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एयर इंडिया ड्रीमलाइनर: पायलट ने बताई थी फ़्यूल स्विच की समस्या, डीजीसीए ने कहा तकनीकी ख़राबी नहीं
- Author, विष्णुकांत तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
भारतीय नागरिक उड्डयन नियामक यानी कि डीजीसीए ने कहा है कि उड़ान भरने से रोके गए एयर इंडिया के 787-8 ड्रीमलाइनर विमान के फ़्यूल कंट्रोल स्विच में 'किसी तरह की तकनीकी खामी नहीं पाई गई है'.
लंदन से बेंगलुरु पहुंची एयर इंडिया की एक ड्रीमलाइनर उड़ान में पायलट ने रविवार 1 फ़रवरी को बेंगलुरु में लैंड करने के बाद फ़्यूल कंट्रोल स्विच से जुड़ी संभावित खराबी की शिकायत की थी.
यह वही संभावित तकनीकी समस्या है, जो पिछले साल जून में हुए एयर इंडिया विमान हादसे की मौजूदा जांच के केंद्र में बनी हुई है.
एयर इंडिया ने बताया कि पायलट से सूचना मिलने के बाद बोइंग 787-8 विमान को तत्काल उड़ान भरने से रोक दिया गया था और डीजीसीए (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन) को इसकी जानकारी दी गई है और पायलट की चिंताओं की जाँच 'प्राथमिकता के आधार पर' कराई जा रही है.
बोइंग के एक प्रवक्ता ने सवाल के जवाब में बीबीसी से कहा कि कंपनी इस मामले की एयर इंडिया की ओर से की जा रही "समीक्षा में सहयोग कर रही है.
डीजीसीए के मुताबिक, पायलट की रिपोर्ट के बाद की गई जांच में यह पाया गया कि बोइंग की सुझाई गई प्रक्रिया के अनुसार स्विच को ऑपरेट करने पर वह रन पोज़ीशन (यानि कि चालू स्थिति) में संतोषजनक तरीके से स्थिर रहा और कटऑफ़ (यानी कि बंद स्थिति) की ओर नहीं गया.
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डीजीसीए ने बताया कि टेकऑफ़ के दौरान इंजन स्टार्ट करते समय चालक दल ने देखा कि दो बार फ़्यूल कंट्रोल स्विच हल्का वर्टिकल दबाव डालने पर रन पोज़िशन में (यानी कि चालू स्थिति में) सही तरह से लॉक नहीं हो पाया. हालांकि तीसरी बार स्विच स्थिर रहा, जिसके बाद पूरे उड़ान के दौरान विमान की करीबी निगरानी की गई और उड़ान बिना किसी घटना के पूरी हुई.
'निर्धारित प्रक्रिया' का पालन न किया तो...
नियामक के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया कि यदि फ़्यूल कंट्रोल स्विच को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संचालित नहीं किया जाए, तो वह रन पोज़िशन से कटऑफ़ की ओर आसानी से खिसक सकता है (यानी कि चालू स्थिति से बंद स्थिति की ओर).
डीजीसीए का कहना है कि यह जांच संबंधित विमान के साथ-साथ एक अन्य बोइंग 787 विमान पर भी की गई और पूरी प्रक्रिया डीजीसीए अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी हुई.
डीजीसीए ने एयर इंडिया को यह भी निर्देश दिया है कि वह बोइंग द्वारा सुझाई गई फ़्यूल कंट्रोल स्विच संचालन प्रक्रिया को अपने सभी क्रू सदस्यों के साथ साझा करे, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न आए.
हालांकि डीजीसीए ने स्विच में किसी तकनीकी ख़ामी की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस विमान को उड़ान भरने से रोकने की घटना ने व्यापक ध्यान खींचा है.
ऐसा इसलिए क्योंकि इस घटना ने पिछले साल जून में अहमदाबाद से उड़ान भरने के तुरंत बाद क्रैश हुए एआई 171 विमान की यादों को ताज़ा कर दिया है.
अहमदाबाद प्लेन क्रैश में 260 लोगों की मौत हो गई थी. सात महीने बाद भी इस घटना की अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतज़ार अब भी बना हुआ है.
विमान के जिस उपकरण, फ़्यूल स्विच में गड़बड़ी के चलते रविवार को फ़्लाइट को रोकना पड़ा था, अहमदाबाद में हुए विमान हादसे में भी यही गड़बड़ी जांच के केंद्र बिंदु में है.
रॉयटर्स के मुताबिक़ मंगलवार को एयर इंडिया ने पायलट के इस घटना की जानकारी देने के बाद बोइंग ड्रीमलाइनर के फ़्यूल स्विच को दोबारा चेक करना शुरू कर दिया है.
इस घटना की इतनी चर्चा क्यों हो रही है?
इस घटना में फ़्यूल स्विच में ख़राबी और अलर्ट सिर्फ एक तकनीकी शिकायत नहीं मानी जा रही है. दरअसल एआई171 हादसे की प्रारंभिक जांच में भी विमान के कॉकपिट में मौजूद दोनों फ़्यूल कंट्रोल स्विच कटऑफ़ स्थिति में पाए गए थे.
अहमदाबाद में हुए विमान हादसे की जांच भारत की एयरक्राफ़्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो कर रही है और इसकी अंतिम रिपोर्ट आने में अभी कुछ महीने लग सकते हैं.
पिछले साल जुलाई में जारी 15 पन्ने की जांच रिपोर्ट में बताया गया था कि उड़ान भरने के कुछ ही सेकेंड बाद 12 साल पुराने इस बोइंग 787 विमान के दोनों फ़्यूल कंट्रोल स्विच अचानक 'कट ऑफ़' पोजिशन में चले गए थे. इस कारण विमान के इंजनों तक ईंधन की सप्लाई रुक गई.
सप्लाई रुकने के कारण विमान पूरी तरह पावर खो बैठा. आम तौर पर फ़्यूल कंट्रोल स्विच विमान की लैंडिंग के बाद ही बंद किए जाते हैं.
यही स्विच विमान के दोनों इंजनों में ईंधन की आपूर्ति नियंत्रित करते हैं. अहमदाबाद में क्रैश हुए विमान के वॉयस रिकॉर्डर में दोनों पायलट के बीच बातचीत में इस स्विच के कट ऑफ़ स्थिति में होने का ज़िक्र है.
कॉकपिट की वॉयस रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछते हैं कि उन्होंने "कट-ऑफ़ क्यों किया", तो दूसरे पायलट कहते हैं कि उन्होंने ऐसा नहीं किया. लेकिन रिकॉर्डिंग से यह साफ़ नहीं होता कि किस पायलट ने क्या कहा. टेक-ऑफ़ के समय को-पायलट विमान उड़ा रहे थे और कैप्टन निगरानी कर रहे थे.
जांच एजेंसी के अनुसार, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये स्विच सामान्य स्थिति से कटऑफ़ में कैसे पहुंचे और ऐसा क्यों हुआ इसकी कई संभावनाएं हैं जिनमें मानवीय भूल, टेक्निकल ख़राबी और इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी जैसे कारण भी शामिल हैं.
गैर लाभकारी संस्था सेफ़्टी मैटर्स फ़ाउंडेशन विमानन सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम करती है. उसके संस्थापक कैप्टन अमित सिंह का कहना है कि ये घटना इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि "एयर इंडिया पहले ही यह सार्वजनिक रूप से कह चुकी है कि उसने अपने पूरे बोइंग 787 ड्रीमलाइनर बेड़े की जांच की है और उनमें किसी तरह की तकनीकी ख़ामी सामने नहीं आई है."
सेफ़्टी मैटर्स फ़ाउंडेशन के अनुसार यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि अमेरिकी विमानन नियामक (एफ़एए) ने वर्ष 2018 में बोइंग के कई विमानों जिसमें 787-8 के मॉडल के विमान भी शामिल थे, उनके फ़्यूल कंट्रोल स्विच को लेकर एक नोटिस जारी किया था.
एफ़एए ने इसमें चेतावनी दी थी कि कई विमानों में यह स्विच बिना लॉकिंग मैकेनिज़्म के रन से कटऑफ़ की ओर खिसक सकता है, यानी कि चालू से बंद की स्थिति में पहुंच सकता है. ऐसी स्थिति में उड़ान के दौरान अचानक से इंजन के बंद होने का ख़तरा रहता है.
इस नोटिस के तहत कई मॉडल के विमानों में स्विच बदलने की सिफ़ारिश की गई थी. फ़्यूल कंट्रोल स्विच का डिजाइन अलग-अलग बोइंग विमानों में लगभग समान बताया गया था.
हालांकि अहमदाबाद हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट जारी होने के बाद अमेरिकी विमानन नियामक एफ़एए ने कहा था कि बोइंग विमानों में इस्तेमाल होने वाले फ़्यूल कंट्रोल स्विच सुरक्षित माने जाते हैं और प्रमाणन मानकों पर खरे उतरते हैं.
'ज़िम्मेदारी सिर्फ एयर इंडिया की नहीं'
नागरिक उड्डयन नियामक ने अहमदाबाद हादसे के बाद देश में उड़ान भर रहे सभी बोइंग 787 और बोइंग 737 विमानों के कॉकपिट फ़्यूल कंट्रोल स्विच की जांच के निर्देश भी दिए थे.
एयर इंडिया का कहना है कि डीजीसीए के निर्देश पर वह पहले ही अपने बेड़े के सभी बोइंग 787 विमानों के फ़्यूल कंट्रोल स्विच की जांच कर चुका है उनमें कोई खामी नहीं पाई गई थी.
एयर इंडिया के पूर्व कार्यकारी निदेशक जितेंद्र भार्गव ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बात करते हुए कहा, "ऐसी किसी भी तकनीकी खराबी की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ एयरलाइन पर नहीं डाली जा सकती है."
उनके मुताबिक, एयरलाइंस विमान निर्माता द्वारा तय किए अनिवार्य मेंटेनेंस सिस्टम के नियमों के तहत काम करती हैं और इसकी उचित निगरानी की जाती है.
उन्होंने आगे कहा, "देखिए, फ़्यूल स्विच जैसे अहम पुर्ज़े किसी लोकल सिस्टम या कंपनी से नहीं आते हैं. इन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित कंपनियां बनाती और सप्लाई करती हैं. ऐसे में इन हिस्सों में खराबी के ज़िम्मेदार एयरलाइन से लेकर विमान निर्माता बोइंग और पुर्जे बनाने वाली कंपनी हनीवेल, सभी हैं."
उनके मुताबिक, किसी भी विमान में पार्ट बदलना सामान्य रखरखाव प्रक्रिया है, लेकिन एक ही तरह की समस्या का बार-बार सामने आना पूरे सिस्टम के लिए चिंता का विषय है.
ऐसी घटनाओं के बाद विमान को उड़ान भरने से रोक दिया जाता है, तकनीकी जांच होती है और रिपोर्ट डीजीसीए को दी जाती है, जो आगे विमान निर्माता और उपकरण सप्लायर के साथ इसे साझा करता है.
उन्होंने आगे कहा, "इसमें यह भी देखना होगा कि क्या पहले भी बोइंग के इन विमानों में ऐसी कोई ख़ामी सामने आई थी क्या? अगर हां तो उसको लेकर क्या कदम उठाए गए? क्या सभी विमानों में यह बदलाव किए गए? इसलिए भी ऐसी घटनाओं की ज़िम्मेदारी विमान निर्माता, उपकरण बनाने वाली कंपनी और एयरलाइन सभी की होगी."
सेफ़्टी मैटर्स फ़ाउंडेशन का कहना है कि उनके द्वारा अहमदाबाद में हुए हादसे और रविवार को हुई घटना के बीच किसी सीधे संबंध का संकेत नहीं दिया जा रहा है, "लेकिन एक ही तरह के विमान में उड़ान नियंत्रण प्रणाली से जुड़ी गंभीर समस्याओं का बार-बार सामने आना, इस पूरे मामले पर कड़ी और गहन जांच की मांग करता है."
दुनिया भर में इस समय 1100 से ज्यादा ड्रीमलाइनर विमान उड़ान भर रहे हैं. ऐसे में यह सवाल अहम हो जाता है कि क्या फ़्यूल कंट्रोल स्विच से जुड़ी समस्याएं केवल एक ही एयरलाइन तक सीमित हैं या अन्य ऑपरेटरों ने भी ऐसी दिक्कतें दर्ज की हैं.
विमानन सुरक्षा से जुड़ी तकनीकी जानकारियां और खामियां आमतौर पर एक ही मॉडल का इस्तेमाल करने वाली सभी एयरलाइंस के बीच साझा की जाती हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, इसे किसी एक देश या एक कंपनी तक सीमित समस्या मानना सही नहीं होगा.
जितेंद्र भार्गव कहते हैं, "विमानन सुरक्षा 99.9 प्रतिशत का खेल नहीं है. यहां अपेक्षा 100 प्रतिशत सुरक्षा की होती है. किसी भी तकनीकी समस्या का बार-बार सामने आना पूरे तंत्र के लिए गंभीर चिंता की बात है."
इस बीच, विमानन सलाहकार और पूर्व विमान दुर्घटना जांचकर्ता टिम एटकिंसन ने बीबीसी से कहा कि उन्हें बोइंग के "फ़्यूल कंट्रोल स्विच के डिज़ाइन पर भरोसा है."
उनका कहना है कि "इन स्विचों को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि वे अनजाने में न हिलें और किसी तकनीकी ख़ामी की पुष्टि होना मेरे लिए हैरान करने वाली बात होगी".
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.