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''शब्दों में नहीं बयां कर सकती खुशी'' - सुरंग से निकले मज़दूर के परिजन ने कहा

उत्तराखंड की सुरंग में फंसे 41 मजदूरों के सुरक्षित बाहर निकलने के बाद उनके परिजनों की ओर से ख़ुशी ज़ाहिर की जा रही है.

लाइव कवरेज

कीर्ति दुबे and प्रेरणा

  1. ''शब्दों में नहीं बयां कर सकती खुशी'' - सुरंग से निकले मज़दूर के परिजन ने कहा

    उत्तराखंड की उत्तरकाशी में बनाई जा रही सुरंग में फंसे सभी 41 मज़दूर सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए हैं.

    फिलहाल सभी मज़दूर स्वास्थ्य केंद्र में ही मौजूद हैं और उनका इलाज जारी है.

    लेकिन पूरे 17 दिनों के बाद देश भर में अलग-अलग स्थानों पर रहने वाले मज़दूरों के परिजन भी राहत की सांस ले रहे हैं.

    बिहार के आरा के रहने वाले एक मज़दूर के परिवारवालों ने समाचार एजेंसी पीटीआई के साथ अपनी ख़ुशी साझा की.

    उन्होंने कहा, ''ये खुशी का दिन है. पूरा देश प्रार्थना कर रहा था और हमारी प्रार्थनाएं सुन ली गई. मैं शब्दों में नहीं बयां कर सकती.''

    अलग-अलग समाचार चैनल पर आ रही तस्वीरों में मज़दूरों के घरवाले जश्न मनाते और खुशी ज़ाहिर करते नज़र आ रहे हैं.

    इससे पहले मजदूरों के बाहर आते ही सुरंग के बाहर भी जश्न का माहौल बनते हुए देखा गया था. टीवी कैमरों पर लोग ख़ुशी में एक दूसरे को मिठाई खिलाते दिख रहे थे. इस मौके पर कुछ लोग पटाख़े जलाते भी दिख रहे थे.

    इसके साथ ही देश के तमाम राज्यों में फैले परिजन भी प्रार्थनाएं करते नज़र आ रहे थे. और इनमें से कुछ परिजनों को मजदूरों के बाहर आने के बाद मिठाई खाते दिखाया गया है.

    सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को सुरक्षित निकालने के लिए बचाव अभियान अब से लगभग 16 दिन पहले शुरू हुआ था.

    इस प्रक्रिया में लगे बचाव कर्मियों को बार - बार कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा.

    शुरुआत में बचाव दल ने हॉरिज़ोंटल यानी क्षैतिज खुदाई शुरू की ताकि सीधे रास्ते से सुरंग में फंसे मजदूरों तक पहुंचा जा सके.

    लेकिन इस प्रक्रिया में तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ा. मसलन, मलबे में सरिए और मिश्रित धातू से टकराने की वजह से ऑगर मशीन को नुकसान पहुंचा.

    और आख़िरकार वह टूट गयी जिसके बाद उसे निकलाने की दिशा में लंबा प्रयास किया गया.

    इसके बाद वर्टिकल खुदाई शुरू की गयी. लेकिन इसके साथ ही हॉरिजोंटल खुदाई की प्रक्रिया में अंतिम पांच मीटर की खुदाई मैनुअली की गयी.

    इस वजह से अब मजदूरों को मैनुअली ही बाहर निकलाने की संभावनाएं प्रबल होती दिख रही हैं.

  2. उत्तराखंड सीएम ने बताया, “सुरंग से निकले मजदूरों को मिलेगी 1 लाख की आर्थिक मदद"

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार शाम सिलक्यारा सुरंग से सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाले जाने के बाद उनसे जुड़ी जानकारी मीडिया को दी है.

    सीएम धामी ने बताया है –

    • सभी श्रमिक एक अलग वातावरण से बाहर आए हैं इसलिए हम डॉक्टरों की सलाह के अनुसार काम करेंगे.
    • उन्हें चिकित्सकीय देखरेख में रखा जाएगा, उनकी निगरानी की जाएगी लेकिन कोई भी गंभीर नहीं है.
    • सभी बचाए गए श्रमिकों को एक-एक लाख रूपये की मदद राशि दी जाएगी.
    • बौखनाग मंदिर को एक बार फिर बनाया जाएगा.
    • निर्माणाधीन सुरंग की समीक्षा की जाएगी
  3. मज़दूरों के सुरक्षित निकलने को उत्तराखंड ने बताया डबल इंजन सरकार की सफलता, कांग्रेस ने क्या कहा?

    सिलक्यारा सुरंग में फंसे सभी 41 मज़दूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है.

    उत्तराखंड सरकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस बारे में जानकारी दी है.

    सरकार का कहना है कि मज़दूरों के बचाव अभियान में राज्य और केंद्र सरकार की एजेंसियों के साथ ही सेना, विभिन्न संगठन और विश्व के नामी टनल विशेषज्ञ शामिल थे.

    रेस्क्यू ऑपरेशन में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बीआरओ, आरवीएनएल, एसजेवीएनएल, ओएनजीसी, आईटीबीपी, एनएचएआईडीसीएल, टीएचडीसी, उत्तराखंड राज्य शासन, जिला प्रशासन, भारतीय थल सेना, वायुसेना समेत तमाम संगठनों, अधिकारियों और कर्मचारियों की अहम भूमिका रही.

    उत्तराखंड सरकार ने कहा कि ये सफलता पीएम मोदी के सशक्त नेतृत्व और सीएम धामी के दृढ़ संकल्प और प्रतिबद्धता के कारण मिली है.

    कांग्रेस ने क्या कहा?

    कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा, ''17 दिन की कड़ी मेहनत और मशक्कत के बाद उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को निकाला जा रहा है.

    ''पूरा देश श्रमिकों के अद्भुत धैर्य और साहस को सलाम करता है. राष्ट्र पूरी बचाव टीम के समर्पण, कौशल और दृढ़ता की भी सराहना करता है और उन्हें दिल से धन्यवाद देता है.''

  4. उत्तराखंड टनल: पीएम मोदी ने लिखा - 'भावुक करने वाली सफलता है ये'

    भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड की सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाले जाने को भावुक करने वाली सफलता बताया है.

    पीएम मोदी ने लिखा है - "उत्तरकाशी में हमारे श्रमिक भाइयों के रेस्क्यू ऑपरेशन की सफलता हर किसी को भावुक कर देने वाली है."

    उन्होंने लिखा है - "टनल में जो साथी फंसे हुए थे, उनसे मैं कहना चाहता हूं कि आपका साहस और धैर्य हर किसी को प्रेरित कर रहा है. मैं आप सभी की कुशलता और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं. यह अत्यंत संतोष की बात है कि लंबे इंतजार के बाद अब हमारे ये साथी अपने प्रियजनों से मिलेंगे. इन सभी के परिजनों ने भी इस चुनौतीपूर्ण समय में जिस संयम और साहस का परिचय दिया है, उसकी जितनी भी सराहना की जाए वो कम है."

    पीएम मोदी ने इस बचाव अभियान में लगे लोगों के जज़्बे को भी सलाम किया है.

    सुरंग से बाहर निकाले जाने के बाद मजदूरों को सुरंग के पास बनाए गए अस्थाई अस्पताल ले जाया गया है जहां उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की जांच - परख की जाएगी.

  5. उत्तराखंड सरकार ने कहा, सुरंग में फंसे सभी 41 मज़दूर सुरक्षित बाहर निकाले गए

    उत्तरकाशी सुरंग में फंसे सभी 41 मज़दूर सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए हैं.

    उत्तराखंड सरकार ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि बचाव अभियान के 17 वें दिन सभी मज़दूर सकुशल बाहर निकाल लिए गए हैं.

    आइए नज़र डालते हैं इस सारे घटनाक्रम की टाइमलाइन पर:

    12 नवंबर

    सुरंग का एक हिस्सा ढह गया और 41 मज़दूर उसमें अंदर फंस गए

    13 नवंबर

    मज़दूरों से संपर्क स्थापित हुआ और एक पाइप के ज़रिए उनतक ऑक्सीजन पहुंचाया जाने लगा

    14 नवंबर

    800-900 मिलीमीटर डायमीटर के स्टील पाइप को ऑगर मशीन के ज़रिए मलबे के अंदर डालने की कोशिश की गई. लेकिन मलबे के लगातार गिरते रहने से दो मज़दूरों को थोड़ी चोट भी लगी...इस दौरान मज़दूरों तक खाना, पानी, आक्सीजन, बिजली और दवाएं पहुंचती रहीं

    15 नवंबर

    ऑगर मशीन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं होने की वजह से एनएचआईडीसीएल ने नई स्टेट ऑफ़ द आर्ट ऑगर मशीन की मांग की जिसे दिल्ली से एयरलिफ़्ट किया गया

    16 नवंबर

    नई ड्रिलिंग मशीन ने काम शुरू हुआ

    17 नवंबर

    लेकिन इसमें भी कुछ रुकावट आई जिसके बाद इंदौर से एक दूसरी ऑगर मशीन मंगाईगई. लेकिन फिर काम रोकना पड़ा.

    18 नवंबर

    पीएमओ के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने एक नई योजना पर काम शुरू करने का आदेश दिया

    19 नवंबर

    ड्रिलिंग बंद रही और इस दौरान केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बचावकार्यों का ज़ायज़ा लिया.

    20 नवंबर

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बचाव कार्यों का जायज़ा लेने के लिए सीएम धामी से फ़ोन पर बात की.

    21 नवंबर

    मज़दूरों का वीडियो पहली बार सामने आया

    22 नवंबर

    800 एमएम की मोटी स्टील पाइप लगभग 45 मीटर तक पहुंची. लेकिन ड्रिलिंग में शाम के समय कुछ बाधा आ गई.

    23 नवंबर

    दरार दिखने के बाद ड्रिलिंग को फिर से रोकना पड़ा

    24 नवंबर

    शुक्रवार को दोबारा ड्रिलिंग शुरू हुई लेकिन फिर रोकनी पड़ी

    25 नवंबर

    मैनुअल ड्रिंलिग शुरू की गई

    26 नवंबर

    सिल्क्यारा-बारकोट सुरंग के ऊपर पहाड़ी पर वर्टिकल ड्रिलिंग शुरू की गई.

    27 नवंबर

    वर्टिकल खुदाई जारी रही

    28 नवंबरदोपहर में रेस्क्यू टीम के लोग मज़दूरों तक पहुंचे और सुरंग में पाइप डालने का काम पूरा हुआ. इसके बाद मज़दूरों को बाहर निकालना शुरू किया गया

  6. फूल-माला और तालियों से हुआ सुरंग से निकले मज़दूरों का स्वागत

    पिछले 17 दिनों से उत्तरकाशी सुरंग में फंसे मज़दूर अब धीरे-धीरे बाहर निकाले जा रहे हैं.

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री वीके सिंह उनके स्वागत के लिए मौके पर मौजूद हैं.

    गले में फूल की माला पहना कर और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ मज़दूरों का गर्मजोशी से स्वागत किया जा रहा है.

    बीबीसी संवाददाता अनंत झणाणे के मुताबिक़ सुरंग के नज़दीकी गांव में आतिशबाजी भी हुई है और आसपास के लोग जश्न में मिठाइयां भी बांट रहे हैं.

    अब तक कुल 13 मज़दूर सुरंग से सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए हैं. बाकियों को बाहर निकालने का काम जारी है.

  7. LIVE: उत्तरकाशी की सुरंग में फंसे मज़दूरों का 17 दिनों बाद बाहर निकलना शुरू, देखिए सीधी तस्वीरें

  8. ब्रेकिंग न्यूज़, उत्तराखंड टनल: उत्तरकाशी की सुरंग से अब तक बाहर आए 13 मजदूर

    उत्तराखंड के उत्तरकाशी में स्थित सिल्कयारा की निर्माणाधीन सुरंग में पिछले 17 दिनों से फंसे 41 में से 13 मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया है.

    समाचार एजेंसी एएनआई पर आ रही तस्वीरों में मज़दूर एम्बुलेंस से सुरक्षित बाहर निकलते दिख रहे हैं.

    इन मजदूरों को एम्बुलेंस के ज़रिए सीधे चिन्यालीसौड़ के स्वास्थ्य केंद्र लाया जाएगा.

    डॉक्टर्स की निगरानी में उनका यहां इलाज किया जाएगा.

    कैसे फंसे थे मज़दूर?

    ये हादसा आज से लगभग 17 दिन पहले दिवाली के दिन हुआ था.

    उस वक़्त ये मजदूर इसी सुरंग में काम कर रहे थे. लेकिन सुरंग धंसने के साथ ही मजदूर 60 मीटर लंबी मलबे की दीवार के पीछे धंस गए.

    इसके बाद धीरे-धीरे मलबे को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई.

    इस प्रक्रिया में राष्ट्रीय के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद ली गयी.

  9. उत्तरकाशी सुरंग के बाहर लगे कैमरों से लाइव, देखिए सीधी तस्वीरें

  10. ब्रेकिंग न्यूज़, उत्तराखंड टनल: हरपाल सिंह ने बताया, 'आधे घंटे में बाहर आता दिखेगा पहला मजदूर'

    उत्तराखंड के उत्तरकाशी में बनाई जा रही सिलक्यारा सुरंग में फंसे मजदूरों के निकलने की प्रक्रिया शुरू होती दिख रही है.

    ज़ोजिला टनल प्रोजेक्ट के प्रमुख हरपाल सिंह ने बताया है कि 'सफलता मिल गयी है, मजदूर नज़र आ रहे हैं.'

    उन्होंने कहा है कि "अगर सब कुछ ठीक ढंग से हुआ तो आप आधे घंटे के अंदर पहले मजदूर को सुरंग से बाहर निकलते हुए देखेंगे."

    इससे पहले समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए ऑगर मशीन के ऑपरेटर की ओर से जानकारी दी गयी थी कि मजदूरों को अगले दो घंटे में निकाल लिया जाएगा. अगले 15 मिनट में मज़दूरों बाहर निकलने शुरू हो जाएंगे.

    इस अधिकारी ने बताया है कि एनडीआरएफ़ की टीमों ने मजदूरों को बाहर निकलाने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है.

    इन मजदूरों को स्ट्रेचर पर लिटाकर पाइपों के ज़रिए निकाला जाएगा.

    इन स्ट्रेचरों के नीचे पहिए लगे हुए हैं ताकि उसे पाइप के अंदर से आसानी से खींचा जा सके.

    एनडीआरएफ के चार सदस्यों की कुल तीन अलग-अलग टीमें सुरंग के अंदर तैनात हैं.

    अब से 17 दिन पहले सुरंग में मिट्टी धंसने से ये मजदूर लगभग 60 मीटर चौड़ी मलबे की दीवार के पीछे फंस गए थे.

    इसके बाद से इन मजदूरों को बाहर निकालने की कोशिशें जारी है. इस प्रक्रिया में हॉरिज़ोंटल और वर्टिकल खुदाई करने की कोशिश की गयी.

    लेकिन अब तक मिली सूचना के मुताबिक़, ये मजदूर हॉरिज़ोंटल खुदाई से बनाए गए रास्ते के ज़रिए बाहर निकाले जा रहे हैं.

  11. उत्तरकाशी टनल में फंसे मज़दूर किसी भी व़क्त बाहर आ सकते हैं, आज सुबह से अब तक क्या-क्या हुआ?

    सिल्कयारा सुरंग में फंसे मज़दूरों को बाहर निकालने का अभियान अपने आखिरी चरण पर है.

    - अधिकारियों ने कहा है कि बचावकर्मी 17 दिनों से सुरंग के अंदर फंसे 41 मज़दूरों की तलाश कर रहे हैं.

    - वे अब बचे हुए कुछ मीटर के मलबे को हाथ से साफ कर रहे हैं.

    - मज़दूरों का बाहर निकालने की प्रक्रिया, जिसमें श्रमिकों को स्ट्रेचर पर रखना और उन्हें 3 फीट चौड़ी सुरंग के माध्यम से बाहर निकालना शामिल है, जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है. हालांकि यह कब तक पूरी होगी इसकी कोई निश्चित जानकारी नहीं दी गई है.

    - अधिकारियों का कहना है कि बचावकर्मियों की एक टीम सबसे पहले सुरंग में प्रवेश करेगी और श्रमिकों को बाहर निकालने की तैयारी करेगी.

    - तत्काल चिकित्सा सहायता पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस घटनास्थल पर इंतजार कर रही है.

    - 41 लोग बीते 12 नवंबर से निर्माणाधीन सुरंग में फंसे हुए हैं. सुरंग का एक हिस्सा भूस्खलन के कारण ढह गया था और इसी के कारण अंदर काम कर रहे मज़दूर फंस गए.

    -उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज ही कई बार घटनास्थल का दौरा कर चुके हैं. वे इस समय भी वहीं मौजूद हैं

    -बीते आधे घंटे से टनल के मुहाने पर काफ़ी हलचल देखी जा रही है.

  12. दिनभर : ख़त्म होगा 17 दिन का इंतज़ार । 28 नवंबर । गुरप्रीत, मोहन लाल

  13. उत्तरकाशी सुरंग हादसा: एनडीएमए ने बताया- पूरी रात जारी रहेगा मज़दूरों को बाहर निकालने का काम

    राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने बताया है कि बचाव अभियान पूरी रात जारी रहेगा.

    हसनैन ने कहा कि एक बार मजदूरों तक पहुंच बन जाने पर उन्हें निकालने में कम से कम तीन से चार घंटे का समय लगेगा.

    उन्हें एनडीआरएफ के कर्मचारी स्ट्रेचर के माध्यम से बाहर निकालेंगे. एनडीआरएफ के चार जवानों की तीन अलग-अलग टीमें बनाई गई है. हर एक मज़दूर को सुरक्षित बाहर निकालने में 3-5 मिनट का व़क्त लगेगा.

  14. उत्तरकाशी सुरंग हादसा: मज़दूरों को एयरलिफ्ट करने के लिए चिनूक हेलिकॉप्टर तैनात

    सिल्कयारा के निर्माणाधीन सुरंग से मज़दूरों को बाहर निकलने में अभी व़क्त है लेकिन उनके सुरक्षित बाहर निकाले जाने के बाद की तैयारियां भी ज़ोरों पर है.

    सुरंग में फंसे मज़दूरों के लिए अब चिनूक हेलिकॉप्टर को भी तैनात किया जा चुका है.

    मज़दूर जैसे ही सुरंग से सुरक्षित बाहर निकाले जाएंगे, उन्हें एम्बुलेंस के ज़रिए सीधा चिन्यालीसौड़ के स्वास्थ्य केंद्र लाया जाएगा. डॉक्टर्स की निगरानी में उनका यहां इलाज किया जाएगा.

    ज़रूरत पड़ने पर यहीं से उन्हें चिनूक हेलिकॉप्टर के माध्यम से एयरलिफ्ट भी किया जा सकता है.

    क्या है चिनूक हेलिकॉप्टर की ख़ासियत?

    - यह हेलीकॉप्टर बहुत तेजी से उड़ान भरने में सक्षम है, यही वजह है कि यह बेहद घनी पहाड़ियों में भी सफ़लतापूर्वक काम कर सकता है.

    - यह किसी भी तरह के मौसम का सामना कर सकता है.

    - चिनूक हेलीकॉप्टर 11 टन तक का भार उठा सकता है.

    - इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल 19 देशों की सेनाएं करती हैं.

  15. उत्तरकाशी सुरंग बचाव अभियान पर विदेशी एक्सपर्ट अनोर्ल्ड डिक्स ने क्या कहा

    ऑस्ट्रेलिया के माइक्रो टनलिंग एक्सपर्ट अनोर्ल्ड डिक्स को भारत सरकार ने बचाव अभियान में बतौर सलाहकार शामिल होने के लिए बुलाया था. जिसके बाद बचावकर्मियों के साथ उन्होंने सुरंग के बाहर कई दिन और रातें गुज़ारी हैं.

    उनकी वेबसाइट उन्हें "एक कुशल वकील के साथ अपने आप में एक तकनीकी और वैज्ञानिक विशेषज्ञ" के रूप में वर्णित करती है.

    उन्होंने इसे अब तक का "सबसे कठिन" सुरंग बचाव अभियान बताया है.

    उन्होंने इस हफ़्ते की शुरुआत में बीबीसी से बातचीत में कहा था, "मुझे लगता है कि यह सबसे कठिन (ऑपरेशन) है, केवल तकनीकी कारणों से नहीं. यह कठिन है क्योंकि इसमें बहुत बड़ा जोख़िम है. कोई भी घायल नहीं हुआ है और हमें यह सुनिश्चित करना है कि अंदर मौजूद हर व्यक्ति सुरक्षित बाहर आए."

  16. उत्तराखंड: सुरंग में फंसे मज़दूर किस हाल में हैं?

  17. उत्तरकाशी सुरंग हादसा: एनडीएमए ने दी रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़ी अहम जानकारी

    एनडीएमए यानी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने ताज़ा प्रेस ब्रीफिंग में रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़ी अहम जानकारियां साझा की हैं.

    - उन्होंने ताज़ा स्थिति के बारे में बताते हुए कहा कि हम कामयाबी तक अभी पहुंचे नहीं है लेकिन इसके क़रीब हैं.

    - अभी भी मैनुअल काम जारी है. पिछली पूरी रात भी काम चलता रहा.

    - अभी 58 मीटर तक पहुंचे हैं, सुरंग में दो मीटर और खुदाई होना बाकी है.

    - हम कोई जल्दबाज़ी नहीं करना चाहते. मज़दूरों के साथ ही बचावकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी हमारी प्राथमिकता है.

    - सरकार का हर विभाग लगभग इस मिशन में जुटा हुआ है.

    - वर्टिकल ड्रिलिंग भी जारी है.

    - जब मज़दूरों को निकालने का समय आएगा तो एनडीआरएफ की अहम भूमिका होगी.

    - एनडीआरएफ के चार जवानों की तीन अलग-अलग टीमें बनाई गई है. ये अंदर जाएंगी और ये सारी चीज़ें व्यवस्थित करेंगी.

    - एसडीआरएफ उन्हें सहयोग देगी. पैरामेडिक्स की टीम अंदर जाएगी और हमारे मेडिकल प्लान को वहां लागू करेंगे.

    - हर मज़दूर को निकाले में तकरीबन तीन से पांच मिनट लगेंगे.

    - तीन से चार घंटे लगेंगे पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन.

  18. उत्तराखंड की सुरंग में फंसे मज़दूरों के परिवार परेशान, सरकार से गुहार लगाई

    दुख, चिंता और फ़िक्र में डूबे ये वो लोग हैं, जिनके अपने इस वक्त एक सुरंग में फंसे हुए हैं. उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले में एक सुरंग धंसने से उसमें 40 मजदूर फंस गए.

    इनमें से 15 मजदूर उत्तराखंड से कोसों दूर झारखंड से हैं. इन मजदूरों के परिजनों को अपनों की चिंता सता रही है.

  19. उत्तरकाशी सुरंग हादसा: बाहर निकलते ही मज़दूरों को परोसा जाएगा ये खाना

    उत्तरकाशी के निर्माणाधीन सुरंग से सुरक्षित बाहर निकाल लिए जाने के बाद मज़दूरों को कहां और कैसे ले जाया जाएगा, इसे लेकर लगातार जानकारियां सामने आ रही हैं.

    अब तक मिली जानकारी के मुताबिक़ सुरंग के भीतर प्राथमिक उपचार देने का इंतज़ाम किया गया है.

    सुरंग का निर्माण करने वाली हैदराबाद स्थित कंपनी नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड के असिस्टेंट एचआर विकास राणा ने बताया है कि मज़दूरों के लिए आज खाना पाइप के ज़रिए नहीं, बल्कि एम्बुलेंस में भेजा गया है. वो जैसे ही बाहर आएंगे, उन्हें एम्बुलेंस में बिठा कर खाना दिया जाएगा. खाने के मेन्यू में आलू गोभी, रोटी, दाल और चावल शामिल है.

  20. उत्तराखंड: सुरंग में फंसे हुए हैं मज़दूर, बाहर परिजन कर रहे हैं सलामती की दुआ