उत्तरकाशी में जिस सुरंग में हुआ हादसा, जानिए उसे बनाने वाली कंपनी के बारे में

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में 17 दिनों से सुरंग में फँसे 41 मज़दूरों को सुरक्षित निकाल लिया गया है.

धरासू से यमुनोत्री के लिए तैयार हो रही सड़क में शामिल सिलक्यारा-बड़कोट सुरंग का एक हिस्सा 12 नवंबर की सुबह धँस गया था.

धँसे हुए हिस्से की दूसरी तरफ़ 41 मज़दूर दो सप्ताह से अधिक समय से फँसे थे.

साढ़े चार किलोमीटर लंबे सिलक्यारा-बड़कोट टनल के निर्माण, निर्माण का काम कर रही कंपनी और कथित तौर पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं.

नेशनल हाईवेज़ एंड इंफ़्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) के मुताबिक़, एनएच 134 पर पड़ने वाले इस दो लेन के टनल निर्माण का काम नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड कर रही है.

क्या है नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी?

नवयुग इंजीनियरिंग हैदराबाद स्थित नवयुग समूह का हिस्सा है, जो बंदरगाहों और सड़कों के निर्माण, बिजली और सिंचाई परियोजनाओं जैसे क्षेत्रों में काम करती है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स का कहना है कि सुरंग में किसी तरह का ‘एस्केप पैसेज’ नहीं था, जबकि सरकार के दिशानिर्देश के अनुसार डेढ़ किलोमीटर से लंबी सुंरग में इमरजेंसी निकास होना ज़रूरी है.

‘एस्केप पैसेज' या सुरक्षित निकलने का रास्ता.. सड़कों या रेल मार्ग पर पड़ने वाली लंबी मुख्य सुंरगों के पास वो छोटी सुरंग होती है, जिन्हें इसलिए तैयार किया जाता है ताकि किसी दुर्घटना की स्थिति में लोगों को वहाँ से सुरक्षित निकाला जा सके या उन्हें मदद पहुँचाई जा सके.

इसी कारण भारतीय रेल ने 111 किलोमीटर लंबे उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक निर्माण के क्रम में 12.89 किलोमीटर लंबा एस्केप टनल तैयार किया है.

रॉयटर्स ने इमरजेंसी निकास न होने की बात दुर्घटना के बाद तैयार जाँच दल के एक सदस्य के हवाले से कही थी.

साढ़े चार किलोमीटर लंबी सिलक्यारा-बड़कोट टनल के साथ 0.33 किलोमीटर लंबे संपर्क रोड और ‘एस्केप’ टनल को साथ तैयार करने का ज़िक्र कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर भी मौजूद है.

क्या दावा किया गया था?

समाचार एजेंसी ने जिस विशेषज्ञ से बात की थी, वो उस दल का हिस्सा हैं, जिसे सरकार ने ये जाँच करने को कहा था कि दुर्घटना की वजह क्या थी और भविष्य में इसे किस तरह रोका जा सकता है.

समिति के सदस्य ने कहा है कि बचाव कार्य के बाद निर्माण में रह गई कमियों को लेकर विस्तार से जाँच होगी.

भारत सरकार ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अंतर्गत तैयार हो रहे 29 टनलों का ऑडिट करने को कहा है.

सिलक्यारा-बड़कोट सुरंग निर्माण को साल 2018 में मंज़ूरी देते समय कैबिनेट कमेटी ऑफ़ इकोनॉमिक अफ़ेयर्स ने निर्माण कार्य का कुल समय चार साल बताया था, जबकि प्रोजेक्ट की लागत 111.69 करोड़ रुपए बताई गई थी.

हालाँकि एनएचआईडीसीएल का कहना है कि अब काम साल 2024 के मध्य तक ख़त्म होने की उम्मीद है.

ये प्रोजेक्ट हिंदुओं के चार पवित्र स्थलों बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री को जोड़ने वाली चारधाम महामार्ग परियोजना का हिस्सा है.

केंद्र सरकार की 889 किलोमीटर लंबी चारधाम महामार्ग परियोजना की कुल लागत 12 हज़ार करोड़ रुपये है.

नवयुग इंजीनियरिंग ने अब तक क्या-क्या काम किए?

सिलक्यारा टनल परियोजना के डिज़ाइन से लेकर उसे तैयार करने और उसे सरकार को सौंपने की ज़िम्मेदारी नवयुग इंजीनियरिंग की है.

कंपनी ओडिशा के आस्त्रंगा और आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम बंदरगाहों को विकसित करने के साथ-साथ मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे, ब्रह्मपुत्र पर तैयार नौ किलोमीटर से लंबे पुल को तैयार करने जैसे कामों में शामिल होने की बात कहती है.

नवयुग की बेवसाइट के अनुसार कंपनी भारत के सबसे लंबे काज़ीगुंड-बनिहाल हाइवे प्रोजेक्ट का काम कर रही है.

आठ किलोमीटर से अधिक लंबा टनल श्रीनगर से जम्मू की दूरी को बहुत कम कर देगा.

नवयुग सिंचाई परियोजनाओं, समुद्री बुनियादी ढाँचे तैयार करने और पनबिजली और थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स के क्षेत्र में भी मौजूद है.

आंध्र प्रदेश के पोलावरम हाईड्रो-पावर प्लांट और पश्चिम बंगाल स्थित 500 मेगावाट का फरक्का थर्मल प्रोजेक्ट नवयुग ने ही तैयार किया है.

उत्तरकाशी सुरंग दुर्घटना ठाणे में स्मृद्धि एक्सप्रेस वे पर हुए हादसे के तक़रीबन तीन माह के दौरान ही हुई है, जिसमें 20 लोगों की मौत हो गई थी. दुर्घटना लोगों पर क्रेन गिर जाने की वजह से हुई थी.

पुलिस ने मामले में लापरवाही के कारण मौत, चोट पहुँचाना और दूसरों की सुरक्षा को ख़तरे में लाना जैसी धाराओं में केस दर्ज किया था.

निर्माण कार्य में लगी दो कंपनियों में से एक नवयुग इंजीनियरिंग थी. दूसरी कंपनी का नाम वीएसएल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड था.

आंध्र प्रदेश में जगनमोहन सरकार ने सत्ता में आने के बाद कंपनी के कई प्रोजेक्ट्स को ठेका दिए जाने की प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों का इल्ज़ाम लगाकर कैंसिल कर दिया था.

कंपनी के आगे कई हैं चुनौतियां

आर्थिक और व्यावसायिक जगत के जाने-माने दैनिक इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार इन परियोजनाओं के रद्द होने का नवयुग के बही-खातों पर बुरा असर होगा क्योंकि कंपनी ने इनके नाम पर सैकड़ों करोड़ रुपयों का क़र्ज़ बैंकों से ले रखा है.

उत्तरकाशी की घटना के बाद सोशल मीडिया पर अदानी समूह को लेकर सवाल भी उठे और दावा किया गया कि नवयुग इंजीनियरिंग में अदानी समूह की हिस्सेदारी है

इसके बाद अदानी समूह ने बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि उत्तरकाशी सुरंग परियोजना के निर्माण में वो किसी भी रूप में शामिल नहीं है.

हालाँकि अदानी इंटरप्राइज़ेज़ और नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी, एक अन्य परियोजना में साथ-साथ काम कर रहे हैं.

बीबीसी ने इन सभी मामलों पर कंपनी का पक्ष जानने के लिए उसके हैदराबाद स्थित मुख्यालय से संपर्क करने की कोशिश की. साथ ही कंपनी के प्रवक्ता को ई-मेल भी भेजा है.

उनकी तरफ़ से जवाब आने पर उसे रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा.

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