादेश समेत भारत के कुछ पड़ोसी देशों में विरोध प्रदर्शनों और आंदोलन की ओर इशारा करते हुए कहा कि जब सरकार जनता से दूर हो जाती है तो लोग सरकार के ख़िलाफ़ हो जाते हैं.

लेकिन नाखुशी जाहिर करने के लिए जिस तरीके का इस्तेमाल होता है उससे कोई लाभ नहीं होता.

उन्होंने कहा, ''अगर हम अब तक की राजनीतिक क्रांतियों का इतिहास देखें तो उनमें से किसी ने भी अपना उद्देश्य कभी हासिल नहीं किया. कम्युनिस्ट सरकारों वाले राष्ट्रों में हुई सभी क्रांतियों ने भी अग्रम राष्ट्रों को पूंजीवादी राष्ट्रों में बदल दिया है. हिंसक प्रदर्शनों से कोई उद्देश्य हासिल नहीं होता, बल्कि देश के बाहर बैठी शक्तियों को अपना खेल खेलने का मंच मिल जाता है.''

अमेरिकी टैरिफ़ पर क्या बोले भागवत

रेशमबाग में संघ संघ संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि देते हुए मोहन भागवत

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इमेज कैप्शन, नागपुर के रेशमबाग आरएसएस के मुख्यालय में संघ संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि देते पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत.

संघ प्रमुख ने अपने भाषण में अमेरिका के टैरिफ़ का भी ज़िक्र किया.

उन्होंने कहा, ''अमेरिका ने जो नई टैरिफ़ नीति अपनाई उसकी मार सभी पर पड़ रही है. यही वजह है कि दुनिया में आपसी संबंध बनाने पड़ते हैं. क्योंकि आप अकेले नहीं जी सकते हैं.''

हालांकि उन्होंने कहा, ''ये निर्भरता मजबूरी में नहीं बदलनी चाहिए. इसलिए हमको इसको मजबूरी नहीं बनने देना है. बल्कि हमें आत्मनिर्भर होना पड़ेगा.''

उन्होंने कहा, '' अमेरिका की ओर से लागू टैरिफ़ नीति उनके अपने हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई है. लेकिन इससे सभी प्रभावित होते हैं. दुनिया एक -दूसरे पर निर्भरता के साथ काम करती है. इसी तरह किन्ही दो देशों के बीच संबंध बनाए जाते हैं. कोई भी देश अलग-थलग नहीं रह सकता. लेकिन हमें स्वदेशी पर भरोसा करने और आत्मिर्भरता पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है.''

पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने कहा- संघ में जातिगत भेदभाव नहीं

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन में कहा, ''यह अत्यंत सुखद संयोग है कि आज महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती भी है. मैं इस अवसर पर उनको श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.''

उन्होंने कहा, "आज का विजयादशमी उत्सव आरएसएस की शताब्दी का प्रतीक है. नागपुर की पावन भूमि आधुनिक भारत की कुछ महान विभूतियों की स्मृतियों से जुड़ी है. डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और डॉ. भीमराव आंबेडकर भी उनमें शामिल हैं."

कोविंद ने कहा, ''संघ में किसी प्रकार का कोई जाति भेदभाव नहीं है. इस तरह का मेरा पहला एक्सपीरियंस भी संघ में ही था. जहां पूरा सम्मान और कोई भेदभाव नहीं मिला.''

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