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ऋषि सुनक ने ब्रिटेन में वक़्त से पहले चुनाव करवाने का फ़ैसला क्यों किया
- Author, क्रिस मैसन
- पदनाम, राजनीतिक संपादक, बीबीसी न्यूज़
ब्रिटेन में आम चुनाव का एलान हो चुका है. चार जुलाई को चुनाव होंगे.
प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने बुधवार को चुनाव की घोषणा की.
इसके साथ ही जल्द ही मौजूदा सरकार के हाथों से सत्ता चली जाएगी.
नेता, नेताओं के भविष्य और सबसे ज़रूरी ब्रिटेन की दिशा तय करने का काम जल्द ब्रितानी मतदाताओं के हाथ में होगा.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कार्यालय 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर ऋषि सुनक जब चुनाव की तारीख़ों का एलान कर रहे थे, तब बारिश हो रही थी.
10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर तेज़ संगीत सुनाई दे रहा था.
आप सोचेंगे कि गाना कौन सा था? जवाब है- 1990 के दौर का पुराना गीत 'थिंग्स कैन ओनली गेट बेटर...' यानी चीज़ें सिर्फ़ बेहतर होती हैं.
टोनी ब्लेयर के दौर का ये गाना शायद कुछ लोगों को याद होगा.
1997 में लेबर पार्टी के टोनी ब्लेयर ने इसे चुनावी अभियान में इस्तेमाल भी किया था.
हफ़्तों से चुनाव की सुगबुगाहट
कई हफ़्तों से ये उम्मीदें जताई जा रही थीं कि चुनाव दिसंबर तक हो सकते हैं.
ऐसा करने से ऋषि सुनक को बतौर प्रधानमंत्री कम से कम दो साल मिल जाते और इससे अर्थव्यवस्था को सुधारने का अच्छा मौक़ा भी रहता.
गर्मियों में चुनाव करवाने की बातचीत के दौरान सरकार के एक वरिष्ठ नेता ने कुछ दिन पहले मुझसे कहा था- कोई कारण नहीं है कि इस बात पर उत्सुक हुआ जाए.
कंज़र्वेटिव पार्टी के एक सीनियर नेता से भी मेरी लंबी बातचीत हुई. इस बातचीत का निष्कर्ष ये समझिए कि चुनाव की तैयारी ऐसे की जा रही थी कि प्रचार लंबा चलता और इस दौरान हैलोवीन जैसे त्योहार भी आते.
मगर हर कोई ऐसा ही नहीं सोच और चाह रहा था.
कुछ चाहते थे कि सुनक जल्दी जाएं और कुछ...
फ़ैसले चाकू की नोक पर लिए जा सकते हैं.
कुछ ऐसे भी दबाव डाले जा रहे थे, जिनमें ख़्वाहिश थी कि ऋषि सुनक प्रधानमंत्री पद से जल्दी हटें.
ऐसा चाहने वाले लोगों में डिप्टी पीएम ओलिवर डाउडेन भी थे.
इससे अलग राय रखने वालों को ये लगता है कि जल्दी चुनाव करवाने से हालात बेहतर नहीं होंगे और इससे कंज़र्वेटिव पार्टी की हार का ख़तरा बढ़ जाएगा.
बढ़ती महंगाई
दूसरे शब्दों में कहें तो चुनाव अभी कराओ वरना हालात बदतर हो सकते हैं.
प्रधानमंत्री ऋषि सुनक अपनी कुछ उपलब्धियों को चुनावी प्रचार में गिनवाएंगे या वो ये कह सकते हैं कि उनके लक्ष्य पूरे होने वाले हैं.
यक़ीनन चुनाव सरकार के किए कार्यों पर ही पूरी तरह से निर्भर नहीं करता है.
जब महंगाई आसमान पर होती है, तब सरकार को घेरा जाता है. ऐसे में ये बात भी जायज़ है कि अगर महंगाई कम होती है तो सरकार चुपके से इसका श्रेय लेने की कोशिश करे. ऐसा होता भी है.
ब्रिटेन में अर्थव्यवस्था की व्यापक तस्वीर कुछ साफ़ दिखती है.
चुनाव प्रचार शुरू
अब बात उस योजना की, जिसमें शरण चाहने वाले कुछ लोगों को रवांडा भेजने की बात कही गई.
ये अभी तक हुआ नहीं है.
मगर प्लेन उड़ान भर सकते हैं, शायद चुनाव प्रचार के दौरान भी ऐसा हो. हालांकि मतदान वाले दिन से पहले ऐसा होने की संभावना कम ही हैं.
ख़ासकर अब जब चुनावी प्रचार शुरू हो चुका है.
कंज़र्वेटिव पार्टी बार-बार ये कहेगी कि अपनी ख़्वाहिशों को लेकर सावधान रहें.
लेबर पार्टी और दूसरे बार-बार कहेंगे कि ये बदलाव का वक़्त है.
हो चाहे जो भी, नतीजा देखने लायक रहेगा.
दो बातें हो सकती हैं.
एक- ओपिनियन पोल्स मोटे तौर पर सही साबित होंगे और सत्ता में बैठी पार्टी हार जाएगी.
दो- ओपिनियन पोल्स ग़लत साबित होंगे और ये बीते सालों की सबसे परेशान करने वाली बातों में एक बात होगी.
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