'अब हमें अपने रिश्ते को छुपाने की ज़रूरत नहीं'- थाईलैंड में समलैंगिक विवाह को मान्यता

    • Author, जोनाथन हेड, थान्यारात दोक्सोने और पैनिसा एमोचा
    • पदनाम, बैंकॉक से रिपोर्टिंग

थाईलैंड में गुरुवार को बहुप्रतीक्षित समलैंगिक विवाह का क़ानून लागू हो गया और इस मौके पर कई जोड़ों ने शादी पंजीकृत कराई.

इन जोड़ो में पुलिस अधिकारी पिसित "कीव" सिरिहिरुंचाय भी थे जो लंबे समय से उनके पार्टनर रहे चनाटिप "जेन" सिरिहिरुंचाय से शादी का पंजीकरण कराने के लिए लाइन में लगे हुए थे.

बैंकॉक के सबसे बड़े शॉपिंग मॉल्स में से एक मॉल में छह जोड़े अपनी शादी को रजिस्टर करने आए थे.

इस क़ानून की वैधता का जश्न मनाने के लिए शहर के अधिकारियों ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया था.

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गुरुवार को थाईलैंड में जब सैकड़ों जोड़ों को शादी के सर्टिफ़िकेट मिले, तो ऐसे मौके पर उनके चेहरे पर मुस्कान और आंसू दोनों देखे जा सकते थे, जिनके बारे में उन्होंने लंबा इंतज़ार किया था.

स्थानीय प्रशासन ने इस मौके पर फ़ोटो बूथ और निःशुल्क केक का इंतज़ाम किया हुआ था और यहां विभिन्न रंगों और पोशाकों का जमावड़ा था.

बैंकॉक के एक जोड़े को फ़्री एयर टिकट दिया गया था जिसने सबसे पहले पंजीकरण कराया.

थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा ने दावोस से अपने फ़ेसबुक अकाउंट पर लिखा, "इंद्रधनुषी झंडा थाईलैंड के आसमान में लहरा रहा है." वह वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम में हिस्सा लेने के लिए दावोस में हैं.

कई एक्टिविस्टों का कहना है कि वह उम्मीद कर रहे थे कि गुरुवार को पंजीकृत शादियों का आंकड़ा 1,448 पार कर जाएगा.

'1448', थाई सिविल कोड की वह धारा है जिसके तहत शादी की परिभाषा को स्पष्ट किया गया है.

पिसित और चनाटिप

पिसित बताते हैं, "हम काफ़ी समय से इसके लिए तैयार थे. हम सिर्फ़ क़ानून का इंतजार कर रहे थे जिससे हमें मदद और समर्थन मिल सके."

अपने रिश्तों को औपचारिक स्वरूप देने के लिए पिसित और उनके पार्टनर चनाटिप एक बौद्ध भिक्षु के पास गए थे. बौद्ध भिक्षु ने उन्हें एक नया उपनाम दिया जिसे वह और उनका पार्टनर दोनों साझा कर सकें. वह नाम है सिरिहिरुंचाय.

उन्होंने स्थानीय आधिकारियों से लेटर ऑफ इंटेट को जारी करने की अपील की थी जिस पर दोनों ने हस्ताक्षर किए थे और शादी करने की क़सम खाई थी.

पिसित कहते हैं कि थाई क़ानून के तहत रिश्ते को मान्यता मिलने के लिए वे इसी पल का इंतजार कर रहे थे.

उन्होंने कहा, "यह हमारे लिए एकदम परफ़ेक्ट है. यह एक ऐसा क़ानून है जो हमारे अधिकारों की रक्षा करता है."

अभी तक, आधिकारिक दस्तावेज़ों में पिसित और चनाटिप को एक-दूसरे का भाई बताया गया था.

इस तरीक़े से वो क़ानून की नज़र में एक परिवार के तौर पर रह सकते थे.

एक शादी के प्रमाणपत्र मिलने का मतलब है कि अब एलजीबीटीक्यू+ जोड़ों के पास भी अन्य जोड़ों की तरह ही अधिकार होगा, जिनमें सगाई और शादी करने, अपनी संपत्ति का प्रबंधन करने और बच्चों को गोद लेने का अधिकार शामिल है.

इस क़ानून के तहत अगर समलैंगिक जोड़े में से एक पार्टनर बीमार हो जाए या दोनों में से एक काम करने में अक्षम हो जाए तो वह अपने पार्टनर के इलाज को लेकर फैसला ले सकता है या किसी तरह की वित्तीय सहायता दे सकता है.

जैसे पिसित ने अपने पार्टनर के नाम पर अपनी सरकारी पेंशन की है.

पिसित ने कहा, "हम साथ में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, एक घर बनाना, एक छोटा-सा बिजनेस शुरू करना, शायद एक कैफ़े ताकि हम एक-दूसरे का ख्याल रख सकें."

कैसे अस्तित्व में आया यह क़ानून

यह क़ानून पिछले साल जून में थाईलैंड की संसद के दोनों सदनों में पारित किया गया था.

इस क़ानून को सितंबर में थाई राजा ने अपना समर्थन दिया था जिसे एलजीबीटीक्यू+ अधिकारों की दिशा में एक बड़ा क़दम माना गया है.

एशिया में थाईलैंड, नेपाल और ताईवान के बाद तीसरा ऐसा देश बन गया है जहां समलैंगिक जोड़ों को वैधता दी गई है.

यही कारण है कि जापान की रहने वाली अकी उर्यू अपनी पार्टनर के साथ रहने के लिए बैकॉक आ गईं.

उनके अनुसार, जापान में एलजीबीटीक्यू+ समुदाय की ज़िंदगी काफ़ी मुश्किल है.

उन्होंने बताया, "थाईलैंड में मैं अपने पार्टनर का हाथ पकड़ सकती हूं. उसके साथ चल सकती हूं. कोई कुछ नहीं कहता है. यह काफ़ी अलग है. यह सही लगता है."

अकी और उनकी पार्टनर ने गुरुवार को शादी का पंजीकरण कराया.

शादी करने के बाद, अकी ने कहा, "ऐसा लग रहा है जैसे मैंने अपनी नई ज़िंदगी की शुरुआत की है."

बैंकॉक के एक मॉल में समलैंगिक जोड़े के साथ अकी और उनकी पार्टनर को जश्न मनाते देख, एक गे चीनी व्यक्ति झांग खुश हो रहे थे. वह अपना पहला नाम नहीं बताना चाहते थे.

उन्होंने कहा, "हम उत्साहित हैं, लेकिन हमें काफ़ी जलन भी हो रही है. थाईलैंड चीन के इतना नजदीक है, लेकिन एक तरह से यह बहुत दूर है."

थाईलैंड को एलजीबीटीक्यू+ लोगों के प्रति अपनी सहिष्णुता के लिए जाना जाता है.

थाईलैंड के कार्यकर्ताओं का कहना है कि क़ानूनी मान्यता के लिए लगातार अभियान चलाया गया था.

एक लंबा इंतज़ार और लंबी लड़ाई

59 साल की रूंगतिवा थांगकानोपास्ट जो अपनी 18 साल से साथ रहीं पार्टनर के साथ मई में शादी करेंगी.

उन्होंने बीबीसी से इस हफ्ते की शुरुआत में कहा था, "हम 18 सालों से इस दिन का इंतज़ार कर रहे थे. जिससे हर कोई हमें खुलेआम पहचान सके और हमें छुपने की कोई ज़रूरत ना पड़े."

उन्होंने अपने परिवार की इच्छानुसार एक व्यक्ति से शादी की. जो कि गे था. कुछ समय बाद उसकी मौत हो गई.

आईवीएफ़ के ज़रिए उनकी एक बेटी हुई. लेकिन पति की मौत के बाद वो बैंकॉक के पहले लेस्बियन पब में समय बिताने लगीं और बाद में पब को चलाने में उनकी मदद करने लगीं.

फिर उनकी मुलाक़ात फानलावी से हुई जो कि अब 45 साल की हैं और वह सिर्फ अपना पहला नाम ही इस्तेमाल करती हैं.

साल 2013 में वैलेंटाइन डे के दिन दोनों महिलाएं आधिकारिक तौर पर शादी करने के लिए सेंट्रल बैंकॉक में बैंग राक जिला कार्यालय गईं थीं. वह शादी को रजिस्टर कराने की एक लोकप्रिय जगह है क्योंकि थाई में उस जगह के नाम का मतलब "लव टाउन" होता है.

यह वह समय था जब एलजीबीटीक्यू+ जोड़ों ने शादी को लेकर ख़ासकर हेट्रोसेक्शुल पार्टनरशिप के रूप में अधिकारियों के नज़रिए को चुनौती देने के लिए ज़िला कार्यालयों से शादी के सर्टिफ़िकेट लेने की कोशिश की थी.

उस दिन क़रीब 400 हेट्रोसेक्शुल जोड़े इंतज़ार कर रहे थे.

ज़िला कार्यालय ने रुंगतिवा और फानलावी को शादी का सर्टिफ़िकेट देने से मना कर दिया था और थाई मीडिया ने लेस्बियन समुदाय के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करके उनकी कोशिशों का मज़ाक बनाया था.

फिर भी, कई एक्टिविस्ट सरकार को शादी के क़ानूनों को बदलने के विचार को मनाने में क़ामयाब रहे.

फिर प्रस्तावित नागरिक भागीदारी विधेयक संसद में पेश किया गया, जिसमें समलैंगिक जोड़ों को कुछ आधिकारिक मान्यता दी गई, लेकिन उसमें उन्हें हेट्रोसेक्शुल जोड़ों के समान क़ानूनी अधिकार नहीं दिए गए थे.

संसद ने बहुमत से पारित किया

साल 2014 में हुए तख्तापलट से थाईलैंड की सरकार हटा दी गई थी जिससे यह आंदोलन बीच में रुक गया था.

संसद से समलैंगिक विवाह के बिल को पास कराने में एक पूरा दशक लगा.

यह इसलिए संभव हो पाया क्योंकि युवा प्रगातिशील राजनीतिक पार्टियों ने इसका समर्थन किया.

इस समय तक कई पश्चिमी देशों में समलैंगिक विवाह को वैधता मिल चुकी थी और समलैंगिक प्यार को भी थाई समाज में अपनाया जाने लगा था.

इस क़ानून के पक्ष में इतना ज़्यादा बदलाव हुआ कि पिछले साल इस क़ानून को 400 वोटों के भारी बहुमत से संसद में पारित कर दिया गया था.

जबकि इसके विरोध में केवल 10 वोट पड़े थे. यहां तक ​​कि रूढ़िवादी सीनेट में से भी केवल चार सीनेट ने ही इस क़ानून का विरोध किया था.

बिना सामाजिक दबाव के रूंगतिवा और फानलीवा जैसे जोड़ों को अब एक-दूसरे के प्रति अपने प्यार को सबके सामने लाने का मौका मिला है.

रुंगतिवा ने कहा, "इस क़ानून के साथ हमारे परिवार को भी मान्यता मिली है. अब हमें सिर्फ़ इसलिए अजीब नहीं समझा जाएगा क्योंकि हमारी बेटी का पालन-पोषण हेट्रोसेक्शुल माता-पिता नहीं कर रहे हैं."

क़ानून में क्या है?

इस नए क़ानून में शादी से संबंधित थाई सिविल संहिता की 70 धाराओं में से पुरुष, महिला, पति और पत्नी जैसे जेंडर- विशेष शब्दों को हटाया गया है और उनके स्थान पर व्यक्ति और जीवनसाथी जैसे शब्दों को रखा गया है.

हालांकि थाईलैंड में ऐसी कई क़ानूनी प्रक्रिया है जिन्हें अभी तक जेंडर न्यूट्रल नहीं कहा जा सकता है .

थाई क़ानून के तहत अभिभावकों को अभी भी माता और पिता के तौर पर ही परिभाषित किया गया है.

यह क़ानून अभी भी लोगों को आधिकारिक दस्तावेजों में अपनी सुविधा के अनुसार जेंडर का इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं देता है.

अभी भी लोगों को जन्म से मिले जेंडर का इस्तेमाल करना पड़ता है.

कार्यकर्ताओं के मुताबिक, ऐसे कई क़ानून हैं जहां पर बदलाव के लिए जोर देने की ज़रूरत है.

चक्रित और उनके पार्टनर प्रिन दोनों 24 साल से साथ में रह रहे हैं.

चक्रित इंक वधनावीरा ने कहा, "मैं वास्तव में उम्मीद करता हूं कि लोग ऐसी पुरानी और ​​रूढ़िवादी सोच को त्याग देंगे कि समलैंगिक पुरुषों को सच्चा प्यार नहीं मिल सकता."

चक्रित कहते हैं, "हम दोनों ने 20 साल से भी ज़्यादा समय में यह साबित कर दिया है कि हर अच्छे-बुरे समय में हम एक-दूसरे से सच्चा प्यार करते हैं. हम दोनों पहले दिन से ही एक-दूसरे का ख़्याल रखने के लिए तैयार हैं. हम हेट्रोसेक्शुल जोड़ों से अलग नहीं हैं."

चक्रित के माता-पिता ने उनके समलैंगिक रिश्ते को तुरंत स्वीकार कर लिया था, जबकि प्रिन के माता-पिता को ऐसा करने में सात साल लग गए.

चक्रित और प्रिन मिलकर एक प्रोडक्शन बिजेनस चलाते हैं. वह दोनों अपने प्रोडक्शन बिजेनस और अपनी दूसरी संपत्तियों को आपस में साझा करना चाहते थे.

इसके लिए उन दोनों ने प्रिन के माता-पिता से चक्रित को आधिकारिक तौर पर गोद लेने के लिए कहा और चक्रित को उनके ही परिवार का नाम देने के लिए कहा.

प्रिन ने कहा, "उदाहरण के लिए, जब समलैंगिक जोड़े को साथ में कुछ खरीदना होता है, जैसे कोई बड़ा- सा सामान, तो वह उसे एक जोड़े के तौर पर नहीं खरीद सकते हैं और अगर हममें से किसी एक की मृत्यु हो जाती है तो हम दोनों ने मिलकर जो कमाया है, वह हम अपने पार्टनर को नहीं दे सकते हैं. इसलिए समलैंगिक विवाह को मान्यता मिलना बहुत ज़रूरी है."

प्रिन बताते हैं, "आज दोनों के माता-पिता हमारे साथ दूसरे शादीशुदा जोड़ों की तरह ही बर्ताव करते हैं."

और जब भी दूसरे जोड़ों की तरह उनके रिश्ते में कोई दिक्कत आती है तो उनके माता-पिता उनकी मदद करते हैं.

प्रिन कहते हैं, "मुझे अच्छे से समझने के लिए मेरे पापा ने अब गे मैंगजीन पढ़ना शुरू कर दिया है. यह देखकर काफ़ी अच्छा लगता है."

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