एलियंस हैं या नहीं, क्या बता रही है नासा की ताज़ा रिपोर्ट?

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- Author, ब्रैंडन लिवसी
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
सैकड़ों यूएफ़ओ देखे जाने की जांच कर रही अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा को इस घटना के पीछे एलियंस का हाथ होने का कोई सुबूत नहीं मिला है.
हालांकि इसने इस संभावना से इनकार भी नहीं किया है.
अगर ये सच भी हो तो भी नासा की जांच की बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट में ऐसा कोई सुबूत नहीं दिया गया है, जिसके आधार पर कोई निर्णायक नतीजा निकाला जा सके.
हालांकि नासा यूएपी यानी अनआइडेंटिफ़ाइड एनोमेलस फ़ेनोमेना (यूएपी) की जांच करेगी.
एजेंसी ने बताया है कि वो कैसे आधुनिक तकनीक और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके इसकी जांच करेगी.
नासा प्रशासक बिल नेल्सन ने बताया कि स्पेस एजेंसी न सिर्फ संभावित यूएपी से जुड़ी घटनाओं की जांच में पहल करेगी बल्कि वो डेटा शेयर करने में ज़्यादा पारदर्शिता से काम लेगी.
नासा की 36 पेज की इस रिपोर्ट में इस मामले से जुड़ी कई तकनीकी और वैज्ञानिक टिप्पणियां की गई हैं.

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एलियंस होने की कितनी संभावना?
रिपोर्ट के आखिरी पेज में कहा गया है कि 'निष्कर्ष निकालने का कोई कारण नहीं' कि देखे गए सैकड़ों यूएपी, जिनकी जांच नासा ने की है, इनके पीछे कोई अन्य शक्ति है.
हालांकि इतना ज़रूर है कि "ये चीजें हमारी सौर प्रणाली से गुजर तक यहां तक आई होंगी."
वैसे इस रिपोर्ट में ये नहीं कहा गया है कि दूसरे ग्रह में जीवन है. लेकिन रिपोर्ट में इस बात से भी इनकार नहीं किया गया है कि पृथ्वी के वायुमंडल में कोई संभावित अज्ञात एलियन टेक्नोलॉजी काम नहीं कर रही है.
नासा साइंस मिशन निदेशालय की सहायक प्रशासिका निकोला फॉक्स ने कहा, ''यूएपी हमारे ग्रह के सबसे बड़े रहस्य हैं. लेकिन ऐसा हाई क्वालिटी डेटा की कमी की वजह से है.''
दावा, जो ख़ारिज हो गया
फॉक्स ने कहा कि यूएपी देखे जाने की तमाम घटनाओं को बावजूद 'इतना डेटा नहीं है कि उस आधार पर यूएपी की प्रकृति और उद्भव के बारे में कोई वैज्ञानिक निष्कर्ष निकाला जा सके.'
फॉक्स ने कहा कि नासा ने यूएपी रिसर्च का नया डायरेक्टर नियुक्त किया है ताकि भविष्य के लिए एक मजबूत डेटाबेस की बुनियाद रखी जा सके.
वैज्ञानिक डेटा जुटाने और उसके विश्लेषण की प्रक्रिया के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंसी और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करेंगे.
बीबीसी की रिपोर्टर सैम कैबरल ने नासा पैनल से, कथित तौर पर परग्रहीय वस्तुओं की तस्वीरों की सीरीज के बारे में पूछा था जिन्हें पिछले सप्ताह मैक्सिको के अधिकारियों को सौंपी गई थीं.
खुद को यूएफ़ओ एक्सपर्ट कहने वाले जेमी मॉसन को एक संसदीय हियरिंग में बुलाया गया था.
वहां उन्होंने दो गैर इंसानी एलियन अवशेष प्रस्तुत किये. उन्होंने दावा किया कि ये 2017 में पेरू के कुस्को में पाए गए थे और रेडियोकार्बन टेस्टिंग के मुताबिक ये 1,800 साल पुराने थे.
लेकिन इन नमूनों को वैज्ञानिक हलकों में काफी संदेह की नजर से देखा गया.
मॉसन ने खुद भी दूसरे ग्रहों पर जीवन होने के दावे किए थे लेकिन उन्हें खारिज कर दिया गया था.
नासा के वैज्ञानिक डॉ. डेविड स्पेगल ने बीबीसी से कहा,"पहले दुनिया के वैज्ञानिकों को नमूने उपलब्ध कराएं. इसके बाद हम देखेंगे कि इसमें क्या सचाई है.''
यूएफ़ओ रिसर्च के नए बॉस का नाम गुप्त
धमकियों के कारण यूएफ़ओ पर रिसर्च करने वाले नए प्रमुख की पहचान गुप्त रखी गई है.
असल में यूएपी रिसर्च के लिए एक नए डायरेक्टर की नियुक्ति होगी. लेकिन उनकी पहचान गुप्त ही रखी गई है.
अनुसंधान के लिए नासा का एक नया निदेशक होगा - लेकिन उनकी पहचान एक रहस्य बनी हुई है.
उनकी भूमिका क्या होगा और उन्हें कितना वेतन दिया जाएगा ये भी गुप्त रखा गया है. जबकि नासा ने कहा है कि वह यूएपी रिसर्च के मामले में ज्यादा पारदर्शिता बरतेगी.
अपने यूएपी अनुसंधान के साथ अधिक पारदर्शी होने का नासा ने वादा किया है.
इसकी एक वजह डायरेक्टर को किसी संभावित सार्वजनिक प्रताड़ना का शिकार होने से बचाना है.
नासा में रिसर्च के असिस्टेंट डिप्टी एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. डेनियल इवान्स ने कहा कि यूएपी रिसर्च पैनल के सदस्यों को वास्तव में कुछ धमकियां मिली हैं.
उन्होंने कहा कि नासा टीम की सुरक्षा को "बेहद गंभीरता से" लेती है. इन खतरों को देखते हुए ही यूएपी के रिसर्च डायरेक्टर का नाम प्रकाशित नहीं किया गया है.

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नासा ने एआई टूल्स की सिफारिश की
रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग यूएपी की पहचान के लिए जरूरी टूल्स हैं.
आम लोगों को यूएपी को समझने के एक अहम पहलू के तौर देखा जाता है.
नासा ने कहा है कि यूएपी की बेहतर समझ और पहचान की सबसे बड़ी चुनौती है डेटा की कमी. नासा तकनीक की क्राउडसोर्सिंग कर कमी की भरपाई करना चाहता है.
इनमें ओपन सोर्स-बेस्ड एप्स और दूसरे स्मार्टफ़ोन मेटाडेटा शामिल हैं. ये मल्टीप्ल सिटिजन ऑब्जर्वर से आते हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा समय में सिविलियन यूएपी रिपोर्ट्स को एक जगह इकट्ठा कर व्यवस्थित रूप देने की कोई मानक व्यवस्था नहीं है. लिहाजा डेटा बिखरे हुए मिलते हैं और इनमें कमियां भी होती हैं.
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