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फ़्रिड्रिख़ मर्त्ज़: अमेरिका पर तल्ख़ टिप्पणी करने वाले वो नेता जिनके जर्मनी का नया चांसलर बनने की संभावना है
- Author, जेसिका पार्कर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) के नेता फ़्रिड्रिख़ मर्त्ज़ के जर्मनी के अगले चांसलर बनने की संभावना जताई जा रही है.
उनकी पार्टी को लगभग 28% वोट मिलने का अनुमान है. अब देखना यह है कि वह गठबंधन किसके साथ करेंगे.
69 साल के मर्त्ज़ को उनके समर्थक यूरोप के संकट का समाधान मानते हैं. उनकी छवि पार्टी के पुराने नेताओं के बीच जानी-पहचानी है.
राजनीतिक रूप से वह कभी बहुत रोमांचक नेता नहीं माने गए, लेकिन वह जर्मनी को मजबूत नेतृत्व देने और चार साल में कई समस्याओं को हल करने का वादा कर रहे हैं.
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पिछले महीने उन्होंने संसद में कड़े प्रवासन नियम लागू करने की कोशिश की, जिसमें उन्हें धुर दक्षिणपंथी दलों के समर्थन की जरूरत पड़ी.
यह एक बड़ा राजनीतिक जोखिम था क्योंकि इसने जर्मनी की राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया.
उनकी इस पहल ने सीडीयू की पूर्व नेता एंजेला मर्केल के संतुलित और मध्यमार्गी रुख से साफतौर पर दूरी बना ली. हालांकि वह प्रवासन से जुड़े कानून को संसद में पास नहीं करवा पाए. हालांकि इस कदम से उन्होंने चुनावी माहौल में हलचल पैदा कर दी.
राजनीति छोड़ चुके थे मर्त्ज़
यह चुनाव उस राजनीतिक संकट के बाद हो रहे हैं, जो पिछले साल चांसलर ओलाफ शॉल्त्स की सरकार के गिरने से पैदा हुआ था.
मर्केल के चांसलर बनने से पहले मर्त्ज़ को दरकिनार कर दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने संसद से इस्तीफा दे दिया और बड़ी कॉर्पोरेट नौकरियों में शामिल हो गए. उस वक्त उन्हें राजनीति का बीता हुआ अध्याय मान लिया गया था.
लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि वह आखिरकार उस पद को हासिल करने वाले हैं, जिसका उन्हें हमेशा से इंतजार था.
23 जनवरी को, जर्मनी के संघीय चुनाव से ठीक एक महीने पहले, बर्लिन के एक पांच सितारा होटल में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया. यहां फ़्रिड्रिख़ मर्त्ज़ ने विदेश नीति पर एक प्रमुख भाषण दिया, जिसे सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए.
होटल डी रोम के 'बॉलरूम' में माहौल बहुत जोशीला नहीं था, लेकिन यह 20 साल पहले की स्थिति से काफी अलग था, जब मर्त्ज़ राजनीतिक करियर खत्म होता नजर आ रहा था.
मर्त्ज़ एक लाइसेंस प्राप्त पायलट भी हैं. 2022 में उन्होंने अपने निजी विमान से उत्तर जर्मनी के सिल्ट द्वीप की उड़ान भरी थी, जहां वह अपने साथी राजनेता क्रिश्चियन लिंडनर की शादी में शामिल हुए थे. इस पर उन्हें काफी आलोचना भी झेलनी पड़ी थी.
अब जब वह होटल डी रोम में आयोजित कार्यक्रम के मंच पर पहुंचे, तो जर्मनी की कंजरवेटिव सीडीयू विपक्ष के नेता के लिए हल्की लेकिन शिष्टतापूर्ण तालियां बजीं. उनकी पार्टी लगातार चुनावी सर्वेक्षणों में आगे चल रही है.
लंबा-दुबला कद, सूट और चश्मा पहने हुए फ़्रिड्रिख़ मर्त्ज़ एक शांत और पारंपरिक व्यक्तित्व को दर्शाते हैं, जो सत्ता की दौड़ में अपनी आकांक्षा को साफ तौर पर दिखाते हुए प्रतीत होते हैं.
लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा है.
मर्त्ज़ का सफर
फ़्रिड्रिख़ मर्त्ज़ का जन्म 1955 में पश्चिमी जर्मनी के शहर ब्रिलॉन में हुआ था. वह एक प्रभावशाली कंजर्वेटिव और कैथोलिक परिवार से आते हैं. उनके पिता स्थानीय जज थे, और उनकी पत्नी शार्लोट भी आज तक इसी पेशे में हैं.
मर्त्ज़ ने स्कूल के दौरान ही सीडीयू (क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन) ज्वाइन कर ली थी.
25 साल पहले एक जर्मन अखबार टैग्स स्पीगल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपनी जवानी के दिनों को अपनी गंभीर और व्यवस्थित छवि से अलग बताया था.
उन्होंने कुछ मजेदार शरारतों का जिक्र किया- जैसे मोटरसाइकिल पर तेज रफ्तार में सड़कों पर घूमना, दोस्तों के साथ स्नैक स्टॉल के पास वक्त बिताना और क्लास के पीछे बैठकर कार्ड गेम डोपेलकोफ खेलना.
डेर स्पीगल पत्रिका के मुताबिक एक बार एक 'टीनएज पार्टी' के दौरान, मर्त्ज़ ने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर स्कूल के एक्वेरियम में पेशाब कर दिया था,
हालांकि, कुछ लोगों को संदेह है कि मर्त्ज़ वास्तव में बहुत बड़े 'शरारती' रहे होंगे. उनके एक पूर्व सहपाठी के मुताबिक, वह हमेशा बहस में आखिरी बात कहने की कोशिश करते थे.
जो लोग उन्हें करीब से जानते हैं, वे मानते हैं कि मर्त्ज़ बीयर का आनंद लेते हैं और मजाकिया भी हो सकते हैं- हालांकि, ऐसी कोई खास कहानी याद नहीं आती जो इसे साबित कर सके.
स्कूल खत्म करने के बाद, फ़्रिड्रिख़ मर्त्ज़ ने सैन्य सेवा की और फिर कानून की पढ़ाई शुरू की. 1981 में उन्होंने अपनी साथी छात्रा, शार्लोट गास से शादी कर ली. यह दंपति तीन बच्चों के माता-पिता हैं.
कुछ साल तक मर्त्ज़ ने वकील के रूप में काम किया, लेकिन उनकी असली दिलचस्पी राजनीति में थी. 1989 में, 33 साल की उम्र में, उन्हें यूरोपीय संसद (ईयू पार्लियामेंट) के लिए चुना गया.
उनके साथ ही डगमर रोथ-बेहरेंड्ट भी यूरोपीय संसद में चुनी गई थीं, जो जर्मनी की सेंटर-लेफ्ट सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) से थीं. वह मर्त्ज़ को एक गंभीर, भरोसेमंद, ईमानदार और शिष्ट व्यक्ति मानती थीं.
उन्होंने यह भी कहा कि मर्त्ज़ में तब हास्य भाव भी था, जो अब कम नज़र आता है. उनका मानना है कि समय के साथ राजनीति की कड़वाहट ने उन्हें थोड़ा सख्त बना दिया होगा.
लेकिन क्या मर्त्ज़ शुरू से ही चांसलर बनने के संभावित उम्मीदवार लगते थे?
उनका जवाब था- "बिलकुल नहीं! मजाक कर रहे हो क्या?"
हालांकि, हर कोई जानता था कि मर्त्ज़ बेहद महत्वाकांक्षी हैं. जल्द ही, उन्होंने यूरोपीय राजनीति से जर्मनी की राष्ट्रीय संसद, बुंडेस्टाग, में जाने का फैसला किया और 1994 में वहां चुनाव जीतकर पहुंचे.
फ़्रिड्रिख़ मर्त्ज़ ने अपनी पार्टी के पारंपरिक और दक्षिणपंथी गुट में एक उभरते हुए नेता के रूप में पहचान बनाई.
सीडीयू सांसद क्लाउस-पीटर विल्श, जो उन्हें 30 साल से जानते हैं, कहते हैं, "वह शानदार वक्ता और गहरे विचारक हैं."
उन्हें 'लड़ाकू' भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपनी पार्टी का नेतृत्व करने के लिए तीन बार प्रयास किया.
2018 और जनवरी 2021 में दो बार असफल होने के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी. हालांकि, उनकी यह असफलताएं यह भी दिखाती हैं कि वह पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं का पूरा समर्थन हासिल नहीं कर पाए थे.
राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी बाधा
असल में, उनके राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी बाधा 2000 के दशक की शुरुआत में आई, जब उन्हें पार्टी के अंदर ही सत्ता संघर्ष में एंजेला मर्केल से हार का सामना करना पड़ा.
मर्केल, पूर्वी जर्मनी से एक शांत स्वभाव की क्वांटम केमिस्ट थीं, वहीं मर्त्ज़ पश्चिमी जर्मनी से आत्मविश्वासी वकील थे. ये दोनों नेता कभी भी एक-दूसरे से ज्यादा मेल नहीं खा पाए.
मर्त्ज़ जस कठिन दौर का जिक्र ज्यादा नहीं करते. सीडीयू की वेबसाइट पर अपनी संक्षिप्त जीवनी में वे बस इतना कहते हैं कि 2009 में उन्होंने ठहरकर विचार करने के लिए संसद छोड़ने का फैसला किया.
हालांकि, उनका यह कदम असल में एक सफल कॉर्पोरेट करियर की ओर बढ़ रहा था. उन्होंने वित्त और कॉर्पोरेट कानून में अपनी जगह बनाई. वे कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के बोर्ड में शामिल हुए. ऐसा माना जाता है कि इस दौरान उन्होंने करोड़ों रुपये कमाए.
एक दशक से ज्यादा समय तक राजनीति से दूर रहने के बाद, जब वे संसद में लौटे, तो उनका लक्ष्य एंजेला मर्केल की उदार नीति को हटाकर पार्टी (सीडीयू) की पारंपरिक दक्षिणपंथी विचारधारा को फिर से स्थापित करना था.
जनवरी के अंत में फ़्रिड्रिख़ मर्त्ज़ ने सख्त आव्रजन नियमों को लेकर एक गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव पास करवाया, जिसमें उन्होंने धुर-दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फ्यूर डॉयचलैंड (एएफडी) के वोटों का सहारा लिया.
हालांकि, मर्त्ज़ ने यह दावा किया कि एएफडी के साथ उनका कोई सीधा सहयोग नहीं था, लेकिन इस कदम के चलते पूरे देश में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए.
खुद एंजेला मर्केल ने भी इसकी दो बार सार्वजनिक रूप से निंदा की. 16 साल तक जर्मनी की चांसलर रहीं मर्केल की ओर ऐसा कहना कोई आम बात नहीं थी.
आलोचकों ने कहा कि वे ऐसा कर चुनावी फायदा उठाना चाहते हैं, जबकि मर्त्ज़ के समर्थकों का कहना था कि असल में वे, धुर-दक्षिणपंथी मतदाताओं को चतुराई से अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहे थे.
जोखिम उठाने की पुरानी आदत
मर्त्ज़ पहले भी मध्यमार्गी मतदाताओं को नाराज़ करने का जोखिम उठा चुके हैं. 1990 के दशक में उन्होंने एक ऐसे विधेयक के खिलाफ मतदान किया था, जिसमें वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में डालने का प्रावधान था.
बाद में उन्होंने सफाई दी कि वैवाहिक बलात्कार पहले से ही अपराध था और उनकी आपत्ति विधेयक के अन्य पहलुओं को लेकर थी.
जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार, वह युवाओं और महिलाओं के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय नहीं हैं. हालांकि, उनके सहयोगी क्लॉस-पीटर विल्श का मानना है कि जर्मन मीडिया में उनके बारे में बनाई गई छवि गलत है.
विल्श कहते हैं, "मैंने उन्हें कई बार अपने संसदीय क्षेत्र में आमंत्रित किया है. बाद में कई महिलाएं मेरे पास आकर कहती हैं कि वह अच्छे इंसान हैं."
उनकी पत्नी, शार्लोट मर्त्ज़, ने भी उनके बचाव में वेस्टफालेनपोस्ट से कहा, "मेरे पति की महिलाओं को लेकर जो छवि पेश की जाती है, वह सही नहीं है."
उन्होंने अपनी शादी को आपसी सहयोग का उदाहरण बताया. उनका कहना है, "हम दोनों ने एक-दूसरे के करियर का ख्याल रखा और बच्चों की देखभाल को इस तरह बांटा कि हमारे पेशेवर जीवन में कोई दिक्कत न आए."
भले ही आलोचनाएं जारी हों, लेकिन एक यूरोपीय संघ (ईयू) राजनयिक ने कहा कि ब्रसेल्स उनके आगमन की उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहा है.
उनका कहना है, "अब समय आ गया है कि इस जर्मन गतिरोध से आगे बढ़ा जाए और चीजों को गति दी जाए."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित