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वीमेन प्रीमियर लीग के इस सीजन से वर्ल्ड कप के लिए कैसे बढ़ गई हैं भारत की उम्मीदें
- Author, प्रवीण
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
"हमारे लिए एक और सीजन अच्छा रहा, लेकिन हम लाइन को पार करने में कामयाब नहीं हो पाए."
दिल्ली कैपिटल्स की कप्तान मेग लैनिंग के इन शब्दों से बयां हो गया कि उनकी टीम इस बार भी अपने लिए वीमेन प्रीमियर लीग को खास बनाने से चूक गई.
दिल्ली कैपिटल्स ने लगातार वीमेन प्रीमियर लीग के लगातार तीसरे सीजन में प्वाइंट्स टेबल में टॉप पर रहते हुए फाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन मुंबई इंडियंस पहले सीजन की कहानी को दोहराते हुए दूसरी बार चैंपियन बनी.
मुंबई इंडियंस के दूसरी बार चैंपियन बनने के अलावा भी वीमेन प्रीमियर लीग का तीसरा सीजन कई मायनों में खास रहा और इस सीजन का प्रभाव आने वाले दिनों में भारतीय महिला क्रिकेट में भी देखने को मिल सकता है.
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इस साल के अंत में भारत में महिला वनडे वर्ल्ड कप का आयोजन होने जा रहा है.
वीमेन प्रीमियर लीग के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले 10 खिलाड़ियों में भारत की चार बैटर शामिल रहीं और यह वनडे वर्ल्ड कप के लिहाज से भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए काफी अच्छी बात है.
शेफाली वर्मा के फॉर्म में वापसी करने के अलावा हरमनप्रीत कौर ने कप्तानी और बल्ले से भी छाप छोड़ना जारी रखा. वहीं ऋचा घोष और हरलीन देओल के प्रदर्शन में निरंतरता भी भारतीय महिला क्रिकेट के लिए अच्छी खबर है.
इसके अलावा काशवी गौतम और प्रिया मिश्रा भारतीय महिला क्रिकेट टीम का उभरता हुआ चेहरा हो सकते हैं.
हरमनप्रीत कौर का कमाल
शनिवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में हरमनप्रीत कौर जब बल्लेबाजी करने उतरीं तो मुंबई इंडियंस ने 6 ओवर में 20 के स्कोर दो विकेट गंवा दिए थे और उनकी टीम बेहद मुश्किल में नजर आ रही थी.
लेकिन हरमनप्रीत कौर ने तेजी से रन बनाते हुए टीम के ऊपर आए दबाव को कम करने की कोशिश की. ये हरमनप्रीत कौर की 44 गेंद में खेली गई 66 रन की पारी का ही नतीजा था कि मुंबई की टीम 20 ओवर में सात विकेट के नुकसान पर 149 रन बनाने में कामयाब रही.
हरमनप्रीत कौर ने इस पारी की बदौलत मुंबई इंडियंस को दूसरी बार चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई.
इस पूरे सीजन के दौरान हरमनप्रीत कौर अच्छे फॉर्म में रहीं और उन्होंने 10 मैच में 33 के औसत और करीब 155 के स्ट्राइक रेट से 302 रन बनाए.
मैच के बाद हरमनप्रीत कौर अपनी टीम के प्रदर्शन से बेहद खुश नजर आईं और उन्होंने कहा, "ये खिताब बेहद मायने रखता है. ये पहला सीजन था जब हमने सब कुछ सही करने की कोशिश की. एक टीम के तौर पर हमने चीजों को सिंपल रखने की कोशिश की और इसमें हम कामयाब भी रहे."
शेफाली वर्मा का कमबैक
बीते साल नवंबर में शेफाली वर्मा को खराब प्रदर्शन की वजह से भारतीय टीम से बाहर कर दिया गया था. वो 10 पारियों में एक भी अर्धशतक नहीं लगा पाईं.
हालांकि ड्रॉप होने के बाद घरेलू क्रिकेट में जोरदार वापसी की और सीनियर वीमेन वनडे चैलेंजर ट्रॉफी में 97 के औसत से 388 रन बनाए. वो इस ट्रॉफी में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी भी रहीं.
शेफाली ने घरेलू क्रिकेट के बेहतर प्रदर्शन को वीमेन प्रीमियर लीग में जारी रखा. उन्होंने 9 मैच में करीब 153 के स्ट्राइक रेट से 304 रन बनाएं.
टीम में शेफाली की जगह लेने वाली प्रतिका रावल ने 6 मैच एक शतक और तीन अर्धशतक लगाकर एक अलग छाप छोड़ी है. लेकिन शेफाली का फॉर्म में वापसी करना भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए अच्छा संकेत है.
काशवी गौतम और प्रिया मिश्रा
भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए ऑलराउंडर पूजा वस्त्राकर का चोटिल होना चिंता का सबब बना हुआ है. इसके अलावा ऑलराउंडर अरुंधति रेड्डी भी अच्छे फॉर्म में नहीं हैं.
लेकिन इस सीजन से भारत को एक नया विकल्प मिल गया है और उनका नाम है काशवी गौतम. काशवी गौतम ने गेंदबाजी से कमाल तो दिखाया ही है. साथ ही उन्होंने बल्ले से भी छाप छोड़ने की कोशिश की है.
काशवी ने 9 मैच में 11 विकेट हासिल किए. सबसे खास बात उनका इकोनॉमी रेट. उन्होंने महज 6.45 के इकोनॉमी रेट से रन खर्च किए. वो इस सीजन में कप्प के बाद दूसरी सबसे किफायती गेंदबाज साबित हुईं.
उन्हें पांच पारियों में बल्लेबाजी करने का मौका मिला और उन्होंने एक बार नाबाद रहते हुए 43 रन भी बनाए.
21 साल की काशवी के अलावा 20 साल की प्रिया मिश्रा इस सीजन में अपनी लेग स्पिन से चर्चा में रहीं. उन्होंने 9 मैच में 6 विकेट हासिल किए. लेकिन खास बात ये रही कि उन्होंने अपने ये सभी 6 विकेट अंतरराष्ट्रीय बैटर को पवेलियन वापस भेज हासिल किए.
प्रिया मिश्रा की गुगली की भी इस सीजन में काफी चर्चा रही और उन्होंने दिखाया है कि वो आने वाले दिनों में भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेलने का माद्दा रखती हैं.
लेकिन ये हैं चिंता का सबब
हरलीन देओल बीते कुछ सालों से भारतीय क्रिकेट टीम का अहम हिस्सा रही हैं. हालांकि उनके प्रदर्शन में निरंतरता की कमी देखने को मिलती है. लेकिन इस सीजन में उन्होंने करीब 39 के औसत से 232 रन बनाए और ये भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए बेहद राहत की बात है.
वहीं ऋचा घोष ने 8 मैच में 38 के औसत और करीब 175 के स्ट्राइक रेट से 230 रन बनाए. उनका शानदार प्रदर्शन भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए काफी अच्छा संकेत है.
हालांकि तेज गेंदबाजी के फ्रंट पर भारतीय महिला टीम को वीमेन प्रीमियर लीग के तीसरे सीजन से कुछ खास हासिल नहीं हुआ. शिखा पांडे को 9 मैच में 11 विकेट मिले, जबकि रेणुका ठाकुर ने 7 मैच में 10 विकेट चटकाए.
तेज गेंदबाजी के मामले में मजबूती हासिल करने के लिए भारतीय टीम को अभी और खिलाड़ियों की तलाश करनी होगी.
इसके अलावा भारत की स्टार बैटर स्मृति मंधाना ने ना सिर्फ कप्तानी से निराश किया बल्कि उनका खुद का बल्ला भी ज्यादा नहीं चला. स्मृति ने 8 मैच में महज 24.62 के औसत से 197 रन ही बनाए.
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की नंबर एक ऑलरआउंडर दीप्ति शर्मा पिछले साल वीमेन प्रीमियर लीग के सबसे कामयाब ऑलरआउंडर थीं. इसी वजह से इस साल उन्हें यूपी वॉरियर्स का कप्तान भी नियुक्त किया गया.
दीप्ति कप्तानी से छाप नहीं छोड़ पाईं और उनकी टीम प्वाइंट्स टेबल में आखिरी पायदान पर रही.
कप्तानी का दबाव दीप्ति के प्रदर्शन पर देखने भी को मिला. दीप्ति का नाम इस साल ना ही सबसे ज्यादा रन बनाने वालीं 15 बैटर में शामिल रहा और ना ही सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली 15 गेंदबाजों में.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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