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गौरव गोगोई पर निशाना, एफ़आईआर पाकिस्तानी के ख़िलाफ़, सीएम हिमंत को किस बात का है डर?
- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए
असम की पुलिस ने बीते सोमवार को पाकिस्तानी नागरिक और जलवायु नीति विशेषज्ञ अली तौक़ीर शेख़ के ख़िलाफ़ एक मामला दर्ज किया है.
अली तौक़ीर शेख़ इस समय असम की राजनीति में मचे बवाल के केंद्र में है.
शेख़ के ख़िलाफ़ ग़ैर क़ानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 यानी यूएपीए और भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस) के तहत भारत की 'संप्रभुता, एकता और अखंडता' को ख़तरे में डालने के आरोप लगाए गए हैं.
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने तौक़ीर शेख़ पर आरोप लगाते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की पत्नी एलिज़ाबेथ कोलबर्न पर भी निशाना साधा है.
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पाकिस्तान में इस्लामाबाद के रहने वाले अली तौक़ीर शेख़ संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के 'लॉस एंड डैमेज फ़ंड" में पिछले एक साल से निदेशक मंडल के सदस्य हैं.
वो पाकिस्तान सरकार की ओर से ग्रीन फ़ाइनेंसिंग पर बनाई गई टास्क फ़ोर्स के सदस्य भी हैं.
तौक़ीर शेख़ ने अपने लिंक्डइन अकाउंट पर दी गई जानकारी में बताया है कि वो साल 2020 से पाकिस्तान के योजना आयोग में जलवायु परिवर्तन सलाहकार के रूप में काम कर रहे हैं.
शेख़ ने ये भी बताया है कि पाकिस्तान की जलवायु परिवर्तन से संबंधित शीर्ष निकाय राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन परिषद में भी वो एक सदस्य के तौर पर तीन साल काम कर चुके हैं, जिसकी अध्यक्षता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री करते हैं.
इसके अलावा शेख़ पिछले 24 साल से पाकिस्तान में लीडरशिप फ़ॉर एनवायरनमेंट एंड डेवलपमेंट (लीड) नामक एक ग़ैर सरकारी संस्था चला रहे हैं, जिसके वे संस्थापक निदेशक हैं.
दरअसल अली तौक़ीर शेख़ ने साल 2009 से 2017 तक सीडीकेएन अर्थात क्लाइमेट डेवलपमेंट एंड नॉलेज नेटवर्क में एशिया निदेशक के तौर पर काम किया था.
उस दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की पत्नी एलिज़ाबेथ भी सीडीकेएन में काम कर रही थीं.
जलवायु परिवर्तन के प्रति सबसे ग़रीब और सबसे अधिक संवेदनशील लोगों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए काम करने वाली सीडीकेएन में काम करने के दौरान एलिज़ाबेथ ने भारत,पाकिस्तान और नेपाल का दौरा किया था.
जलवायु परिवर्तन से जुड़े विषयों पर एलिज़ाबेथ और अली तौक़ीर शेख़ के कई लेख सीडीकेएन की वेबसाइट पर अब भी मौजूद हैं.
लेकिन एलिज़ाबेथ और अली तौक़ीर शेख़ के विषय को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पिछले कई दिनों से गौरव गोगोई को निशाने पर ले रहे हैं.
मुख्यमंत्री हिमंत जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था 'लीड पाकिस्तान' के साथ एलिज़ाबेथ का नाम जोड़ते हैं.
हिमंत बिस्वा सरमा ने आरोप लगाया है कि एलिज़ाबेथ इस्लामाबाद में रहने के दौरान लीड पाकिस्तान का अभिन्न अंग थीं.
पिछले एक सप्ताह से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स और अपने फ़ेसबुक पेज पर जितने भी पोस्ट किए है, उनमें कांग्रेस सांसद गोगोई के मामले पर ज़्यादा बात की है.
वे कभी नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में 10 साल पहले गौरव गोगोई के जाने की तस्वीर पोस्ट कर रहे हैं, तो कभी सांसद की पत्नी एलिज़ाबेथ की 11 साल पहले इस्लामाबाद में मनाए गए जन्मदिन के ट्वीट को शेयर कर रहे हैं.
इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री ने कैबिनेट में चर्चा करने के बाद हाल ही में सीआईडी विभाग के स्पेशल डीजीपी एमपी गुप्ता की अध्यक्षता में चार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शामिल कर एक विशेष जाँच दल (एसआईटी) का गठन किया है.
17 फरवरी को असम के सीएम हिमंत ने एक्स पर लिखा, "असम पुलिस के डीजीपी ने मामला दर्ज होने के बाद उसकी जाँच के लिए एसआईटी का गठन किया है. असम पुलिस एक पेशेवर और पूरी तरह से निष्पक्ष जाँच करेगी."
हालाँकि इस एफ़आईआर में सांसद की पत्नी एलिज़ाबेथ का नाम शामिल नहीं है.
ऐसे में असम की राजनीति और हिमंत बिस्वा सरमा की मौजूदा स्थिति पर नजर रख रहे जानकारों का मानना है कि इस समय गौरव गोगोई उनकी सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने खड़े हो गए हैं.
अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव है और हिमंत भ्रष्टाचार के आरोपों और कुछ विवादित बयानों को लेकर फ़िलहाल बैकफुट पर नज़र आ रहे हैं.
पार्टी के भीतर भी एक तबका हिमंत के कथित नायकवादी तौर- तरीक़ों से ख़फ़ा है.
हिमंत की राजनीतिक मजबूरी के बारे में असम के वरिष्ठ पत्रकार बैकुंठ नाथ गोस्वामी कहते है, "साल 2026 का चुनाव हिमंत के राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकता है. प्रदेश की राजनीति के कुछ ताज़ा घटनाक्रमों ने उन्हें अभी से चिंता में डाल दिया है."
गोस्वामी कहते है, "इस समय हिमंत तीन तरह के डर से गुजर रहे हैं. पहला डर सर्बानंद सोनोवाल का राज्य की राजनीति में सक्रिय रहने का है. क्योंकि बीजेपी को साल 2021 में ऊपरी असम के जो लोकप्रिय वोट मिले थे वो सोनोवाल की वजह से मिले थे. मतदाताओं को लगा था कि सोनोवाल दूसरी बार भी सीएम बनेंगे. लेकिन सीएम हिमंत बन गए. इस बार उन मतदाताओं के वोट हासिल करना बड़ी चुनौती होगी.''
वो कहते हैं, ''दूसरा डर भ्रष्टाचार को लेकर जो लगातार आरोप लग रहे हैं, उसका है. अगर सरकार नहीं बनी, तो हिमंत और उनकी पत्नी को कई मामलों में जाँच का सामना करना पड़ सकता है. तीसरा डर मुसलमान मतदाताओं का वापस कांग्रेस की तरफ़ जाने का है."
वो बताते हैं, "गौरव गोगोई के जोरहाट लोकसभा सीट से जीतने से केंद्रीय नेताओं के सामने हिमंत की पहले ही किरकिरी हो चुकी है. इसलिए वो अब गौरव के मुद्दे को बड़ा बनाने की कोशिश में लगे हैं. ताकि ऊपरी असम के मतदाताओं के सामने गौरव की छवि को ख़राब कर चुनावी फ़ायदा हासिल कर सकें."
"लेकिन हिमंत का यह दाँव भी अब उल्टा पड़ता दिख रहा है. इस मुद्दे पर सोनोवाल का न बोलने का मतलब है कि ऊपरी असम में यह मुद्दा चलने वाला नहीं है. गौरव का विरोध कर ऊपरी असम में बीजेपी राजनीति नहीं कर पाएगी."
दरअसल ऊपरी असम में विधानसभा की 33 सीट ऐसी हैं, जहाँ पर जीते बगैर बीजेपी सत्ता में वापसी नहीं कर सकती.
ऊपरी असम की राजनीति को बीते तीन दशकों से कवर कर रहे वरिष्ठ पत्रकार नवज्योति बोरूआ कहते हैं, "बीजेपी को सत्ता में आने के लिए ऊपरी असम की सीटें ही चाहिए. ऊपरी असम बीजेपी का गढ़ है. जबकि लोकसभा चुनाव में मौलाना बदरुद्दीन अजमल की हार के बाद निचले असम की मुसलमान बहुल सीटों पर भी बीजेपी का गणित बिगड़ चुका है."
"ऐसे में अगर ऊपरी असम में बीजेपी का खेल बिगड़ता है, साल तो 2026 के चुनाव में पार्टी वापसी नहीं करेगी. इस बात से सीएम हिमंत काफ़ी चिंतित हैं."
"लिहाजा ऊपरी असम में अगर किसी तरह गौरव गोगोई की छवि को ख़राब किया जाए, तो इसका फ़ायदा पार्टी को मिलेगा. क्योंकि गौरव गोगोई ने हिंदू बहुल जोरहाट सीट पर बीजेपी के उम्मीदवार को क़रीब डेढ़ लाख वोट से हराया था. यह एक तरह से सीएम हिमंत की हार थी. क्योंकि जोरहाट सीट पर गौरव को हराने के लिए हिमंत ने अपने पूरे कैबिनेट को क्षेत्र में उतार दिया था."
पत्रकार बोरूआ कहते हैं, "ऊपरी असम के लोग हिमंत से ज़्यादा सर्बानंद सोनोवाल को पसंद करते हैं. हिमंत की वजह से सर्बानंद को लगातार दूसरी जीत के बावजूद मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर यहाँ से जाना पड़ा. लिहाजा हिमंत के लिए यह दोहरी चुनौती है."
"सर्बानंद के लोग अभी से क्षेत्र में काफ़ी सक्रिय हो गए हैं. अगर गौरव गोगोई का मुद्दा इतना गंभीर होता, तो सोनोवाल ऊपरी असम के बड़े नेता हैं, केंद्र में मंत्री हैं, लेकिन उन्होंने इस पर कोई बयान नहीं दिया. सोनोवाल अच्छी तरह जानते हैं कि इस तरह विपक्ष के किसी नेता को निशाने पर लेने से ख़ासकर ऊपरी असम में पार्टी को नुक़सान उठाना पड़ेगा."
असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का कहना है कि भारत की सुरक्षा और संप्रभुता के हित में इस मामले को अत्यंत गंभीरता से आगे बढ़ाया जाएगा, क्योंकि असम ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान की आईएसआई (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है.
लेकिन असम के पूर्व पुलिस महानिदेशक और जाने-माने लेखक हरे कृष्ण डेका इस पूरे मामले को राजनीति से प्रेरित बताते हैं.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "एफ़आईआर पाकिस्तानी नागरिक के ख़िलाफ़ हुई है. ऐसे में एसआईटी के अधिकारी पाकिस्तान जा कर मामले की जाँच कैसे कर पाएँगे? इसके लिए विदेश मंत्रालय और केंद्रीय एजेंसियों को शामिल करना ज़रूरी है."
"असल में यह पूरा मामला राजनीति से प्रेरित लगता है. क्योंकि गौरव गोगोई ने जब संसदीय चुनाव लड़ा था, तो उन्होंने अपनी पत्नी की जानकारी आधिकारिक रूप से भी दी है. लिहाजा उनकी शादी के 12 साल बाद अचानक इस मामले को उठाने का क्या मतलब हो सकता है? एसआईटी गठन करने का मक़सद मामले को लंबा खींचना है ताकि यह राजनीतिक मुद्दा बना रहे."
इस मामले में अब असम प्रदेश बीजेपी ने सांसद गौरव गोगोई से कुछ सवाल पूछे हैं.
पहले सवाल में बीजेपी ने पूछा है कि उनकी पत्नी एलिज़ाबेथ कोलबर्न ने शादी के 12 साल बाद भी भारतीय नागरिकता लेने से इनकार क्यों किया?
उनके बच्चे माया और कबीर यात्रा के लिए कौन सा पासपोर्ट इस्तेमाल करते हैं- भारतीय या ब्रिटिश?
क्या एलिज़ाबेथ ने कभी पाकिस्तान सरकार के किसी अधिकारी से मुलाक़ात की है? अगर हाँ, तो क्या आप ऐसी बातचीत के बारे में जानकारी देंगे?
क्या आपके एनजीओ, 'फ़ार्म 2 फ़ूड' को जॉर्ज सोरोस या किसी ईसाई संगठन से कोई वित्तीय सहायता मिली है?
असम में बीजेपी के वरिष्ठ नेता विजय गुप्ता कहते हैं, "गौरव गोगोई की पत्नी के मामले में सांसद ने कई अहम सवालों का जवाब नहीं दिया है. लिहाजा इस मामले की अब जाँच की जा रही है, क्योंकि यह देखना बेहद ज़रूरी हो गया है कि हमारे राष्ट्र की सुरक्षा पर कोई आँच तो नहीं है."
जब मुद्दा गौरव की पत्नी को लेकर है, तो एफ़आईआर में उनका नाम क्यों नहीं है?
इस सवाल का जवाब देते हुए बीजेपी नेता गुप्ता कहते हैं, "एलिज़ाबेथ ब्रिटिश नागरिक हैं, लिहाजा उनके विषय को भारत सरकार का विदेश मंत्रालय देखेगा. लेकिन पाकिस्तानी नागरिक के असम के साथ लिंक हो सकते है और उनकी जाँच होनी बेहद ज़रूरी है."
"राज्य में आईएसआई की गतिविधियाँ बढ़ गई हैं. ब्रह्मपुत्र के रेतीले इलाक़े में जो लोग बसे हैं, उनमें हो सकता है कि किसी का किसी से तार जुड़ा हो.अब मामले को एसआईटी देख रही है."
गौरव गोगोई ने इन सवालों के जवाब में कहा, "कांग्रेस का रुख़ साफ़ है. अगर उन्हें जाँच करनी है, तो वे कर सकते हैं. हम अपनी स्थिति में डटे हैं."
कांग्रेस सांसद ने कहा कि मुख्यमंत्री के मन में चिंता है और ऐसा होना स्वाभाविक है, क्योंकि वह डरे हुए हैं.
उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कहा, "मुख्यमंत्री को डर इसलिए है, क्योंकि वे जानते हैं कि साल भर बाद होने वाले चुनावों में हार तय है और उनकी कुर्सी जाएगी. उन्हें डर इस बात का भी है कि जब राज्य में कांग्रेस की सरकार बनेगी, तो उनका भविष्य क्या होगा."
असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने गौरव के मामले को लेकर हिमंत की सरकार को घेरा है.
उन्होंने कहा, "हिमंत के नेतृत्व में यह सरकार पूरी तरह विफल हुई है, जिसकी वजह से मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी के लोग झूठा प्रचार करने में लग गए हैं. चुनाव सामने है और लोग उनसे पिछले वादों के बारे में पूछ रहे हैं. भ्रष्टाचार, सिंडिकेट, स्मार्ट मीटर, महंगाई जैसे मुद्दों से लोग परेशान है."
"लिहाजा उन्होंने गौरव गोगोई के ख़िलाफ़ एक झूठे मुद्दे के सहारे राजनीति करने की चाल खेली है. गौरव गोगोई देश की संसद में गंभीर मुद्दों को उठाने वाले एक मज़बूत नेता हैं, जिसके चलते हिमंत बैकफ़ुट पर आ गए हैं."
कांग्रेस नेता बोरा के अनुसार जोरहाट सीट पर गौरव गोगोई को हराने में विफल रहने के बाद से हिमंत बदले की भावना से राजनीति कर रहे हैं.
4 सितंबर 1982 को दिल्ली में जन्में गौरव गोगोई असम के पूर्व और सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे तरुण गोगोई के बेटे हैं.
दरअसल साल 2011 के विधानसभा चुनाव तक हिमंत बिस्वा सरमा तरुण गोगोई के काफ़ी क़रीब थे.
लेकिन गोगोई ने अपने तीसरे कार्यकाल की शुरुआत में बेटे गौरव को असम की राजनीति में सक्रिय कर दिया था.
यही वजह थी कि कभी तरुण गोगोई के क़रीबी रहे हिमंत ने उनके ख़िलाफ़ विद्रोह कर दिया. तरुण गोगोई ने बेटे गौरव को कलियाबोर सीट से 2014 में चुनाव लड़वाया और जीत के साथ गौरव ने राजनीति में एंट्री की.
राजनीति में आने से पहले गौरव ने क़रीब 10 साल तक विकास और ग़ैर-लाभकारी क्षेत्र में काम किया. इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई करने बाद गौरव ने ग्रामीण भारत में चार साल काम किया. इसके बाद वे न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर करने अमेरिका चले गए.
ब्रिटेन में जन्मीं एलिज़ाबेथ कोलबर्न से गौरव गोगोई की मुलाक़ात साल 2010 में हुई थी, जब वे दोनों संयुक्त राष्ट्र सचिवालय की एक समिति में एक साथ इंटर्नशिप कर रहे थे.
इस मुलाक़ात के तीन साल बाद गौरव और एलिज़ाबेथ ने साल 2013 में शादी कर ली. एलिज़ाबेथ का परिवार लंदन में बसा है. लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से स्नातक की पढ़ाई कर चुकी एलिज़ाबेथ इस समय ऑक्सफ़र्ड पॉलिसी मैनेजमेंट से जुड़ी हुई हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित