हैती में ये अफ़्रीकी देश किन वजहों से ख़ास भूमिका निभाना चाहता है? - दुनिया जहान

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अक्टूबर 2022 में कैरिबियाई देश, हैती ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल मदद की गुहार लगाई थी. सैकड़ों सशस्त्र गुटों, व्यापक हिंसा और बढ़ती महंगाई की वजह से ये देश अराजकता की दलदल में धंसता जा रहा था.
प्रधानमंत्री एरियल ऑनरी के ख़िलाफ़ लोगों में भारी ग़ुस्सा था. पूर्व राष्ट्रपति जोवोनेल मोइस की हत्या के बाद बिना चुनाव के ही ऑनरी ने सत्ता हासिल कर ली थी.
ऑनरी ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वो हैती के लिए एक सशस्त्र बल भेजे ताकि हैती को बिखरने से बचाया जा सके और वहां गहरा रहे मानवीय संकट को टाला जा सके.
दो साल बाद एरियल ऑनरी तो सत्ता से बाहर हो गए हैं लेकिन हैती में हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं.

राजधानी पोर्ट-ओ-प्रिंस सहित कई शहरों पर सशस्त्र गैंगों का कब्ज़ा हो चुका है.
कीनिया ने अन्य देशों के साथ मिलकर हैती में सुरक्षा व्यवस्था की बहाली के लिए अपने विशेष पुलिस बल को हैती भेजने के लिए स्वीकृति दे दी है. इस बहुराष्ट्रीय विशेष सशस्त्र पुलिस बल का नेतृत्व कीनिया करेगा.
इस सप्ताह बीबीसी दुनिया जहान में यही जानने की कोशिश करेंगे कि कीनिया को हैती में दिलचस्पी क्यों है और हैती में शांति बहाली करने में वो भूमिका क्यों निभाना चाहता है?
असंभव उद्देश्य
रॉबर्ट फ़ेटोन अमेरिका की वर्जीनिया यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र के प्रोफ़ेसर हैं.
उनका मानना है कि हैती में कीनिया का अभियान बहुत ही चुनौतीपूर्ण हो सकता है. वो कहते हैं कि कई लोगों को इसके सफल होने को लेकर भी संदेह है.
रॉबर्ट फ़ेटोन का जन्म हैती की राजधानी पोर्ट-ऑ-प्रिंस में हुआ था. वो कहते हैं कि हैती कई बार क्रांति, विद्रोह, तानाशाही और सैन्य तख़्तापलट के दौर का गवाह बन चुका है.
उनके मुताबिक़, "1986 में पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा डूवेलियर की सरकार के गिरने के बाद से हैती में राजनीतिक अस्थिरता, सरकार का तख़्ता पलटने की कोशिशें और सशस्त्र गुटों का प्रभाव बढ़ता गया है. लेकिन मौजूदा समय की राजनीतिक स्थिति सबसे मुश्किल और पेचीदा है."
रॉबर्ट फ़ेटोन कहते हैं कि एक समय था जब ये सशस्त्र गैंग उद्योगपतियों और उच्च वर्ग के लोगों के हित सुनिश्चित करने का काम करते थे. लेकिन अब वो स्वायत्त तरीके़ से काम करते हैं.

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इस साल मार्च में एक सशस्त्र गैंग के लोगों ने हैती की दो बड़े जेलों पर हमला कर दिया. इस घटना में हज़ारों कैदी फ़रार हो गए. इन गुटों ने कई पुलिस थानों को भी आग लगा दी.
फ़िलहाल राजधानी पोर्ट-ओ-प्रिंस के अस्सी प्रतिशत इलाक़े पर इन सशस्त्र गैंगों का नियंत्रण है.
रॉबर्ट फ़ेटोन कहते हैं, "हैती में खाद्य सामग्री समेत जो भी सामान आयात किया जाता है वो पहले राजधानी में लाया जाता है और वहां से दूसरे क्षेत्रों में पहुंचाया जाता है. अब इन सामान पर गैंग कब्ज़ा कर लेते हैं और इसे छुड़वाने के लिए पैसे देने पड़ते हैं. इसलिए यहां खाद्य सामग्री की किल्लत हो रही है. हालांकि पहले ही खाद्य सामग्री की क़ीमत बहुत बढ़ी हुई हैं. गैंग्स के साथ संघर्ष की वजह से हैती में लगभग तीन लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं और राहत शिविरों में रहने के लिए मजबूर हैं."
हैती में दो प्रमुख गैंग हैं जिन्होंने अन्य गुटों के साथ मिलकर गठजोड़ कर लिया है. इस साल की शुरुआत में उन्होंने प्रधानमंत्री एरियल ऑनरी से सत्ता छोड़ने को कहा. अप्रैल में पीएम ने पद से इस्तीफ़ा दे दिया.
रॉबर्ट फ़ेटोन के अनुसार शायद यह गैंग अब सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं कि ये समझते हैं कि अगर कीनिया के विशेष पुलिस बल की तैनाती हैती में होती है तो उन्हें मारा नहीं जाएगा.
कीनिया की विशेष पुलिस की हैती में तैनाती को संयुक्त राष्ट्र का समर्थन ज़रूर है मगर वह सीधे-सीधे वहां हस्तक्षेप नहीं कर रहा है.
2004 में हैती की सरकार का तख़्तापलट होने के बाद संयुक्त राष्ट्र ने वहां अंतरराष्ट्रीय शांतिबलों को तैनात किया था, लेकिन उसके नतीजों से लोग ख़ुश नहीं थे. शांतिबलों पर यौन उत्पीड़न के आरोप भी लगे थे.
रॉबर्ट फ़ेटोन ने बताया कि जब संयुक्त राष्ट्र का शांतिबल हैती पहुंचा तब वहां बड़े पैमाने पर हिंसा चल रही थी इसलिए शुरुआत में लोगों ने शांतिबलों का स्वागत किया था. लेकिन ये शांतिबल वहां कोई ख़ास सुरक्षा नहीं दे पाए और लोग उन्हें कब्ज़ा करने वाली बाहरी ताक़त की तरह देखने लगे.
कीनिया के अंतरराष्ट्रीय शांति अभियान

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अब कीनिया के नेतृत्व में विशेष सैन्यबलों के ढाई हज़ार सैनिक हैती के सैकड़ों गैंगों से कैसे मुक़ाबला करेंगे यह बड़ा सवाल है.
रॉबर्ट फ़ेटोन का कहना है कि हैती के पुलिसबल के पास इन गैंग्स से निपटने के लिए ना तो प्रशिक्षण है और न ही आधुनिक हथियार. जबकि कीनिया के विशेष पुलिस बल के पास ऐसी स्थिति से निपटने का अनुभव है, उनके पास प्रशिक्षण भी है और आधुनिक हथियार भी हैं. इसलिए उन्हें सफलता मिल सकती है. लेकिन यह भी संभव है कि यह गैंग कहीं छिप कर मौक़े का इंतज़ार कर रहे हों.
लेकिन कीनिया के लिए भी स्थिति पर क़ाबू पाना काफ़ी मुश्किल होगा. फ़िलहाल हैती में एक अंतरिम प्रशासन है और जनता उम्मीद लगाए बैठी है कि चुनाव होंगे और एक नई सरकार सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत करेगी.
नैरोबी स्थित ट्राइकार्टा एडवाइज़री लिमिटेड में पोलिटिकल रिस्क विश्लेषक डिसमास मोकुआ के अनुसार कीनिया, हैती के लोगों की सहायता को अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी मानता है.
वो कहते हैं कीनिया पहले भी दुनिया के कई देशों में शांति अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है.
उनके मुताबिक़, "साउथ सूडान और कांगो में भी कीनिया ने शांति अभियानों में मदद की है. सोमालिया में भी शांति बहाल करने में कीनिया ने सैन्य योगदान दिया है. अफ़्रीका के बाहर भी कीनिया ने कई देशों में अपने शांति सैनिकों को भेजा है."
कोसोवो, क्रोएशिया, बोस्निया और कंबोडिया में भी अपने शांति अभियानों के लिए कीनिया ने अपने विशेष पुलिस बलों को भेजा है. कीनिया ने कई देशों में अपनी सेना को भी भेजा है लेकिन हैती में वह सिर्फ़ अपने विशेष पुलिस बल तैनात कर रहा है.
डिसमास मोकुआ के अनुसार सेना तब भेजी जाती है जब किसी देश की अखंडता को ख़तरा हो. कीनिया सरकार का मानना है कि हैती की अखंडता को बाहरी दुश्मन से ख़तरा नहीं है बल्कि वहां की मूल समस्या क़ानून व्यवस्था फिर से स्थापित करने की है, जिसके लिए सेना की ज़रूरत नहीं है बल्कि विशेष पुलिस बल ही पर्याप्त है.

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हैती में पुलिस बलों की तैनाती की तारीख़ कई बार आगे बढ़ाई गई है. लेकिन अब तैनाती से पहले स्थिति का जायज़ा लेने के लिए कीनिया के कुछ अधिकारियों ने हैती का दौरा किया है.
डिसमास मोकुआ ने कहा कि हैती में जो विशेष पुलिस बल भेजा जा रहा है वो कीनिया का सामान्य पुलिस दस्ता नहीं है बल्कि इसके सैनिक पुलिस की तीन विशेष इकाइयों से लिए गए हैं.
इन्हें आतंकी हमलों का मुक़ाबला करने या हिंसक विरोध प्रदर्शनों को क़ाबू में करने के लिए तैनात किया जाता है, इन्हें अर्धसैनिक बलों की तरह का प्रशिक्षण भी दिया गया है.
कीनिया ने एक हज़ार विशेष पुलिस अधिकारियों को भी हैती के पुलिस बल के साथ मिलकर काम करने के लिए भेजने का वादा किया है.
जो अंतरराष्ट्रीय पुलिस बल हैती भेजा जाएगा उसमें जमैका, बारबाडोस, चाड और बांग्लादेश के पुलिसकर्मी भी शामिल होंगे जिनकी संख्या लगभग एक हज़ार होगी. इस बहुराष्ट्रीय पुलिस अभियान का नेतृत्व कीनिया के अधिकारी करेंगे.
लेकिन कीनिया की विशेष पुलिस बल पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग करने के आरोप लगते रहे हैं. उसके कई पुलिस अधिकारियों पर हत्या के आरोप लगे हैं और उन्हें जेल की सज़ा भी सुनाई गई है. सवाल ये है कि क्या इन बातों का इस मिशन पर असर पड़ेगा?
डिसमास मोकुआ कहते हैं, "जिन पुलिस अधिकारियों को हैती भेजा जा रहा है उनका चयन मिशन के ऐसे कमांडर कर रहे हैं जिन पर कोई आरोप नहीं हैं. वो जानते हैं कि भ्रष्ट या अपराधिक रिकार्ड वाले पुलिसकर्मियों को अंतरराष्ट्रीय मिशन पर भेजने से कीनिया और कीनियाई राष्ट्रपति की प्रतिष्ठा को चोट पहुंच सकती है."
आर्थिक पहलू

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मगर कीनिया में कुछ लोग हैं जो कीनियाई विशेष पुलिस बल के हैती भेजने को लेकर विरोध भी कर रहे हैं.
नैरोबी यूनिवर्सिटी के इंस्टिट्यूट फ़ॉर डेवेलपमेंट में प्रशासन और विकास संबंधी विषय के प्रोफ़ेसर करूटी कनिंग के अनुसार कीनिया में कई लोगों की राय है कि देश के सामने अपनी कई चुनौतियां और सुरक्षा के मसले हैं, ऐसे में उसे अपने विशेष पुलिस बल को हैती नहीं भेजना चाहिए.
उनका कहना है, "कीनिया की साठ फ़ीसदी आबादी महंगाई की मार से परेशान है, ऐसे में साल दर साल दूसरे देशों की मदद के लिए पैसे ख़र्च करने को लेकर लोगों को चिंता है."
कीनिया के सामने दूसरी समस्या यह है कि उस पर कर्ज़ का बोझ बढ़ रहा है. करूटी कनिंग बताते हैं कि इनमें से अधिकांश कर्ज़ कीनिया को चीन से बंदरगाहों, रेल नेटवर्क जैसी ढांचागत व्यवस्था के निर्माण के लिए मिला है. कुछ रिपोर्टों के अनुसार कीनिया ने चीन से 6 अरब डॉलर का कर्ज़ लिया हुआ है.
मगर समस्या यहीं तक सीमित नहीं है. करूटी कनिंग ने कहा कि कीनिया के सामने चुनौती यह है कि चीनी कंपनियां इन प्रोजेक्ट के लिए मज़दूर और कच्चा माल बाहर से ला रही हैं जबकि इनमें कीनिया के लोग भी काम कर सकते हैं और कीनिया में मौजूद कच्चे माल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. इसलिए इसका लाभ कीनिया की कंपनियों को नहीं मिल रहा.
उनके मुताबिक़, "अगर हम कर्ज़ की किश्तें नहीं चुका पाए तो चीन इन संपत्तियों को नीलाम कर सकता है और कुछ सार्वजनिक संस्थाओं को भी अपने कब्ज़े में कर सकता है. हालांकि फ़िलहाल ऐसी स्थिति नहीं आई है क्योंकि कीनिया कर्ज़ की किश्तें वक़्त पर चुका रहा है."

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कीनिया पूर्वी अफ़्रीका की एक बड़ी अर्थव्यवस्था है. कीनियाई सरकार पर क़रीब 70 अरब डॉलर का कर्ज़ है.
कीनिया में दो प्रमुख उद्योग हैं, कृषि और पर्यटन, जिससे होने वाली आय से कर्ज़ की किश्त चुकाई जाती है.
करूटी कनिंग कहते हैं कि देश की 60 प्रतिशत आय कर्ज़ चुकाने में खर्च हो जाती है जिसके चलते विकास के काम के लिए सरकार के पास पैसे नहीं बचते.
वहीं देश के रिफ़्ट वैली क्षेत्र में डकैतों के हमले बड़ी समस्या है. इसलिए कई लोग इस बात से हैरान हैं कि अपनी घरेलू समस्या पर ध्यान देने की बजाय सरकार हैती में पुलिस बल क्यों भेजना चाह रही है?
करूटी कनिंग कहते हैं कि कई लोग, ख़ास तौर पर विपक्षी राजनीतिक दल और सामाजिक संस्थाएं सरकार के हैती मे पुलिस बल तैनात करने के फ़ैसले का विरोध कर रहे हैं.
सरकार के फ़ैसले को अदालत में भी चुनौती दी गई जिसके बाद हाइकोर्ट ने हैती में कीनियाई पुलिस की तैनाती पर यह कह कर रोक लगा दी कि ऐसा तभी हो सकता है जब दोनों देशों में पुलिस बलों की तैनाती को लेकर द्विपक्षीय समझौता हो.
इसके कुछ ही हफ़्तों बाद कीनिया और हैती ने एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए.
करूटी कनिंग के मुताबिक़ समझौता होते ही पुलिस बलों की तैनाती की प्रक्रिया शुरू हो गई. कुछ लोग मानते हैं कि इसके पीछे राजनीतिक और आर्थिक कारण हैं.
कनिंग का कहना है, "राष्ट्रपति विलियम रूटो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी सरकार का दबदबा बनाना चाहते हैं क्योंकि कोई और अफ्रीकी देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस प्रकार की मौजूदगी कायम नहीं कर पाया है. कीनियाई सरकार के इस फ़ैसले के बाद अमेरिका ने भी सहायता का वादा कर दिया है. ज़ाहिर है, इस फ़ैसले के पीछे कुछ आर्थिक हित भी हैं."
अमेरिका के साथ कीनिया के संबंध

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अमेरिका स्थित थिंकटैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस में वरिष्ठ शोधकर्ता मिशेल गैविन का कहना है कि कीनिया कई सालों से अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सहयोगी रहा है.
वो कहती हैं, "कीनिया और अमेरिका के बीच सहयोग का दायरा भी काफ़ी व्यापक है. दोनों देशों के बीच आतंक विरोधी अभियान और संक्रामक रोगों का नियंत्रण करने से लेकर कृषि उद्योग में सुधार कार्यक्रमों के लिए सहयोग होता है. पिछले कुछ सालों में ये आपसी सहयोग काफ़ी बढ़ा भी है."
मिशेल गैविन कहती हैं कि इस साल मई में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कीनिया के राष्ट्रपति विलियम रूटो को अमेरिका आने का निमंत्रण दिया. था जो काफ़ी महत्वपूर्ण था. पिछले पंद्रह सालों में वो पहले अफ़्रीकी राष्ट्रपति हैं जो अमेरिका में आधिकारिक यात्रा पर आए हैं. इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका कीनिया के साथ संबंधों को कितना महत्व देता है.
मिशेल गैविन कहती हैं कि इस दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौते हुए और निवेश को लेकर फ़ैसले लिए गए. इतना ही नहीं राष्ट्रपति बाइडन ने कीनिया को अमेरिका का प्रमुख ग़ैर नेटो सहयोगी देश घोषित कर दिया.
मिशेल गैविन का मानना है कि क़ानूनी तौर पर देखा जाए तो अब अमेरिका कीनिया को कई प्रकार की सुरक्षा संबंधी सहायता दे सकता है जो पहले संभव नहीं था. साथ ही उसकी गिनती अब अमेरिका के प्रमुख सहयोगियों में होगी.
आतंक विरोधी गतिविधियों और अन्य सुरक्षा संबंधी मामलों में दोनों देशों के बीच पहले से सहयोग चल रहा था, अब इसे और मज़बूत किया गया है.
राष्ट्रपति रूटो अमेरिका के साथ नज़दीकी से अपने देश और अफ़्रीका के दूसरे देशों को फ़ायदा पहुंचाना चाहते हैं. वो पहले भी पश्चिमी देशों से मांग करते रहे हैं कि कीनिया और अफ़्रीकी देशों को जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने के लिए अधिक सहायता दी जाए. वो अफ़्रीकी देशों की सहायता के लिए दुनिया की वित्तीय संस्थाओं में सुधार की मांग भी करते रहे हैं.

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मिशेल गैविन का कहना है, “ केन्या अंतराष्ट्रीय संस्थाओं में बदलाव की अपनी मांग के मुद्दे पर अमेरिका का समर्थन चाहता है. केन्या की आबादी का बडा हिस्सा युवाओं का है और वह चाहता है कि रोज़गार के मसले को सुलझाने के लिए केन्या और अफ़्रीकी देशों में व्यापारिक निवेश बढ़े. इस साल के अंत तक अमेरिका और केन्या के बीच व्यापार संबंधी महत्वपूर्ण समझौते होने की उम्मीद है जिससे दोनो के बीच व्यापार संबंध मज़बूत होंगें.”
अफ़्रीका में चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका के लिए केन्या काफ़ी महत्वपूर्ण सहयोगी साबित हो सकता है. मगर अमेरिका के साथ क़रीबी संबंधों के बावज़ूद केन्या चीन के साथ भी अपने व्यापारिक संबंध मज़बूत रखना चाहता है.
इस साल मई में एक अमेरीकी मिशनरी दंपत्ति की हैती के गैंग ने हत्या कर दी थी. अमेरिका हैती में अपनी पुलिस नहीं भेजना चाहता है मगर वहां अंतरराष्ट्रीय पुलिस बल की तैनाती का समर्थन करता है.
मिशेल गैविन कहती हैं कि 1990 के दशक में अमेरिका ने हैती में सैनिक हस्तक्षेप किया था जिसकी वजह से हैती में अमेरिका के प्रति काफ़ी नाराज़गी है.
तो अब लौटते हैं अपने मुख्य सवाल की तरफ 'हैती में कीनिया क्या भूमिका निभाना चाहता है, और क्यों?'
अपने पिछले अनुभवों की वजह से अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र हैती में अपने सैनिक भेजने से कतरा रहे हैं.
कीनिया का कहना है कि हैती के लोगों की जान बचाना उसकी नैतिक ज़िम्मेदारी है और उसके पास इसे निभाने की क्षमता है.
इससे राष्ट्रपति रूटो को कीनिया और अन्य अफ़्रीकी देशों का पक्ष अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखने में मदद मिलेगी और उसे राजनीतिक फ़ायदा भी होगा.
इससे कीनिया में दूसरे देश भी निवेश बढ़ा सकते हैं, साथ ही इस कदम के ज़रिए अमेरिका के साथ उसकी नज़दीकी भी बढ़ सकती है.
कीनिया का विशेष पुलिस बल अगर कुछ हद तक हैती में शांति और सुरक्षा स्थापित करने में कामयाब हो भी जाए तब भी वहां की आर्थिक समस्याएं आसानी से ख़त्म नहीं होंगी.
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