हिमाचल के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू बोले, 'पांच साल चलेगी सरकार, गिड़गिड़ा रहे हैं बाग़ी'

    • Author, राघवेंद्र राव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, शिमला से

हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग से उठे सियासी तूफ़ान में फंसी कांग्रेस सरकार की कश्ती किनारे लगती दिख रही है लेकिन तूफ़ान अभी पूरी तरह से थमा नहीं है.

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बग़ावत के बीच, कुछ समय के लिए ही सही, फिलहाल अपनी सरकार को बचा लिया है. लेकिन कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह के तेवरों से साफ़ है की मामला अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है. वहीं छह बाग़ी विधायकों की आगे की रणनीति को लेकर सवाल बने हुए हैं.

शुक्रवार को सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में दावा किया कि वो पांच साल तक सरकार चलाएंगे.

सुक्खू ने कहा है कि जिन छह विधायकों ने पार्टी के साथ राज्यसभा सीट के लिए वोटिंग के दौरान बग़ावत की है वो अब 'वापस आने के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं.'

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के पास 68 में से 40 विधानसभा सीटें हैं और राज्यसभा चुनाव में कांग्रेसी प्रत्याशी अभिषेक मनु सिंघवी की जीत पक्की मानी जा रही थी लेकिन छह विधायकों के बाग़ी होने और फिर मुक़ाबला टाई होने पर हुए टॉस के हक़ में न जाने के बाद अभिषेक मनु सिंघवी ये सीट हार गए.

बीबीसी को दिए एक ख़ास इंटरव्यू में सुक्खू ने माना है कि उन्हें बग़ावत का अंदाज़ा तो था लेकिन ये पता नहीं था कि ये इस स्तर पर होगी.

सुक्खू ने कांग्रेस के दिवंगत दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह के साथ अपने रिश्तों पर भी बात की.

सुखविंदर सिंह सुक्खू का कहना है कि उनकी सरकार पर अब कोई ख़तरा नहीं हैं.

‘ब्लैकमेलिंग से नहीं डरता’

सुक्खू ने कहा, “ना हमारी सरकार ख़तरे में है और ना ही मैं ब्लैकमेलिंग से डरता हूं. अभी हमारी सरकार को बने हुए चौदह महीने ही हुए हैं. मैं निश्चित रूप से दावे के साथ कह सकता हूं कि हमारी सरकार पांच साल चलेगी. जो षड्यंत्र भाजपा ने किया है वो कामयाब नहीं होगा. हिमाचल प्रदेश में पहली बार ईमान को बेचा गया है और मैं कह सकता हूं कि जो एमएलए हैं वो अब पश्चाताप कर रहे हैं.”

सुक्खू ने ये दावा भी किया है कि पार्टी छोड़कर जाने वाले विधायक अब उन्हें फ़ोन कर रहे हैं और पार्टी में वापस आना चाहते हैं.

सुक्खू ने कहा, “उनके कल से मुझे फोन आ रहे हैं, पंचकूला में वो एक पांच सितारा होटल में ठहरे हुए हैं, उन्हें लाने ले जाने के लिए हेलीकॉप्टर लगा है. मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि उनके घरवाले भी बहुत दुखी हैं.”

सुक्खू ने कहा कि राज्यसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी का जीतना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि बीजेपी ने 'षड्यंत्र से ये सीट जीती है.'

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में हुई बग़ावत में छह विधायकों ने पार्टी के ख़िलाफ़ वोट किया है. इन विधायकों को अब सदन से निलंबित कर दिया गया है.

‘34 विधायक मेरे साथ’

दरअसल राज्यसभा चुनाव में पार्टी व्हिप अनिवार्य नहीं होता है लेकिन वित्तीय विधेयक पर मतदान के लिए व्हिप को मानना अनिवार्य होता है. इसके उल्लंघन पर विधायकों के ख़िलाफ़ निलंबन की कार्रवाई संभव है. वित्तीय विधेयक पर मतदान के बाद ही छह बाग़ी विधायकों को सदन से निलंबित किया गया है.

पार्टी में बग़ावत के सवाल पर सुक्खू ने कहा, “पार्टी में कोई विधायक ख़ुश है या नाराज़ है, ये उनकी अपनी भावना है. छोटे मोटे मतभेद होते हैं उनका समाधान करना मुख्यमंत्री का दायित्व होता है. 34 विधायक कंधे से कंधा मिलाकर मेरे साथ खड़े हैं और इस चुनौती का सामना कर रहे हैं.”

“एक तरफ़ केंद्र सरकार के सीआरपीएफ़ के जवान, हरियाणा पुलिस के जवान, सब तरफ़ से घेरकर विधानसभा में घुसने की कोशिश करते हैं. इस बीच, उन चौंतीस विधायकों ने हमारा साथ दिया. उन चौंतीस में से एक-दो विधायक अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं, वो भी जनता जानती हैं.”

क्या पार्टी के भीतर चल रही इस राजनीति से उनकी सरकार को ख़तरा हो सकता है. इस सवाल पर सुक्खू ने दोहराते हुए कहा कि वो पूरे पांच साल सरकार चलाकर दिखाएंगे.

सुक्खू ने कहा, “आने वाले समय में हम पांच साल सरकार चलाएंगे, पांच साल बाद जनता मूल्यांकन करे. हम सत्ता में सत्ता सुख प्राप्त करने के लिए नहीं आए हैं, हम व्यवस्था परिवर्तन के लिए आए हैं. हम भ्रष्टाचार दूर करने के लिए सत्ता में आए हैं. आने वाले पांच साल तक हम जनता की सेवा करेंगे और जनता हमें फिर से मौका देगी.”

विक्रमादित्य सिंह से रिश्ते पर क्या बोले

विक्रमादित्य सिंह ने सुखविंदर सरकार पर निशाना साधा है और कहा है कि सरकार में उन लोगों की सुनवाई नहीं होती है. उन्होंने इस्तीफ़े की पेशकश भी की, जिस पर बाद में उन्होंने कहा कि वो अपना इस्तीफ़ा स्वीकार किए जाने पर ज़ोर नहीं देंगे. विक्रमादित्य सिंह ने ये आरोप भी लगाया है कि सुखविंदर सरकार ने उनके पिता वीरभद्र सिंह के स्मारक के लिए जगह नहीं दी.

विक्रमादित्य सिंह ने ये भी कहा कि पिछला विधानसभा चुनाव उनके पिता के चेहरे पर लड़ा गया था.

उनके आरोपों पर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, “पिछला चुनाव हमने कांग्रेस के हाथ के निशान पर लड़ा था. वीरभद्र सिंह हमारी पार्टी के बड़े सम्मानित नेता थे, वो राजनीतिक तौर पर हमारी पार्टी के बड़े नेता हैं, उनके पिता हैं, हमारे लिए भी सम्मानित हैं. मूर्ति लगाने के लिए मना करने की बात पता नहीं कहां से आई हैं, उन्होंने कभी भी लिखित में मूर्ति लगाने के लिए नहीं कहा था.”

सुक्खू ने कहा, “वीरभद्र सिंह की प्रतिमा वो लगाना चाहते हैं, आज तक हमें पता ही नहीं था, हम उनकी मूर्ति क्यों नहीं लगाएंगे, वो हमारे नेता हैं. जिस समय वित्तीय बिल पास हो रहा था, सरकार ख़तरे में थी, वो मंत्री थे और हम भारतीय जनता पार्टी की घिनौनी राजनीति से लड़ाई लड़ रहे थे, उस समय इस तरह की बात उन्होंने क्यों की, मुझे समझ नहीं आया.”

सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ये भी कहा है कि विक्रमादित्य सिंह से उनकी लगातार बात हो रही है.

उन्होंने कहा, “विक्रमादित्य कल मेरे साथ कैबिनेट में थे, रात भी उन्होंने मुझे फ़ोन किया था. सुबह भी उन्होंने फ़ोन किया और कहा कि इन छह विधायकों को आप माफ़ कर दीजिए, मैं दिल्ली जा रहा हूं. मैंने कहा हमारे मन में कोई बैर है ही नहीं. विक्रमादित्य से मेरा मनमुटाव कभी नहीं रहा है. हमारा वीरभद्र सिंह जी के साथ था, लेकिन विक्रमादित्य के साथ कोई मनमुटाव नहीं है. वीरभद्र जी से भी मेरा तर्क-वितर्क होता था लेकिन मैंने कभी प्रेस में उनके ख़िलाफ़ बयान नहीं दिया.”

प्रतिभा सिंह को लेकर क्या कहा

सुक्खू ने कहा, “विक्रमादित्य राजनीतिक परिवार से हैं, वो आगे बढ़ रहे हैं, धीरे-धीरे और राजनीति सीखेंगे.”

वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष हैं. प्रतिभा सिंह ने मौजूदा राजनीतिक संकट पर कई टिप्पणियां की हैं. दिल्ली से आए पर्यवेक्षकों से मुलाक़ात के बाद भी उन्होंने ऐसे संकेत दिए हैं कि पार्टी में अभी सबकुछ ठीक नहीं हैं. हिमाचल में कांग्रेस के चुनाव जीतने के बाद प्रतिभा सिंह भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल थीं.

सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रतिभा सिंह को मुख्यमंत्री न बनाए जाने और उनकी नाराज़गी को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा, “सरकार बहुमत से चलती है, बहुमत सरकार के साथ है.वो जो बोल रही हैं, उसका जवाब वही दे सकती हैं, मैं नहीं दे सकता हूं, कई बार मीडिया में बने रहने के लिए भी ऐसी बातें कहीं जाती हैं.”

प्रतिभा सिंह को एक अच्छी नेता बताते हुए उन्होंने कहा, “चालीस विधायक चुनकर आए, ये लोकतंत्र की प्रक्रिया है, जिसके पास बहुमत होता है वो मुख्यमंत्री बनता है. उनके पास विधायकों की संख्या नहीं थी, इसलिए वो मख्यमंत्री नहीं बन पाई. जो विधायक वीरभद्र सिंह जी के साथ रहते हैं, वो भी आज हमारे साथ हैं. विधायकों की संख्या मेरे साथ थी और मैं मुख्यमंत्री बना.”

हिमाचल में राजनीतिक संकट के बीच सुखविंदर सिंह सुक्खू के इस्तीफ़े की ख़बर भी चली. इसे अफ़वाह बताते हुए सुक्खू ने कहा, “पर्यवेक्षक हमें गाइड करने के लिए आए थे. पता नहीं ये किसने ख़बर चला दी कि मैंने इस्तीफ़ा दे दिया है. वो सभी विधायकों से मिले हैं. विधायकों ने अपना पक्ष रखा है और कहा है कि मेरे अलावा उनके पास कोई और विकल्प नहीं है.”

बग़ावत करने वालों को माफ़ करेंगे या नहीं?

क्या उन्हें बग़ावत का पहले से अंदाज़ा था, इस सवाल पर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, “चार विधायकों का मुझे पता था, वो मंत्री बनना चाहते थे, आए दिन फ़ेसबुक पर वो सरकार के ख़िलाफ़ लिख रहे थे. हिमाचल की जनता ये सब चीज़ें जानती हैं, आने वाले समय में उन्हें राजनीतिक नुक़सान होगा इसका.”

सुक्खू का कहना है कि बग़ावत के पीछे उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने की साज़िश थी जिसे उन्होंने अब नाकाम कर दिया है.

उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने राजनीतिक तौर पर इसका फ़ायदा उठाने की कोशिश की, उन छह विधायकों और एक जो षडयंत्रकारी हैं, उनकी रणनीति ये थी कि हम राज्यसभा में वोट डालेंगे और हम ये दबाव डालेंगे कि अगर मुख्यमंत्री को हटा दिया जाएगा तो हम पार्टी में वापस आएंगे. राज्यसभा की वोटिंग पर व्हिप नहीं लगता है. लेकिन वित्तीय बिल पर व्हिप लगता है.”

सुक्खू ने कहा, “वोट डालकर वो यहां से भाग गए पंचकुला. उन्हें हिमाचल की जनता का डर था तब ही तो हेलीकॉप्टर से आए कि कहीं रास्ते में हमें जनता रोक ना ले. जनता को मुंह उन छह विधायकों को दिखाना है जो बिके हैं. उनकी साज़िश मुख्यमंत्री का इस्तीफ़ा दिलवाने की थी, लेकिन उन्होंने ये नहीं सोचा था कि उनके साथ ही ये हो जाएगा. हमारी सरकार पूरे पांच साल चलेगी, धन प्रलोभन में आए बिकाऊ एमएलए भी पश्चाताप कर रहे हैं.”

क्या वो इन विधायकों को माफ़ कर देंगे, इस सवाल पर सुक्खू ने कहा, “माफ़ी सबसे बड़ा हथियार है, कांग्रेस की विचारधारा हमेशा ऐसी ही रही है. उन्हें माफ़ करने में हमें कोई ऐतराज नहीं है. उन्होंने गलती कर ली है, अब देखते हैं, सब विधायकों से, पार्टी नेताओं से बात करके आगे का रास्ता निकालते हैं.”

क्या आगे भी उनकी सरकार को ऐसा ख़तरा हो सकता है, इस सवाल पर सुक्खू ने कहा, “ख़रीद फ़रोख़्त की राजनीति मेरे लिए चुनौती नहीं है, मुझे अपने विधायकों को इकट्ठा रखना है, हमें सत्ता से नहीं, संघर्ष से मोह है. मैं एक साधारण परिवार से आने वाला आम व्यक्ति हूं लेकिन राजनीति में मैं चालीस साल से हूं. मैं एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस और स्टेट यूनिट का स्टेट प्रेसिडेंट रहा हूं. मुझे राजनीति आती है, इसलिए ही मैंने सत्ता बचा ली. लेकिन ये भी सच है कि बग़ावत हुई है. हम किसी भी स्थिति से निबटने के लिए तैयार हैं.”

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