इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज ने विहिप के कार्यक्रम में क्या कह दिया जिस पर हो रहा विवाद

    • Author, अंशुल सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

जस्टिस शेखर कुमार यादव इलाहाबाद हाई कोर्ट में जज हैं. वो रविवार को विश्व हिन्दू परिषद के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे.

इस मौक़े पर उन्होंने यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के मुद्दे पर कहा, "हिन्दुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यक के अनुसार ही देश चलेगा."

जस्टिस शेखर यादव का कहना था कि एक से ज़्यादा पत्नी रखने, तीन तलाक़ और हलाला के लिए कोई बहाना नहीं है और अब ये प्रथाएं नहीं चलेंगी.

जस्टिस यादव की इस स्पीच से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं और अब उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.

हालाँकि बीबीसी से बातचीत में जस्टिस शेखर यादव ने कहा है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर चलाया जा रहा है.

क्या है पूरा मामला?

रविवार यानी आठ दिसंबर को विश्व हिन्दू परिषद के विधि प्रकोष्ठ (लीगल सेल) ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के लाइब्रेरी हॉल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था.

इस कार्यक्रम में जस्टिस शेखर यादव के अलावा इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक और मौजूदा जज जस्टिस दिनेश पाठक भी शामिल हुए.

कार्यक्रम में 'वक़्फ़ बोर्ड अधिनियम', 'धर्मान्तरण-कारण एवं निवारण' और 'समान नागरिक संहिता एक संवैधानिक अनिवार्यता' जैसे विषयों पर अलग-अलग लोगों ने अपनी बात रखी.

इस दौरान जस्टिस शेखर यादव ने 'समान नागरिक संहिता एक संवैधानिक अनिवार्यता' विषय पर बोलते हुए कहा कि देश एक है, संविधान एक है तो क़ानून एक क्यों नहीं है?

लगभग 34 मिनट की इस स्पीच में शाह बानो केस का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि तीन तलाक़ बिल्कुल ग़लत है, लेकिन तत्कालीन सरकार को झुकना पड़ा था.

जस्टिस शेखर यादव कहते हैं, "जिस नारी को हमारे यहां देवी का दर्जा दिया जाता है, आप उसका निरादर नहीं कर सकते हैं. आप यह नहीं कह सकते हैं कि हमारे यहां तो चार पत्नियां रखने का अधिकार है, हमारे यहां तो हलाला का अधिकार है, हमारे यहां तो तीन तलाक़ बोलने का अधिकार है. ये सब नहीं चलने वाला है."

अपनी स्पीच के दौरान जस्टिस यादव ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की जमकर आलोचना की. उनका कहना था कि हमें किसी का कष्ट देखकर कष्ट होता है, लेकिन आपके यहां ऐसा नहीं होता है.

उन्होंने कहा, "ये कहने में बिल्कुल गुरेज़ नहीं है कि ये हिन्दुस्तान है. हिन्दुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यक के अनुसार ही देश चलेगा. यही क़ानून है. आप यह भी नहीं कह सकते कि हाई कोर्ट के जज होकर ऐसा बोल रहे हैं. क़ानून तो भैय्या बहुसंख्यक से ही चलता है. परिवार में भी देखिए, समाज में भी देखिए. जहां पर अधिक लोग होते हैं, जो कहते हैं उसी को माना जाता है."

जस्टिस शेखर यादव ने ये भी कहा कि 'कठमुल्ले' देश के लिए घातक हैं.

जस्टिस यादव कहते हैं, "जो कठमुल्ला हैं, 'शब्द' ग़लत है लेकिन कहने में गुरेज़ नहीं है, क्योंकि वो देश के लिए घातक हैं. जनता को बहकाने वाले लोग हैं. देश आगे न बढ़े इस प्रकार के लोग हैं. उनसे सावधान रहने की ज़रूरत है."

इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अयोध्या में मौजूद राम मंदिर पर भी अपनी बात रखी.

उन्होंने कहा, "कभी कल्पना की थी क्या आपने कि हम राम मंदिर को अपनी आंखों के सामने देखेंगे, लेकिन देखा है आपने. हमारे पूर्वज तमाम बलिदान देकर चले गए इसी आस में कि हम रामलला का भव्य मंदिर बनते देखेंगे लेकिन वो देख नहीं पाए. किया उन्होंने, लेकिन देख आज हम रहे हैं."

स्पीच के आख़िर में उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि यूसीसी बिल को लोग जल्दी ही देखेंगे.

जस्टिस शेखर यादव के बयान पर किसने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट की वकील इंदिरा जयसिंह ने जस्टिस शेखर यादव के बयान को शर्मनाक बताया है.

सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर इंदिरा जयसिंह ने लिखा, "एक मौजूदा न्यायाधीश के लिए अपने राजनीतिक एजेंडे पर एक हिंदू संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लेना कितनी शर्म की बात है."

बीबीसी से बातचीत में इंदिरा जयसिंह कहती हैं, "पहले तो एक धार्मिक संगठन की मीटिंग हाई कोर्ट की बिल्डिंग में कैसे हो सकती है. यह मुझे संवैधानिक नहीं लगता है. दूसरी बात अगर एक सिटिंग जज इस तरह की मीटिंग में शामिल होते हैं तो यह सेक्युलरिज्म के ख़िलाफ़ है."

अभिषेक आत्रेय विश्व हिन्दू परिषद विधि प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय सह-संयोजक हैं और कार्यक्रम में बतौर वक्ता शामिल हुए थे.

जस्टिस यादव के कार्यक्रम में भाग लेने के सवाल पर अभिषेक आत्रेय कहते हैं, "विश्व हिन्दू परिषद विधि प्रकोष्ठ पर न तो बैन लगा है और न ही यह संगठन कोई अवैध काम कर रहा है. फिर जस्टिस शेखर यादव के कार्यक्रम में आने पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं. हम वक़ीलों का एक क़ानूनी संगठन हैं और वक़ीलों के प्लेटफ़ॉर्म्स पर जज जाते रहते हैं. इसमें कुछ नया नहीं है."

जस्टिस शेखर कुमार यादव बीबीसी से कहते हैं, "विश्व हिन्दू परिषद सामाजिक संगठन है और कोई प्रतिबंध थोड़े न लगा है उस पर. विश्व बंधुत्व को लेकर चलने वाला संगठन है. तो भाग लेने पर कोई सवाल ही नहीं उठना चाहिए."

जस्टिस शेखर यादव ने अपनी स्पीच में कहा था कि हिन्दुस्तान बहुसंख्यक के हिसाब से चलेगा. इस बयान पर विवाद हो रहा है और कई लोगों ने उन्हें हटाए जाने की मांग की है.

जस्टिस शेखर यादव ने बीबीसी से कहा है, "छोटा सा एक परिवार ले लीजिए. चार सदस्य होते हैं. अगर एक व्यक्ति कुछ और बोल रहा है तो तीन लोगों के तीन दिमाग़ हैं न. इसलिए ये तीन अच्छा लेकर चलेंगे. तो सबको साथ लेकर चलिए. अकेले आप ये कहें कि हम सही हैं तो यह ठीक नहीं है."

जब संविधान के हिसाब से सब बराबर हैं तो फिर इस तरह का बयान क्यों?

इस सवाल के जवाब में जस्टिस शेखर यादव कहते हैं, "मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर चलाया जा रहा है. बहुसंख्यक का मतलब हैं जिनकी सोच अच्छी है यानी प्रगतिशील सोच है, तो उनके आधार पर यह देश चलना चाहिए. हिन्दू-मुस्लिम का इसमें ग़लत सेंस लिया जा रहा है. बहुसंख्यक का सीधा सा मतलब है इस देश का आगे लेकर जाने वाले लोग."

वीएचपी के इस कार्यक्रम में जस्टिस यादव ने 'कठमुल्ला' शब्द का इस्तेमाल किया है. इस पर एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आपत्ति जताई है.

उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में '(रिस्टेटमेंट ऑफ़ वैल्यूज़ ऑफ़ जुडिशियल लाइफ़) यानी न्यायिक जीवन के मूल्यों का पुनर्स्थापन- 1997' का हवाला देते हुए कहा, "कोई न्यायाधीश सार्वजनिक बहस में शामिल नहीं होगा या राजनीतिक मामलों पर या उन मामलों पर सार्वजनिक रूप से अपने विचार व्यक्त नहीं करेगा जो लंबित हैं या जिसके न्यायिक निर्धारण के लिए उठने की संभावना है."

जस्टिस शेखर यादव कहते हैं, "कठमुल्ला तो एक प्रचलित शब्द हो गया है जो हमारे हिन्दू में भी हो सकता है. हिन्दू धर्म में जो ग़लत रूप से काम करने वाले लोग हैं उनको भी कठमुल्ला कहते हैं. मुल्ला तो अच्छा शब्द है. कठ का मतलब लकड़ी होता है. जिसके अंदर लकड़ी का दिमाग़ होता है वो कठमुल्ला होता है. वो हिन्दू में भी हो सकता है, मुस्लिम में भी हो सकता है."

बयान पर नेताओं ने क्या कहा?

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा का कहना है कि इस बयान पर मुख्य न्यायाधीश को स्वत: संज्ञान लेना चाहिए.

महुआ मोइत्रा ने एक्स पर लिखा, "वीएचपी के कार्यक्रम में शामिल हुए हाई कोर्ट के मौजूदा जज, कहा- देश हिंदुओं के मुताबिक़ चलेगा और हम अपने संविधान के 75 वर्ष का जश्न मना रहे हैं! सुप्रीम कोर्ट, माननीय सीजेआई - क्या किसी ने स्वतः संज्ञान लिया?"

टीएमसी के पूर्व राज्यसभा सांसद जवाहर सरकार का कहना है कि जस्टिस शेखर यादव को उनके पद से हटा देना चाहिए.

बीजेपी विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने जस्टिस यादव के बयान के लिए उनकी तारीफ़ की है.

शलभ मणि ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "हमारे यहाँ बच्चा जन्म लेता है तो उसे ईश्वर की तरफ़ ले जाते हैं, वेद मंत्र बताते हैं, उनके यहाँ बच्चों के सामने बेज़ुबानों का बेरहमी से वध होता है, सैल्यूट है जस्टिस शेखर यादव, सच बोलने के लिए !"

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का कहना है कि मामले में सुप्रीम कोर्ट को स्वत: संज्ञान लेना चाहिए और जस्टिस यादव को बर्खास्त करना चाहिए.

इस मामले पर आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सांसद चन्द्रशेखर आज़ाद ने भी प्रतिक्रिया दी है.

चन्द्रशेखर आज़ाद ने एक्स पर लिखा, "एक न्यायाधीश का कर्तव्य है कि वह अपने शब्दों और कार्यों के माध्यम से समाज को एकजुट करे, न कि वैमनस्य को बढ़ावा दे. 'कठमुल्ला' जैसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग न केवल असंवेदनशील है, बल्कि यह न्यायपालिका की निष्पक्षता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है."

कौन हैं जस्टिस शेखर यादव?

जस्टिस शेखर यादव ने बतौर वकील अपना करियर शुरू किया था. साल 1988 में उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से क़ानून की डिग्री ली और साल 1990 में वकालत शुरू की. उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में सिविल और संवैधानिक मामलों में प्रैक्टिस की थी.

शेखर यादव ने हाई कोर्ट में राज्य सरकार के अपर शासकीय अधिवक्ता और स्थायी अधिवक्ता के पद पर काम किया है. इसके अलावा केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता और रेलवे के वरिष्ठ अधिवक्ता के पद पर भी काम कर चुके हैं.

दिसंबर, 2019 में जस्टिस यादव ने एडिशनल जज के रूप में शपथ ली और 26 मार्च, 2021 को हाई कोर्ट के स्थायी जज बने.

ऐसा पहली बार नहीं है जब शेखर यादव अपने बयानों के कारण चर्चा में आए हों. सितंबर 2021 में उन्होंने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की बात कही थी.

तब कथित गोकशी के एक मामले में सुनवाई करते हुए उन्होंने कहा था, "वर्तमान हालात को देखते हुए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए और गाय की सुरक्षा को हिंदू समाज का मूलभूत अधिकार बना देना चाहिए, क्योंकि हम जानते हैं कि जब एक देश की संस्कृति और विश्वास को ठेस पहुंचती है तो देश कमज़ोर होता है."

जस्टिस यादव यह भी दावा कर चुके हैं कि गाय एक मात्र पशु है जो ऑक्सीजन छोड़ती है.

दिसंबर 2021 में उन्होंने चुनावी रैलियों में होने वाली भीड़ रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयुक्त को यूपी चुनाव टालने का सुझाव दिया था.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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