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पाकिस्तान: चार साल की बच्ची का बलात्कार और हत्या, 'हथकड़ी समेत अभियुक्त फ़रार', फिर मिला शव
- Author, आसिया अंसर
- पदनाम, बीबीसी उर्दू
चेतावनी: इस रिपोर्ट में कुछ विवरण पाठकों को परेशान कर सकते हैं.
सराय आलमगीर में चार साल की बच्ची ज़हरा के बलात्कार और हत्या का मामला, जितने ड्रामाई अंदाज़ में हल करने का दावा किया गया, उससे भी ज़्यादा नाटकीय ढंग से इस केस का ख़ात्मा भी बताया जा रहा है.
पुलिस अधिकारियों ने दावा किया है कि वो मुख्य अभियुक्त की पहचान करने में सक्षम हो गए हैं, जो पहले से ही उनकी हिरासत में है. हालाँकि, कुछ ही घंटों के भीतर मुख्य संदिग्ध रहस्यमय परिस्थितियों में फ़रार हो गया और उसकी भी रहस्यमय तरीक़े से मौत हो गई.
बीबीसी से बात करते हुए गुजरात (पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का इलाका ) के डीएसपी आमिर शिराज़ी ने पुष्टि की कि "अभियुक्त को अज्ञात व्यक्तियों ने सिर में गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई, और इस मामले की जांच चल रही है."
लेकिन ये सब कैसे हुआ?
गुरुवार को मध्य पंजाब के गुजरात ज़िले की पुलिस ने पुष्टि की थी कि चार वर्षीय ज़हरा के बलात्कार और हत्या के 11 दिन बाद डीएनए मिलान पाए जाने पर अभियुक्त को गिरफ़्तार कर लिया गया था.
शुक्रवार को अभियुक्त को अदालत में पेश किया जाना था. 34 वर्षीय अभियुक्त उन पांच संदिग्धों में से एक था जिन्हें घटना की जांच के दौरान हिरासत में लिया गया था.
बलात्कार और हत्या की यह घटना 5 जनवरी को सराय आलमगीर के खोहर गांव में हुई थी. बच्ची के शव को बोरे में भरकर सुनसान घर में फेंक दिया गया था.
पुलिस के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट से भी यह साबित हो गया था कि लड़की के साथ बलात्कार हुआ था.
डीएसपी गुजरात के अनुसार, शुरुआत में बच्ची के अपहरण के संबंध में एफ़आईआर दर्ज की गई थी, फिर जब शव मिला तो मेडिकल रिपोर्ट में हत्या और बलात्कार साबित होने पर इसमें धारा 376 भी जोड़ दी गई.
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कोहरे और अंधेरे में भागना और फिर शव की बरामदगी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सराय आलमगीर में बच्ची के हत्या के मुख्य अभियुक्त मुहम्मद नदीम को पुलिस घटना के समय पहने हुए कपड़ों को बरामद करने के लिए खोहर गांव ले जा रही थी, लेकिन इसी दौरान अभियुक्त फ़रार हो गया. देर रात को अभियुक्त का शव सुनसान इलाके में मिला.
पुलिस के बयान के अनुसार 16 जनवरी 2025 की रात में अभियुक्त सराय आलमगीर पुलिस हिरासत से कोहरे और अंधेरे का फ़ायदा उठाकर कॉन्स्टेबल को धक्का देकर वाहन से कूद गया और हथकड़ी समेत फ़रार हो गया.
घटना के संबंध में दर्ज एफ़आईआर के मुताबिक़, "पुलिस ने अभियुक्त का पीछा किया और एक जगह पर दो-तीन लोगों का शोर, गाली-गलौच और फिर गोलियों की आवाज़ें सुनीं."
एफ़आईआर के अनुसार, "जब पुलिस ने उन्हें बुलाया तो अज्ञात लोग भाग गए, लेकिन उन्हें घटनास्थल पर एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति मिला. उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका और उसकी पहचान ज़हरा मामले के अभियुक्त के रूप में हुई."
अभियुक्त को कैसे पकड़ा गया था?
इससे पहले गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पुलिस अधिकारियों ने मीडिया को बताया था "अभियुक्त की पहचान के लिए पंजाब फोरेंसिक साइंस एजेंसी के विशेषज्ञों को घटनास्थल पर बुलाया गया है और घटनास्थल और उसके आसपास से डीएनए सैंपल और अन्य सबूत इकट्ठे किए गए हैं."
पुलिस के मुताबिक इस दौरान 73 अलग-अलग जगहों से डीएनए सैंपल लिए गए, जिनमें से 24 जगहों पर मानव डीएनए के निशान पाए गए. आस-पास के घरों से पांच संदिग्ध व्यक्तियों की जांच की गई और उनमें से तीन संदिग्धों का पॉलीग्राफ़िक टेस्ट भी कराया गया.
पुलिस के अनुसार, "इसके बाद डीएनए नमूने पंजाब फोरेंसिक साइंस एजेंसी, लाहौर भेजे गए और संदिग्ध का डीएनए मृत लड़की के नमूने से मेल खा गया."
लेकिन इस केस के दौरान अभियुक्त तक पहुंचने में पुलिस को न सिर्फ़ डीएनए सैंपल से मदद मिली, बल्कि डीएसपी सिटी गुजरात आमिर शिराज़ी के मुताबिक़ घटना के बाद मिले सीसीटीवी फ़ुटेज के 77 सेकंड के ऑडियो ने सबसे अहम भूमिका निभाई.
पुलिस ने बीबीसी को महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई है जिससे उन्हें घटना के 11 दिन बाद अभियुक्त का पता लगाने में मदद मिली.
77 सेकंड का ऑडियो, दरवाज़ा बंद होने की तेज़ आवाज़ और दुकान का सीसीटीवी कैमरा
पुलिस ने बीबीसी को बताया कि सीसीटीवी फुटेज में ज़हरा को 3:07 बजे कैमरे की नज़र से ग़ायब होते हुए दिखाया गया है, और लड़की की चीख़ 77 सेकंड बाद, 3:08 बजे सुनाई देती है.
ज़हरा कह रही थी, "चाचू.... चाचू नहीं जाना... नहीं जाऊंगी" और फिर कुंडी की आवाज़ रिकॉर्डिंग में भी सुनाई दी.
यह पता लगाने के लिए कि चीखें कहां ख़त्म होती हैं पुलिस ने एक अपरंपरागत तरीक़ा अपनाया और उसी उम्र के एक स्थानीय लड़के को उस स्थान से 77 सेकंड तक चलने को कहा, जहां से ज़हरा कैमरे की नज़र से ओझल हो गई थी.
गुजरात सिटी के डीएसपी आमिर अब्बास शिराज़ी ने बीबीसी को बताया कि "जिस दरवाज़े पर कुंडी की आवाज़ सुनकर बच्चा रुका, वह अभियुक्त का दरवाज़ा था."
हालांकि, यहां पुलिस के सामने एक और समस्या थी. इस घर के ठीक सामने एक और घर है, तो वो कैसे पता लगा सकते थे कि लड़की किस घर में गई थी?
यहां पुलिस ने दोनों घरों के दरवाज़े की कुंडी बंद होने की आवाज़ रिकॉर्ड की और फिर सीसीटीवी में आई आवाज़ से उसका मिलान किया.
घटना की जांच करने वाले डीएसपी आमिर अब्बास शिराज़ी ने कहा, "अभियुक्त का दरवाज़ा भारी था और उसकी आवाज़ रिकॉर्ड की गई ऑडियो से मेल खाती थी. दूसरा दरवाज़ा हल्का था और उसकी आवाज़ मेल नहीं खाती थी."
घर की पहचान करने के बाद पुलिस को यह पता लगाना था कि क्या अभियुक्त उस समय घटनास्थल पर मौजूद था.
अभियुक्त का बयान, जिसमें उसने पुलिस को बताया था कि वह घटना के समय एक दुकान पर गया था, यहां काम आया. जब दुकान के कैमरों की सीसीटीवी फुटेज देखी गई, तो अभियुक्त वहां नहीं था.
डीएसपी आमिर शिराज़ी के अनुसार, "अभियुक्त उस समय घर पर अकेला था और उसके डिजिटल फुटप्रिंट से पता चला कि उस दौरान उसने मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल नहीं किया था."
यह सब जानने के बाद पुलिस को पता चला कि जिस निर्जन इलाके में शव मिला था, वह अभियुक्त के घर की दीवार से सटा हुआ था.
पुलिस के अनुसार, अभियुक्त बच्ची के शव को ले जाने में असमर्थ था और जब स्थिति कठिन हो गई तो उसने किसी समय उसके शव को एक बोरे में डालकर एक ख़ाली मकान की छत से नीचे फेंक दिया.
डीएसपी आमिर शिराज़ी ने आगे कहा, "जिस तरह की बोरी में हमें बच्ची का शव मिला, वह अभियुक्त के घर पर भी मौजूद थी."
उन्होंने बीबीसी को बताया , "जब उसे पॉलीग्राफ़ टेस्ट के लिए पंजाब फ़ोरेंसिक साइंस एजेंसी भेजा गया, तो उसने अपना अपराध कबूल कर लिया और महिला अधिकारियों से बात करते हुए पूरी कहानी बता दी."
इस संबंध में अधिक जानकारी हासिल करने के लिए बीबीसी ने ज़हरा की मां से भी बात की है, जो इस समय गहरे दुख में हैं.
'बेटा कहता है कि सभी से कहो कि हमारे घर न आएं'
नन्हीं ज़हरा 5 जनवरी की दोपहर को अपने घर से पास में ही रहने वाली अपनी मौसी के घर जाने के लिए निकली थी, और अगले दिन उसका शव पड़ोस के एक सुनसान घर में एक बोरे में लिपटा हुआ पाया गया.
"उस दिन, मैंने ज़हरा को एक सेब खिलाया और उसे फ़ीडर पिलाई और फिर वो ट्यूशन पढ़ने के शौक़ में ख़ुशी-ख़ुशी छोटा से बस्ता उठाकर भाई के पीछे निकल गई और फिर हमारी ज़िंदगी वीरान हो गई. अब हम एक ज़िंदा लाश की तरह हैं, ऐसे मुर्दे हैं जो खुली और वीरान आंखों से दुनिया देख रहे हैं."
ये कहना है ज़हरा की मां सबा जुनैद का. ज़हरा का जन्म उनके माता-पिता की शादी के 13 साल बाद हुआ था और उनकी माँ सबा जुनैद इस घटना के बाद से ही इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं.
सिसकियों, हिचकी और गहरे दुख से भरी आवाज़ में सबा ने अपनी बेटी को याद करते हुए कहा, "मैं उस दिन बहुत खुश थी कि उसने इतने आराम से खाना खाया. फिर उसने कहा, 'ममा, मुझे भी पढ़ने जाना है.' वह मुझसे पूछे बिना कहीं नहीं जाती थी."
"उसी समय, मेरा बेटा भी मेरी बहन के घर जाने के लिए निकल गया, जो क़रीब ही था. मैं उसे ख़ुश देखकर ख़ुद भी ख़ुश थी मगर बस उसको नज़र लग गई, बेटी बाहर गई मगर ज़िंदा वापस न आई."
उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना का उनके सात साल के बेटे पर इतना गहरा असर पड़ा है कि वह लोगों के आने-जाने से डरता है. "अब वह कह रहा है कि सभी से कहो कि हमारे घर न आएं."
ज़हरा के पिता जुनैद इकबाल विदेश में रहते हैं और फ़िलहाल पाकिस्तान आए हुए हैं. सबा का कहना है कि ज़हरा ने ज़िद करके उन्हें बुलाया था.
"मेरी बेटी शादी के 13 साल बाद पैदा हुई थी. मैंने अल्लाह से रो, रोकर बेटी की दुआ की थी. वो हम सबको बहुत ज़्यादा प्यारी थी. उसके बाबा उससे बहुत ज़्यादा प्यार करते थे. बाबा को उसने रो, रोकर बुलाया था कि आप मेरे पास आएं."
5 जनवरी को क्या हुआ?
इस घटना के बारे में बीबीसी से बात करते हुए ज़हरा जुनैद के चाचा उस्मान ने कहा, "उस दिन हम सब एक शादी में गए थे और मेरी भाभी और पत्नी घर पर थीं. ज़हरा को भेजने के बाद भाभी ने अपनी बहन के घर फ़ोन किया तो पता चला कि ज़हरा का भाई उनके घर पहुंच गया है लेकिन ज़हरा नहीं पहुंची."
जब ज़हरा अपनी मौसी के घर नहीं पहुंची तो सबा उसे ढूंढने निकली. सबा के अनुसार, " हमारी गली में बच्चे आते-जाते रहते हैं, खेलते रहते हैं, रौनक होती है. बच्चों की छुट्टियां हैं, इसलिए वे आते-जाते रहते हैं. इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं था कि हमारे पड़ोस में ऐसा कुछ हो सकता है."
उस्मान कहते हैं, "मेरी भाभी के कहने पर हमने कैमरे का वीडियो चेक किया तो पाया कि उसमें ज़हरा के घर से निकलते हुए का वीडियो था, लेकिन आगे गली मुड़ जाती है. हमने हर जगह देखा. मैंने 15 नंबर पर कॉल किया और पुलिस स्टेशन गया, और पुलिस आ गई. उन्होंने आस-पड़ोस की जांच और तलाशी ली. सब कैमरे देखे मगर उसका पता न चला."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित