ताबूत में 61 दिनों तक 'ज़िंदा दफ़्न' रहने वाले शख़्स की कहानी

ताबूत में माइक मिनी

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, आयरलैंड के माइक मिनी दूसरे विश्व युद्ध के बाद काम की तलाश में इंग्लैंड चले गए थे
    • Author, डालिया वेंटुरा
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, मुंडो

"यह पहला मौक़ा है, जब मैंने किसी ऐसे शख़्स को दफ़्न किया है, जिसे पहले ही दफ़नाया जा चुका था."

यह कहना था माइक मिनी की बेटी मैरी मिनी का, जिन्होंने अपनी किताब 'यू कांट ईट रोज़ेज़ मैरी' (तुम गुलाब नहीं खा सकती, मैरी) में इस घटना की चर्चा की है. उनके अनुसार, ये शब्द उनके पिता की अंतिम विदाई देने वाले पादरी के थे.

माइक मिनी का पहला 'अंतिम संस्कार' उनकी असली मौत से 35 साल पहले हुआ था. उस वक़्त वहाँ न केवल एक भारी भीड़ मौजूद थी बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी इसमें शामिल हुआ था. लेकिन तब वह ज़िंदा थे.

जी हां, इसकी वजह यह थी कि यह एक तमाशा था जो जनता और मीडिया का ध्यान खींचने के लिए रचा गया था.

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें.

इस असाधारण कहानी की शुरुआत एक आयरिश शराबख़ाने (पब) से होती है.

कहानी के मुख्य किरदार माइक मिनी एक किसान के बेटे थे और दूसरे विश्व युद्ध के ख़त्म होने के बाद अपने परिवार की मदद के लिए काम की तलाश में इंग्लैंड चले गए थे. उनका सपना वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियन बनने का था लेकिन उन्हें एक मज़दूर के तौर पर काम करना पड़ा.

रिंग में कामयाब होने का उनका सपना एक हादसे में उस वक़्त टूट गया, जब उनका हाथ ज़ख्मी हो गया. लेकिन उसी दौरान एक और हादसे ने एक और ख़्याल को जन्म दिया.

हुआ यह कि वह एक सुरंग खोद रहे थे तो उस दौरान मिट्टी उन पर गिर गई. कहा जाता है कि जब वह मलबे के नीचे दबे हुए थे, तभी उनके नए सपने का बीज फूटा: 'ताबूत में ज़िंदा दफ़्न होने का रिकॉर्ड तोड़ने का.'

अमेरिका में ऐसे अजीबोग़रीब मुक़ाबले फ़ैशन बन चुके थे और 1966 में एक नाविक आयरलैंड में 10 दिनों तक दफ़्न रहा था. एक अमेरिकी शख़्स ने टेनेसी में ज़मीन के नीचे 45 दिन गुज़ारे थे और यही वह रिकॉर्ड था, जिसे माइक तोड़ना चाहते थे.

लोग ख़ुद को दफ़्न क्यों करते थे?

ताबूत

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, ख़ुद को दफ़्न करने जैसी असामान्य प्रतियोगिताएं अमेरिका में फैशन बन गई थीं
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

लोग ऐसा कुछ करने पर ज़िद क्यों करते हैं जो इतिहास में टॉर्चर का एक तरीक़ा रहा है और हम में से अधिकांश के लिए एक डरावना सपना है?

कथित 'अंतिम संस्कार कलाकारों' के मक़सद अलग-अलग नज़र आते हैं. कुछ तो केवल रिकॉर्ड तोड़ने की ख़ुशी चाहते हैं तो कुछ पैसा कमाने के लिए ऐसा करते हैं.

यहां तक कि किसी समस्या की तरफ़ ध्यान खींचने की कोशिश में भी ऐसा किया जाता है.

मिसाल के तौर पर ओडील नाम के शख़्स ने अपने जीवन में 158 बार अपनी इच्छा से ख़ुद को दफ़नाया. उन्होंने अक्सर जगहों या सामान का इश्तिहार करके पैसा कमाया लेकिन 1971 में उन्होंने आख़िरी बार पेट्रोल की क़ीमतों को कम करने की योजना को बढ़ावा देने के लिए ऐसा किया. मतलब वह कई मक़सद के लिए ऐसा करते रहे.

33 साल की उम्र में माइक मिनी के पास कोई ख़ास योग्यता, उच्च शिक्षा या स्पष्ट प्रतिभा नहीं थी. लेकिन इस तरह का कारनामा उनका नाम 'गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज करवा सकता था और उन्हें इतना अमीर बना सकता था कि वह आयरलैंड में अपना घर बना सकें.

उन्होंने घोषणा की, "असली जीवन में मेरा कोई भविष्य नहीं था. इसीलिए मैं अपनी योग्यता साबित करना चाहता था."

इस तरह उन्होंने विश्व प्रसिद्ध चैंपियन बनने के सपने को ज़िंदा रखा. चूंकि वह अब एक बॉक्सर के तौर पर यह कामयाबी हासिल नहीं कर सकते थे, इसलिए उन्होंने सहनशक्ति के इस अद्भुत कारनामे में सर्वश्रेष्ठ बनने और इसके लिए शर्त लगाने का संकल्प लिया.

ताबूत में शख़्स

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, यह कारनामा करने से माइक मिनी का नाम 'गिनीज़ बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स' में दर्ज हो सकता था और वह इतने अमीर हो सकते थे कि आयरलैंड में एक घर बना सकें

माइक मिनी उत्तरी लंदन के एक मोहल्ले में रहते थे जो उस समय उनके कई देशवासियों (आयरिश लोगों) का घर था. यहां 'एडमिरल नेल्सन' नाम का एक मशहूर पब था, जिसे माइकल 'बटी' सूग्रो चलाते थे.

वह पहले ख़ुद एक सर्कस में पहलवान रह चुके थे और कुर्सी पर बैठे शख़्स को केवल अपने दांतों से उठाने जैसे करतब दिखाते थे. वह एक व्यवसायी भी थे और बॉक्सिंग को बढ़ावा देने के शौक़ीन भी. चार साल बाद वह मोहम्मद अली को मुक़ाबले के लिए डबलिन लेकर पहुंच गए.

जब माइक मिनी ने शराब पीते हुए ख़ुद को ज़िंदा दफ़्न करने के आइडिया का ज़िक्र किया तो सूग्रो को यह पसंद आ गया.

माइक मिनी की बेटी मैरी बताती हैं कि जब उनकी मां ने रेडियो पर सुना कि एक शख़्स 45 दिन से ज़्यादा ज़मीन के नीचे गुज़ार कर वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने की कोशिश कर रहा है, तो वह जान गईं कि यह उनका पति है और वह बेहोश हो गईं.

वह यह करतब आयरलैंड में दिखाना चाहते थे लेकिन उनके परिवार ने इसे रोक दिया. उन्हें डर था कि वह सबसे भयानक मौत का शिकार हो जाएंगे और कैथलिक चर्च इसे पसंद नहीं करेगा.

लेकिन मैरी के अनुसार, 21 फ़रवरी 1968 को उन्होंने वह कर दिखाया.

ज़मीन के नीचे

सूग्रो ने इसके लिए बहुत बड़ा शो आयोजित किया था. उनके दिमाग़ में यह विचार आया कि माइक मिनी को ताबूत का ढक्कन बंद करने से पहले अपना 'आखिरी खाना' पब में अंतरराष्ट्रीय प्रेस के सामने खाना चाहिए.

नीला पाजामा और टाइट्स पहने, चैंपियन बनने की महत्वकांक्षा लिए माइक 1.90 मीटर लंबे और 0.78 मीटर चौड़े ताबूत में चले गए, जिसे ख़ासतौर से इसी चैलेंज के लिए बनाया गया था.

उन्होंने अपने साथ सलीब (क्रॉस) और एक माला ले रखी थी. ताबूत बंद होने से पहले उन्होंने घोषणा की, "मैं यह अपनी पत्नी, बेटी और आयरलैंड की इज़्ज़त और शान के लिए कर रहा हूं."

इस ताबूत में दफ़न होने के बाद वे कास्ट आयरन से बनी ट्यूबों के ज़रिए सांस ले सकते थे. इन्हीं ट्यूबों की मदद से उन्हें टॉर्च की रोशनी में पढ़ने के लिए अख़बार और किताबें, साथ ही खाना, ड्रिंक्स और सिगरेट भी पहुंचाई जाती थी.

उन्हें चाय-टोस्ट, रोस्टेड बीफ़ और उनकी पसंदीदा शराब भी मिलती थी. ताबूत के नीचे बने एक गड्ढे की ओर खुलने वाला एक 'ट्रैप डोर' टॉयलेट का काम करता था.

ताबूत से माइक मिनी के निकालते हुए

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, माइक मिनी की वापसी ने पत्रकारों और प्रशंसकों की भीड़ को आकर्षित किया

साइट पर एक डोनेशन बॉक्स रखा गया था और आप पैसे देकर उनसे बात कर सकते थे.

इस चुनौती ने बॉक्सर हेनरी कूपर और अभिनेत्री डायना डोर्स जैसे सितारों को आकर्षित किया, जो उनकी 'क़ब्र' पर उनसे मिलने पहुंचे.

ताबूत के अंदर लगे टेलीफ़ोन से उन्होंने बाहरी दुनिया से बात की. यह लाइन 'एडमिरल नेल्सन' पब से जुड़ी थी जहां सूग्रो ने हर कॉल के लिए पैसे वसूल किए.

प्रेस ने कुछ समय तक उनकी ख़बरों को फ़ॉलो किया, लेकिन फिर बड़ी अंतरराष्ट्रीय घटनाओं ने इस ख़बर को दबा दिया. वियतनाम युद्ध और मार्टिन लूथर किंग की हत्या ने लगभग हर चीज़ पर ग्रहण लगा दिया.

इसके बावजूद जब माइक के बाहर निकलने का दिन आया तो सूग्रो ने सुनिश्चित किया कि दुनिया इसके बारे में जाने.

शोहरत से गुमनामी तक

नर्तकों, संगीतकारों और पत्रकारों की मौजूदगी में 22 अप्रैल को, दफ़न होने के 8 हफ़्ते और 5 दिन बाद, ताबूत को बाहर निकाला गया. जैसे ही भीड़ के बीच ट्रक पर रखे ताबूत का ढक्कन हटाया गया माइक मिनी ने अपनी आंखों को रोशनी से बचाने के लिए धूप का चश्मा पहना और मुस्कुराए.

वह गंदे और अस्त-व्यस्त थे, लेकिन निर्विवाद रूप से विजेता बन चुके थे. उन्होंने घोषणा की, "मैं यहां सौ दिन और रहना चाहता हूं."

मेडिकल जांच में उन्हें पूरी तरह सेहतमंद बताया गया.

माइक मिनी

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, दफ़नाने के 8 हफ़्ते और 5 दिन बाद माइक मिनी के ताबूत को कब्र से बाहर निकाला गया

उनकी बेटी मैरी के अनुसार, उनसे एक लाख पाउंड नक़द और वर्ल्ड टूर का वादा किया गया था. यह उस वक़्त बहुत बड़ी रक़म थी. 1970 में डबलिन के एक पॉश इलाक़े में तीन मंज़िला मकान की क़ीमत लगभग बारह हज़ार पाउंड थी.

61 दिन ज़मीन के नीचे रहने के बाद माइक मिनी ने रिकॉर्ड को बहुत पीछे छोड़ दिया था. लेकिन न तो उन्हें पैसे मिले और न ही वर्ल्ड टूर का मौक़ा मिला. वह अपनी जेब में एक पैसा लिए बिना आयरलैंड वापस लौट आए.

गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने भी कभी उनके रिकॉर्ड को आधिकारिक मान्यता नहीं दी क्योंकि उनके कारनामे की पुष्टि के लिए वहां कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं था, जैसा कि अक्सर 'अंतिम संस्कार के कलाकारों' के मामलों में होता था.

हालांकि अंतरराष्ट्रीय प्रेस की गवाही मौजूद थी और कोई भी उनके 61 दिनों के दावे पर शक नहीं कर सकता था.

सिर्फ़ कुछ महीनों बाद उसी साल एमा स्मिथ नाम की एक पूर्व नन ने इंग्लैंड के एक मनोरंजन पार्क में अपनी इच्छा से 101 दिनों तक दफ़न रहकर उनके कारनामे को पीछे छोड़ दिया.

उनकी मौत के दो दशक बाद, 2003 में, माइक मिनी की कहानी 'बरीड अलाइव' शीर्षक से एक डॉक्यूमेंट्री के रूप में फिर से ज़िंदा हुई. उन्हें शायद यह बहुत पसंद आती.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)