इसराइल और हिज़बुल्लाह के एक दूसरे पर हमलों पर हमास और हूती विद्रोही क्या बोले, अब तक क्या कुछ हुआ?

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मध्य पूर्व में बीते कई महीनों से जारी तनाव रविवार को उस वक्त बढ़ गया, जब इराइल ने हिज़बुल्लाह के ठिकानों पर और हिज़बुल्लाह ने इसराइली सेना के ठिकानों पर हमले किए.
इसराइली सेना ने रविवार सुबह कहा कि उसने क़रीब 100 फाइटर जेट भेजकर हिज़बुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए हैं. उसने कहा कि ये कार्रवाई ख़तरों के मद्देनज़र आत्मरक्षा में की गई.
इसके बाद हिज़बुल्लाह ने उत्तरी इसराइल पर क़रीब 300 रॉकेट और मिसाइल हमले किए. हिज़बुल्लाह ने पहले कहा था कि वो अपने वरिष्ठ सैन्य कमांडर फौद शुक्र की मौत का बदला लेगा.
बीबीसी संवाददाता जॉन डॉनिसन कहते हैं कि अगर इसराइल की 100 फाइटर जेट भेजे जाने की बात सही है, तो ये इसराइल और हिज़बुल्लाह के बीच 2006 में पूर्ण पैमाने पर हुए युद्ध के बाद लेबनान पर हुआ सबसे बड़ा हमला है.
एक दूसरे पर किए गए इन हमलों के बाद इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने तेल अवीव में इमरजेंसी नेशनल सिक्योरिटी की बैठक बुलाई. अमेरिका ने भी कहा कि वो स्थिति पर नज़र बनाए हुए है और इसराइल के आत्मरक्षा के हक़ का समर्थन करता है.
वहीं हमास और हूती विद्रोहियों ने हिज़बुल्लाह के हमलों का सराहना की है. जहां हमास ने इसे मज़बूत प्रतिक्रिया कहा है वहीं हूती विद्रोहियों ने इसे साहसिक कदम बताया है.

कब, कैसे हुआ हमला?
इसराइली सेना ने कहा है कि उसमे लेबनान में मौजूद हिज़बुल्लाह के ठिकानों को सुबह 4 बजकर 30 मिनट पर निशाना बनाया.
इसराइल ने कहा कि हिज़बुल्लाह इसके आधे घंटे बाद यानी 5 बजे बड़े पैमाने पर हमला करने की योजना बना रहा था.
न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक अज्ञात इसराइली ख़ुफ़िया अधिकारी के हवाले से बताया कि तेल अवीव पर रॉकेट हमले हुए हैं. ये देश का सबसे बड़ा शहर है, जो सेंट्रल इसराइल में मौजूद है.
इसराइली सेना ने कहा है कि उत्तरी इसराइल में "संघर्ष के दौरान" एक जवान की मौत हुई है. सेना ने 21 साल के इस जवान की पहचान बताई है लेकिन कोई आर जानकारी नहीं दी है.
वहीं हिज़बुल्लाह की तरफ से कहा गया कि उसने उत्तरी इसराइल में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए 300 रॉकेट और मिसाइल हमले किए. यहां साइरन की आवाज़ भी सुनी गई हैं.
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि तिरी गांव में इसराइली हमले में दो लोगों की मौत हुई है. लेकिन इसे लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं है कि मारे जाने वाले हिज़बुल्लाह के लड़ाके थे या नहीं.
मंत्रालय ने यह भी कहा कि ख़ियाम में एक कार पर ड्रोन हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई है. हिज़बुल्लाह के सहयोगी अमल आंदोलन ने उस गांव में अपने एक लड़ाके की मौत की बात कही है.
पूरे क्षेत्र में अब इस बात का डर बढ़ गया है कि ये ताज़ा संघर्ष बड़े पैमाने पर होने वाले युद्ध का रूप ले सकता है.

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हिज़बुल्लाह ने कहा, 'कमांडर की मौत का बदला'
हिज़बुल्लाह के प्रमुख शेख़ हसन नसरल्लाह ने कहा है कि समूह ने अपने कमांडर फौद शुक्र की हत्या का बदला लिया है, हालांकि इसका बदला लेने में उसे ई कारणों से देर हो गई.
उन्होंने कहा, "हिज़बुल्लाह ने 110 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद इसराइली सेना के एक ठिकाने को निशाना बनाया. ये जगह तेल अवीव से देढ़ किलोमीटर दूर है."
नसरल्लाह ने कहा है कि हिज़बुल्लाह ने इसराइल के रिहाइशी इलाक़ों और उसके बुनियादी ढांचे को निशाना न बनाने का निर्णय लिया है.
साथ ही उन्होंने दावा किया कि रविवार सवेरे के हमला में छेड़े गए सभी ड्रोन इसराइली हवाई क्षेत्र में घुसने में सफल रहे.
उन्होंने कहा कि रविवार के हमले में हिज़बुल्लाह ने सटीक मार करने वाले मिसाइलों का इस्तेमाल नहीं किया लेकिन ज़रूरत पड़ने पर बाद में उन्हें भी तैनात कर सकता है.
शेख़ हसन नसरल्लाह एक शिया मौलवी हैं और 1992 से हिज़बुल्लाह का नेतृत्व कर रहे हैं.
इस समूह को एक राजनीतिक और सैन्य ताकत बनाने में उनकी भूमिका अहम रही है. हालांकि उन्हें सालों से सार्वजनिक तौर पर नहीं देखा गया है.
माना जाता है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अली ख़ामेनेई के साथ उनके क़रीबी संबंध हैं.
एक बयान में हिज़बुल्लाह ने कहा कि उसने बीते महीने हुई अपने मिलिट्री कमांडर फ़ौद शुक्र की हत्या का बदला लेने के लिए इसराइल पर हमले किए हैं.
हिज़बुल्लाह की मीडिया की ओर से टेलीग्राम पर डाले गए पोस्ट में हिज़बुल्लाह के दो लड़ाकों के मारे जाने की पुष्टि की गई है.
हिज़बुल्लाह ने टेलिग्राम चैनल में मारे गए लोगों की पहचान ख़ादिर मूसा स्वेईद और हमज़ा मोहम्मद ज़लगोट के रूप में बताई है. साथ ही ये भी लिखा है कि "ये यरूशलम की राह में शहीद हो गए."
इसके अलावा हिज़बुल्लाह ने और कोई जानकारी नहीं दी है.
लेबनान के दाहिये में फ़ौद शुक्र की मौत के एक दिन बाद हमास की पॉलिटिकल विंग के नेता इस्माइल हनिया की भी हत्या ईरान के तेहरान में कर दी गई थी. इन दोनों हत्याओं के लिए इसराइल को ज़िम्मेदार माना गया.
इसराइल ने जहां सेना के एक हमले में फ़ौद शुक्र की हत्या की बात को स्वीकार किया उसने इस्माइल हनिया की हत्या में अपना हाथ होने से इनकार किया. लेकिन ईरान ने इसक लिए सीधे तौर पर इसराइल को ज़िम्मेदार ठहराया.
इस घटना के बाद से ही ऐसा अंदेशा बढ़ने लगा था कि ईरान या फिर उसके सशस्त्र प्रॉक्सी गुटों (हिज़बुल्लाह और हूती विद्रोहियों) की तरफ से कोई न कोई प्रतिक्रिया आएगी.
इसराइल और हिज़बुल्लाह के एकदूसरे पर हमलों पर अब तक ईरान की तरफ से कोई प्रतिक्रिया तक नहीं आई है. लेकिन इसे हिज़बुल्लाह की तरफ से की गई पहली जवाबी कार्रवाई मानी जा रही है.
हालांकि बढ़ रहे तनाव के बीच बीते कई हफ्तों से पश्चिमी मुल्कों के राजनयिक ग़ज़ा संकट को बडे़ क्षेत्रीय संघर्ष में तब्दील होने से रोकने की कोशिश में लगे हैं.
क्या एक और जंग के लिए तैयार है इसराइल?

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बीबीसी संवाददाता जॉन डॉनिसन के अनुसार ग़ज़ा में जारी जंग को जल्द एक साल हो जाएगा और कुछ लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या इसराइल एक और जंग के लिए तैयार है.
इसराइल ने ग़ज़ा में जंग के लिए अपने सैकड़ों हज़ारों रिजर्व सैनिकों को बुलाया है. लेकिन कई इसराइली खासतौर पर उत्तरी क्षेत्र में रहने वाले कहते हैं कि हिज़बुल्लाह से निपटना इसराइल के लिए ज़रूरी है.
ग़ज़ा में शुरू हुई जंग के बाद से यहां रहने वाले हज़ारों लोगों को अपने घर खाली करने पड़े हैं. कइयों के व्यवसाय बर्बाद हो गए हैं.
इसराइली हमलों के डर से दक्षिणी लेबनान में भी हज़ारों लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है.
इसराइल और हिज़बुल्लाह के नेता कहते हैं कि वो जंग को बढ़ाना नहीं चाहते. लेकिन दोनों ही पक्ष ये भी कहते हैं कि अगर स्थिति एक और जंग की बनी तो वो इसके लिए तैयार हैं.
हमास और हूती विद्रोही क्या बोले
हमास ने कहा है कि वह हिज़बुल्लाह के इसराइल पर किए गए हमले का स्वागत करता है.
टेलीग्राम चैनल पर हमास के जारी किए गए बयान में इसराइल के भीतर किए गए इस हमले की तारीफ़ की गई है. बयान में इस हमले को हिज़बुल्लाह की "मज़बूत प्रतिक्रिया" के रूप में बताया गया है.
हमास ने कहा है कि वरिष्ठ कमांडर फौद शुक्र के मारे जाने के बाद वह हिज़बुल्लाह की इस मजबूत कार्रवाई की वो सराहना करता है.
हमास ने अपने बयान में कहा है, "फ़लस्तीन और लेबनान के लोगों के ख़िलाफ़ की गई आपराधिक कार्रवाई को बख्शा नहीं जाएगा."
वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने इसे "इसराइली दुश्मन के ख़िलाफ़ लिया गया साहसिक कदम" बताया है.
हूती विद्रोहियों ने कहा है कि जुलाई में इसराइल ने यमन के एक बंदरगाह पर हमले किए थे, वो इस हमले का बदला लेंगे. जुलाई के उस हमले के बारे में इसराइल का कहना था कि तेल अवीव में हूती विद्रोहियों के ड्रोन हमले की प्रतिक्रिया थी.
लेबनान के पीएम ने की आपात बैठक

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इसराइली हमलों के बीच लेबनान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने मंत्रियों के साथ आपात बैठक की है.
लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक देश के दक्षिणी भाग के स्थिति पर चर्चा करने के लिए लेबनान के प्रधानमंत्री नजीब मकाती ने मंत्रियों के साथ आपात बैठक की है.
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मकाती ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि वह बढ़ती स्थित को रोकने के लिए लेबनान के मित्रों के साथ लगातार संपर्क में हैं.
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि लेबनान ग़ज़ा में युद्धविराम के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से किए जा रहे प्रयासों का समर्थन करता है.
अमेरिका की चेतावनी
अमेरिकी व्हाइट हाउस की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति जो बाइडन इसराइल और लेबनान के बीच चल रहे घटनाक्रम पर नज़र बनाए हुए हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ संपर्क में हैं.
बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति जो बाइडन के निर्देश पर वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी इसराइल में अपने समकक्षों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं.
व्हाइट हाउस की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है, "हम इसराइल का उसकी रक्षा करने में लगातार समर्थन और क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए काम करते रहेंगे."
इससे पहले अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि इसराइल और हमास के बीच युद्धविराम और बंधकों की रिहाई के लिए समझौते पर सहमति न बन पाने के कारण इस दिशा में राजनयिक कोशिशें विफल हो सकती हैं.

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ग़ज़ा में जारी युद्ध को 10 महीने से ज़्यादा का वक्त हो गया है और अमेरिका और अन्य पश्चिमी मुल्कों के दबाव के बावजूद ग़ज़ा में युद्धविराम समझौते पर सहमति के लिए बातचीत बेनतीजा रही हैं.
दूसरी तरफ, इसराइली सेना का कहना है कि वो दो फ्रंट पर जंग करने के लिए तैयार है. एक फ्रंट ग़ज़ा, जहां वो हमास से लड़ रहा है और दूसरा लेबनान की उत्तरी सीमा, जहां हिज़बुल्लाह के साथ उसका संघर्ष चल रहा है. लेकिन माना जाता है कि हिज़बुल्लाह हमास से कहीं ज़्यादा मज़बूत संगठन है.
ऐसा अनुमान है कि हिज़बुल्लाह के पास लगभग 150,000 रॉकेट हैं, जिनमें से कुछ इसराइल के भीतर तक हमला करने में सक्षम हैं. उसके कुछ लड़ाके सीरिया की जंग में लड़ चुके हैं. ये लड़ाके हमास के लड़ाकों से ज़्यादा प्रशिक्षित हैं और इनके पास उनसे बेहतर हथियार हैं.

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आगे क्या होगा?
ताज़ा स्थिति की बात करें तो फिलहाल हिज़बुल्लाह ने कहा है कि उसने फौद शुक्र की हत्या के बदले का पहला चरण पूरा कर लिया है.
उसने इसराइल पर हुए हमलों को सफल बताया है, वहीं इसराइल का मानना है कि उसने हिज़बुल्लाह के एक बड़े हमले को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया है.
लेकिन सवाल ये है कि जिस तरह इसराइल और हिज़बुल्लाह के एक दूसरे पर सीमापार हमले सात अटूबर के बाद से शुरू हुए थे, क्या वो पहले की तरह जारी रहेंगे या फिर ये हमले रुकेंगे? या, क्या आज के हमले आने वाले कल में और अधिक ख़तरमनाक रूप ले सकते हैं?
इसराइल और हिज़बुल्लाह दोनों ने कहा है कि वो बड़े पैमाने पर युद्ध के लिए तैयार नहीं है, लेकिन इसराइल और हिज़बुल्लाह दोनों ने इशारा दिया हैकि ज़रूरत पड़ी तो वो आमने-सामने आगे को तैयार हैं.
नेतन्याहू ने कहा है कि अगर उस पर हमले हुए तो वो आत्मरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और ये "कहानी का अंत नहीं है". वहीं हिज़बुल्लाह ने इसे फौद शुक्र की मौत के बदले का "पहला चरण कहा है."
हालात आगे क्या रूप लेंगे, क्या इसराइल की उत्तरी सीमा पर मौजूद तनाव युद्ध की शक्ल लेगा, अभी ये कह पाना मुश्किल है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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