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बीमारियों के रूहानी इलाज के बहाने रेप और यौन शोषण करने वालों की पड़ताल
बीबीसी अरबी ने यौन हिंसा और शोषण की एक छिपी हुई दुनिया से पर्दा हटाया है.
रूहानी इलाज अरब जगत और मुसलमानों के बीच आम चलन में है.
रूहानी इलाज का दावा करने वालों के पास अधिकतर महिलाएं ही जाती हैं. उन्हें लगता है कि ऐसे लोग, उन पर पड़े 'जिन्नों के साये' को हटाकर, बीमारी से निजात दिला सकते हैं.
बीबीसी ने पिछले एक वर्ष में 85 महिलाओं से बात की है. इन महिलाओं ने मोरक्को और सूडान में ऐसे 65 रूहानी इलाज करने वालों के बारे में जानकारी दी है. इन लोगों पर महिलाओं ने रेप से लेकर यौन शोषण तक के आरोप लगाए हैं.
बीबीसी ने गैर सरकारी संगठनों, अदालतों, वकीलों और महिलाओं से बात करने, दुर्व्यवहार की कहानियों को इकट्ठा करने और उन्हें सत्यापित करने में महीनों बिताए हैं.
बीबीसी की एक अंडरकवर रिपोर्टर ऐसे ही एक चिकित्सक के पास इलाज करवाने का बहाना बनाकर पहुँची थी. उस व्यक्ति ने बीबीसी रिपोर्टर का यौन उत्पीड़न करने का प्रयास किया. रिपोर्टर ने वहां से भागकर ख़ुद को बचाया.
कुछ साल पहले दलाल नाम की मोरक्को की एक महिला डिप्रेशन के इलाज के लिए कासाब्लांका के करीब के एक क़स्बे में रूहानी इलाज करने वाले व्यक्ति के पास गई थी. उस वक़्त महिला की उम्र 25 वर्ष के क़रीब थी.
अध्यात्मिक इलाज करने का दावा करने वाले व्यक्ति ने दलाल को बताया कि उस पर 'प्रेमी जिन्न' का साया है.
महिला के साथ अकेले में मुलाक़ात के वक्त इस व्यक्ति ने दलाल को कुछ सूंघने के लिए कहा. उसके बाद वो बेहोश हो गईं. उसे लगता है कि वो कोई बेहोश करने की दवा ही रही होगी.
दलाल को तब तक सेक्स का कोई अनुभव नहीं था. उन्होंने बीबीसी को बताया कि जब उन्हें होश आया तो पाया कि उनके सारे कपड़े खोल दिए गए हैं और उनके साथ रेप हुआ है.
स्थानीय भाषा में राक़ी बुलाए जाने वाले इस व्यक्ति पर दलाल ख़ूब चिल्लाईं.
दलाल बताती हैं, "मैंने कहा शर्म करो, तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? उसने जवाब दिया कि मैंने ये सब जिन्न को तुम्हारे जिस्म से निकालने के लिए किया."
दलात ने इस घटना का ज़िक्र किसी से नहीं किया. एक तो वो शर्मसार थी, दूसरा उन्हें यक़ीन था कि लोग उन्हें ही दोषी मानेंगे.
कुछ हफ़्ते बाद जब वो गर्भवती हुईं तो उनके होश उड़ गए. उनके मन में अपनी जान लेने का ख़्याल तक आया.
जब दलाल ने राक़ी को बताया कि वो गर्भवती हैं तो उसने कहा कि ये जिन्न का काम है. दलाल इस अनुभव से इतनी डरी-सहमी थीं कि जब बच्चा पैदा हुआ तो उन्होंने उस पर नज़र डालने तक से इनकार कर दिया.
बच्चे का नाम तक नहीं रखा और उसे किसी और व्यक्ति को गोद दे दिया.
दलाल ने बीबीसी को बताया कि अगर उनके परिवार को इस बारे में पता चल जाता तो वे उसे जान से मार देते.
बीबीसी से मिलने वाली कई महिलाओं ने ये कहा कि अगर वो ख़ुद पर हुई ज़्यादती के बारे में रिपोर्ट लिखवातीं तो उन्हें ही दोषी माना जाता इसलिए बहुत कम महिलाओं ने इस शोषण का ज़िक्र अपने परिवार या पुलिस से किया.
कुछ महिलाओं ने तो ये भी कहा कि उन्हें डर था कि शिकायत करने पर जिन्न और नाराज़ हो जाएगा और उनसे बदला लेगा.
सूडान में सवसान नाम की महिला ने अपनी कहानी हमसे साझा की.
जब सवसान का पति अपनी दूसरी पत्नी के साथ रहने चला गया तो वो बेसहारा हो गईं. उसने मदद के लिए जिन्न भगाने वाले राक़ी का रुख़ किया.
सवसान को उम्मीद थी कि राक़ी उसे कुछ ऐसी दवा देगा जिससे उसका पति, उसके पास लौट आएगा.
लेकिन उसे उपचार की जो विधि बताई गई, उसकी उम्मीद सवसान को बिल्कुल नहीं थी.
सवसान बताती हैं, "उसने कहा मैं तुम्हारे साथ संभोग करूंगा और उससे जो तरल पदार्थ निकलेंगे, उनके ज़रिए बनी औषधि को मुझे अपने पति को पिलाना होगा."
सवसान बताती हैं कि उसके इस सुझाव को बताने के तरीके से साफ़ था कि वो बिल्कुल निडर था.
वे कहती हैं, "उसे यक़ीन था कि मैं इस बारे में पुलिस, अदालत और अपने पति से कोई बात नहीं करुंगी."
सवसान बताती हैं कि वे तुरंत वहाँ से चली आईं, उन्होंने अपने अनुभव के बारे में किसी से ज़िक्र भी नहीं किया.
सूडान में हमने 50 महिलाओं से बात की. सवसान समेत उनमें से तीन महिलाओं ने शेख़ इब्राहिम का नाम लिया.
इनमें एक महिला ऐसी भी है जो अपना नाम नहीं बताना चाहती हैं. उन्होंने हमें बताया कि शेख़ ने उन्हें शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया.
एक अन्य महिला अफ़ाफ़ ने कहा कि जब शेख़ इब्राहिम ने उनके साथ ज़ोर जबरदस्ती का प्रयास किया तो उन्होंने उसे पीछे धकेल दिया. अफ़ाफ़ ख़ुद को पूरी तरह से असहाय महसूस कर रही थी.
उन्होंने बीबीसी को बताया, "लोग ये बात नहीं मानते कि शेख इब्राहिम ऐसा कर सकता है. वो इस बात पर बिल्कुल यक़ीन नहीं करेंगे. मैं अपने पक्ष में गवाह कहाँ से लाती? उस कमरे में मुझे उसके साथ देखने वाला कोई नहीं था."
बीबीसी के लिए एक अंडरकवर रिपोर्टर शेख इब्राहिम के ख़िलाफ़ सबूत इकट्ठा करने उसके ठिकाने पर जाने के लिए तैयार हुई.
हम उस रिपोर्टर को रीम कहकर पुकार रहे हैं. रीम ने शेख को बताया कि उन्हें कोई औलाद नहीं होती.
शेख इब्राहिम ने कहा कि वो उनके लिए दुआ करेंगे और एक बोतल में कुछ पानी भी दिया. इस पानी को महय्या कहा जाता है. रीम को कहा गया इस पानी को घर ले जाए और इसको पिया करे.
रीम बताती हैं कि उसके बाद शेख़ उनके काफ़ी क़रीब आकर बैठ गया. उसने रीम के पेट पर हाथ रखा. जब रीम ने हाथ हटाने के लिए कहा तो उसने अपना हाथ थोड़ा और नीचे खिसका दिया. रीम कमरे से भागकर निकल आईं.
बाद में रीम ने बताया, “मैं तो पूरी तरह से हिल गई थी. उसका चेहरा ही बहुत ख़ौफ़नाक था.“
रीम बताती हैं कि शेख़ की हरकतों से ये बिल्कुल नहीं लगा कि वो ये सब पहली बार कर रहा था.
बीबीसी ने रीम के साथ हुए व्यवहार के बारे में शेख़ इब्राहिम से सवाल पूछे.
उन्होंने मदद मांगने आने वाली महिलाओं के साथ यौन दुर्व्यवहार से इनकार किया और अचानक इंटरव्यू देना बंद कर दिया.
शेख़ फ़ातिमा ऐसे ही लोगों के झांसे में न आने का सुझाव देती हैं.
सूडान की राजधानी ख़ार्तूम में उन्होंने महिलाओं के लिए एक रूहानी सेंटर खोला है. बीते 30 सालों से ये जगह महिलाओं को बिना किसी शोषण के डर से, रुक़याह यानी हीलिंग का अनुभव करवा रही हैं.
बीबीसी को इस सेंटर में जाने का अवसर मिला. इस सेंटर में महिलाओं को देखना एक अलग ही अनुभव था.
महिलाए बदहवास-सी थीं. शेख़ फ़ातिमा ने बताया कि ऐसी दिमाग़ी हालत में ये महिलाएं रूहानी इलाज करने वालों का शिकार बन जाती हैं.
उन्होंने बीबीसी को बताया, “कई महिलाओं ने मुझे बताया कि उन्हें यक़ीन था कि शेख़ उन्हें छूकर, शैतान को बाहर निकाल रहे हैं. उन्हें लगा कि ये ट्रीटमेंट का हिस्सा है. ये महिलाएं जो क़िस्से सुनाती हैं वो हैरान करने वाले हैं.”
बीबीसी ने मोरक्को और सूडान में राजनीतिक नेतृत्व से इस बारे में बात करने का प्रयास किया.
सूडान में डॉक्टर अला अबु ज़ैद देश के इस्मालिक अफ़ैयर विभाग में हैं.
उन्होंने स्वीकार किया कि रूहानी इलाज करने वालों को रेगुलेट करने का कोई तरीका नहीं है इसलिए ये लोग काफ़ी उत्पात मचा रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा काम अक्सर वही लोग कर रहे हैं जिनके पास और कोई काम नहीं है.
उन्होंने बीबीसी को बताया कि वो पहले भी इस काम को रेगुलेट करने का प्रयास कर चुके हैं लेकिन देश में फैली अस्थिरता के कारण ये नहीं हो सका है.
मोरक्को में इस्लामिक अफ़ेयर को मंत्री अहमद तौफ़ीक ने बताया कि उन्हें नहीं लगता कि इसके लिए कोई अलग से कानून बनाने की ज़रुरत है.
अहमद तौफ़ीक कहते हैं, "ऐसे मामलों में कानूनी तरीके से हस्तक्षेप करना मुश्किल है. इसका हल धर्म के बारे में लोगों को शिक्षित करना और उपदेश देना है.”
इतने सारे सबूत इकट्ठा करने के बाद भी मोरक्को और सूडान के अधिकारी कोई कार्रवाई करने में हिचक रहे हैं.
ऐसे में जिन्नों से निजात दिलाने के पेशे के पीछे छिपे लोगों के ख़िलाफ़ बोलने का बोझ महिलाओं के सिर पर ही है.
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