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शिकागो से नई दिल्ली के लिए उड़े एयर इंडिया के विमान को क्यों लौटना पड़ा था वापस
- Author, साजिद हुसैन
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए
एयर इंडिया के एक विमान ने शिकागो से नई दिल्ली के लिए उड़ान भरी, लेकिन गुरुवार को बीच रास्ते से ही उसे वापस शिकागो एयरपोर्ट पर लैंड होना पड़ा.
फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट फ्लाइट रडार24 के मुताबिक़ यह विमान उड़ान भरने के बाद चार घंटे 25 मिनट के बाद जब ग्रीनलैंड कोस्ट को पार कर चुका था तब वापस लौटा.
विमान क़रीब 10 घंटे के बाद उसी एयरपोर्ट पर लैंड हुआ, जहां से उसने उड़ान भरी थी.
विमान को वापस शिकागो क्यों लैंड होना पड़ा, इस सवाल के जवाब में एयरलाइन के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया है कि शिकागो से दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाली फ्लाइट एआई126 को 'तकनीकी समस्या' के कारण वापस लौटना पड़ा.
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हालांकि इस मामले को लेकर सूत्र के हवाले से न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने बताया कि कई शौचालयों के काम नहीं करने की वजह से विमान को वापस लैंड करना पड़ा.
पीटीआई ने सूत्र के हवाले से बताया कि एयर इंडिया के बोइंग 777-300 ईआर विमान में कुल 10 टॉयलेट थे, जिनमें केवल एक काम कर रहा था.
वहीं द हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर में भी सूत्र के हवाले से बताया गया कि विमान के बिज़नेस क्लास में एक ही शौचालय काम कर रहा था.
हिंदु्स्तान टाइम्स से बातचीत में एक एविएशन कंसलटेंट ने कहा है कि एक दो शौचालय का काम नहीं करने की बात तो असामान्य नहीं है लेकिन अधिकांश के काम नहीं करने की स्थिति असामान्य है.
एयर इंडिया ने बीबीसी से क्या कहा
हालांकि एयर इंडिया के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया, "शिकागो में उतरने पर सभी यात्री और क्रू विमान से उतर गए और उन सभी यात्रियों की असुविधा को कम करने के लिए उनको ठहराने की व्यवस्था की गई."
साथ ही, यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई.
प्रवक्ता ने यह भी बताया, "इसके अलावा, यात्रियों को टिकट रद्द करने पर पूरे पैसे वापस दिए जाएंगे और अगर यात्री चाहें तो वे बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के फिर से यात्रा कर सकते हैं."
इस विमान की क्षमता क़रीब 340 सीटों की थी, जिनमें 300 सीटें इकॉनमी क्लास की थीं.
कैसे काम करते हैं विमान के शौचालय
विमान के शौचालय में अपशिष्ट को दूर करने के लिए पानी के इस्तेमाल की जगह, शक्तिशाली वैक्यूम सिस्टम का इस्तेमाल होता है.
यही वजह है कि हवाई जहाज़ पर फ्लश की आवाज़ घर के टॉयलेट में इस्तेमाल होने वाले फ्लश के मुक़ाबले तेज़ होती है.
फ्लश के बाद आपको सीट में नीले रंग का सैनिटाइज़िंग लिक्विड दिखाई देता है.
विमान के शौचालय का वैक्यूम सिस्टम ज़्यादातर अपशिष्ट को हटा देता है.
इसके बाद पूरी सफ़ाई के लिए लिक्विड का इस्तेमाल होता है.
कहां जाता है विमान के टॉयलेट का कचरा
वैक्यूम सिस्टम के सोखे जाने के बाद विमान के टॉयलेट का कचरा विमान के तल वाले हिस्से में बने विशेष कैविटीज़ में रखा जाता है.
इन कैविटीज़ में सैनेटाइज़िंग लिक्विड के साथ मिलकर अपशिष्ट 'नीली बर्फ़' में तब्दील हो जाता है और इसे सफ़र पूरा होने के बाद मशीनों के ज़रिए इसका निपटारा किया जाता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित