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एसआईआरः यूपी के अलग-अलग ज़िलों में बीएलओ और अन्य कर्मचारियों पर मुक़दमे
- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद भारत का चुनाव आयोग अब उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत देश के 9 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर कर रहा है.
इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की गहन जांच की जा रही है और इसे नए सिरे से तैयार किया जाएगा.
हालांकि इस प्रक्रिया को ज़मीनी स्तर पर लागू करने वाले बीएलओ यानी बूथ लेवल ऑफ़िसर की स्थिति और उनपर काम के बोझ को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं.
उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में बीएलओ और अन्य कर्मचारियों के ख़िलाफ़ काम में लापरवाही और आधिकारिक आदेशों की अवहेलना के आरोप में मुक़दमे भी दर्ज किए गए हैं.
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चुनाव आयोग ने इस संबंध में 27 अक्तूबर को आदेश जारी किया था.
इसके तहत 9 राज्यों- छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल एवं तीन केंद्र शासित प्रदेशों निकोबार, लक्षद्वीप और पुद्दुचेरी में 4 नवंबर से मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
321 ज़िलों में एसआईआर जारी
इस दौरान 321 ज़िलों में 843 विधानसभाओं के 51 करोड़ से अधिक मतदाताओं की जांच की जाएगी.
इस प्रक्रिया के तहत 4 नवंबर से 4 दिसंबर के बीच गणना पत्र (एन्यूमरेशन फॉर्म) भरे जाएंगे. देशभर में 5.3 लाख बूथ लेवल ऑफ़िसर इस काम में लगाए गए हैं.
बीएलओ यानी बूथ लेवल ऑफ़िसर को इस काम के लिए घर-घर जाना है. उन्हें गणना पत्र भरवाने और जमा करने हैं.
बीएलओ पर काम का दबाव
इस दौरान काम के दबाव के चलते बीएलओ की मौतें और आत्महत्या की ख़बरें एक राजनीतिक मुद्दा बन रही हैं.
इसपर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी समेत कई विपक्षी दलों ने सवाल खड़े किए हैं.
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ देश के अलग-अलग राज्यों में अब तक पंद्रह बीएलओ की मौतों को एसआईआर के काम से जोड़ा जा रहा है. ऐसी कई मौतें आत्महत्या बताई जा रही हैं.
इनमें पश्चिम बंगाल में तीन मौतों के अलावा गुजरात और मध्य प्रदेश में चार-चार, राजस्थान में दो, केरल और तमिलनाडु में एक-एक की बीएलओ की मौत को एसआईआर से जोड़ा गया है.
मध्य प्रदेश में तो बीते 48 घंटों के दौरान ही दो बीएलओ की मौत होने का दावा किया गया.
हालाँकि बीबीसी स्वतंत्र तौर पर इन मौतों और वजहों की पुष्टि नहीं कर सका है.
उत्तर प्रदेश में दर्ज हुए मुक़दमे
इसी बीच, उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) बहराइच और बरेली में काम में लापरवाही का हवाला देते हुए बीएलओ और एसआईआर के काम में लगे अन्य कर्मियों पर कई मुक़दमे भी दर्ज किए गए हैं.
गौतम बुद्ध नगर में दर्ज की गई अलग-अलग एफ़आईआर में 60 से अधिक कर्मचारियों को नामजद किया गया है. इनमें बीएलओ, सहायक और सुपरवाइज़र शामिल हैं.
इन कर्मचारियों पर बार-बार निर्देश, चेतावनी देने और नोटिस देने के बाद भी अपने क्षेत्र में एसआईआर से जुड़ा काम न करवाने और उच्च अधिकारियों के आदेश ना मानने के आरोप लगाए गए हैं.
गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) में कुल चार मुक़दमे दर्ज किए गए हैं. इनमें से दो एफ़आईआर दादरी थाना क्षेत्र में दर्ज हैं, एक इकोटेक फ़ेज़-1 और एक जेवर थाना क्षेत्र में.
बीबीसी ने दर्ज की गई इन एफ़आईआर की कॉपी देखी हैं. ये मुक़दमे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 32 के तहत दर्ज किए गए हैं.
'हम बहुत दबाव में हैं'
मतदाता सूची के पुनरीक्षण में लगे बीएलओ का कहना है कि उन पर काम का बहुत ज़्यादा दबाव है. इस चुनावी कार्य के चलते शिक्षकों की छुट्टियां भी मंज़ूर नहीं की जा रही हैं.
मुक़दमे में नामजद एक महिला शिक्षिका ने अपना नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बीबीसी से कहा, "काम का दबाव बहुत अधिक है, मेरी सेहत ख़राब है और मैंने छुट्टी की अर्ज़ी दी है जो अभी तक मंज़ूर नहीं हुई है."
उनका कहना है, "मेरी जगह पर 12 नवंबर को ही दूसरी शिक्षिका को बीएलओ नियुक्त कर दिया गया था बावजूद इसके मेरे ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है."
बीबीसी ने जब फ़ोन किया तब ये महिला शिक्षक स्कूल में शिक्षण कार्य में लगीं थीं.
उन्होंने कहा, "मैं पहले से सेहत को लेकर परेशान थी, इस मुक़दमे ने मेरे लिए हालात और तनावपूर्ण कर दिए हैं. अब मुझे बच्चों को पढ़ाने के साथ ही क़ानूनी लड़ाई भी करनी पड़ेगी."
नोएडा की ही एक और शिक्षिका पिंकी सिरोही ने बीएलओ के अतिरिक्त काम के दबाव के चलते अपने पद से इस्तीफ़ा देने का दावा किया है.
काम के दबाव का ज़िक्र करते हुए उन्होंने लिखा, "मेरे वॉर्ड में 1179 मतदाता हैं, मैंने अब तक 215 मतदाताओं के विवरण फ़ीड कर दिए हैं. मैं इस्तीफ़ा दे रही हूं क्योंकि मुझसे अब ये काम नहीं होगा."
हालांकि पिंकी सिरोही का कहना है कि उनका इस्तीफ़ा मंज़ूर नहीं हुआ है.
बीबीसी से बात करते हुए पिंकी सिरोही ने कहा, "मैं अभी भी बूथ पर ही हूं, मतदाता फ़ार्म भर रही हूं. मैंने इस्तीफ़ा दे दिया लेकिन मेरी समस्या का समाधान नहीं हुआ. हम जिस दबाव में काम कर रहे हैं कोई समझ नहीं पा रहा है."
नोएडा में जिन 60 लोगों पर मुक़दमे दर्ज किए गए हैं उनमें बीएलओ के अलावा चुनाव कार्य में लगे 6 सुपरवाइज़र भी हैं. ये अलग-अलग विभागों में काम कर रहे कर्मचारी हैं. इन पर भी काम में लापरवाही के आरोप में मुक़दमे दर्ज हुए हैं.
बीबीसी ने बीएलओ और अन्य कर्मचारियों की स्थिति को लेकर गौतम बुद्ध नगर की ज़िलाधिकारी मेधा रूपम से बात करनी चाही लेकिन उनकी तरफ़ से कोई जवाब नहीं मिला. उनके सरकारी नंबर पर भेजे गए व्हाट्सएप संदेश का भी जवाब नहीं मिला.
हालांकि, ज़िलाधिकारी कार्यालय की तरफ़ से जारी एक बयान में कहा गया है कि चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत ही ये सख़्त कार्रवाई की गई है.
क्या कहना है शिक्षक संघ का?
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा संघ ने बीएलओ को आ रही समस्याओं को लेकर ज़िलाधिकारी को एक पत्र भी लिखा है.
इस पत्र में कहा गया है, "ज़िले में 1800 शिक्षकों को बीएलओ नियुक्त किया गया है जो पूरी ज़िम्मेदारी से अपना काम कर रहे हैं लेकिन आपके अथवा आपके निर्देशों पर अधीनस्थ अधिकारियों की तरफ से एफ़आईआर दर्ज कर प्रतिकूल प्रविष्टि जारी की जा रही हैं, जिससे अध्यापकों का मानसिक शोषण हो रहा है."
इस पत्र में दावा किया गया है कि ग्रामीण क्षेत्र में अधिकांश परिवार एसआईआर की प्रक्रिया में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं और फॉर्म भरकर वापस नहीं कर रहे हैं. ये भी दावा किया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव आयोग का ऐप काम नहीं कर रहा है.
शिक्षक संघ का आरोप है कि रात में डेढ़ बजे तक डेटा फ़ीड करने के लिए ओटीपी मांगे जा रहे हैं.
बीबीसी ने बीएलओ का काम कर रहे शिक्षकों के व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर किए गए ऐसे संदेश देखे हैं जिनमें बीएलओ से आधी रात के बाद भी काम का अपडेट मांगा जा रहा है.
नोएडा के अलावा बहराइच और बरेली में भी एफ़आईआर दर्ज की गई हैं.
बहराइच के अपर ज़िलाधिकारी गौरव रंजन श्रीवास्तव ने बीबीसी को बताया, "चुनाव कार्य में लापरवाही के लिए कई बीएलओ पर मुक़दमे दर्ज किए गए हैं."
उन्होंने कहा, "जिन बीएलओ पर मुक़दमे दर्ज किए गए हैं वो अपना काम नहीं कर रहे थे."
बहराइच में लापरवाही के आरोप में दो बीएलओ को निलंबित भी किया गया है.
वहीं मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ बरेली में भी बीएलओ पर मुक़दमा दर्ज किया गया है.
'बीएलओ की स्थिति को कोई नहीं समझ रहा'
बीएलओ और ख़ास कर शिक्षकों पर दर्ज किए गए मुक़दमों को शिक्षक संगठन अपमान के रूप में देख रहे हैं.
टीचर्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मेघराज भाटी ने बीबीसी से कहा, "अध्यापक शिक्षण कार्य के साथ बीएलओ की ज़िम्मेदारी का अतिरिक्त भार उठा रहे हैं, काम के बोझ की वजह से इस्तीफ़ा दे रहे हैं और बदले में शिक्षकों को एफ़आईआर मिल रही है, ये शिक्षकों का अपमान है."
मेघराज भाटी कहते हैं, "बीएलओ अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं, रात में बारह बजे तक डेटा अपलोड करना सामान्य बात है, हमारी स्थिति को समझने के बजाए हमारे ख़िलाफ़ दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है."
भाटी कहते हैं, "काम के बोझ में दबे बीएलओ को इस समय सहयोग और काउंसलिंग की ज़रूरत है, इस तरह की दंडात्मक कार्रवाई उनका मनोबल ही तोड़ रही है. हम अपनी मांगें सरकार के सामने रखेंगे और जिन शिक्षकों के ख़िलाफ़ मुक़दमे दर्ज हुए उन्हें क़ानूनी सहायता मुहैया कराई जाएगी."
बीएलओ को किस तरह का प्रशिक्षण और सहायता दी जा रही है और अधिक काम के दबाव को लेकर चुनाव आयोग क्या कर रहा है यह जानने के लिए हमने उत्तर प्रदेश चुनाव आयुक्त के कार्यालय में फ़ोन किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिल सका. उनके निजी सचिव ने भी कॉल नहीं उठाया.
बीबीसी ने चुनाव आयोग का पक्ष जानने के लिए ईमेल के ज़रिए संपर्क किया. चुनाव आयोग की तरफ़ से जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट कर दिया जाएगा.
चुनाव आयोग ने बीएलओ की स्थिति और काम के दबाव को लेकर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है.
(आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुज़र रहे हैं तो भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.)
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.