गुजरात टाइटंस की जीत हुई ज़रूर लेकिन चर्चा शुभमन गिल के आउट होने की क्यों हो रही है?

    • Author, मनोज चतुर्वेदी
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

गुजरात टाइटंस ने आईपीएल के प्लेऑफ़ में स्थान बनाने की तरफ़ एक कदम और बढ़ा लिया है. वह सनराइज़र्स हैदराबाद को 38 रन से हराकर अंकतालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गई है.

कप्तान शुभमन गिल और जॉस बटलर की पारियों ने टाइटंस को 224 रन तक पहुंचाकर किसी हद तक मज़बूत स्थिति में पहुंचा दिया. बाद में गेंदबाज़ों ने कसी हुई गेंदबाज़ी करके सनराइज़र्स को छह विकेट पर 186 रन पर सीमित कर दिया.

सनराइज़र्स हैदराबाद इस हार से प्लेऑफ़ की दौड़ से किसी हद तक बाहर हो गई है. अब कुछ अजूबा होने पर ही वह आगे जाने की उम्मीद कर सकती है.

प्रसिद्ध कृष्णा रहे जीत के हीरो

प्रसिद्ध कृष्णा अकेले गेंदबाज़ रहे, जिन्हें विकेट से थोड़ा उछाल मिला. वह हार्ड लेंथ पर गेंदबाज़ी करना पसंद करते हैं और उनकी धीमी गेंदें भी बहुत कामयाब साबित होती हैं. सनराइज़र्स जब 225 रन का लक्ष्य पाने के लिए अच्छी शुरुआत कर रही थी, उस समय उन्होंने ट्रेविस हेड का विकेट निकालकर तगड़ा झटका दिया.

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हेड जब अभिषेक की तरह खुलकर खेलने की तरफ़ बढ़ रहे थे, तब ही प्रसिद्ध कृष्णा ने उन्हें राशिद खान के हाथों लपकवा दिया. यह ज़रूर है कि इस विकेट में गेंदबाज़ से ज़्यादा राशिद के कमाल का परिणाम था. वह पीछे की तरफ दौड़ते हुए गेंद पर निगाह टिकाने में सफल रहे और बेहतरीन कैच से हेड की पारी ख़त्म करके तगड़ा झटका दे दिया.

प्रसिद्ध ने दूसरा विकेट हेनरिक क्लासेन का निकाला. यह बल्लेबाज़ भी मैच का रुख़ बदलने की क्षमता रखता है. वह लेंथ बॉल पर लेप शॉट खेलने गए पर गेंद उनके ग्लब्स से लगकर विकेट के पीछे बटलर के हाथों में समा गई.

प्रसिद्ध कृष्णा ने चार ओवरों में 19 रन देकर दो विकेट निकाले. इस प्रदर्शन पर उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया.

प्रसिद्ध कृष्णा: जीत पर्पल कैप से ज़्यादा ज़रूरी

प्रसिद्ध कृष्णा ने अब तक 10 मैचों में 19 विकेट लेकर पर्पल कैप हासिल की हुई है. उनकी गेंदबाज़ी की सबसे बड़ी खूबी किफायती होना है.

उनकी इकॉनमी रेट 7.48 है. पर प्रसिद्ध पर्पल कैप को बहुत महत्वपूर्ण नहीं मानते हैं और उनके हिसाब से टीम के काम आना ज़्यादा महत्वपूर्ण है.

उन्होंने प्लेयर ऑफ द मैच बनने पर कहा, "पर्पल कैप पाना महत्वपूर्ण नहीं है. हमारे लिए मैच जीतना ज़रूरी था और मैं जीत में योगदान देकर खुश हूं. मेरा गेंद पर नियंत्रण अच्छा है और मेरी तैयारी गेंद को नियंत्रित रखने के साथ ही होती है. नेट्स पर तैयारी के बाद अपने आसपास अनुभवी खिलाड़ियों से चर्चा करता हूं और सही स्थान पर गेंदें डालने का प्रयास करता हूं."

गिल-साई का जवाब नहीं

शुभमन गिल और साई सुदर्शन ने इस सत्र में टाइटंस को जिस तरह की शुरुआत दिलाई है, उसने टीम के अभियान को ऊंचाइयां दिलाने में अहम भूमिका निभाई है. दोनों ही ओपनर पावरप्ले में कोई भी जोखिम भरा शॉट खेलने के बजाय क्रिकेटिंग शॉट खेलकर रन गति को रफ्तार देने में सफल रहते हैं.

इस जोड़ी को जमाने में सनराइज़र्स की ख़राब गेंदबाज़ी का भी अहम योगदान रहा. मोहम्मद शमी पहले की तरह रंगत में गेंदबाज़ी नहीं कर पा रहे हैं. यह कहा जा रहा है कि वह पूरा फॉलो थ्रू नहीं कर पा रहे हैं, जिससे गेंदबाज़ी में पैनापन नहीं आ पा रहा है. सुदर्शन ने इसका फायदा उठाकर उनके द्वारा फेंके गए तीसरे ओवर में पांच चौके लगा दिए.

इस जोड़ी ने पावरप्ले में बिना विकेट खोए 82 रन बनाकर टीम को मज़बूत आधार प्रदान कर दिया.

इस मज़बूत शुरुआत का ही नतीजा है कि टीम 224 रनों का बड़ा लक्ष्य देने में सफल हो सकी.

गिल ने सीज़न का पांचवां और लगातार तीसरा अर्धशतक लगाकर दिखाया कि पारी को मज़बूती कैसे दी जाती है.

बटलर की पारी के हैं ख़ास मायने

यह मैच काली मिट्टी के विकेट पर खेला गया, जिस पर गेंद बहुत ऊपर नहीं आ रही थी, इस कारण तमाम शॉट खेलना खासा मुश्किल था. ख़ासतौर से पावरप्ले के बाद तो तेज़ी से रन बनाना और भी मुश्किल था. इस हालत में बटलर की पारी के बहुत मायने हैं.

बटलर आमतौर पर सामने खेलने में विश्वास रखते हैं और इस विकेट पर ऐसे ही खेला जा सकता था. वह गेंद के टप्पे को जल्दी पढ़ते हैं, इस कारण उन्हें बड़े शॉट खेलने में आसानी होती है. उन्होंने 37 गेंदों में 64 रन की पारी खेली, जिसमें तीन चौके और चार छक्के लगाए.

बटलर इस पारी के दौरान 4000 आईपीएल रन बनाने के मामले में दूसरे सबसे तेज़ बल्लेबाज़ रहे.

उन्होंने अपने 51वें मैच में 2714 गेंदों में चार हज़ार रन पूरे किए हैं. इस मामले में उनसे आगे सिर्फ एबी डिविलियर्स हैं, उन्होंने 2658 गेंदों में यह रन बनाए. बटलर आईपीएल में 4000 रन बनाने वाले इंग्लैंड के इकलौते बल्लेबाज़ हैं.

शुभमन गिल का आउट होना क्यों रहा चर्चा में

इस मैच में गिल का आउट होना काफ़ी चर्चा में रहा. वह जब शतक लगाने की तरफ़ बढ़ते नज़र आ रहे थे तब ही जॉस बटलर जीशान अंसारी की गेंद को शॉर्ट फाइन लेग पर खेलकर रन लेने दौड़े.

लेकिन हर्षल पटेल ने गेंद पर तेज़ी से झपटकर विकेट पर थ्रो की और इस पर अंपायर ने तीसरे अंपायर से मदद मांगी.

तीसरे अंपायर ने गिल को आउट दिया. पर गिल का मानना था कि विकेटकीपर क्लासेन ने गेंद पकड़ने से पहले हाथ से विकेट गिरा दिया था. ऐसी स्थिति में विकेट को दोबारा लगाकर गिराना होता है.

हालांकि अंपायर का मानना था कि क्लासेन ने गेंद पकड़ने के बजाय उसे स्टंप की दिशा दे दी और गेंद के विकेट से लगने से ही उसकी दिशा बदली.

इसी तरह 14वें ओवर में अभिषेक को एलबीडब्ल्यू नहीं दिए जाने पर भी गिल अंपायर से बहस करते नज़र आए. पर अंपायर अपनी बात पर डटे रहे.

चार गेंद में मैच की दिशा बदल गई

अभिषेक शर्मा को मैच का रुख़ बदलने वाला खिलाड़ी माना जाता है. वह खेल भी इसी अंदाज़ में रहे थे. ट्रेविस हेड और ईशान किशन के आउट हो जाने पर उन्हें क्लासेन के रूप में अच्छे जोड़ीदार मिल गए. सही मायने में यही जोड़ी थी, जिसमें मैच को सनराइज़र्स की तरफ मोड़ने की क्षमता थी.

इस जोड़ी के खेलने के समय भले ही उनकी टीम रन गति के मामले में पिछड़ती नज़र आ रही थी. पर दोनों ही विस्फोटक अंदाज़ में खेलने वाले हैं, इसलिए लक्ष्य पाने की उम्मीद की जा रही थी. यह जोड़ी 33 गेंदों में 57 रन जोड़ने में सफल हो गई.

चार गेंदों के अंदर दोनों के आउट हो जाने पर सनराइज़र्स की चुनौती का दम निकल गया. टाइम आउट के दौरान ईशांत शर्मा, शुभमन गिल और कोच आशीष नेहरा में गेंदबाज़ी को लेकर खासी चर्चा हुई. ऐसा लग रहा था कि ईशांत नेहरा की बात से सहमत नहीं हैं और वह अपने दिमाग से गेंदबाज़ी करना चाहते हैं.

ईशांत ने 15वें ओवर की आखिरी गेंद को अभिषेक से दूर रखा और वह छक्का लगाने के प्रयास में डीप मिड विकेट पर सिराज के हाथों लपक गए. इसके चार गेंदों बाद ही प्रसिद्ध कृष्णा की गेंद पर क्लासेन के विकेट के पीछे लपके जाने से सनराइज़र्स का लक्ष्य का पीछा करने को लेकर उम्मीद टूट गई.

जीटी के गेंदबाज़ों को भी देना होगा श्रेय

गुजरात टाइटंस ने बहुत ही योजनाबद्ध ढंग से गेंदबाज़ी करके सनराइज़र्स के बल्लेबाज़ों को बांधे रखने में सफलता प्राप्त की. सभी जानते हैं कि अभिषेक शर्मा और ट्रेविस हेड दोनों ही बड़े शॉट खेलने में महारत रखते हैं.

टाइटंस के गेंदबाज़ों ने योजना बनाई कि दोनों को बड़े शॉट खेलने के लिए जगह देने से बचना है. इस कारण अधिकांश समय उनके शरीर को निशाना बनाकर गेंदबाज़ी की गई. इस कारण दोनों को अपने शॉट खेलने के लिए ढीली गेंदों का इंतज़ार करना पड़ा.

इस योजना की वजह से अभिषेक और हेड को खुलकर खेलने की छूट नहीं मिली, इस कारण तेज़ी से रन नहीं बनाए जा सके. तेज़ी से रन बनाने का दबाव भी लगातार बनता रहा. इस वजह से भी टीम बिखर गई.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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