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रजत पाटीदार की कप्तानी अजिंक्य पर भारी, विराट कोहली का 'जादू' बरक़रार
- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
पिछले 17 सालों से ख़िताब की बाट जोह रही रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने इस साल के उद्घाटन मैच में पिछली चैंपियन कोलकाता नाइट राइडर्स को सात विकेट से हरा दिया.
कोलकाता नाइट राइडर्स ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 20 ओवरों में आठ विकेट पर 174 रन बनाए जिसके जवाब में आरसीबी ने 17वें ओवर में ही तीन विकेट पर 177 रन बना लिए.
कोलकाता की ओर से सबसे ज़्यादा 56 रन कप्तान अजिंक्य रहाणे ने बनाए.
आरसीबी के नए कप्तान रजत पाटीदार की जीत के साथ शुरुआत हुई है. उन्होंने शुरुआत में केकेआर के बनाए दबाव के जवाब में अपने स्पिन गेंदबाज़ों का इस्तेमाल किया और मैच पर नियंत्रण बनाकर अपनी नेतृत्व क्षमता की छाप छोड़ दी है.
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कोहली दिखे विराट अंदाज़ में
विराट कोहली ने पिछले सत्र में जिस अंदाज़ में बल्लेबाज़ी की थी, इस मैच में वह उससे आगे खेलते नज़र आए. कुछ समय पहले उन्हें स्पिन गेंदबाज़ों को खेलने में दिक्कत हो रही थी. पर चैंपियंस ट्रॉफी में उनके प्रदर्शन से लगा कि उन्होंने इस क्षेत्र में काफी काम किया है. इसका फायदा उन्हें इस मैच में भी देखने को मिला.
विराट ने भले ही अपना खाता चौका लगाकर खोला, पर पहले चार ओवरों में अपने ओपनिंग जोड़ीदार फिल सॉल्ट को खेलने का मौका दिया. इस कारण इस दौरान सॉल्ट के 44 रनों पर पहुंचने पर विराट 12 रन पर खेल रहे थे.
विराट ने सही मायनों में पांचवें ओवर से आक्रामक रुख़ अपनाया और जॉनसन की पहली दो गेंदों पर स्ट्रेट छक्के लगाकर ईडन गार्डंस पर शोर को चरम पर पहुंचा दिया. विराट ने एक बार मोर्चा संभाला तो टीम को जीत तक पहुंचाकर ही दम लिया.
विराट कोहली और सॉल्ट की जोड़ी पर केकेआर के गेंदबाज़ कोई प्रभाव छोड़ते नज़र नहीं आ रहे थे. इस जोड़ी ने 8.2 ओवरों में स्कोर को 95 रन तक पहुंचा दिया था. इनके खेलने के अंदाज़ से लग रहा था कि वे 15-16 ओवरों में 175 रन के लक्ष्य तक पहुंच जाएंगे.
विराट ने आईपीएल करियर का 55वां अर्धशतक लगाकर टीम की जीत तक नाबाद 59 रन बनाकर विकेट पर डटे रहे. ये भी संयोग है कि आईपीएल में उनके नाम सर्वाधिक रन होने पर उन्हें बीसीसीआई अध्यक्ष रोजर बिन्नी ने मैच शुरू होने से पहले स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया.
सॉल्ट के आने से आई है मज़बूती
फिल सॉल्ट पिछले सीज़न में केकेआर को विजेता बनाने में अहम भूमिका निभा चुके हैं. उन्होंने 185 के स्ट्राइक रेट से ज़्यादा से बल्लेबाज़ी करके 12 मैचों में 435 रन बनाए थे. उन्हें जेसन रॉय के हटने पर टीम में लिया गया था.
ऐसा लगा कि पिछले सीज़न में अभ्यास के दौरान केकेआर के गेंदबाज़ों को जमकर खेलने से वह हर गेंदबाज़ के बारे में जानते थे. इस कारण कोई भी गेंदबाज़ उनके ऊपर प्रभाव छोड़ने में कामयाब नहीं हो पा रहा था.
केकेआर के गेंदबाज़ों पर दबाव बनाने में अहम भूमिका सॉल्ट ने ही निभाई. इसके बाद में आरसीबी के अन्य बल्लेबाज़ों को भी फ़ायदा मिला.
वरुण चक्रवर्ती को केकेआर के गेंदबाज़ी आक्रमण की जान माना जाता है. पहले तीन ओवरों में यश दयाल और जॉनसन के प्रभाव नहीं छोड़ पाने पर चौथे ओवर में जब वरुण को आक्रमण पर लाया गया तो सॉल्ट ने इस ओवर में 20 रन ठोककर आक्रमण की जान निकाल दी.
हालांकि फिल सॉल्ट आख़िर में वरुण का ही शिकार बने. वह फिल सॉल्ट को कैच कराकर ओपनिंग जोड़ी को तोड़ने में कामयाब हो गए. पर वह कैच आउट होने से पहले 31 गेंदों में नौ चौकों और दो छक्कों से 56 रन की पारी खेलकर अपना काम कर गए.
रजत पाटीदार में दिखी नेतृत्व क्षमता
रजत पाटीदार ने 212 की स्ट्राइक रेट से 34 रन की पारी खेलकर टीम की जीत में अहम योगदान तो दिया ही, साथ ही केकेआर के बल्लेबाज़ी करते समय अपने कुछ गेंदबाज़ी परिवर्तनों से भी प्रभावित किया.
रिंकू सिंह के आउट होने के बाद केकेआर पर बने दबाव से उन्हें कोई निकाल सकता था, तो वह आंद्रे रसेल थे. रजत इस बात से अच्छे से वाक़िफ़ थे. इसलिए वह उनके आते ही सुयश शर्मा को अपना चौथा ओवर फेंकने के लिए ले आए और रसेल को बोल्ड करके सुयश कप्तान की उम्मीदों पर खरे उतरे.
कप्तान अजिंक्य रहाणे और सुनील नरेन के बीच आक्रामक अंदाज़ में शतकीय साझेदारी बनते समय स्कोर के 200 पार जाने की उम्मीद की जा रही थी और यह माना जाने लगा था कि मैच आरसीबी की पकड़ से दूर हो रहा है. इस स्थिति में उन्होंने अपने स्पिनरों का अच्छा इस्तेमाल करके केकेआर को दबाव में ला दिया.
रजत ने मैच के बाद कहा, "निश्चय ही मेरे ऊपर दबाव था पर दिन अच्छा गुज़रा. ऐसे ही और दिनों के आने की उम्मीद करता हूं. मेरे स्पिनरों ने बहुत दिलेरी दिखाई. साथ ही कोहली ने बहुत सहयोग दिया और उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला."
क्रुणाल ने बनाई जीत की राह
क्रुणाल पांड्या के आने से आरसीबी की गेंदबाज़ी में धार आई है. पिछले सीज़न में सुयश शर्मा का कोई अच्छा जोड़ीदार नहीं था. पर क्रुणाल के आने से स्पिन आक्रमण का रंग जमता दिखा. रहाणे और सुनील के खेलते समय उन्हें रोकना बेहद मुश्किल दिख रहा था.
कप्तान रजत पाटीदार क्रुणाल को 11वें ओवर में आक्रमण पर लाए. शुरुआत में उन्हें आक्रामक बल्लेबाज़ी का शिकार होना पड़ा. पर उन्होंने जल्द ही गेंदों में गति के बदलाव और टप्पे में विभिन्नता लाकर बल्लेबाज़ों पर अंकुश लगाना शुरू कर दिया.
यह सच है कि क्रुणाल की गेंदबाज़ी का ही यह कमाल था कि जो टीम 200 पार जाती दिख रही थी, वह 174 रन पर सीमित हो गई. उन्होंने सबसे पहले अजिंक्य रहाणे को वापस भेजा और फिर वेंकटेश अय्यर और रिंकू सिंह के विकेट निकालकर केकेआर की बल्लेबाज़ी की रीढ़ तोड़ दी. उन्होंने चार ओवरों में 29 रन देकर तीन विकेट निकाले.
आरसीबी के गेंदबाज़ी आक्रमण में जोश हेज़लवुड के आने से बहुत जान आ गई है. उन्होंने दिखाया कि वह अच्छी गति के साथ अच्छी उछाल से भी बल्लेबाज़ों को परेशान करने में महारत रखते हैं. उन्होंने अपने चार ओवरों में सिर्फ 22 रन देकर दो विकेट निकाले. उनके आने से शुरुआती ओवरों के साथ डेथ ओवरों में गेंदबाज़ी की समस्या का भी समाधान हआ है.
अजिंक्य का बल्लेबाज़ी में रंग दिखा पर कप्तानी में नहीं
रहाणे की टी-20 में छवि महेंद्र सिंह धोनी की टीम में खेलने से बदली है. वह अब जिस आक्रामकता से खेल रहे हैं, उससे केकेआर को इस सीज़न में बहुत फ़ायदा मिलने वाला है.
शुरुआत में बने दबाव से उन्होंने टीम को जिस तरह से निकाला, वह उनके बदले रूप को बयान करता है. लेकिन टीम के अन्य बल्लेबाज़ इस स्थिति को भुनाने में एकदम से असफल रहे.
यह सही है कि रिंकू सिंह, वेंकटेश अय्यर और रसेल इस मैच में नहीं चल सके, पर टीम की बल्लेबाज़ी को कमज़ोर नहीं माना जा सकता है. लेकिन सबसे प्रमुख दिक्कत यह रही कि सामने वाली टीम पर अंकुश लगाने वाली रणनीति बनाने में रहाणे सफल नहीं हो पाए.
बहुत संभव है कि इस मैच में अचानक मिली कप्तानी का दबाव रहा हो पर उन्हें गेंदबाज़ी में और बेहतर बदलाव करने की ज़रूरत होगी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित