मध्य प्रदेश: बीजेपी में ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर विवाद- प्रेस रिव्यू

शिवराज सिंह चौहान

इमेज स्रोत, Vishal Bhatnagar/NurPhoto via Getty Images

आज के प्रेस रिव्यू की शुरुआत करते हैं, मध्य प्रदेश की ख़बर से जहाँ, इस साल दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले बीजेपी में मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं.

द हिंदू में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव से कुछ महीने पहले यहाँ पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराज़गी खुलकर सामने आ रही है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया

इमेज स्रोत, ANI

गुना से बीजेपी सासंद केपी यादव का एक वीडियो भोपाल प्रदेश कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर किया है.

वीडियो में केपी यादव ये कहते सुने जा सकते हैंं, "भीड़ में कुछ लोग ख़ुद को बुद्धिजीवी कहते हैं लेकिन वो इतने मूर्ख हैं कि उन्हें ये नहीं पता कि हम बीजेपी में हैं. केंद्र और राज्य में बीजेपी की सरकार है, यहां से बीजेपी के सांसद हैं. वो भरे मंच से चिल्ला-चिल्ला कर कहते हैं कि 2019 में हमसे ग़लती हुई थी. जिस पार्टी में आप हैं उसी के बारे में आप कहते हैं कि आपसे ग़लती हुई है. ये समझ से परे है. मुझे लगता है कि जहां वो थे उन्हें वहीं रहना था, अगर वो जनप्रिय हैं तो वो वहीं रहकर मुझसे फिर से चुनाव लड़ते और जीतते."

केपी यादव का निशाना ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरफ़ था. बीते लोकसभा चुनावों में केपी यादव ने बीजेपी के टिकट पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराया था, जो उस वक्त कांग्रेस के टिकट पर चुनाव में थे. बाद में ज्योतिरादित्य ने अपने समर्थकों से साथ कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया था.

छोड़िए X पोस्ट, 1
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

पोस्ट X समाप्त, 1

द हिंदू लिखता है कि तनाव केवल यादव और सिंधिया के समर्थकों बीच नहीं है बल्कि पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेता कांग्रेस में रहते हुए सिंधिया के दिए बयानों और उनके समर्थकों के प्रदर्शन पर भी चर्चा कर रहे हैं. इनमें से कई शिवराज सिंह चौहान की कैबिनेट का हिस्सा हैं.

इसी महीने पार्टी के एक पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने बीजेपी छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया था. पूर्व सीएम कैलाश जोशी के बेटे दीपक 2003 में बागली और 2008 और 2013 में हाटपिपलिया से विधायक रह चुके हैं.

2018 के चुनावों में हाटपिपलिया सीट पर वो कांग्रेस के मनोज चौधरी से हार गए थे. बाद में सिंधिया के साथ मनोज चौधरी बीजेपी में शामिल हो गए थे. 2020 में हुए उपचुनावों में भी नतीजा मनोज चौधरी के पक्ष में गया था.

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

अख़बार लिखता है कि पार्टी इस बार विधानसभा चुनावों में मनोज चौधरी को तवज्जो दे सकती है.

जबलपुल सीट से पूर्व मंत्री और विधायक हरेंद्रजीत सिंह बब्बू ने दो दिन पहले प्रदेश बीजेपी प्रमुख वीडी शर्मा के प्रति नाराज़गी जताई थी कि उन्हें नज़रअंदाज़ किया जा रहा है.

बीते सप्ताह अनूपपुर से नेता अखिलेश द्विवेदी ने आरोप लगाया था कि पार्टी कार्यकर्ताओं को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है, वहीं पूर्व विधायक ध्रुव प्रताप सिंह ने कहा था कि वो बीजेपी छोड़ कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार इस तनाव पर चर्चा के लिए पार्टी नेता नरेंद्र सिंह तोमर और प्रह्लाद पटेल ने शिवराज सिंह चौहान से मुलाक़ात की है.

इससे कुछ दिन पहले उनकी कैबिनेट के दो मंत्रियों गोपाल भार्गव और गोविंद सिंह राजपूत समेत तीन विधायकों ने चौहान से मुलाक़ात कर शिकायत की थी कि शहरी विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह उनके विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ी परियोजनाओं को मंज़ूरी नहीं दे रहें.

अख़बार लिखता है कि दो साल (दिसंबर 2028 से लेकर मार्च 2020) को छोड़ दिया जाए तो बीते दो दशकों से प्रदेश में बीजेपी की सरकार रही है. इस बार बीजेपी यहां एंटी-इन्कम्बेंसी का सामना कर सकती है और इस लिहाज़ से ये चुनाव उसके लिए महत्वपूर्ण हैं.

अंदरूनी कलह की इन सभी ख़बरों के बीजेपी कहती रही है कि इसका असर आगामी चुनावों पर नहीं पड़ेगा.

छोड़िए YouTube पोस्ट, 1
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. YouTube सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 1

संसद भवन के उद्घाटन को लेकर बयानबाज़ी जारी

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार बीजेपी ने गुरुवार को विपक्षी पार्टियों से कहा है कि वो नई संसद के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने का अपना फ़ैसला वापस लें.

नई संसद का उद्घाटन 28 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होना है.

अख़बार लिखता है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चेन्नई में विपक्षी पार्टियों की आलोचना की और कहा “आप प्रधानमंत्री को पसंद करें या नहीं, लेकिन आपको गणतंत्र के मंदिर का सम्मान करना चाहिए. ये सही नहीं है कि आप उस समारोह का बहिष्कार करें जो गणतंत्र के मंदिर के लिए हो, जहां लोगों के मुद्दों पर चर्चा की जानी हो. जनता के लिए ही सही लेकिन आप इस समारोह में शिरकत करें.“

वहीं दिल्ली में एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैंने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान देखा कि गणतंत्र में सभी लोग साथ आते हैं, विपक्षी नेता भी समारोह में शामिल होते हैं और लोगों की बात करते हैं.

अख़बार लिखता है कि ये मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है. एक वकील ने जनहित याचिका दायर कर कोर्ट से कहा है कि लोकसभा सेक्रेटेरिएट और केंद्र सरकार राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को इस कार्यक्रम से दूर रख संविधान का उल्लंघन कर रहे हैं, ये राष्ट्रपति का अपमान है.

अख़बार लिखता है कि 25 पार्टियां इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी जिनमें से 18 सत्ताधारी एनडीए की सहयोगी पार्टियां हैं. इसने अलावा बहुजन समाज पार्टी, शिरोमणी अकाली दल, जनता दल (सेक्युलर), लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), वाईएसआर कांग्रेस, बीजेू जनता दल और तेलुगूदेशम शामिल हैं.

वहीं विपक्षी दल कांग्रेस ने एक पत्र जारी किया है जिसके अनुसार 19 पार्टियां इसमें हिस्सा नहीं लेंगी.

छोड़िए X पोस्ट, 2
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

पोस्ट X समाप्त, 2

तमिलनाडु में दूध न ख़रीदे अमूल- स्टालिन

जनसत्ता में छपी एक ख़बर के अनुसार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र गृह मंत्री अमित शाह से कहा है कि वो अमूल कोऑपरेटिव को तमिलनाडु में दूध ख़रीदने से रोकें.

अख़बार लिखता है कि उन्होंने कहा है कि गुजरात की इस कंपनी ने कृष्णगिरी ज़िले में 'चिलिंग सेंटर' और प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए अपने बहु-राज्य सहकारी लाइसेंस का इस्तेमाल किया है.

शाह को लिखे एक पत्र में उन्होंने कहा कि अमूल ने कृष्णगिरी, धर्मपुरी, वेल्लोर, रानीपेट, तिरुपथुर, कांचीपुरम और तिरुवल्लूवर ज़िले के आसपास के इलाक़ों में मौजूद एफ़पीओ और एसएचजी से दूध खरीदने की योजना बनाई है जो दूसरे के मिल्क शेड इलाक़े में हस्तक्षेप करने जैसा है.

उन्होंने लिखा है कि देश में ये नियम रहा है कि सहकारी समितियां एकदूसरे के मिल्क शेड के इलाक़ों का उल्लेघन नहीं करतीं और सभी को फलने-खूलने का बराबर मौक़ा दिया जाता है. इस तरह खरीद में हस्तक्षेप श्वेत क्रांति की भावना के ख़िलाफ़ है. इस कारण उपभोक्ताओं की दिक्कतें बढ़ सकती हैं.

छोड़िए YouTube पोस्ट, 2
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. YouTube सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 2

एलएसी के पास चीन बना रहा गाँव

द हिंदू में छपी एक ख़बर के अनुसार चीन मिडिल सेक्टर और पूर्वी सेक्टर में लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास मॉडल विलेज़ेस का एक नेटवर्क तैयार कर रहा है जिन्हें शाओकांग कहा जाता है.

देश के उत्तर में एलएसी के मिडिल सेक्टर से 6-7 किलोमीटर की दूरी पर चीन नए पोस्ट भी बना रहा है.

अख़बार ने खु़फ़िया स्रोतों के हवाले से लिखा है कि सीमा पर बाराहोटी के दूसरी तरफ चीन तेज़ी से नए घर बना रहा है. वो 90 से 100 दिनों में तीन सौ से चार सौ घर तैयार कर रहा है.

वहीं चीनी सेना ने इस इलाक़े में अपनी गश्त भी बढ़ा दी है. अख़बार लिखता है कि जहां मौसम में एक बार (तीन-से चार महीने) चीनी सेना की टुकड़ी को यहां गश्त लगाते देखा जाता था वहीं अब हर पंद्रह दिन में उसकी सेना यहां गश्त करती दिखती है. इस तरह के गश्ति दलों को माना, लीती और थंगला इलाक़े में भी देखा गया है.

छोड़िए YouTube पोस्ट, 3
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. YouTube सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 3

रकबर ख़ान लिंचिंग मामले में 4 लोग दोषी करार

2018 में राजस्थान के अलवर ज़िले में हुई मॉब लिंचिंग की एक घटना के मामले में अलवर की एक अदालत ने 4 लोगों को दोषी करार दिया है.,

इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि रक़बर ख़ान लिचिंग मामले में दोषी इन चारों को सात-सात साल की सज़ी सुनाई गई है, वहीं सबूतों के अभाव में एक व्यक्ति को अदालत ने बरी कर दिया है.

अदालत ने नरेश विजय, परमजीत और धर्मेंद्र को धारा 341 और 304 आईपीसी (गैर इरादतन हत्या की सज़ा) के तहत दोषी ठहराया है, जबकि नवल को बरी कर दिया है.

2018 में रक़बर ख़ान को भरतपुर ज़िले में अपने गांव की तरफ जाते वक्त भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला था. इस घटना में कथित तौर पर कई गौरक्षक शामिल थे. रक़बर पर मवेशियों की तस्करी का शक़ था.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)